Mahadev Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

भला किसी का कर ना सको तो बुरा किसी का मत करना ( bhala kisi ka kar na sako to bura kisi ka na karna Lyrics in Hindi ) - SHIV NIGAM

शिव का यह भजन मानवता और सदाचार का उपदेश देता है, जीवन में आचार-व्यवहार को सकारात्मकता से भरता है।

प्रस्तावना एवं परिचय

शिव की कृपा से सच्चे मानवता का उपदेश

इस भजन में मानवता के मूल्यों को स्थापित करने की प्रेरणा दी गई है।

भला किसी का कर ना सको तो बुरा किसी का मत करना। पुष्प नहीं बन सकते तो तुम कांटे बन कर मत रहना॥ बन ना सको भगवान् अगर कम से कम इंसान बनो। नहीं कभी शैतान बनो नहीं कभी हैवान बनो॥ सदाचार अपना न सको तो पापों में पग ना धरना। पुष्प नहीं बन सकते तो तुम कांटे बन कर मत रहना॥ सत्य वचन ना बोल सको तो झूठ कभी भी मत बोलो। मौन रहो तो ही अच्छा कम से कम विष ना घोलो॥ बोलो यदि पहले तुम तोलो फिर मुंह को खोला करना। पुष्प नहीं बन सकते तो तुम कांटे बन कर मत रहना॥ घर ना किसी का बसा सको तो झोपड़ियां ना जला देना। मरहम पट्टी कर ना सको तो खार नमक ना लगा देना॥ दीपक बन कर जल ना सको तो अंधियारा ना फैला देना। पुष्प नहीं बन सकते तो तुम कांटे बन कर मत रहना॥ अमृत पिला ना सके किसी को ज़हर पिलाते भी डरनाधीरज बंधा नहीं सको तो घाव किसी के मत करना॥ राम नाम की माला ले कर सुबह श्याम भजन करना।
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय मानवता और सदाचार की प्रेरणा है। 'भला किसी का कर ना सको तो बुरा किसी का मत करना' की पंक्ति हमें यह ज्ञान देती है कि यदि हम दूसरों की भलाई नहीं कर सकते, तो कम से कम हमें उनका बुरा करने से बचना चाहिए। यह विचार दर्शाता है कि मानव जीवन का अभिप्राय केवल सुख या साधन जुटाना नहीं है, बल्कि दूसरों के प्रति एक सकारात्मक दृष्टिकोण रखना भी आवश्यक है। पंक्ति में 'पुष्प नहीं बन सकते तो तुम कांटे बन कर मत रहना' कहकर यह स्पष्ट किया गया है कि यदि हम अच्छे कर्म नहीं कर सकते, तो हमें दूसरों का जीवन दुखी करने का अधिकार नहीं है। इस प्रकार, भजन में आत्मसंयम, प्रेम और करुणा का महत्व उजागर किया गया है।

भावार्थ की दृष्टि से, यह भजन हमें नैतिकता और मानवीय मूल्यों पर ध्यान केंद्रित करने की प्रेरणा देता है। गीत में जो बातें की गई हैं, जैसे 'सत्य वचन ना बोल सको तो झूठ कभी भी मत बोलो' और 'मौन रहो तो ही अच्छा', यह दर्शाता है कि कैसे चुप रहकर भी हम समाज में सकारात्मकता बनाए रख सकते हैं। आमतौर पर लोगों की भाषा से होने वाले बुरे प्रभावों से बचने के लिए, यह मार्गदर्शन हमें बताता है कि यदि हमारी बातें सत्य नहीं हैं, तो बेहतर है कि हम मौन रह जाएं। यह एक ऐसे विचार का उदाहरण है जो समाज को हिंसा और नकारात्मकता के प्रभाव से बचाता है।

यह भजन न केवल व्यक्तिगत नैतिकता बल्कि समाज में सद्भावना क्षेत्र का भी उद्धाटन करता है। इसमें 'दीपक बन कर जल ना सको तो अंधियारा ना फैला देना' से यह निष्कर्ष निकाला जाता है कि हमारी जिम्मेदारी है कि हम नकारात्मकता को प्रश्रय न दें। 'अमृत पिला ना सके किसी को ज़हर पिलाते भी डरना', यह बताता है कि हमें दूसरों को हानि नहीं पहुँचानी चाहिए, भले ही हमारी क्षमताएँ सीमित हों। यह भक्ति मार्ग का संकेत है, जहां सच्ची भक्ति व्यक्ति को अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर मानवता की सेवा के लिए प्रेरित करती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह प्रार्थना जनहित के सिद्धांत को सिद्ध करती है, जिसे हम विभिन्न पुराणों और ग्रंथों में पाते हैं। उपनिषदों में 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' का मूल मंत्र हमें इस दिशा में प्रेरित करता है। महाभारत और रामायण में भी न्याय और दया की बातें की गई हैं, जोकि इस भजन की भावना को प्रतिध्वनित करती हैं। रामायण में भगवान राम ने सदा दया और करूणा का पालन किया, जबकि महाभारत में युधिष्ठिर ने सत्य और धर्म का परचम लहराया। इस प्रकार, यह भजन हमारी सांस्कृतिक धरोहर का एक हिस्सा है जो हमें उत्कृष्टता और मानवीय गुणों के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। इस भजन का नियमित जाप करने से मानसिक शांति और स्थिरता प्राप्त होती है। यह सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और व्यक्ति को आत्म-नियंत्रण में सहायता करता है। मानसिक तनाव और नकारात्मक विचारों की कमी आती है, जिससे हम अपने जीवन में सुगंधित और संतोषजनक अनुभव कर सकते हैं।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह उठकर या संध्याकाल में किया जा सकता है। जाप के समय, एक दीया जलाना और शुद्ध मन से भक्ति भाव के साथ इसे गाना प्रभावी होता है। बैठने का सही आसन हो, जैसे पद्मासन या सुखासन, जिससे ध्यान और एकाग्रता में सुधार हो।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का अर्थ क्या है?

इस भजन का अर्थ है कि यदि आप दूसरों की भलाई नहीं कर सकते, तो कम से कम उन्हें नुकसान न पहुँचाएँ। मानवता और सदाचार की प्रेरणा दी गई है।

कौन से समय में इस भजन का जाप करना चाहिए?

इस भजन का जाप सुबह और शाम दोनों समय किया जा सकता है, विशेषकर जब मन एकाग्र हो।

इस भजन का महत्व क्या है?

यह भजन जीवन में नैतिकता, करुणा और प्रेम के मूल्यों को स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण है। यह ध्यान केंद्रित करता है कि हमें समाज में सकारात्मकता का विस्तार करना चाहिए।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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