भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

जोगिया (Jogiya) - Shiv Bhajan SHEKHAR JAISWAL

शेखर जायसवाल द्वारा स्वरबद्ध शिव भजन 'जोगिया' के संपूर्ण बोल, भावार्थ और संदर्भ सहित व्याख्या। पढ़ें और आनंद लें इस पावन शिव भजन का केवल Bhaktilok पर।

भगवान शिव का 'जोगिया' स्वरूप वैराग्य, त्याग और परम कल्याण का प्रतीक है। शेखर जायसवाल द्वारा स्वरबद्ध यह भजन "जोगिया" भक्तों को सांसारिक मोह-माया के बंधनों से मुक्त होकर महादेव की अनंत चेतना में लीन होने की प्रेरणा देता है। शिव का अर्थ ही 'कल्याण' है, और यह भजन उनके उसी कल्याणकारी, ध्यानमग्न और भस्म-रमित स्वरूप का सजीव चित्रण करता है। इस भजन का श्रवण और गायन मन को शांति प्रदान करता है और साधक को आत्म-साक्षात्कार की दिशा में अग्रसर करता है। शिव भक्ति की इस पावन धारा में बहते हुए, यह भजन श्रोताओं को कैलाश पर्वत की उस अलौकिक अनुभूति से जोड़ता है जहाँ महादेव समाधिस्थ होकर संपूर्ण सृष्टि के कल्याण का चिंतन करते हैं। इस भजन का मुख्य भाव पूर्ण समर्पण और वैराग्य है, जो साधक के अंतःकरण में भक्ति का बीज बोता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

(मुखड़ा)
जोगिया... ओ जोगिया...
मेरे शिव शंकर जोगिया...
भस्म रमाए, डमरू बजाए, कैलाश का वासी,
जोगिया... मेरे शिव शंकर जोगिया...

(अंतरा 1)
गले में सर्पों की माला, जटा में गंगा की धारा,
विष का प्याला पीकर तूने, जग का कष्ट संवारा,
नीलकंठ तू, महाकाल तू, भक्तों का तू साथी,
जोगिया... मेरे शिव शंकर जोगिया...

(अंतरा 2)
नंदी की सवारी तेरी, त्रिशूल हाथ में सोहे,
तेरी एक झलक पाने को, सारा जग ये मोहे,
ध्यान में डूबे, मौन में खोए, तू ही अंतर्यामी,
जोगिया... मेरे शिव शंकर जोगिया...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन में भगवान शिव को 'जोगिया' (योगी) के रूप में संबोधित किया गया है। 'जोगिया' शब्द उस परम सत्ता को दर्शाता है जो समस्त ऐश्वर्य और शक्तियों का स्वामी होने के बावजूद पूर्णतः विरक्त और उदासीन है। भजन का मुख्य संदेश यह है कि महादेव ही इस सृष्टि के आदि और अंत हैं, जो भस्म लगाकर और डमरू बजाकर कैलाश पर्वत पर निवास करते हैं।

प्रथम अंतरे में शिव के परोपकारी और रक्षक स्वरूप का वर्णन है। वे अपने गले में सर्पों की माला धारण करते हैं, जो काल और विषैले विकारों पर उनके नियंत्रण को दर्शाती है। उनकी जटाओं से बहने वाली गंगा की धारा ज्ञान और पवित्रता का प्रतीक है। जब समुद्र मंथन से हलाहल विष निकला, तब संपूर्ण सृष्टि की रक्षा के लिए उन्होंने उस विष को स्वयं पी लिया, जिससे उनका कंठ नीला पड़ गया और वे 'नीलकंठ' कहलाए। वे काल के भी काल 'महाकाल' हैं, जो अपने भक्तों के संकटों को दूर करने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।

द्वितीय अंतरे में शिव के शांत, ध्यानमग्न और अंतर्यामी स्वरूप की स्तुति की गई है। नंदी (जो धर्म का प्रतीक है) उनकी सवारी है और उनके हाथ में त्रिशूल है, जो तीनों तापों (आधिदैविक, आधिभौतिक और आध्यात्मिक) के विनाश का सूचक है। वे मौन और ध्यान की पराकाष्ठा हैं। संपूर्ण जगत उनकी एक झलक पाने के लिए लालायित रहता है, जबकि वे स्वयं अंतर्मुखी होकर समाधि में लीन रहते हैं। वे प्रत्येक जीव के हृदय की बात जानने वाले अंतर्यामी हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल एक संगीतमय प्रस्तुति नहीं है, बल्कि यह शिव तत्व को समझने का एक माध्यम है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • वैराग्य का संदेश: शिव का 'जोगिया' रूप हमें सिखाता है कि भौतिक सुख-सुविधाओं के बीच रहते हुए भी मन से अनासक्त कैसे रहा जाए।
  • भस्म का आध्यात्मिक अर्थ: शरीर पर भस्म रमाना इस बात का प्रतीक है कि यह भौतिक संसार नश्वर है और अंततः सब कुछ मिट्टी में मिल जाना है।
  • कल्याणकारी भावना: विषपान की घटना यह दर्शाती है कि दूसरों के कल्याण के लिए कष्टों को सहना ही सच्ची दिव्यता है।
  • ध्यान और मौन की शक्ति: शिव का मौन स्वरूप हमें अंतर्मुखी होने और मानसिक शांति प्राप्त करने की प्रेरणा देता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि भगवान शिव की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष अवसर अत्यंत फलदायी माने गए हैं:

  • श्रावण मास (सावन): सावन के सोमवार को इस भजन का श्रवण मन को असीम शांति प्रदान करता है।
  • महाशिवरात्रि: शिवरात्रि के पावन पर्व पर रात्रि जागरण के समय इस भजन को गाने से शिव कृपा प्राप्त होती है।
  • दैनिक संध्या आरती: शाम के समय पूजा घर में धूप-दीप जलाकर शांत मन से इस भजन को सुनने से दिनभर का तनाव दूर होता है।
  • प्रदोष व्रत: प्रदोष काल में शिव आराधना के दौरान इस भजन का कीर्तन करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन देवों के देव महादेव, भगवान शिव को समर्पित है। सनातन धर्म में शिव को संहारक और पुनरुत्पादक दोनों रूपों में पूजा जाता है। वे आदिगुरु हैं जिन्होंने योग विज्ञान की नींव रखी। इस भजन के माध्यम से गायक शेखर जायसवाल ने पारंपरिक शिव भजनों की समृद्ध विरासत को आधुनिक पीढ़ी के समक्ष प्रस्तुत किया है। शिव भक्ति की परंपरा आदि शंकराचार्य, गोस्वामी तुलसीदास और संत कबीर जैसे महान संतों से जुड़ी हुई है, जिन्होंने शिव के निर्गुण और सगुण दोनों रूपों की स्तुति की है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

"जोगिया" भजन आधुनिक भक्ति संगीत का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। शेखर जायसवाल की भावपूर्ण आवाज और सुमधुर संगीत ने इसे भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय बना दिया है। इस भजन की पृष्ठभूमि पारंपरिक लोक धुनों और शास्त्रीय रागों के मिश्रण पर आधारित है, जो सीधे हृदय को स्पर्श करती है। यह भजन शिव के उस पारंपरिक स्वरूप को रेखांकित करता है जो सदियों से भारतीय जनमानस के मानसपटल पर अंकित है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और प्रवाहमयी हिंदी है, जिसमें अवधी और लोकभाषा के शब्दों का सुंदर समन्वय है। काव्य शैली अत्यंत संवादात्मक और भक्ति रस से परिपूर्ण है। 'जोगिया', 'कैलाश वासी', 'नीलकंठ' जैसे शब्दों का प्रयोग शिव के बहुआयामी व्यक्तित्व को उजागर करता है। भजन में अनुप्रास और रूपक अलंकारों का सहज प्रयोग देखने को मिलता है, जो इसके सौंदर्य को और बढ़ाता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें व्यावहारिक जीवन के लिए कई महत्वपूर्ण सीख देता है:

  1. समर्पण भाव: ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण ही जीवन के दुखों से मुक्ति का मार्ग है।
  2. सहनशीलता: विष पीने वाले नीलकंठ की तरह हमें भी जीवन की कड़वाहट और आलोचनाओं को पचाकर समाज में प्रेम फैलाना चाहिए।
  3. सादगी: शिव का जोगिया रूप हमें सादगीपूर्ण जीवन जीने और दिखावे से दूर रहने की सीख देता है।
  4. आत्म-नियंत्रण: हाथ में त्रिशूल और गले में सर्प इस बात के प्रतीक हैं कि हमें अपनी इंद्रियों और विकारों पर नियंत्रण रखना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
जोगिया योगी, वैरागी संसार से विरक्त, परम चेतना में लीन रहने वाले शिव।
भस्म राख नश्वरता और पवित्रता का प्रतीक।
नीलकंठ नीले गले वाले विष पीकर सृष्टि की रक्षा करने वाले दयालु देव।
अंतर्यामी मन की बात जानने वाले प्रत्येक जीव के हृदय में वास करने वाली चेतना।
कैलाश वासी कैलाश पर्वत पर रहने वाले उच्चतम आध्यात्मिक चेतना के शिखर पर स्थित।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"जोगिया... ओ जोगिया... मेरे शिव शंकर जोगिया..."
हे मेरे आराध्य शिव शंकर! आप परम योगी हैं, जो सांसारिक बंधनों से परे हैं। मैं आपको बारंबार पुकारता हूँ।

