Chhath Puja Geet बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

उग हे सुरुज देव (Ug He suraj Dev) - chhathpuja Mona Singh Chhath Puja Geet

छठ महापर्व के प्रसिद्ध गीत 'उग हे सुरुज देव' (Ug He Suraj Dev) के बोल, Mona Singh Chhath Song का विस्तृत भावार्थ और सूर्य उपासना का आध्यात्मिक महत्व जानें।

बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के सबसे पावन और महापर्व छठ पूजा का नाम आते ही मन में एक अद्भुत श्रद्धा, पवित्रता और आस्था का संचार होने लगता है। छठ महापर्व के अवसर पर गाए जाने वाले पारंपरिक लोकगीत इस उत्सव की आत्मा हैं। इन्हीं गीतों में से एक अत्यंत लोकप्रिय और हृदयस्पर्शी गीत है "उग हे सुरुज देव" (Ug He Suraj Dev), जिसे सुप्रसिद्ध गायिका मोना सिंह ने अपनी सुमधुर आवाज में गाया है। यह गीत भगवान सूर्य देव की आराधना, उनके प्रति अगाध श्रद्धा और अर्घ्य देने के पावन समय की प्रतीक्षा को दर्शाता है। छठ पूजा के पावन अवसर पर जब घाटों पर व्रती महिलाएं हाथ में सूप लिए भगवान भास्कर के उदय होने की प्रतीक्षा करती हैं, तब यह गीत उनके अंतर्मन की व्याकुलता और अटूट विश्वास को स्वर देता है। इस लेख में हम इस पावन गीत के बोल, उसका विस्तृत भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व और छठ पूजा की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का गहराई से विश्लेषण करेंगे।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

उग हे सुरुज देव (Ug He Suraj Dev) - छठ पूजा गीत

उग हे सुरुज देव अरघ के रे बेरवा,
पूजन के रे बेरवा हो...
सभ कोई अरघ देवे ठाढ़ भईल बाड़े,
उग हे सुरुज देव अरघ के रे बेरवा हो...

कांच ही बांस के बहंगिया,
बहंगी लचकत जाए...
बहंगी लचकत जाए हो...
बाट जे पूछेला बटोहिया,
बहंगी केकरा के जाए...
बहंगी केकरा के जाए हो...

तू त आन्हर हवें रे बटोहिया,
बहंगी छठी माई के जाए...
बहंगी छठी माई के जाए हो...

केरा के पात पर उगेलन सुरुज देव,
झांकी झुकी उगेलन सुरुज देव हो...
अंजलि में गंगा जल लेके ठाढ़ बानी,
उग हे सुरुज देव अरघ के रे बेरवा हो...

नारियल फलवा से दउरा सजल बा,
ठेकुआ पकवान से सूपवा भरल बा हो...
दर्शन दीहीं हे दीनानाथ,
अरघ के रे बेरवा हो...
उग हे सुरुज देव अरघ के रे बेरवा हो...

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

यह पारंपरिक छठ गीत "उग हे सुरुज देव" भगवान सूर्य और छठी मैया के प्रति भक्तों के असीम समर्पण को व्यक्त करता है। गीत की प्रत्येक पंक्ति में आस्था, धैर्य और प्रकृति के प्रति सम्मान का गहरा संदेश छिपा हुआ है।

प्रथम अंतरा: सूर्य देव से प्रार्थना

गीत की शुरुआत में व्रती और श्रद्धालु भगवान सूर्य देव से प्रार्थना करते हैं कि हे सूर्य देव! अब उदित होइए, क्योंकि अर्घ्य देने का पावन समय (बेरवा) हो चुका है। सभी भक्त और व्रती नदी के पवित्र घाट पर पानी में खड़े होकर आपके दर्शन और आपको अर्घ्य देने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यह पंक्ति भक्त की उस व्याकुलता को दर्शाती है जो रात भर जागने और कठिन उपवास रखने के बाद सुबह की पहली किरण को देखने के लिए होती है।

