Parvati Stotram

तेरी चुनरी गोतेदार मैया (Teri Chunri Gotedar Maiya) - Mata Rani Bhajan Gagandeep - Bhaktilok

94 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

"तेरी चुनरी गोतेदार मैया, मैं तो लहरिया लाऊँगा" भगवती जगदम्बा दुर्गा के भव्य श्रृंगार और अनन्य भक्ति भाव को समर्पित एक अत्यंत सुमधुर और लोकप्रिय माता रानी भजन है। गगनदीप जी द्वारा रचित एवं गाए गए इस भक्ति गीत में आद्यशक्ति माँ जगदम्बा के मनमोहक स्वरूप, गोटेदार चुनरी, लहरिया ओढ़नी और नख-शिख श्रृंगार का बड़ा ही मर्मस्पर्शी चित्रण किया गया है। सनातन देवी उपासना परंपरा में भगवती दुर्गा को ब्रह्मांड की आदिशक्ति और ममतामयी माता माना गया है। नवरात्रि के पावन पर्व, भगवती जागरण, दुर्गा पूजा, माता की चौकी और दैनिक संध्या वंदन के अवसर पर यह भजन श्रद्धालुओं के हृदयों को अलौकिक भक्ति रस से भर देता है। जब साधक पूर्ण निष्ठा और वात्सल्य भाव से अपनी आराध्य माता को सुंदर वस्त्र और श्रृंगार अर्पित करने का संकल्प लेता है, तो जीवात्मा और परमात्मा के बीच एक अटूट भावनात्मक संबंध स्थापित होता है। इस विस्तृत एवं प्रामाणिक लेख में आप इस पावन भजन के सम्पूर्ण लिरिक्स, शब्दार्थ, विस्तृत भावार्थ, शास्त्रीय संदर्भ, श्रृंगार भक्ति का आध्यात्मिक महत्व और नवरात्रि पूजन विधि की गहन जानकारी प्राप्त करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

स्थाई (मुखड़ा):

तेरी चुनरी गोतेदार मैया, मैं तो लहरिया लाऊँगा।
ओ मैया लहरिया लाऊँगा, तुझे मैया मैं सजाऊँगा॥
तेरी चुनरी गोतेदार मैया, मैं तो लहरिया लाऊँगा॥

प्रथम अंतरा:

लाल-लाल चुनरी पे सितारे चमके,
माथे की बिंदिया गणपति चमके।
मैया तोहे टीका सोहे, माँ तोहे नथुनी सोहे,
मैं तो पायल गढ़वाऊँगा... तुझे मैया मैं सजाऊँगा॥
तेरी चुनरी गोतेदार मैया, मैं तो लहरिया लाऊँगा॥

द्वितीय अंतरा:

चैत्र और आश्विन के नवराते आए,
भक्तों के मन में हर्ष समाए।
मैया तेरे द्वारे आए, तेरा दर्शन पाए,
मैं तो भेंट चढ़ाऊँगा... तुझे मैया मैं सजाऊँगा॥
तेरी चुनरी गोतेदार मैया, मैं तो लहरिया लाऊँगा॥

तृतीय अंतरा:

गगनदीप गावे मैया तेरी महिमा,
अपरंपार है मैया तेरी गरिमा।
राज शर्मा सुर सजावे, पवन पाठक ध्यावे,
मैं तो गुण तेरे गाऊँगा... तुझे मैया मैं सजाऊँगा॥
तेरी चुनरी गोतेदार मैया, मैं तो लहरिया लाऊँगा॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस पावन भजन "तेरी चुनरी गोतेदार मैया" का भावार्थ केवल भौतिक कपड़ों या श्रृंगार सामग्री के अर्पण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवात्मा द्वारा अपनी परमेश्वरी माँ जगदम्बा के प्रति अनन्य प्रेम, श्रद्धा और पूर्ण आत्मसमर्पण का प्रतीक है। सगुण भक्ति धारा में ईश्वर के दिव्य रूप को सजाना, संवारना और उन्हें सुंदर आभूषण एवं वस्त्र अर्पित करना 'श्रृंगार भक्ति' कहलाता है।

मुखड़े का भावार्थ: भक्त अपनी परम पावन माता रानी से कहता है कि हे मैया! आपकी चुनरी गोटे (सुनहरी व रूपहली किनारी) से सुसज्जित है। मैं आपके लिए लहरदार सुंदर लहरिया वस्त्र लाऊँगा और अत्यंत प्रेम से आपका दिव्य श्रृंगार करूँगा। यहाँ 'चुनरी' संपूर्ण सृष्टि की विविधताओं और प्रकृति रूपी आवरण का प्रतिनिधित्व करती है, जिसे भक्त माता के चरणों में ससम्मान अर्पित करना चाहता है।

