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छठी माई के घाट( Chhathi Maai Ke Ghaat ) - Priti Lata Chhath Puja Geet

पढ़ें छठी माई के घाट( Chhathi Maai Ke Ghaat ) - Priti Lata Chhath Puja Geet - BhaktiLok का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्म

छठ पूजा का पावन पर्व हिंदू धर्म में आस्था, शुचिता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। इस महापर्व के अवसर पर गाए जाने वाले लोकगीत न केवल उत्सव के माहौल को भक्तिमय बनाते हैं, बल्कि भक्तों के हृदय में छठी माई के प्रति अगाध श्रद्धा का संचार भी करते हैं। भोजपुरी लोकगायिका प्रीति लता द्वारा गाया गया लोकप्रिय छठ गीत "छठी माई के घाट" (Chhathi Maai Ke Ghaat) एक ऐसा ही सुमधुर और भावपूर्ण गीत है, जो छठ पूजा के पावन घाटों की जीवंत छवि, सूर्य देव की महिमा और व्रतियों की कठिन साधना को दर्शाता है। इस गीत में प्रयुक्त पारंपरिक भोजपुरी शब्द और मधुर धुन श्रोताओं को सीधे गंगा-यमुना के पावन घाटों पर ले जाती है, जहाँ आस्था का जनसैलाब उमड़ता है। इस विस्तृत लेख में हम इस गीत के संपूर्ण बोल, उसका गहरा भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व और इससे जुड़ी सांस्कृतिक परंपराओं का गहन विश्लेषण प्रस्तुत कर रहे हैं।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

मुखड़ा:
छठी माई के घाट पर बाजेला बजंतवा, हो बाजेला बजंतवा।
अरघ के बेर भइले उगेलन सुरुजदेव, हो उगेलन सुरुजदेव॥
सजल बावे घाट माई के, चमकेला दियवा, हो चमकेला दियवा।
दउरा उठाई के चलले बरतिया, हो चलले बरतिया॥

अंतरा 1:
कांच ही बांस के बहँगी, बहँगी लचकत जाए, हो बहँगी लचकत जाए।
बाट जे पूछेला बटोहिया, बहँगी केकरा के जाए, हो बहँगी केकरा के जाए॥
तू तअ आन्हर होवे रे बटोहिया, बहँगी छठी माई के जाए।
छठी माई के घाट पर बाजेला बजंतवा, हो बाजेला बजंतवा॥

अंतरा 2:
केरवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मँडराय, हो सुगा मँडराय।
मारबो रे सुगवा धनुष से, सुगा गिरे मुरझाय, हो सुगा गिरे मुरझाय॥
उ जे अरघ के बेर भइले, उगेलन सुरुजदेव, हो उगेलन सुरुजदेव।
सजल बावे घाट माई के, चमकेला दियवा, हो चमकेला दियवा॥

अंतरा 3:
गंगा जी के पावन तीरे, सजल बावे घाट, हो सजल बावे घाट।
नमन करेले सब नर-नारी, जोरेले दुनो हाथ, हो जोरेले दुनो हाथ॥
प्रीति लता गावे गीतिया, माई के चरनिया शीश नवाए।
छठी माई के घाट पर बाजेला बजंतवा, हो बाजेला बजंतवा॥

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

प्रीति लता द्वारा गाए गए इस सुंदर छठ पूजा गीत का भावार्थ अत्यंत सरल, मर्मस्पर्शी और भक्ति से परिपूर्ण है। गीत की प्रत्येक पंक्ति में छठ महापर्व के दौरान घाटों पर दिखने वाले दृश्य और भक्तों की मनोदशा का सजीव चित्रण किया गया है।

मुखड़े का भावार्थ:

गीत की शुरुआत में गायिका कहती हैं कि छठी माई के पावन घाट पर सुंदर वाद्ययंत्र (बजंतवा) बज रहे हैं, जिससे पूरा वातावरण दिव्य और संगीतमय हो गया है। संध्या और उषा काल में जब सूर्य देव को अर्घ्य देने का समय आता है, तब भगवान भास्कर अपनी स्वर्णिम किरणों के साथ उदित होते हैं। घाटों को सुंदर दीयों और फूलों से सजाया गया है, जहाँ मिट्टी के दीयों की टिमटिमाती रोशनी (चमकेला दियवा) मन को शांति प्रदान करती है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु (बरतिया) अपने सिर पर पूजा की सामग्रियों से भरा पीला दउरा (बांस की टोकरी) उठाकर श्रद्धापूर्वक घाट की ओर चल पड़े हैं।

अंतरा 1 का भावार्थ:

इस अंतरे में पारंपरिक छठ गीतों की प्रसिद्ध पंक्तियों "कांच ही बांस के बहँगी" का समावेश किया गया है। इसका अर्थ है कि कच्चे बांस से बनी बहँगी (जिसमें पूजा का प्रसाद रखा जाता है) अत्यधिक भार और श्रद्धा के कारण लचक रही है। मार्ग में चलने वाला कोई राहगीर (बटोहिया) जब पूछता है कि यह बहँगी किसके लिए जा रही है, तो उसे उत्तर मिलता है कि "हे राहगीर! क्या तुम देख नहीं सकते? यह पवित्र बहँगी हमारी आराध्य देवी छठी माई के घाट के लिए जा रही है।" यह संवाद भक्तों के अटूट विश्वास और समर्पण को दर्शाता है।

अंतरा 2 का भावार्थ:

यहाँ प्रकृति और शुद्धता का सुंदर चित्रण है। केले के पेड़ पर लगे फलों के गुच्छे (घवद) पर जब कोई पक्षी (सुगा) मंडराता है, तो व्रती उसे दूर रहने की चेतावनी देते हैं ताकि पूजा का फल जूठा और अपवित्र न हो। यह लोकगीत दर्शाता है कि छठ पूजा में पवित्रता और स्वच्छता का कितना अधिक ध्यान रखा जाता है। जब अर्घ्य का समय होता है, तो सूर्य देव उदित होते हैं और सभी भक्त उनकी वंदना करते हैं।

अंतरा 3 का भावार्थ:

अंतिम अंतरे में गंगा नदी के पवित्र किनारे पर सजे हुए घाटों का वर्णन है। वहाँ उपस्थित सभी नर-नारी दोनों हाथ जोड़कर छठी माई और सूर्य देव को नमन कर रहे हैं। गायिका प्रीति लता भी माता के चरणों में अपना शीश नवाकर इस पावन गीत के माध्यम से अपनी भक्ति अर्पित कर रही हैं और सभी के कल्याण की कामना कर रही हैं।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत की मुख्य भावना "पूर्ण समर्पण, शुचिता और प्रकृति पूजा" है। छठ पूजा एकमात्र ऐसा पर्व है जहाँ प्रत्यक्ष देवता सूर्य और उनकी शक्ति छठी माई (उषा और प्रत्युषा) की आराधना की जाती है। इस गीत के माध्यम से निम्नलिखित संदेश प्रसारित होते हैं:

  • प्राकृतिक संतुलन का संदेश: गीत में बांस, केला, सुगा (तोता) और गंगा जल का उल्लेख यह दर्शाता है कि मानव जीवन प्रकृति के बिना अधूरा है।
  • समानता और सामूहिकता: घाट पर अमीर-गरीब का भेद मिट जाता है। सभी लोग एक साथ मिलकर दउरा उठाते हैं और अर्घ्य देते हैं।
  • कठिन साधना और अनुशासन: ३६ घंटे के निर्जला व्रत के दौरान व्रतियों की निष्ठा और कठिन नियमों का पालन इस गीत के स्वरों में महसूस किया जा सकता है।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण श्रेणी गीत की जानकारी (Song Details)
गीत का नाम (Song Name) छठी माई के घाट (Chhathi Maai Ke Ghaat)
गायिका (Singer) प्रीति लता (Priti Lata)
श्रेणी (Category) भोजपुरी भक्ति गाना / छठ पूजा गीत
भाषा (Language) भोजपुरी (Bhojpuri)
मुख्य विषय (Theme) छठी माई की महिमा, सूर्य देव को अर्घ्य और घाट का वर्णन
संगीत शैली (Music Style) पारंपरिक भोजपुरी लोक संगीत

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

इस सुप्रसिद्ध गीत को भोजपुरी जगत की सुरीली गायिका प्रीति लता ने अपनी मधुर आवाज दी है। प्रीति लता अपने पारंपरिक और लोक-संस्कृति से जुड़े गीतों के लिए जानी जाती हैं। इस गीत में उन्होंने पारंपरिक छठ गीतों की आत्मा को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक संगीत का ऐसा समन्वय किया है जो युवा पीढ़ी को भी अपनी जड़ों से जोड़ता है। इस गीत के संगीतकार और गीतकार ने लोक धुनों का अत्यंत खूबसूरती से उपयोग किया है, जिससे यह गीत हर वर्ष छठ महापर्व के दौरान मंदिरों, घरों और घाटों पर गूंजता रहता है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

कठिन शब्द सरल हिंदी अर्थ गीत के संदर्भ में महत्व
बजंतवा वाद्ययंत्र / बाजा घाट पर बजने वाले मांगलिक और भक्तिमय संगीत का प्रतीक।
अरघ (अर्घ्य) सूर्य देव को जल अर्पित करना छठ पूजा की मुख्य क्रिया, जो उदित और अस्त होते सूर्य को की जाती है।
बेर समय / वेला अर्घ्य देने के शुभ मुहूर्त या समय को दर्शाता है।
दउरा बांस की बड़ी टोकरी इसमें पूजा का प्रसाद जैसे ठेकुआ, फल आदि रखकर घाट ले जाया जाता है।
बहँगी बांस का बना काँवर कंधे पर रखकर पूजा सामग्री ढोने का पारंपरिक साधन।
बटोहिया राहगीर / यात्री मार्ग में चलने वाला व्यक्ति जो कौतूहलवश प्रश्न पूछता है।
घवद केले का गुच्छा छठ पूजा में चढ़ाया जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण फल।

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

छठ महापर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। "छठी माई के घाट" गीत इस महत्व को रेखांकित करता है:

  1. सूर्य उपासना का महत्व: सूर्य देव ऊर्जा, स्वास्थ्य और जीवन के कारक हैं। इस गीत में उनके उदय होने की प्रतीक्षा और अर्घ्य देने की व्याकुलता भक्तों के समर्पण को दर्शाती है।
  2. छठी मैया का स्वरूप: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, छठी मैया भगवान सूर्य की बहन और ब्रह्मा जी की मानस पुत्री 'देवसेना' हैं। वे बच्चों की रक्षा करने वाली और संतान सुख प्रदान करने वाली देवी हैं।
  3. सामुदायिक समरसता: यह गीत हमें याद दिलाता है कि छठ पूजा में किसी पुरोहित या विशेष मंत्रोच्चार की आवश्यकता नहीं होती। यह पूरी तरह से लोक-आस्था और जन-भागीदारी का पर्व है, जहाँ समाज का हर वर्ग एक साथ नदी के किनारे एकत्रित होता है।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

इस पावन गीत और छठ पर्व से हमें अपने दैनिक जीवन के लिए कई महत्वपूर्ण सीख मिलती हैं:

  • धैर्य और प्रतीक्षा: जिस प्रकार भक्त पूरी रात जागकर सुबह के सूर्य देव के उदय होने की प्रतीक्षा करते हैं, उसी प्रकार हमें भी अपने जीवन के कठिन समय में धैर्य रखना चाहिए।
  • प्रकृति का संरक्षण: नदी, जल, मिट्टी के दीये और बांस के बर्तनों का उपयोग हमें पर्यावरण के अनुकूल जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
  • शुद्धता और अनुशासन: मन, वचन और कर्म की पवित्रता ही ईश्वर प्राप्ति का सच्चा मार्ग है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यद्यपि इस गीत को कभी भी सुना जा सकता है, लेकिन इसका वास्तविक आनंद और महत्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी तिथि तक चलने वाले चार दिवसीय छठ महापर्व के दौरान होता है।