द्वितीय अंतरा: बहंगी और बटोहिया का प्रसंग

गीत का यह भाग अत्यंत प्रतीकात्मक और लोक संस्कृति का जीवंत उदाहरण है। इसमें "कांच ही बांस की बहंगिया" का वर्णन है, जो कि छठ पूजा की पवित्रता का प्रतीक है। बांस की टोकरी और बहंगी को अत्यंत शुद्ध माना जाता है। जब कोई भक्त इस बहंगी को लेकर घाट की ओर जाता है, तो रास्ते में एक राही (बटोहिया) पूछता है कि यह बहंगी किसके लिए जा रही है? इस पर भक्त उत्तर देता है कि हे राही! तुम अज्ञानी हो, यह बहंगी हमारी परम पूजनीय छठी मैया के लिए जा रही है। यह संवाद दर्शाता है कि छठ पूजा में उपयोग होने वाली हर वस्तु कितनी पवित्र और समर्पित होती है।

तृतीय अंतरा: प्रकृति और सूर्य का संबंध

"केरा के पात पर उगेलन सुरुज देव" - यह पंक्ति प्रकृति और ईश्वर के अटूट संबंध को दर्शाती है। केले के पत्ते पर सूर्य देव की किरणें पड़ती हैं और वे धीरे-धीरे उदित होते हैं। भक्त अपने हाथों की अंजलि में गंगाजल लेकर खड़े हैं और सूर्य देव से उदित होने की प्रार्थना कर रहे हैं। यह दृश्य हिंदू धर्म में प्रकृति पूजा के सर्वोच्च शिखर को प्रदर्शित करता है।

चतुर्थ अंतरा: पूजा सामग्री और समर्पण

अंतिम पंक्तियों में पूजा की थाली और दउरा (बांस की बड़ी टोकरी) का सुंदर वर्णन है। दउरा नारियल, सेब, केला और अन्य मौसमी फलों से सजा हुआ है। शुद्ध घी और गेहूं के आटे से बना पारंपरिक प्रसाद "ठेकुआ" सूप में भरा हुआ है। भक्त पुकारते हैं कि हे दीनानाथ (गरीबों के रक्षक सूर्य देव)! हमें दर्शन दीजिए और हमारा अर्घ्य स्वीकार कीजिए।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत की मुख्य भावना पूर्ण समर्पण, धैर्य और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता है। छठ पूजा एकमात्र ऐसा पर्व है जहां डूबते हुए सूर्य और उगते हुए सूर्य दोनों की पूजा की जाती है। यह गीत हमें सिखाता है कि जीवन में सुख और दुख दोनों ही अवस्थाओं में ईश्वर के प्रति आस्था बनाए रखनी चाहिए।

गीत का संदेश यह है कि ईश्वर किसी भव्य मंदिर या मूर्ति में ही नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष रूप से हमारे सामने सूर्य देव के रूप में विद्यमान हैं। उनकी आराधना के लिए किसी आडंबर की आवश्यकता नहीं है, बल्कि बांस की बहंगी, मिट्टी के चूल्हे पर बना ठेकुआ और शुद्ध अंतःकरण ही पर्याप्त है।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण बिंदु महत्वपूर्ण जानकारी
गीत का नाम उग हे सुरुज देव (Ug He Suraj Dev)
गायिका मोना सिंह (Mona Singh)
श्रेणी छठ पूजा गीत (Chhath Puja Geet)
भाषा भोजपुरी (Bhojpuri)
मुख्य देवता भगवान सूर्य देव एवं छठी मैया
मुख्य वाद्य यंत्र ढोलक, मंजीरा, बांसुरी, हारमोनियम
सांस्कृतिक संदर्भ बिहार और पूर्वांचल का महापर्व छठ