अंतराओं का भावार्थ: प्रथम अंतरे में माता रानी के सोलह श्रृंगार का सुंदर वर्णन है। लाल चुनरी पर दमकते सितारे और मस्तक पर चमकती बिंदिया माता के अलौकिक तेज का प्रतीक हैं। माथे का टीका, नासिका की नथुनी और चरणों की पायल देवी भगवती की अलौकिक शोभा में वृद्धि करते हैं। द्वितीय अंतरे में चैत्र और शारदीय (आश्विन) नवरात्रि के पावन पर्वों का उल्लेख है। जब समस्त सृष्टि में चेतना और उत्साह का संचार होता है, तब भक्त माता के दिव्य दरबार में आकर अपनी सामर्थ्य और भक्ति अनुसार भेंट अर्पित करते हैं। तृतीय अंतरे में रचनाकार और संगीत साधक माता की महिमा और गरिमा का गुणगान करते हुए अपनी शरण्य भावना व्यक्त करते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

सनातन धर्म में शक्ति उपासना का अत्यधिक महत्व है। "तेरी चुनरी गोतेदार मैया" भजन में कई ऐसी आध्यात्मिक व सांस्कृतिक विशेषताएं निहित हैं जो इसे जन-जन का प्रिय बनाती हैं:

  • श्रृंगार भक्ति का प्राधान्य: यह भजन नवधा भक्ति के अंतर्गत 'दास्य' और 'माधुर्य/वात्सल्य' भाव का अद्भुत मिश्रण है, जहाँ भक्त देवी को केवल एक भयप्रद महाशक्ति नहीं, अपितु अपनी करुणामयी माता मानकर उनका सहज श्रृंगार करता है।
  • लाल रंग का शास्त्रीय महत्व: भजन में 'लाल-लाल चुनरी' का वर्णन है। शाक्त परंपरा में लाल रंग शक्ति, उत्साह, विजय, सौभाग्य और शुद्ध चेतना का प्रतीक माना जाता है।
  • सोलह श्रृंगार का आध्यात्मिक अर्थ: माता रानी को अर्पित टीका, नथुनी, बिंदिया और पायल केवल आभूषण नहीं हैं, बल्कि ये प्रकृति के विभिन्न तत्त्वों और सौभाग्य के प्रतीक हैं।
  • नवरात्रि पर्व की महिमा: भजन में वर्ष की दो प्रमुख नवरात्रियों (वासंतिक और शारदीय) का उल्लेख है, जो आध्यात्मिक साधना और आत्म-शुद्धि के सर्वश्रेष्ठ समय माने जाते हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यह भजन किसी भी समय भगवती की आराधना हेतु गाया जा सकता है, परंतु कुछ विशेष अवसरों पर इसका गायन अत्यधिक पुण्यदायी माना जाता है:

  • उपयुक्त समय: नवरात्रि के नौ दिनों में, मंगलवार एवं शुक्रवार के दिन, अष्टमी व नवमी तिथि पर, तथा माता की चौकी या भगवती जागरण के दौरान।
  • गायन विधि: भजन का गायन करने से पूर्व स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर या पूजा स्थल पर दीपक प्रज्वलित करें। यदि संभव हो तो माँ जगदम्बा के चित्र या प्रतिमा के सम्मुख लाल चुनरी, रोली, अक्षत और पुष्प अर्पित करें।
  • भाव शुद्धि: गायन के समय हृदय में अहंकार के स्थान पर सहज बाल भाव और कृतज्ञता होनी चाहिए। सुर और ताल के साथ माता रानी के स्वरूप का ध्यान करना परम फलदायी है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन आद्यशक्ति भगवती दुर्गा, माँ पार्वती और माता रानी के समस्त सौम्य व तेजस्वी स्वरूपों को समर्पित है। सनातन दर्शन में त्रिगुणात्मक शक्ति (महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती) ही जगत की उत्पत्ति, पालन और संहार करने वाली मूल सत्ता है।

देवी पुराण एवं श्रीमद्देवीभागवत के अनुसार, जो साधक माता रानी की शरण में आकर उनके दिव्य स्वरूप का चिंतन करता है, उसके जीवन के समस्त भय, दरिद्रता और क्लेश समाप्त हो जाते हैं। संतों और शाक्त आचार्यों ने माता की चुनरी को जगदाधार रूपी आवरण माना है, जिसकी छत्रछाया में समस्त जीव सुरक्षित रहते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

