Matarani Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

मेरे हाथ में हो छैना जय माता की है कहना (Mere Haath Mein Ho Chhaina) - Matarani Bhakti Bhajan

यह भजन माता देवी की अनुकंपा को प्राप्त करने और समर्पण का उत्कृष्ट साधन है। मातृ शक्ति की स्तुति में अभिव्यक्त सच्ची भक्ति।

प्रस्तावना एवं परिचय

आध्यात्मिक शक्ति का अभिव्यक्ति: मातृ देवी की स्तुति

जय माता दी! इस भव्य भजन के साथ अपने हृदय में मातृ शक्ति की भक्ति का संचार करें।

मेरे हाथ में हो छैना जय माता की है कहना मेरे हाथ में हो छैना जय माता की है कहना मेरे हृदय में हो सैतान जय माता की है कहना श्री भवानी माँ जय जय जय भवानी माँ मेरे हाथ में हो छैना जय माता की है कहना मेरे हाथ में हो छैना जय माता की है कहना मेरे हृदय में हो सैतान जय माता की है कहना श्री भवानी माँ जय जय जय भवानी माँ जग के अंदर जो संतोष है वो मातृ शक्ति का ही परणाम है मेरे हाथ में हो छैना जय माता की है कहना मेरे हाथ में हो छैना जय माता की है कहना मेरे हृदय में हो सैतान जय माता की है कहना श्री भवानी माँ जय जय जय भवानी माँ तू मातृ शक्ति है अजर अमर है तू जग की सृष्टि है जग की जननी है पूजा करूँ मैं तेरी सर्वत्र सदा मेरे हाथ में हो छैना जय माता की है कहना मेरे हाथ में हो छैना जय माता की है कहना मेरे हृदय में हो सैतान जय माता की है कहना श्री भवानी माँ जय जय जय भवानी माँ तू सदा मेरे संग में रहना तु ही जीवन है, मैं तो तेरा ही हूँ तेरे बिना मैं अधूरा अधूरा हूँ मेरे हाथ में हो छैना जय माता की है कहना मेरे हाथ में हो छैना जय माता की है कहना मेरे हृदय में हो सैतान जय माता की है कहना श्री भवानी माँ जय जय जय भवानी माँ
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन 'मेरे हाथ में हो छैना जय माता की है कहना' में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत समागम है। यह भजन माता देवी की कृपा को इंगित करता है, जिसमें भक्त यह प्रकट करता है कि मातृ शक्ति के हाथों में शक्ति और सौभाग्य का आधार होता है। 'मेरे हाथ में हो छैना' का अर्थ है कि देवी की कृपा से भक्त के जीवन में सुख और समृद्धि का प्रवाह हो रहा है। जब भक्त अपने हृदय में माता के प्रति श्रद्धा रखता है, तो वह सैतान और नकारात्मकता को पराजित कर सकता है। माता को जग की जननी माना जाता है, और इस प्रकार, भक्त इस भजन के माध्यम से यह अनुरोध कर रहा है कि माँ सदा उनके साथ रहें और उन्हें अपने आशीर्वाद से आलोकित करें।

भजन की भावार्थ में गहराई है। 'तू मातृ शक्ति है अजर अमर है' में माता दुर्गा या भवानी की शाश्वतता का उल्लेख किया गया है, जिसमें भक्त का मानना है कि मातृ शक्ति हर परिस्थिति में मददगार होती है। भक्त अपने हृदय में माँ को बसा कर जीवन में स्थिरता, आनंद और शांति की कामना कर रहा है। 'मेरे हाथ में हो छैना' का दोहराव इस भजन की विशेषता है, जो भक्त के मन में माता के प्रति बार-बार समर्पण का भाव जगाता है। भक्त का यह विशवास है कि माता की कृपा से ही वह अपने जीवन में सच्चा सुख और समृद्धि प्राप्त कर सकता है।

इस भजन में भक्ति मार्ग का अद्भुत चित्रण है। भक्त किस तरह से मन और हृदय से माँ की आराधना करते हैं, इसे स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है। भक्ति मार्ग में शुद्धता और विनम्रता का होना अत्यंत आवश्यक है, जिससे भक्त देवी के प्रिय बन सकें। यहाँ यह प्रतिपादन किया गया है कि श्रद्धा और सच्ची भक्ति से ही संतोष और शांति की प्राप्ति होती है। भक्ति का मार्ग कठिन हो सकता है, लेकिन यदि भक्तें माँ की अनुकंपा का संज्ञान लेते हैं, तो वे सभी बाधाओं को पार कर सकते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन हिंदू धर्म में मातृ शक्ति की स्थिति और भक्ति के महत्व को विशेष रूप से उजागर करता है। जैसे माता दुर्गा, काली, या इस तरह की अन्य देवियों का महिमामंडन हिंदू पौराणिक कथाओं में किया जाता है, यह भजन उन सभी मातृ देवीयों के प्रति श्रद्धा प्रकट करता है। मातृ शक्ति का आदान-प्रदान, जो राजनीतिज्ञ और मानव जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इस भजन के माध्यम से व्यक्त होता है। भारतीय पौराणिक कथाओं में माँ दुर्गा और अन्य देवीयों का ऐतिहासिक संदर्भ भी इस भजन में देखने को मिलता है, जहां वे अंधकार को मिटाने वाली और धर्म का पुनर्स्थापित करने वाली शक्ति मानी जाती हैं।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित जप करने से मानसिक संतुलन, आत्मशक्ति और आंतरिक शांति के लाभ प्राप्त होते हैं। भक्त जब इस भजन को गाता है, तब वह आत्मसमीक्षा करता है और अपने भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। यह भजन तनाव को कम करने, जीवन में सकारात्मकता लाने और देवी की शक्तियों का अनुभव करने में भी सहायता करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन की साधना के लिए सुबह या शाम का समय सर्वोत्तम होता है, जब मन शांत होता है। श्रद्धालु को एक शुद्ध स्थान पर बैठकर, दीप जलाकर और माता को अपने विचारों में लाते हुए इस भजन का गान करना चाहिए। उचित मुद्रा में बैठना, जैसे पद्मासन या सुखासन, और मन में समर्पण का भाव होना आवश्यक है। जहाँ श्रद्धा है, वहाँ देवी की कृपा अवश्य होती है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश है कि माता की कृपा से ही जीवन में सुख और समृद्धि आती है। भक्त का हृदय और हाथ माता की शक्ति से परिपूर्ण होना चाहिए।

क्या इस भजन का गान किसी विशेष अवसर पर करना चाहिए?

इस भजन का गान नवरात्रि, दुर्गा पूजा, या किसी अन्य धार्मिक उत्सव के अवसर पर करना विशेष फलदायक माना जाता है। यह मातृ शक्ति की आराधना का एक महत्वपूर्ण भाग है।

भजन गाने से क्या मानसिक लाभ होता है?

भजन गाने से मानसिक संतुलन, खुशियों की अनुभूति, और आंतरिक शांति प्राप्त होती है। यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने में भी सहायक है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 10 Oct 2026

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