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

यह गीत मूल रूप से एक पारंपरिक लोकगीत है, जिसे सदियों से बिहार और उत्तर प्रदेश की महिलाएं गाती आ रही हैं। हालांकि, आधुनिक समय में इसे कई प्रसिद्ध कलाकारों ने अपनी आवाज दी है। मोना सिंह ने इस पारंपरिक धुन को बनाए रखते हुए इसमें एक नया माधुर्य और भक्ति भाव पिरोया है। उनकी आवाज में जो सादगी और दर्द है, वह सीधे सुनने वाले के हृदय को छू लेता है। संगीत संयोजन में पारंपरिक वाद्यों का उपयोग किया गया है जो छठ घाट के वास्तविक वातावरण की अनुभूति कराता है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द सरल हिंदी अर्थ सांस्कृतिक संदर्भ
अरघ (Arghya) जल या दूध का अर्पण सूर्य देव को दिया जाने वाला पवित्र अर्घ्य
बेरवा (Berwa) समय या काल पूजा या अर्घ्य देने का शुभ मुहूर्त
बहंगिया (Bahangiya) बांस का बना कांवड़ पूजा सामग्री को कंधे पर उठाकर ले जाने का साधन
बटोहिया (Batohiya) राही या मुसाफिर संसार रूपी मार्ग पर चलने वाला साधारण मनुष्य
दउरा (Daura) बांस की बड़ी टोकरी जिसमें छठ का प्रसाद और फल रखे जाते हैं
दीनानाथ (Deenanath) दीनों के नाथ (सूर्य देव) समस्त जगत को प्रकाश देने वाले दयालु देव

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

छठ महापर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। "उग हे सुरुज देव" गीत इस पर्व के दार्शनिक पक्ष को उजागर करता है।

  • प्रत्यक्ष देव की आराधना: सनातन धर्म में सूर्य देव को "प्रत्यक्ष देव" माना गया है, जिन्हें हम अपनी आंखों से देख सकते हैं। यह गीत उनकी इसी प्रत्यक्ष सत्ता को नमन करता है।
  • समानता का संदेश: छठ पूजा में अमीर हो या गरीब, सभी एक ही घाट पर, एक जैसी मिट्टी और बांस की सामग्रियों से पूजा करते हैं। गीत में "बहंगी" का वर्णन इसी सामाजिक समरसता को दर्शाता है।
  • प्रकृति संरक्षण: इस गीत में बांस, केला, नारियल और गंगाजल का उल्लेख है, जो हमें प्रकृति के करीब लाता है और पर्यावरण के संरक्षण की प्रेरणा देता है।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

इस पावन गीत और छठ व्रत से हमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण जीवन सीख मिलती हैं:

  1. धैर्य और प्रतीक्षा: जैसे व्रती पूरी रात पानी में खड़े होकर सूर्य देव के उदय होने की प्रतीक्षा करते हैं, वैसे ही हमें अपने जीवन के कठिन समय में धैर्य बनाए रखना चाहिए।
  2. शुद्धता और अनुशासन: छठ पूजा में अत्यंत कड़े नियमों और स्वच्छता का पालन किया जाता है। यह हमें अपने दैनिक जीवन में भी मानसिक और शारीरिक शुद्धता बनाए रखने की सीख देता है।
  3. अहंकार का त्याग: राजा हो या रंक, सूर्य देव के सामने सभी हाथ जोड़कर खड़े होते हैं। यह हमें सिखाता है कि ईश्वर के दरबार में सभी समान हैं।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यह गीत विशेष रूप से छठ पूजा के चार दिवसीय अनुष्ठान के दौरान गाया और सुना जाता है। छठ पूजा की शुरुआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को "नहाय-खाय" से होती है, जिसके बाद पंचमी को "खरना", षष्ठी को "संध्या अर्घ्य" और सप्तमी को "उषा अर्घ्य" दिया जाता है।

विशेष रूप से, षष्ठी की शाम और सप्तमी की सुबह जब भक्त नदी के घाटों पर एकत्रित होते हैं, तब लाउडस्पीकरों और घरों में यह गीत गूंजता है। इसके अलावा, जो लोग अपने घरों से दूर विदेशों या अन्य राज्यों में रहते हैं, वे इस गीत को सुनकर अपनी मिट्टी और संस्कृति से जुड़ाव महसूस करते हैं। आप इस पावन अवसर पर छठ पूजा व्रत कथा का पाठ भी कर सकते हैं जो इस पर्व की महत्ता को और बढ़ाता है।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

