Punjabi Devi Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

माँ पार्वती तू ही काली (Maa Parvati Tu Hi Kaali) - Devi Bhajan SANGEETA SACHDEVA

माँ पार्वती की महिमा का बखान करती इस भजन से भक्तों को शक्ति, सुरक्षा और संतोष का अनुभव होता है।

प्रस्तावना एवं परिचय

शक्ति की आराधना: माँ पार्वती की महिमा

माँ पार्वती की इस भजन द्वारा साधक को शक्तियों और सुरक्षा का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

माँ पार्वती तू ही काली, तू ही दुर्गा तू ही भवानी। तु ही शक्ति तु ही सती, तू ही जगन जननी। पुत्र गणेश कार्तिकेय, तू कर दे सबकी रक्षा। संसार में तू ही है माता, तू ही सुख की साक्षा। माँ पार्वती तू ही काली। माँ पार्वती तू ही काली। जग में तू ही आश्रय, तू ही भक्तों की ममता। संकट दूर कर दे माई, तू ही है सबकी संजीवनी। कल्याणी माँ तू ही है माया, तेरे दर पर आता हर भक्त, तू करती हो सबकी भक्ति। माँ पार्वती तू ही काली। माँ पार्वती तू ही काली। पार्वती माँ की जिनको भरोसा, देवी से कोई दूर नहीं। सभी भक्तों की हर तृष्णा, तू कर दे पूरी माता। आशीर्वाद से बहे सुख, खुशियों की धारा बहे। माँ पार्वती तू ही काली। माँ पार्वती तू ही काली।
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में माँ पार्वती की सत्ता और महिमा का वर्णन किया गया है। विशेष रूप से, माँ पार्वती को काली, दुर्गा, और भवानी के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो कि भक्ति और सुरक्षा का प्रतीक हैं। 'तु ही शक्ति तु ही सती' यह पंक्ति माँ की अद्वितीय शक्तियों और उनकी सतीत्व का बोध कराती है। भक्त इसकी द्वारा यह अनुभव करते हैं कि माँ पार्वती ही जगत की जननी और माता हैं। 'पुत्र गणेश कार्तिकेय' की चर्चा में ये एक विशेष संकेत देती है कि माँ अपने भक्तों और पुत्रों की सुरक्षा करती हैं। इसके माध्यम से भक्तों को यह विश्वास मिलता है कि माँ उनकी सभी दुविधाओं और संकटों में उनके साथ हैं।

माँ पार्वती का प्रति भाव एक गहरी भावनात्मक कड़ी से जुड़ा हुआ है। भक्त जब 'माँ पार्वती तू ही काली' कहते हैं, तो इसका अर्थ है कि वे माँ की सम्पूर्ण शक्ति और करुणा की ओर देखते हैं। ये शब्द साधकों को मानसिक शांति और भावनात्मक सुकून प्रदान करते हैं। 'संकट दूर कर दे माई' इस पंक्ति में भक्तों की अंतिम इच्छा और आशा प्रकट होती है, जहाँ वे माँ से योद्धा की शक्ति की अपेक्षा करते हैं। यह भजन एक गहन श्रद्धा और भक्ति का भाव उत्पन्न करता है, जो भक्तों को संकट काल में संजीवनी की तरह काम करता है।

इस भजन का केंद्रीय धार्मिक अर्थ माँ पार्वती की भक्ति में निहित है। यह भक्ति मार्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहाँ भक्त अपनी भावनाओं को माँ के चरणों में समर्पित करते हैं। माँ पार्वती शक्ति, ज्ञान, और करुणा का प्रतीक हैं जो भक्तों को जीवन के सभी पहलुओं में मार्गदर्शन करती हैं। 'कल्याणी माँ तू ही है माया' यह दर्शाता है कि माँ पार्वती ही धरती पर सभी सुखों और समृद्धियों का स्रोत हैं। इस प्रकार, भक्त केवल अपनी इच्छाओं को माँ के प्रति समर्पित नहीं करते, बल्कि वे आत्मिक विकास की ओर भी अग्रसर होते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन देवी भागवत, स्कंद पुराण, और अन्य पुराणों से जुड़ा है, जहाँ माँ पार्वती को शक्ति और सृष्टि की रक्षक के रूप में पूजा जाता है। माँ पार्वती का चरित्र न केवल एक पत्नी के रूप में महान है, बल्कि वह शक्ति, ज्ञान, और भक्ति की अवतार भी हैं। ऐतिहासिक संदर्भों में, माँ पार्वती ने अपने भक्तों को दुष्ट शक्तियों से बचाने के लिए कई सन्न्यासियों और ऋषियों की रक्षा की है। इस प्रकार, 'माँ पार्वती तू ही काली' एक स्तोत्र के रूप में, भक्तों को माँ की शरण में आने की प्रेरणा देती है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। माँ पार्वती के इस भजन को गाने से मानसिक शांति और संतुलन प्राप्त होता है। यह भक्ति साधक को नकारात्मक ऊर्जा से दूर रखती है और आत्मविश्वास में वृद्धि करती है। इसके नियमित जाप से आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ती है और भक्त का भक्ति मार्ग पर अग्रसर होना सुनिश्चित होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप सुबह के समय करना सर्वोत्तम होता है, जहाँ भक्त को शांति और एकाग्रता के लिए उपयुक्त वातावरण मिल सके। पूजा के समय एक दीपक जलाना और माँ को फल और फूल का भोग अर्पित करना चाहिए। संकल्प लेते हुए ध्यान मुद्रा में बैठें और पूर्ण समर्पण के साथ भजन गाएं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या माँ पार्वती और माँ काली का कोई संबंध है?

हाँ, माँ पार्वती और माँ काली का संबंध गहरा है। पार्वती देवी ही माँ काली के रूप में पूजी जाती हैं, जो कि शक्ति का प्रदर्शक है। माँ काली, पार्वती का क्रोधित रूप है, जो कि भक्तों की रक्षा करती हैं।

इस भजन को किस समय गाना चाहिए?

इस भजन को सुबह की आरती में या संध्या के समय गाना अत्यन्त लाभकारी है। सुबह के समय यह ऊर्जा प्रदान करता है, जबकि संध्या को यह मन को शांति देता है।

क्या इस भजन की कोई विशेष विधि है?

इस भजन को गाते समय भक्त को ईश्वरीय भाव और भक्ति के साथ ध्यान मुद्रा में बैठना चाहिए। दीप जलाना और माँ को भोग अर्पित करना ज़रूरी है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!