  • नहाय-खाय और खरना के दिन: घरों की सफाई करते समय और प्रसाद बनाते समय इस गीत को सुनने से मन शांत और एकाग्र होता है।
  • संध्या अर्घ्य के समय: जब भक्त अपने सिर पर दउरा लेकर घाट की ओर प्रस्थान करते हैं, तब यह गीत वातावरण को अत्यंत भावुक और भक्तिमय बना देता है।
  • उषा अर्घ्य के समय: सुबह के समय जब सूर्य देव की पहली किरण का इंतजार होता है, तब इस गीत का गायन भक्तों में नई ऊर्जा का संचार करता है।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

मुख्य बिंदु संक्षिप्त विवरण
गीत का शीर्षक छठी माई के घाट (Chhathi Maai Ke Ghaat)
मुख्य कलाकार प्रीति लता (Priti Lata)
संबंधित त्योहार छठ पूजा (Chhath Puja)
मुख्य देव/देवी छठी मैया एवं भगवान सूर्यदेव
काव्य रस भक्ति रस, शांत रस
सांस्कृतिक संदर्भ बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश की लोक संस्कृति

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस सुप्रसिद्ध और पारंपरिक भाव वाले छठ गीत को लोकप्रिय भोजपुरी गायिका प्रीति लता ने गाया है।

बहँगी कच्चे बांस से बनी एक काँवर होती है, जिसका उपयोग छठ पूजा के पावन प्रसाद और फलों से भरे दउरा को कंधे पर रखकर सुरक्षित और पवित्र तरीके से घाट तक ले जाने के लिए किया जाता है।

गीत में "सुगा" का उल्लेख छठ पूजा के प्रसाद की परम शुद्धता को दर्शाने के लिए किया गया है। मान्यता है कि पूजा के फलों को कोई पक्षी जूठा न करे, इसलिए व्रती बहुत सतर्क रहते हैं।

छठ पूजा मुख्य रूप से प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य और उनकी शक्ति छठी मैया (उषा और प्रत्युषा) को समर्पित है।

छठ पूजा वर्ष में दो बार मनाई जाती है - पहली चैत्र मास में (चैती छठ) और दूसरी कार्तिक मास में (कार्तिकी छठ), जो कि मुख्य और व्यापक रूप से मनाई जाने वाली छठ पूजा है।

नहीं, यह गीत बिहार के साथ-साथ झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) और देश-विदेश में जहाँ भी भोजपुरी भाषी और छठ पर्व मनाने वाले लोग रहते हैं, वहाँ अत्यंत चाव से सुना जाता है।

छठ के घाटों को मिट्टी के दीयों, केले के पत्तों, फूलों और रंगोली से सजाया जाता है। यहाँ का वातावरण अत्यंत पवित्र, अनुशासित और भक्तिमय होता है।

इस गीत का मुख्य संदेश छठी माई के प्रति पूर्ण समर्पण, पारिवारिक सुख-समृद्धि की कामना और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री: इस लेख का संपादन और संकलन भक्तिलोक के विद्वान संपादकों द्वारा किया गया है। इस गीत के बोल और भावार्थ को पारंपरिक स्रोतों और लोक-संस्कृति के विशेषज्ञों की देखरेख में शुद्धता के साथ प्रस्तुत किया गया है ताकि पाठकों को सही और प्रामाणिक जानकारी मिल सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • बिहार और उत्तर प्रदेश की पारंपरिक छठ पूजा लोक-परंपराएं।
  • श्रीमद्देवीभागवत महापुराण - षष्ठी देवी (छठी मैया) की कथा।
  • प्रीति लता के आधिकारिक संगीत एल्बम और भोजपुरी लोकगीत संग्रह।

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यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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