छठ महापर्व की महिमा अपरंपार है। लोक आस्था के इस महापर्व में जब छठी मैया और भगवान सूर्य देव की आराधना के लिए घाट सजते हैं, तो वातावरण भक्तिमय हो जाता है। उर्वशी सिंह और सृष्टि सिंह द्वारा स्वरबद्ध भजन "सजा दो घाट फूलो से" इसी पावन भाव को अभिव्यक्त करता है। यह भजन न केवल एक गीत है, बल्कि उस श्रद्धा का प्रतिबिंब है जो एक व्रती के हृदय में अपने आराध्य के प्रति होती है। घाट की सफाई, उसे फूलों से सजाना और दीपों की रोशनी से उसे जगमगाना, सूर्योपासना के प्रति समर्पण का प्रतीक है। इस लेख में हम इस भजन के भावार्थ, इसके आध्यात्मिक महत्व और छठ पूजा की परंपराओं पर विस्तृत चर्चा करेंगे।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
सजा दो घाट फूलों से, छठी मैया आई हैं,
जला दो दीप घी के, खुशियाँ साथ लाई हैं।
सजा दो घाट फूलों से, छठी मैया आई हैं॥
गंगा की लहरों में, सूरज की लाली है,
भक्तों के मन में देखो, कैसी खुशहाली है।
श्रद्धा के सुमन चढ़ाओ, मैया की दुहाई है,
सजा दो घाट फूलों से, छठी मैया आई हैं॥
निर्मल मन से जो भी, अर्घ्य चढ़ाते हैं,
छठी मैया उनकी, झोलियाँ भर जाती हैं।
महिमा इनकी अपरंपार, सबने ये गाई है,
सजा दो घाट फूलों से, छठी मैया आई हैं॥
उर्वशी-सृष्टि की वाणी, मैया को भाती है,
भक्ति की ये धारा, जीवन महकाती है।
रवि के बोलों में देखो, श्रद्धा समाई है,
सजा दो घाट फूलों से, छठी मैया आई हैं॥
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस भजन का मुख्य भाव 'समर्पण' और 'स्वागत' है। जिस प्रकार हम अपने घर में किसी विशिष्ट अतिथि के आगमन की तैयारी करते हैं, उसी प्रकार छठ पूजा के दौरान व्रती अपने घाट को फूलों और दीपों से सजाते हैं। "सजा दो घाट फूलों से" पंक्ति यह दर्शाती है कि बाहरी स्वच्छता के साथ-साथ मन की पवित्रता भी अनिवार्य है। घाट का अर्थ यहाँ केवल नदी का किनारा नहीं, बल्कि वह स्थान है जहाँ जीवात्मा परमात्मा (सूर्य देव) से साक्षात्कार करती है। अर्घ्य देना केवल जल अर्पित करना नहीं, बल्कि अपने अहंकार को सूर्य देव के चरणों में विसर्जित करना है। जब भक्त निर्मल मन से अर्घ्य देता है, तो छठी मैया उसकी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। यह भजन हमें याद दिलाता है कि भक्ति में आडंबर से अधिक भाव की प्रधानता होती है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह भजन छठ पूजा के दौरान गाए जाने वाले गीतों में अत्यंत लोकप्रिय है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- सांस्कृतिक जुड़ाव: यह भजन बिहार और उत्तर प्रदेश की लोक संस्कृति और छठ महापर्व की परंपराओं को जीवंत करता है।
- भक्ति भाव: इसमें सूर्य देव और छठी मैया के प्रति अटूट विश्वास को दर्शाया गया है।
- सरलता: इसके बोल अत्यंत सरल हैं, जिन्हें कोई भी भक्त आसानी से गा सकता है।
- आध्यात्मिक संदेश: यह भजन हमें सिखाता है कि ईश्वर की सेवा में किया गया प्रत्येक कार्य पूजा के समान है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन को छठ पूजा के चारों दिनों—नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य के दौरान गाया जा सकता है। विशेष रूप से जब व्रती घाट पर जाते हैं या अर्घ्य देने की तैयारी करते हैं, तब इस भजन का श्रवण मन को शांति और एकाग्रता प्रदान करता है। इसे सामूहिक रूप से सत्संग में या घर पर पूजा के समय गाया जा सकता है।
भजन की जानकारी | Song Information
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| भजन का नाम | सजा दो घाट फूलो से |
| गायिका | उर्वशी सिंह, सृष्टि सिंह |
| गीतकार | रवि सिंह |
| संगीत | सनी ऑस्कर और बबलू मिश्रा |
| भाषा | हिंदी/भोजपुरी मिश्रित |
| विषय | छठ पूजा, सूर्योपासना |
कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| घाट | नदी का किनारा जहाँ पूजा होती है |
| अर्घ्य | सूर्य देव को जल अर्पित करना |
| सुमन | फूल |
| निर्मल | पवित्र, स्वच्छ |
| अपरंपार | जिसकी कोई सीमा न हो (अनंत) |
छठ पूजा का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व
छठ पूजा केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम है। सूर्य देव, जो समस्त ऊर्जा के स्रोत हैं, उन्हें अर्घ्य देकर हम जीवन के प्रकाश के लिए धन्यवाद देते हैं। छठी मैया, जिन्हें 'ऊषा' (भोर की देवी) माना जाता है, वे जीवन में नई आशा और ऊर्जा का संचार करती हैं। इस महापर्व के बारे में अधिक जानने के लिए आप छठ पूजा विधि एवं नियम और सूर्य देव उपासना का महत्व पढ़ सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। अधिक जानकारी के लिए हमारे अन्य लेखों जैसे गोवर्धन पूजा व्रत कथा और माता रानी के भजन देखें।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
यह सामग्री लोक परंपराओं, छठ पूजा गीतों के प्रचलित संस्करणों और भक्ति साहित्य के आधार पर संकलित की गई है।
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें