Chhath Puja Geet बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

सुनी हे छठी माई (Hey Chhathi Maai) - Priti Lata Suni Chhath Geet

गायिका प्रीति लता का प्रसिद्ध छठ गीत 'सुनी हे छठी माई' का भावार्थ और महत्व। छठी मैया की भक्ति से सराबोर इस पावन लोकगीत को यहाँ सुनें।

प्रीति लता का पावन छठी गीत परिचय

लोक आस्था और सूर्य उपासना के महापर्व छठ पूजा के अवसर पर गाए जाने वाले गीतों में भोजपुरी लोकगीतों की एक अत्यंत समृद्ध और दिव्य परंपरा रही है। 'सुनी हे छठी माई' (Hey Chhathi Maai) भजन, जिसे लोकप्रिय गायिका प्रीति लता (Priti Lata) ने अपनी मधुर और सस्वर वाणी से सजाया है, छठी मैया के प्रति अनन्य प्रेम, श्रद्धा और करुण पुकार का एक जीवंत प्रतीक है। यह पावन गीत केवल एक संगीत रचना नहीं है, बल्कि यह पूर्वांचल की संस्कृति, लोक माटी की सुगंध और व्रत के दौरान साधक के अंतर्मन में उठने वाले भक्ति भाव का सजीव दस्तावेज है। छठ महापर्व चार दिनों तक चलने वाला एक ऐसा अनुष्ठान है जिसमें न केवल उगते हुए सूर्य बल्कि अष्टगामी सूर्य को भी अर्घ्य देकर प्रकृति के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की जाती है। इस संपूर्ण अनुष्ठान में महिलाएं, पुरुष और बच्चे लोकगीतों के माध्यम से छठी मैया और सूर्य देव का आह्वान करते हैं। प्रीति लता द्वारा गाया गया यह गीत साधकों के हृदय में मैया के प्रति अटूट विश्वास और समर्पण का संचार करता है, जिससे संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो जाता है। इस लेख में हम इस भजन के संपूर्ण बोल, इसके गहरे आध्यात्मिक अर्थ, छठ पूजा के महत्व और लोक संस्कृति से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे ताकि पाठकों को इस महान पर्व और संगीत की दिव्यता का पूर्ण अनुभव प्राप्त हो सके।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

स्थाई (मखड़ा):

सुनी हे छठी माई, अरजिया हमार,
भोरही से जोहत बानी बाट तोहार।
दर्शन दियs ना अउरी भाग्य जगाइs,
सुनी हे छठी माई, अरजिया हमार...

अंतररा 1:

घाट पर सजले बिया सुंदर बिया बहंगी,
दउरवा में सजले बा केरा अउर नरियर रंगी।
नियनवा जोहिला तोहरे दर्शन के प्यासी,
मैया मोहि लेहू मोर मन के बिलासी।
भक्ति भाव से भरल बिया घर-दुआर,
सुनी हे छठी माई, अरजिया हमार...

अंतररा 2:

कार्तिक मास अँजोरिया केरे इहे परबिया,
छठी मैया तहरे भरोसे बानी सब सजनिया।
बाल-बच्चा परिवार के सुख-चैन दिहs,
अंधियारा जीवन में उजियार क दिहs।
तोहरे चरण में बाटे प्राण आ आधार,
सुनी हे छठी माई, अरजिया हमार...

अंतिम चरण (समापन):

सुर्य देव के मनाइब, छठी माई के धियाइब,
अगिला जनम मोके एहिजे बुलाइब।
प्रीति लता गावे भजनवा मन लागाय के,
मइया कृपा करिहा अपना शरण लगाई के।
भक्ति रस डूबल बा संसार असार,
सुनी हे छठी माई, अरजिया हमार...

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

प्रीति लता द्वारा गाए गए इस लोकप्रिय छठ गीत 'सुनी हे छठी माई' का भावार्थ अत्यंत मार्मिक और भक्त के हृदय की सच्ची पुकार को व्यक्त करता है। गीत के मुखड़े में व्रती या साधक छठी मैया से करबद्ध प्रार्थना करता है कि हे माता! मेरी विनती सुनो। मैं सुबह से ही तुम्हारे आगमन और दर्शन की प्रतीक्षा कर रहा/रही हूँ। यह प्रतीक्षा केवल आँखों की नहीं, बल्कि उस आत्मा की छटपटाहट है जो परम सत्ता के सान्निध्य के लिए व्याकुल है।

पहले अंतररा में लोक जीवन के दृश्यों का बहुत ही सुंदर चित्रण किया गया है। नदी या तालाब के घाट पर सजी हुई बहंगी, दउरा (बांस की टोकरी) में रखे केले, नारियल, और अन्य मौसमी फल इस बात के प्रतीक हैं कि प्रकृति ने हमें जो कुछ भी श्रेष्ठ दिया है, उसे हम सबसे पहले अपनी आराध्य को समर्पित करते हैं। व्रती कहता है कि मेरी आँखें आपके दर्शन के लिए प्यासी हैं, मेरे मन की अभिलाषा को पूर्ण करो।

