Chhath Puja Geet बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

सजा दो घाट फूलो से (Saja Do Ghat Fulo Ka) - Urvashi Singh Shristi Singh Chhath Puja Geet

छठ महापर्व के पावन अवसर पर सुनें उर्वशी व सृष्टि सिंह का प्रसिद्ध भजन 'सजा दो घाट फूलों से'। संपूर्ण लिरिक्स और भावार्थ पढ़ें भक्तिलोक पर।

छठ महापर्व की महिमा अपरंपार है। लोक आस्था के इस महापर्व में जब छठी मैया और भगवान सूर्य देव की आराधना के लिए घाट सजते हैं, तो वातावरण भक्तिमय हो जाता है। उर्वशी सिंह और सृष्टि सिंह द्वारा स्वरबद्ध भजन "सजा दो घाट फूलो से" इसी पावन भाव को अभिव्यक्त करता है। यह भजन न केवल एक गीत है, बल्कि उस श्रद्धा का प्रतिबिंब है जो एक व्रती के हृदय में अपने आराध्य के प्रति होती है। घाट की सफाई, उसे फूलों से सजाना और दीपों की रोशनी से उसे जगमगाना, सूर्योपासना के प्रति समर्पण का प्रतीक है। इस लेख में हम इस भजन के भावार्थ, इसके आध्यात्मिक महत्व और छठ पूजा की परंपराओं पर विस्तृत चर्चा करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

सजा दो घाट फूलों से, छठी मैया आई हैं,
जला दो दीप घी के, खुशियाँ साथ लाई हैं।
सजा दो घाट फूलों से, छठी मैया आई हैं॥

गंगा की लहरों में, सूरज की लाली है,
भक्तों के मन में देखो, कैसी खुशहाली है।
श्रद्धा के सुमन चढ़ाओ, मैया की दुहाई है,
सजा दो घाट फूलों से, छठी मैया आई हैं॥

निर्मल मन से जो भी, अर्घ्य चढ़ाते हैं,
छठी मैया उनकी, झोलियाँ भर जाती हैं।
महिमा इनकी अपरंपार, सबने ये गाई है,
सजा दो घाट फूलों से, छठी मैया आई हैं॥

उर्वशी-सृष्टि की वाणी, मैया को भाती है,
भक्ति की ये धारा, जीवन महकाती है।
रवि के बोलों में देखो, श्रद्धा समाई है,
सजा दो घाट फूलों से, छठी मैया आई हैं॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का मुख्य भाव 'समर्पण' और 'स्वागत' है। जिस प्रकार हम अपने घर में किसी विशिष्ट अतिथि के आगमन की तैयारी करते हैं, उसी प्रकार छठ पूजा के दौरान व्रती अपने घाट को फूलों और दीपों से सजाते हैं। "सजा दो घाट फूलों से" पंक्ति यह दर्शाती है कि बाहरी स्वच्छता के साथ-साथ मन की पवित्रता भी अनिवार्य है। घाट का अर्थ यहाँ केवल नदी का किनारा नहीं, बल्कि वह स्थान है जहाँ जीवात्मा परमात्मा (सूर्य देव) से साक्षात्कार करती है। अर्घ्य देना केवल जल अर्पित करना नहीं, बल्कि अपने अहंकार को सूर्य देव के चरणों में विसर्जित करना है। जब भक्त निर्मल मन से अर्घ्य देता है, तो छठी मैया उसकी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। यह भजन हमें याद दिलाता है कि भक्ति में आडंबर से अधिक भाव की प्रधानता होती है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन छठ पूजा के दौरान गाए जाने वाले गीतों में अत्यंत लोकप्रिय है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • सांस्कृतिक जुड़ाव: यह भजन बिहार और उत्तर प्रदेश की लोक संस्कृति और छठ महापर्व की परंपराओं को जीवंत करता है।
  • भक्ति भाव: इसमें सूर्य देव और छठी मैया के प्रति अटूट विश्वास को दर्शाया गया है।
  • सरलता: इसके बोल अत्यंत सरल हैं, जिन्हें कोई भी भक्त आसानी से गा सकता है।
  • आध्यात्मिक संदेश: यह भजन हमें सिखाता है कि ईश्वर की सेवा में किया गया प्रत्येक कार्य पूजा के समान है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को छठ पूजा के चारों दिनों—नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य के दौरान गाया जा सकता है। विशेष रूप से जब व्रती घाट पर जाते हैं या अर्घ्य देने की तैयारी करते हैं, तब इस भजन का श्रवण मन को शांति और एकाग्रता प्रदान करता है। इसे सामूहिक रूप से सत्संग में या घर पर पूजा के समय गाया जा सकता है।

भजन की जानकारी | Song Information

विवरण जानकारी
भजन का नामसजा दो घाट फूलो से
गायिकाउर्वशी सिंह, सृष्टि सिंह
गीतकाररवि सिंह
संगीतसनी ऑस्कर और बबलू मिश्रा
भाषाहिंदी/भोजपुरी मिश्रित
विषयछठ पूजा, सूर्योपासना

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द अर्थ
घाटनदी का किनारा जहाँ पूजा होती है
अर्घ्यसूर्य देव को जल अर्पित करना
सुमनफूल
निर्मलपवित्र, स्वच्छ
अपरंपारजिसकी कोई सीमा न हो (अनंत)

छठ पूजा का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व

छठ पूजा केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम है। सूर्य देव, जो समस्त ऊर्जा के स्रोत हैं, उन्हें अर्घ्य देकर हम जीवन के प्रकाश के लिए धन्यवाद देते हैं। छठी मैया, जिन्हें 'ऊषा' (भोर की देवी) माना जाता है, वे जीवन में नई आशा और ऊर्जा का संचार करती हैं। इस महापर्व के बारे में अधिक जानने के लिए आप छठ पूजा विधि एवं नियम और सूर्य देव उपासना का महत्व पढ़ सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

घाट सजाना छठी मैया के प्रति सम्मान और स्वागत का प्रतीक है। यह स्वच्छता और पवित्रता का संदेश देता है।

इस भजन को छठ पूजा के दौरान, विशेषकर घाट पर जाते समय या पूजा की तैयारी करते समय सुनना अत्यंत शुभ माना जाता है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। अधिक जानकारी के लिए हमारे अन्य लेखों जैसे गोवर्धन पूजा व्रत कथा और माता रानी के भजन देखें।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

यह सामग्री लोक परंपराओं, छठ पूजा गीतों के प्रचलित संस्करणों और भक्ति साहित्य के आधार पर संकलित की गई है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!