Punjabi Devi Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

जगदाती पहाड़ोंवाली मां लिरिक्स हिंदी (Jagdaati Pahadonwali Maa Lyrics in Hindi) - Devi Bhajan

जगदाती पहाड़ोंवाली मां भजन के संपूर्ण बोल हिंदी में पढ़ें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित माँ दुर्गा का यह प्रसिद्ध देवी भजन। अभी देखें Bhaktilok पर।

"जगदाती पहाड़ोंवाली मां" एक अत्यंत लोकप्रिय और हृदयस्पर्शी देवी भजन है, जो विशेष रूप से उत्तर भारत और पंजाब के भक्ति संगीत में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। यह भजन आदिशक्ति माता दुर्गा के उस स्वरूप का आह्वान करता है जो त्रिकुटा पर्वत की गुफाओं में विराजमान हैं। 'जगदाती' का अर्थ है—जगत को धारण करने वाली और समस्त चराचर की आधारशिला। इस भजन के माध्यम से भक्त माता के ममतामयी स्वरूप और उनकी शक्ति का गुणगान करते हैं। यह भजन न केवल माता के प्रति अटूट श्रद्धा को प्रकट करता है, बल्कि साधक के मन में भक्ति, करुणा और साहस का संचार भी करता है। नवरात्रि के पावन पर्वों, जागरणों और माता की चौकी में इस भजन का गायन भक्तों को एक अलौकिक आनंद की अनुभूति कराता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

जगदाती पहाड़ों वाली माँ, मेहर करो जी,
झोलियाँ भर दो माँ, मेहर करो जी।
ऊँचे पहाड़ों वाली माँ, मेहर करो जी,
शेरों वाली माँ, मेहर करो जी॥

तेरी महिमा गाते हैं सब नर-नारी,
तेरी ज्योति जगाते हैं सब नर-नारी।
दुखियों के दुख हरती माँ, मेहर करो जी,
जगदाती पहाड़ों वाली माँ, मेहर करो जी॥

लाल चुनरियाँ सोहे माँ के तन पे,
प्यारा मुखड़ा चमकता है मन में।
भक्तों की सुन लो पुकार, मेहर करो जी,
शेरों वाली माँ, मेहर करो जी॥

कष्ट मिटाओ माँ, संकट हटाओ माँ,
अपने बच्चों को गले से लगाओ माँ।
तेरी शरण में आए हैं हम, मेहर करो जी,
जगदाती पहाड़ों वाली माँ, मेहर करो जी॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का भावार्थ माता के प्रति पूर्ण समर्पण है। भक्त पुकारता है कि हे जगदाती! आप पहाड़ों पर निवास करने वाली हैं, आप पर कृपा कीजिए। 'जगदाती' का अर्थ है वह शक्ति जो पूरे संसार को धारण करती है। भक्त अपनी झोली खाली लेकर माता के द्वार पर आया है और उनसे अपनी भक्ति और सुख-समृद्धि से झोली भरने की प्रार्थना कर रहा है। भजन की पंक्तियाँ माता के दिव्य श्रृंगार, उनकी लाल चुनरी और उनके तेजस्वी मुखड़े का वर्णन करती हैं, जो भक्तों के मन को शांति प्रदान करता है। अंत में, भक्त माता से प्रार्थना करता है कि वह उसके सभी कष्टों और संकटों को हर ले और उसे अपनी शरण में स्थान दे। यह भजन केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि एक भक्त की हृदय से निकली हुई पुकार है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन माता के 'पहाड़ोंवाली' स्वरूप को समर्पित है, जो वैष्णो देवी के दिव्य धाम की याद दिलाता है। इसका मुख्य महत्व यह है कि यह सरल भाषा में होने के कारण जन-जन की जुबान पर रहता है। नवरात्रि के दौरान, जब भक्त नौ दिनों का उपवास रखते हैं, तब इस भजन का श्रवण मन को एकाग्र करने में सहायक होता है। यह भजन नकारात्मकता को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को किसी भी समय गाया जा सकता है, लेकिन ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः काल) और संध्या आरती के समय इसका प्रभाव अधिक होता है। इसे गाते समय माता की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं और पूर्ण श्रद्धा के साथ गायन करें। सामूहिक सत्संग या जागरण में इसे ढोलक और मंजीरे की ताल पर गाना अत्यंत आनंददायी होता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द अर्थ
जगदाती जगत को धारण करने वाली
पहाड़ोंवाली पर्वत पर निवास करने वाली (वैष्णो देवी)
मेहर कृपा या आशीर्वाद
ज्योति माता का दिव्य प्रकाश
चुनरियाँ माता को अर्पित किया जाने वाला वस्त्र

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  • प्रश्न: जगदाती पहाड़ोंवाली मां भजन का मुख्य भाव क्या है?
    उत्तर: इस भजन का मुख्य भाव माता के प्रति अटूट विश्वास और उनकी कृपा प्राप्ति की प्रार्थना है।
  • प्रश्न: क्या इस भजन को नवरात्रि में गाना शुभ है?
    उत्तर: हाँ, नवरात्रि के नौ दिनों में इस भजन का गायन अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।
  • प्रश्न: 'जगदाती' शब्द का क्या अर्थ है?
    उत्तर: 'जगदाती' का अर्थ है वह शक्ति जो पूरे संसार का पालन-पोषण और धारण करती है।
  • प्रश्न: यह भजन किस देवी को समर्पित है?
    उत्तर: यह भजन माता दुर्गा (वैष्णो देवी) को समर्पित है।
  • प्रश्न: क्या इसे घर पर अकेले गाया जा सकता है?
    उत्तर: बिल्कुल, इसे व्यक्तिगत पूजा या ध्यान के समय भी गाया जा सकता है।
  • प्रश्न: माता के भजनों के नियमित श्रवण से क्या लाभ होता है?
    उत्तर: इससे मन को शांति मिलती है और आध्यात्मिक उन्नति होती है।
  • प्रश्न: क्या इस भजन के साथ कोई विशेष वाद्य यंत्र जरूरी है?
    उत्तर: कोई विशेष वाद्य यंत्र अनिवार्य नहीं है, आप इसे भावपूर्ण तरीके से बिना किसी वाद्य के भी गा सकते हैं।
  • प्रश्न: माता की कृपा पाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्या है?
    उत्तर: माता की कृपा पाने के लिए 'निष्कपट भाव' और 'पूर्ण समर्पण' सबसे महत्वपूर्ण है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख भक्ति परंपराओं और लोक गीतों के आधार पर तैयार किया गया है। भजन के बोल और भावार्थ को जन-श्रुति और पारंपरिक देवी गीतों के संकलन से लिया गया है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!