मुख्य बिंदु संक्षिप्त विवरण
गीत का शीर्षक उग हे सुरुज देव
मुख्य विषय सूर्य देव की स्तुति और अर्घ्य की प्रतीक्षा
प्रयुक्त भाषा भोजपुरी लोकभाषा
मुख्य वाद्य पारंपरिक भोजपुरी संगीत वाद्य
आध्यात्मिक भाव भक्ति, समर्पण, करुणा, विनय
संबंधित पर्व कार्तिक छठ महापर्व

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस गीत का मुख्य संदेश भगवान सूर्य देव के प्रति पूर्ण समर्पण और श्रद्धा है। यह गीत भक्तों की उस व्याकुलता और धैर्य को दर्शाता है जिसके साथ वे सूर्य देव के उदित होने और अर्घ्य स्वीकार करने की प्रतीक्षा करते हैं।

सूर्य देव इस पृथ्वी पर जीवन के मुख्य स्रोत हैं। उन्हें अर्घ्य देकर भक्त उनके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। छठ पूजा में डूबते और उगते दोनों सूर्यों को अर्घ्य दिया जाता है, जो जीवन के चक्र को दर्शाता है। आप इस विषय में अधिक जानकारी के लिए सूर्य देव के मंत्र का संग्रह देख सकते हैं।

"कांच ही बांस" का अर्थ है कच्चा और शुद्ध बांस। छठ पूजा में केवल नए और शुद्ध बांस से बनी टोकरियों (दउरा और सूप) का ही उपयोग किया जाता है। यह पवित्रता और सादगी का प्रतीक है।

मोना सिंह ने इस पारंपरिक गीत को बहुत ही सुमधुर और आधुनिक संगीत के साथ प्रस्तुत किया है, जिससे युवा पीढ़ी भी इस पारंपरिक लोकगीत से आसानी से जुड़ पाती है।

छठ पूजा का मुख्य प्रसाद "ठेकुआ" होता है, जो गेहूं के आटे, गुड़ और घी से बनाया जाता है। इसके अलावा चावल के लड्डू (कसार), फल, नारियल और गन्ना भी प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है।

यह गीत मुख्य रूप से सुबह के अर्घ्य (उषा अर्घ्य) के समय गाया जाता है जब भक्त सूर्योदय की प्रतीक्षा कर रहे होते हैं। हालांकि, इसकी लोकप्रियता के कारण इसे पूरे चार दिनों के दौरान कभी भी सुना जा सकता है।

"दीनानाथ" भगवान सूर्य देव का ही एक नाम है, जिसका अर्थ है दीनों (गरीबों और असहायों) के स्वामी या रक्षक। वे बिना किसी भेदभाव के पूरी सृष्टि को अपना प्रकाश और जीवन प्रदान करते हैं।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, कार्तिक मास में सूर्य की किरणें पृथ्वी पर विशेष कोण से पड़ती हैं। इस समय नदी के पानी में खड़े होकर सूर्य की किरणों को ग्रहण करने से शरीर को भरपूर विटामिन डी मिलता है और त्वचा संबंधी रोग दूर होते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री पर आधारित है। इस पावन गीत "उग हे सुरुज देव" के विश्लेषण में लोक परंपराओं, पौराणिक मान्यताओं और प्रामाणिक स्रोतों का समन्वय किया गया है। छठ पूजा के गीतों की यह श्रृंखला हमारी सांस्कृतिक धरोहर को संजोए रखने का एक विनम्र प्रयास है। इस गीत के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और लोक कलाओं से परिचित कराना ही हमारा मुख्य उद्देश्य है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भागवत पुराण - सूर्य देव की स्तुति और उपासना प्रसंग।
  • बिहार और पूर्वांचल की पारंपरिक लोक संस्कृति एवं मौखिक इतिहास।
  • भोजपुरी लोकगीत संग्रह और पारंपरिक छठ पूजा पद्धतियां।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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