प्रस्तावना एवं परिचय
मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
प्रस्तावना एवं परिचय
भँवर में नाव पड़ी है बिच मजधार हूँ मैं
सहारा दीजिये आकर की अब लाचार हूँ मैं।
भोले गिरिजा पति हूँ तुम्हारी शरण
भोले गिरिजा पति हूँ तुम्हारी शरण
हे कैलाश पति हूँ तुम्हारी शरण।।
सुना है आपका जिसने कभी पुकार किया
तो उसका आपने संकट से है उद्धार किया
भगत हूँ आपका मैं भी तो ऐ मेरे भोले
आसरा आपका हमने भी ऐ सरकार किया
हूँ तुम्हारी शरण शरण तुम्हारी शरण।
सदा दरबार में एक भीड़ भक्तो की लगी देखि
हर एक भगत की झोली आपके दर पे भोले भरी देखि
कोई लौटा नही खाली तुम्हारे द्वार पे आके
निपुत्री बाँझ की हमने यही गोदी हरी देखि
यही है प्रार्थना तुमसे मेरी भोले शंकर
दया की दृष्टि जरा डाल दो भोले मुझ पर
तुम्हारे द्वार पे झुका दिया है सर ये कह कह कर
हूँ तुम्हारी शरण शरण तुम्हारी शरण।
मैं तो नादान हूँ दुनिया से भी अंजाना हूँ
पर ये सच है की भोले मैं तेरा दीवाना हूँ
ठोकरे दुनिया की मेरे भोले मैं बहुत खाया हूँ
होके लाचार में तेरे दर पे आया हूँ
हूँ तुम्हारी शरण शरण तुम्हारी शरण।।
मेरी झोली चरण के धूल से एक बार भर दी जे
मेहर की एक नजर सरकार लख्खा पे कर दी जे
सरन देते हो सबको मेरी खातिर क्यों हुई देरी
तुम्हारे हाथ में है प्रभु अब लाज मेरी
हूँ तुम्हारी शरण शरण तुम्हारी शरण।
तुम जो चाहोगे तो तक़दीर पलट जाएगी
दुःख संकट सभी एक पल में ही हट जाएगी
मुझको विश्वास है और दिल में यकीं है मुझको
छोड़कर आपकी चोखट को अगर जाऊंगा
अपने चरणों में पड़ा रहने दो मुझको भोले
गर चरण छूटे तो बेमौत ही मर जाऊंगा
हूँ तुम्हारी शरण शरण तुम्हारी शरण।
तुम्हारे नाम के प्याले को पि रहा हु में
कृपा से आपकी दुनिया में जी रहा हूँ में
दया क्र मेरे भोले ये शर्मा की दुहाई है
मेरी बिगड़ी बना दे तुमने लाखो की बनाई है
हूँ तुम्हारी शरण शरण तुम्हारी शरण।।
भोले गिरिजा पति हूँ तुम्हारी शरण
भोले गिरिजा पति हूँ तुम्हारी शरण
हे कैलाश पति हूँ तुम्हारी शरण।।
हूँ तुम्हारी शरण शरण तुम्हारी शरण।
भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें।
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
देवादिदेव महादेव को समर्पित यह भजन "भोले गिरिजा पति हूँ तुम्हारी शरण लिरिक्स (Bhole Girja Pati Lyrics in Hindi ) - Shiv Bhajan Lakhbir Singh Lakkha - Bhaktilok" भगवान शिव के कल्याणकारी और वैराग्यपूर्ण रूप का सजीव चित्रण करता है। शिव का अर्थ ही कल्याण है। इस भजन के शब्दों के माध्यम से साधक शिव की अनंत चेतना, भस्म आरती, डमरू की ध्वनि और ध्यानमग्न मुद्रा का ध्यान करता है।
शिव भक्ति का मूल सिद्धांत यही है कि जगत की प्रत्येक नश्वर वस्तु का अंत शिव में ही होना है। यह भजन भक्त को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर आत्मा के वास्तविक स्वरूप को पहचानने की प्रेरणा देता है। शिव का नाम पंचमहाभूतों को नियंत्रित करने वाली परम शक्ति का प्रतीक है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव अत्यंत भोले हैं और साधारण जल तथा बेलपत्र अर्पण करने मात्र से भी प्रसन्न हो जाते हैं। इस शिव भजन का संकीर्तन करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और कुंडली के ग्रहों के दोष शांत होते हैं।
भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। नियमित शिव भजन और पंचाक्षरी मंत्र (ॐ नमः शिवाय) के जप से तनाव का नाश होता है, अवसाद दूर होता है और अंतर्मन में अपूर्व शांति का उदय होता है। यह आरोग्य और दीर्घायु प्रदान करने में भी सहायक है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
शिव संकीर्तन के लिए प्रदोष काल (संध्या समय) अथवा सोमवार का दिन सर्वोत्तम माना जाता है। उत्तर दिशा की ओर मुख करके कुशासन पर बैठकर शिवजी का ध्यान करते हुए भजन गाएं।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भगवान शिव को शीघ्र प्रसन्न करने की सरल विधि क्या है?
शुद्ध जल, बेलपत्र, धतूरा अर्पित करते हुए श्रद्धापूर्वक शिव मंत्र अथवा भजनों का संकीर्तन करने से महादेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
शिव भजनों के लिए कौन सा दिन विशेष है?
सोमवार, प्रदोष व्रत की तिथि और महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की उपासना और भजन संकीर्तन के लिए विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।
क्या शिव जी की उपासना से कुंडली के दोष दूर होते हैं?
हाँ, भगवान शिव (महाकाल) की आराधना से कालसर्प दोष, राहु-केतु दोष और शनि जनित कष्टों का निवारण होता है।
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