भजन "तेरी चुनरी गोतेदार मैया" आधुनिक भक्ति संगीत जगत का एक अत्यंत लोकप्रिय भजन है। इस भजन की रचना और सुमधुर गायन गायक **गगनदीप** द्वारा किया गया है। इसका संगीत निर्देशन **राज शर्मा** ने किया है, जबकि वीडियो निर्देशन **पवन पाठक** द्वारा संपन्न हुआ। भक्ति दर्शन यूट्यूब चैनल एवं भक्ति लोक परंपरा के अंतर्गत इस गीत को आधुनिक वाद्ययंत्रों और पारंपरिक ढोलक-मंजीरे की लयबद्ध ध्वनि के साथ प्रस्तुत किया गया है, जिसने इसे जगरातों और लोक उत्सवों का अनिवार्य हिस्सा बना दिया है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा लोक-संस्कृत से प्रभावित सरल और सुबोध हिंदी (खड़ी बोली) है। इसमें राजस्थानी और ब्रज लोक संस्कृति की झलक भी मिलती है, जैसे 'गोतेदार' और 'लहरिया' जैसे शब्दों का सुंदर प्रयोग।

काव्य शैली: भजन की शैली गेय (गाए जाने योग्य) और लयात्मक है। छंद विधान में मुखड़ा और अंतरा की स्पष्ट संरचना है। अनुप्रास अलंकार और बिंब विधान (जैसे लाल चुनरी, जगमगाते सितारे, माथे की बिंदिया) के प्रयोग से यह भजन श्रोता के मन में माता रानी के सजीव स्वरूप का चित्र उकेर देता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें केवल भक्ति संगीत का आनंद ही नहीं देता, बल्कि व्यावहारिक और आध्यात्मिक जीवन की कई महत्वपूर्ण सीख भी प्रदान करता है:

1. श्रद्धा और निष्ठा का महत्व: ईश्वर वस्तु या द्रव्य का भूखा नहीं होता, वह केवल भाव का भूखा होता है। एक छोटी सी चुनरी भी यदि अपार प्रेम से चढ़ाई जाए तो माँ प्रसन्न होती हैं।

2. संस्कृति और परंपरा का सम्मान: नवरात्रि और लोक त्योहार हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं। माता रानी का पूजन और श्रृंगार हमारी सनातन परंपराओं से जुड़े रहने का संदेश देता है।

3. समर्पण और विनम्रता: "मैं तो गुण तेरे गाऊँगा" की पंक्ति साधक को सिखाती है कि मनुष्य को अपनी कला, वाणी और सामर्थ्य को भगवद् चरणों में ही समर्पित कर देना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पद सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक / संदर्भगत अर्थ
चुनरी ओढ़नी / पावन वस्त्र भगवती का पावन मंगलकारी आवरण व सौभाग्य का प्रतीक
गोतेदार गोटे व सुनहरी किनारी से सजा दिव्य तेज और भगवती के स्वरूप की भव्यता
लहरिया लहरदार डिजाइन वाला पारंपरिक वस्त्र भक्ति रस की तरंगे और प्रकृति की सुंदरता
बिंदिया माथे का तिलक / बिंदी आज्ञा चक्र की जाग्रति और परम सौभाग्य
नथुनी नाक का आभूषण (नथ) सौम्य रूप और स्त्री शक्ति की गरिमा
नवराते नवरात्रि का पर्व नौ रात्रियों की विशेष आत्म-साधना व शक्ति पूजा
भेंट उपहार / अर्पण अहंकार त्यागकर ईश्वर को अर्पित श्रद्धासुमन

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

पंक्ति 1-2: "तेरी चुनरी गोतेदार मैया, मैं तो लहरिया लाऊँगा। ओ मैया लहरिया लाऊँगा, तुझे मैया मैं सजाऊँगा॥"
व्याख्या: हे जगज्जननी मैया! आपकी ओढ़नी सुनहरे गोटे से सुशोभित है। मैं आपके लिए अत्यंत सुंदर लहरदार वस्त्र (लहरिया) लाऊँगा और आपको अत्यंत मनमोहक रूप से सजाऊँगा। यह पंक्ति साधक के मन की ममता और सेवक भाव को व्यक्त करती है।

पंक्ति 3-5: "लाल-लाल चुनरी पे सितारे चमके, माथे की बिंदिया गणपति चमके। मैया तोहे टीका सोहे, माँ तोहे नथुनी सोहे, मैं तो पायल गढ़वाऊँगा..."
व्याख्या: आपकी लाल चुनरी पर जड़े सितारे आकाश के नक्षत्रों की भांति चमक रहे हैं। आपके माथे की बिंदिया में प्रथम पूज्य श्री गणेश जी की भांति अलौकिक मंगल तेज दमक रहा है। आपके मस्तक पर माँग-टीका और नासिका में नथुनी अत्यंत सुंदर लग रही है। हे माँ! मैं आपके पावन चरणों के लिए सुंदर पायल भी बनवाकर लाऊँगा।

पंक्ति 6-8: "चैत्र और आश्विन के नवराते आए, भक्तों के मन में हर्ष समाए। मैया तेरे द्वारे आए, तेरा दर्शन पाए, मैं तो भेंट चढ़ाऊँगा..."
व्याख्या: बसंत ऋतु की चैत्र नवरात्रि और शरद ऋतु की आश्विन (क्वार) नवरात्रि के पावन दिन आ गए हैं। इन दिनों में सभी भक्तों के दिलों में अपार आनंद छा गया है। सभी श्रद्धालु आपके पावन द्वार पर आकर आपका अलौकिक दर्शन प्राप्त कर रहे हैं। मैं भी आपके चरणों में अपनी निष्ठा रूपी भेंट अर्पित करने आया हूँ।

पंक्ति 9-11: "गगनदीप गावे मैया तेरी महिमा, अपरंपार है मैया तेरी गरिमा। राज शर्मा सुर सजावे, पवन पाठक ध्यावे, मैं तो गुण तेरे गाऊँगा..."
व्याख्या: हे मैया! आपके गायक और भक्त निरंतर आपकी महिमा का गान कर रहे हैं। आपकी गरिमा और कृपा अपरंपार है, जिसका कोई पार नहीं पा सकता। संगीतकार और साधक आपके चरणों में ध्यान लगाकर सुरों की सेवा अर्पित कर रहे हैं। मैं जीवन भर आपके दिव्य गुणों और लीलाओं का गान करता रहूँगा।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

माता रानी की पूजा और चुनरी/श्रृंगार अर्पित करते समय निम्नलिखित शास्त्रीय मंत्रों का जप करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है:

1. भगवती मंगला स्तुति (देवी महात्म्य):

सर्वमंगल मंगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

अर्थ: हे नारायणी! आप सब प्रकार का मंगल प्रदान करने वाली मंगलमयी हैं। आप कल्याणकारिणी, सब पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली, शरणागतवत्सला, तीन नेत्रों वाली और गौरी हैं। आपको बारंबार नमस्कार है।

2. देवी रूप ध्यान श्लोक:

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

अर्थ: जो देवी समस्त प्राणियों में शक्ति रूप से स्थित हैं, उनको मेरा बारंबार नमस्कार है, नमस्कार है, नमस्कार है।

3. वस्त्र व चुनरी अर्पण मंत्र:

शीतवातोष्णसंत्राणं लज्जाया रक्षणं परम्।
देहालंकरणं वस्त्रमतः शांति प्रयच्छ मे॥

अर्थ: हे माँ! शीत, वायु और उष्णता से रक्षा करने वाले, लज्जा का निवारण करने वाले तथा शरीर को अलंकृत करने वाले इस पावन वस्त्र/चुनरी को स्वीकार करें और मुझे शांति प्रदान करें।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विषय / मद विवरण
भजन का शीर्षक तेरी चुनरी गोतेदार मैया (Teri Chunri Gotedar Maiya)
प्रमुख देवी/देवता माँ दुर्गा / भगवती पार्वती / माता रानी
गायक एवं गीतकार गगनदीप (Gagandeep)
संगीत निर्देशक राज शर्मा (Raj Sharma)
काव्य भाषा एवं शैली हिंदी (लोक-शैली एवं भक्ति रस)
भक्ति का स्वरूप श्रृंगार भक्ति एवं दास्य/वात्सल्य भाव
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, माता की चौकी, भगवती जागरण, शुक्रवार/मंगलवार पूजन
मुख्य संदेश निष्कपट भाव से माँ जगदम्बा का पूजन, श्रृंगार एवं समर्पण

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्‍न 1: "तेरी चुनरी गोतेदार मैया" भजन के मूल गायक और गीतकार कौन हैं?