दूसरे और अंतिम अंतररा में कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि का स्मरण कराया गया है, जो इस व्रत का मुख्य समय है। व्रती मैया से अपने संपूर्ण परिवार के सुख, आरोग्य और समृद्धि की कामना करता है। वह प्रार्थना करता है कि हे मैया! मेरे जीवन के अंधकार को दूर कर प्रकाश भर दो। अंत में गायिका प्रीति लता अपना नाम लेते हुए कहती हैं कि मैं मन लगाकर यह भजन गा रही हूँ, हे मैया! मुझे अपनी शरण में स्थान देना और अपनी कृपा दृष्टि हमेशा बनाए रखना।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत का मूल भाव अत्यंत पवित्र और समर्पण से परिपूर्ण है। छठ पूजा केवल एक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, सूर्य और जल के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का महापर्व है। इस गीत के माध्यम से निम्नलिखित संदेश मिलते हैं:

  • अनन्य शरणागति: अपनी सभी चिंताओं और कष्टों को छठी मैया के चरणों में समर्पित कर देना।
  • प्रकृति प्रेम: नदी, सूर्य, जल, और पृथ्वी की उपज (फल-अनाज) के प्रति सम्मान और आभार प्रकट करना।
  • परिवार की कल्याण कामना: केवल अपने लिए नहीं बल्कि संपूर्ण परिवार और समाज के आरोग्य एवं सुख-समृद्धि की प्रार्थना करना।
  • सात्विक संयम: कठिन व्रतों और नियमों का पालन करते हुए मन की शुद्धि बनाए रखना।

गीत की जानकारी | Song Information

गीत का नाम सुनी हे छठी माई (Hey Chhathi Maai)
गायिका प्रीति लता (Priti Lata)
संगीत शैली भोजपुरी लोक गीत / छठ भजन
भाषा भोजपुरी / हिंदी
मुख्य विषय छठी मैया की वंदना और सूर्य उपासना
संबंधित पर्व छठ पूजा (Chhath Puja)
प्लेटफॉर्म भक्तिलोक (BhaktiLok)

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

लोक कला और लोक संगीत हमारी सांस्कृतिक धरोहर के मजबूत स्तंभ हैं। प्रीति लता जैसी गायिकाएं ग्रामीण और पारंपरिक धुनों को आधुनिक मंचों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। छठ गीतों की विशेषता यह होती है कि इनमें किसी बनावटीपन के बजाय ठेठ लोक की मिठास और हृदय की सच्ची गहराई होती है। इस भजन को जिस सादगी और शालीनता के साथ गाया गया है, वह श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देता है और उन्हें सीधे अपनी जड़ों से जोड़ देता है। लोक संगीत के माध्यम से संस्कार और संस्कृति की यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी यात्रा भारतीय सनातन परंपरा की सबसे बड़ी ताकत है। ऐसे प्रेरणादायी गीतों के माध्यम से हम अपनी संस्कृति से जुड़े रहते हैं। अधिक जानने के लिए आप हमारे छठी मैया के अन्य पावन गीत और भोजपुरी भक्ति गानों के संग्रह को देख सकते हैं।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द सरल अर्थ संदर्भ
अरजिया प्रार्थना या विनती मैया से अपनी मनोकामना कहना
भोरही सुबह-सवेरे / भोर में सूर्योदय के समय का इंतजार
बहंगी बांस की बनी काँवर जिसमें पूजा का सामान रखा जाता है घाट पर पूजा सामग्री ले जाने का साधन
दउरवा बांस की छोटी टोकरी फल और प्रसाद सजाने के लिए
नरियर नारियल छठ पूजा का अनिवार्य प्रसाद
नियनवा नयन या आँखें दर्शन की लालसा

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

छठ महापर्व भारत के विशेषकर बिहार, झारखण्ड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में अत्यंत श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह एकमात्र ऐसा पर्व है जिसमें डूबते और उगते दोनों सूर्यों को अर्घ्य दिया जाता है, जिसका अर्थ है कि जो उदय हुआ है उसका अस्त होना और जो अस्त हुआ है उसका पुनः उदय होना प्रकृति का शाश्वत नियम है। इस आध्यात्मिक दर्शन को लोकगीतों के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाया जाता है। 'सुनी हे छठी माई' जैसे गीत व्रतियों को कठिन उपवास के दौरान मानसिक शक्ति और ऊर्जा प्रदान करते हैं। जब व्रती इन गीतों को घाट पर गाती हैं, तो सामूहिक ऊर्जा से पूरा वातावरण सकारात्मक और दिव्य हो जाता है। यह गीत संस्कृति की उस अटूट डोर को मजबूत करता है जो पीढ़ियों से चली आ रही है। सूर्य उपासना के इस पर्व पर साधक शारीरिक और मानसिक शुद्धता के साथ प्रकृति की आराधना करते हैं।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

यह लोकगीत केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जीवन के कई महत्वपूर्ण मूल्य भी सीखे जा सकते हैं:

  • धैर्य और प्रतीक्षा: गीत में 'भोरही से जोहत बानी बाट' पंक्ति जीवन में कठिन समय के दौरान धैर्य रखने और ईश्वर पर विश्वास बनाए रखने की सीख देती है।
  • कृतज्ञता का भाव: प्रकृति हमें जीवन देती है और छठ पर्व के माध्यम से हम प्रकृति के प्रति अपना आभार व्यक्त करते हैं।
  • सामूहिकता और परिवार प्रेम: पर्व और गीत हमें परिवार और समाज के साथ मिलकर उत्सव मनाने की प्रेरणा देते हैं।
  • समर्पण: अपने अहंकार को त्यागकर ईश्वर के चरणों में खुद को समर्पित कर देना ही सच्ची भक्ति है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

इस प्रकार के पारंपरिक गीत विशेष रूप से निम्नलिखित अवसरों पर सुने और गाए जाते हैं:

  • नहाय-खाय और खरना के दिन: जब व्रत की शुरुआत होती है और घर की सफाई व प्रसाद निर्माण का कार्य होता है।
  • संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य के समय: नदी तट या तालाब के घाट पर जब पूरा परिवार एकत्र होता है।
  • सामूहिक बैठकों और सोहर-संकीर्तन में: लोक पर्व के दौरान महिलाओं द्वारा गाए जाने वाले पारंपरिक अनुष्ठानों में।
  • दैनिक साधना: छठ पूजा के पूरे चार दिनों के दौरान घरों में भक्तिमय माहौल बनाए रखने के लिए।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

गीत का शीर्षक सुनी हे छठी माई (Hey Chhathi Maai)
गायिका प्रीति लता
शैली भोजपुरी लोकगीत / छठ भजन
मुख्य deity छठी मैया एवं सूर्य देव
प्रमुख अवसर छठ पूजा महापर्व
भाषा भोजपुरी
वेबसाइट भक्तिलोक (BhaktiLok.in)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

પ્રશ્ન 1: 'सुनी हे छठी माई' गीत की गायिका कौन हैं?
उत्तर: इस पावन छठ गीत को लोकप्रिय गायिका प्रीति लता (Priti Lata) ने अपनी मधुर आवाज में गाया है।

प्रश्न 2: यह गीत मुख्य रूप से किस अवसर पर गाया जाता है?
उत्तर: यह गीत महान लोक पर्व छठ पूजा के अवसर पर छठी मैया की आराधना में गाया जाता है।

प्रश्न 3: छठ पूजा में सूर्य देव की पूजा का क्या महत्व है?
उत्तर: सूर्य देव प्रत्यक्ष देवता हैं जो हमें जीवन, ऊर्जा, आरोग्य और प्रकाश प्रदान करते हैं। उनकी कृपा से समस्त संसार पोषित होता है।

प्रश्न 4: इस गीत का मुख्य केंद्रीय भाव क्या है?
उत्तर: इस गीत का मुख्य भाव छठी मैया के प्रति अनन्य प्रेम, दर्शन की लालसा और परिवार के लिए सुख-समृद्धि की कामना करना है।

प्रश्न 5: क्या यह गीत भोजपुरी भाषा में है?
उत्तर: हाँ, यह गीत ठेठ भोजपुरी लोक भाषा और संस्कृति में रचा गया है जो पूर्वांचल की मिट्टी की खुशबू बिखेरता है।

प्रश्न 6: छठ पूजा कितने दिनों तक मनाई जाती है?
उत्तर: छठ पूजा का यह महापर्व कुल चार दिनों तक चलता है जिसमें नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य शामिल हैं।

प्रश्न 7: छठ पर्व पर कौन-से मुख्य पकवान बनाए जाते हैं?
उत्तर: इस पर्व पर ठेकुआ, खजूर, चावल के लड्डू और विभिन्न मौसमी फल प्रसाद के रूप में तैयार किए जाते हैं।

प्रश्न 8: भक्तिलोक वेबसाइट पर ऐसे अन्य कौन-से भजन उपलब्ध हैं?
उत्तर: भक्तिलोक पर आपको विभिन्न देवी-देवताओं के भजन, चालीसा, व्रत कथाएँ और लोक पर्वों से जुड़े गीत मिल जाएंगे।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस लेख को भक्तिलोक की संपादकीय टीम द्वारा पारंपरिक लोक संस्कृति, प्रामाणिक स्रोतों और श्रोताओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए पूरी निष्ठा और शुद्धता के साथ संकलित किया गया है। हमारा उद्देश्य पाठकों तक भारतीय संस्कृति के मूल स्वरूप और उसकी आत्मीयता को पहुँचाना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक भोजपुरी लोकगीत और मौखिक परंपराएं
  • पूर्वांचल की लोक संस्कृति एवं छठ पूजा अनुष्ठान ग्रंथ
  • भक्तिलोक लोक संगीत आर्काइव एवं सांस्कृतिक अध्ययन

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!