"भस्म रमाए, डमरू बजाए, कैलाश का वासी..."
आप अपने दिव्य शरीर पर भस्म लगाते हैं, हाथ में डमरू बजाकर सृष्टि को स्पंदित करते हैं और पवित्र कैलाश पर्वत पर निवास करते हैं।

"गले में सर्पों की माला, जटा में गंगा की धारा..."
आपके गले में भयानक सर्प सुशोभित हैं जो आपके शांत स्वभाव के कारण आभूषण बन गए हैं, और आपकी जटाओं से पतित-पावनी गंगा प्रवाहित हो रही है।

"विष का प्याला पीकर तूने, जग का कष्ट संवारा..."
सृष्टि को विनाश से बचाने के लिए आपने हलाहल विष को अपने कंठ में धारण कर लिया और संपूर्ण जगत के दुखों का निवारण किया।

"नंदी की सवारी तेरी, त्रिशूल हाथ में सोहे..."
धर्म के प्रतीक नंदी बैल आपकी सवारी हैं और आपके हाथ में सुशोभित त्रिशूल तीनों लोकों और तीनों गुणों को संतुलित रखता है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के साथ भगवान शिव के इस परम कल्याणकारी मंत्र का जप करना अत्यंत फलदायी होता है:

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

अर्थ: हम त्रि-नेत्रधारी भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो सुगंधित हैं और हमारा पोषण करते हैं। जैसे फल पक जाने पर बंधन से मुक्त हो जाता है, वैसे ही वे हमें मृत्यु और नश्वरता से मुक्त कर अमरता की ओर ले जाएं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम जोगिया (Jogiya)
गायक शेखर जायसवाल (Shekhar Jaiswal)
मुख्य देवता भगवान शिव (महादेव)
भजन का भाव वैराग्य, समर्पण, शांत रस
भाषा हिंदी (भक्ति प्रधान)
उपयुक्त अवसर महाशिवरात्रि, सावन सोमवार, प्रदोष व्रत

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

'जोगिया' शब्द 'योगी' या 'जोगी' से बना है। भगवान शिव को आदिगुरु और महायोगी माना जाता है, जो समस्त ऐश्वर्य के स्वामी होकर भी श्मशान में रहते हैं और भस्म लगाते हैं। उनके इसी वैरागी स्वरूप के कारण उन्हें 'जोगिया' कहा जाता है।

भस्म इस बात का प्रतीक है कि यह भौतिक शरीर और संसार नश्वर है। अंत में सब कुछ राख में बदल जाना है। शिव भस्म लगाकर भक्तों को जीवन की इस अंतिम सच्चाई और अनासक्ति का स्मरण कराते हैं।

इस सुमधुर और भावपूर्ण भजन को प्रसिद्ध गायक शेखर जायसवाल ने अपनी आवाज दी है।

समुद्र मंथन के समय निकले हलाहल विष से सृष्टि को बचाने के लिए शिव ने उसे पी लिया था। माता पार्वती ने उस विष को उनके गले में ही रोक दिया, जिससे उनका कंठ नीला पड़ गया और वे 'नीलकंठ' कहलाए।

इस भजन के श्रवण से मानसिक तनाव दूर होता है, मन में वैराग्य और शांति का उदय होता है, और साधक का ध्यान भगवान शिव के चरणों में केंद्रित होता है।

त्रिशूल के तीन शूल तीन गुणों (सत्व, रज, तम) और तीन तापों (दैहिक, दैविक, भौतिक) के नियंत्रण और विनाश का प्रतीक हैं।

हाँ, इस भजन को आप अपनी दैनिक सुबह या शाम की पूजा के समय गा सकते हैं। यह घर के वातावरण को सकारात्मक और भक्तिमय बनाता है।

नंदी धर्म, निष्ठा और धैर्य का प्रतीक हैं। वे शिव के परम भक्त और द्वारपाल भी हैं, जो हमें सिखाते हैं कि ईश्वर की प्रतीक्षा में सदैव तत्पर रहना चाहिए।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन की व्याख्या और इसके आध्यात्मिक पहलुओं का विश्लेषण सनातन धर्म के ग्रंथों, शिव पुराण और पारंपरिक भक्ति दर्शन के आधार पर किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों को भजन के केवल शाब्दिक अर्थ से न जोड़कर उसके अंतर्निहित दार्शनिक संदेश से अवगत कराना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • शिव पुराण: भगवान शिव के स्वरूप, भस्म धारण करने और विषपान की कथाओं का संदर्भ।
  • श्रीमद्भगवद्गीता: अनासक्ति और वैराग्य के सिद्धांतों का दार्शनिक विश्लेषण।
  • पारंपरिक भजन संग्रह: शेखर जायसवाल द्वारा प्रस्तुत "जोगिया" भजन के मूल बोल और संगीत संरचना।

संबंधित भजन एवं लेख

भगवान शिव की भक्ति से ओतप्रोत अन्य पावन भजनों और स्तोत्रों को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लेखों पर जाएं:

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!