उत्तर: इस सुप्रसिद्ध माता रानी भजन के रचयिता और गायक गगनदीप (Gagandeep) हैं, तथा इसका संगीत निर्देशन राज शर्मा द्वारा किया गया है।

प्रश्‍न 2: माता रानी को लाल चुनरी और गोटा क्यों अर्पित किया जाता है?

उत्तर: सनातन परंपरा में लाल रंग शक्ति, सौभाग्य, उत्साह और ऊर्जा का प्रतीक है। गोटा और चुनरी माता के आद्यशक्ति स्वरूप के सम्मान और सौभाग्य की वृद्धि हेतु अर्पित किए जाते हैं।

प्रश्‍न 3: भजन में 'चैत्र और आश्विन के नवराते' का क्या अर्थ है?

उत्तर: हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष में दो प्रमुख नवरात्रियाँ आती हैं—चैत्र (वासंतिक) नवरात्रि और आश्विन (शारदीय) नवरात्रि। भजन में इन दोनों मुख्य शक्ति उपासना पर्वों का उल्लेख किया गया है।

प्रश्‍न 4: क्या यह भजन माता की चौकी या जागरण में गाया जा सकता है?

उत्तर: हाँ, यह भजन अपनी तीव्र लय और भक्तिमय बोलों के कारण माता की चौकी, भगवती जागरण और नवरात्रि उत्सवों में अत्यंत उत्साह के साथ गाया जाता है।

प्रश्‍न 5: माता रानी का श्रृंगार करते समय किन-किन सामग्रियों का प्रयोग करना चाहिए?

उत्तर: माता रानी के सोलह श्रृंगार में लाल चुनरी, रोली, सिंदूर, महावर, मेहंदी, बिंदिया, चूड़ियाँ, नथ, पायल, और सुगंधित इत्र मुख्य रूप से शामिल होते हैं।

प्रश्‍न 6: इस भजन को सुनने या गाने से क्या आध्यात्मिक लाभ मिलता है?

उत्तर: इस भजन का श्रद्धापूर्वक श्रवण या गायन करने से मन में शांति, सकारात्मक ऊर्जा, भक्ति भाव का संचार होता है और भगवती जगदम्बा की कृपा प्राप्त होती है।

प्रश्‍न 7: लहरिया वस्त्र का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व क्या है?

उत्तर: लहरिया राजस्थान और उत्तर भारत का एक पारंपरिक वस्त्र प्रकार है, जो खुशी, वर्षा ऋतु और उत्सव के आगमन का प्रतीक माना जाता है। इसे माता रानी को अर्पित करना परम मंगलकारी माना जाता है।

प्रश्‍न 8: घर में नवरात्रि या शुक्रवार को चुनरी चढ़ाने की सही विधि क्या है?

उत्तर: स्नान के बाद शुद्ध लाल वस्त्र पहनें, दीप जलाएं, माता रानी को प्रणाम करें और 'ॐ दूँ दुर्गायै नमः' या 'सर्वमंगल मंगल्ये' मंत्र का उच्चारण करते हुए ससम्मान चुनरी अर्पित करें।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख भक्तिलोक के विद्वान संपादकीय मंडल द्वारा सनातन शास्त्रों, मार्कंडेय पुराण के देवी महात्म्य खंड, शाक्त परंपराओं और भक्ति संगीत ग्रंथों के गहन अध्ययन के पश्चात तैयार किया गया है। सामग्री की प्रामाणिकता, भाषाई शुद्धता और आध्यात्मिक सत्यता का विशेष ध्यान रखा गया है। यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जिसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को शुद्ध और ज्ञानवर्धक भक्ति साहित्य उपलब्ध कराना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • देवी महात्म्य (श्री दुर्गा सप्तशती): मार्कंडेय पुराण के अंतर्गत भगवती के स्वरूप एवं श्रृंगार महिमा का वर्णन।
  • श्रीमद्देवीभागवत महापुराण: नवधा भक्ति एवं शाक्त उपासना पद्धतियों के शास्त्रीय नियम।
  • पारंपरिक भक्ति संगीत संग्रह: भक्ति दर्शन एवं प्रामाणिक भजन रचयिता मंडल की प्रस्तुतियां।

संबंधित भजन एवं लेख

भगवती दुर्गा और माता रानी की कृपा प्राप्त करने हेतु भक्तिलोक पर उपलब्ध इन अन्य पावन स्तोत्रों और भजनों को भी अवश्य पढ़ें:

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!