Durga Bhajan Lyrics बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

तू लगाले रे जयकारा (Tu Lagale Re Jaykara) - Riza Khan Bali Thakare Ajaz Khan Durga Bhajan

इस भजन से माँ दुर्गा की महिमा को गाएं और उनकी कृपा से जीवन में सुख और समृद्धि प्राप्त करें।

प्रस्तावना एवं परिचय

माँ दुर्गा की महिमा: जयकारा का उद्घोष

इस भजन के माध्यम से माँ दुर्गा की कृपा और सुरक्षा का आह्वान करें।

तू लगाले रे जयकारा तू लगाले रे जयकारा तू लगाले रे जयकारा माँ दुर्गा माँ दुर्गा जय जय दुर्गा पाताल लोक ते तेरो नाँव होवे तू लगाले रे जयकारा तू लगाले रे जयकारा तू लगाले रे जयकारा माँ दुर्गा माँ दुर्गा जय जय दुर्गा सुर नर मुनि जन सभी तेरा गुन गावे तू लगाले रे जयकारा तू लगाले रे जयकारा तू लगाले रे जयकारा माँ दुर्गा माँ दुर्गा जय जय दुर्गा खुशियों की फुलवारी तेरे दर पे सजती तू लगाले रे जयकारा तू लगाले रे जयकारा तू लगाले रे जयकारा माँ दुर्गा माँ दुर्गा जय जय दुर्गा वाइसराय की चाईनीज़ भोग तेरे दर पे आये तू लगाले रे जयकारा तू लगाले रे जयकारा तू लगाले रे जयकारा माँ दुर्गा माँ दुर्गा जय जय दुर्गा पाताल लोक ते तेरो नाँव होवे तू लगाले रे जयकारा तू लगाले रे जयकारा तू लगाले रे जयकारा माँ दुर्गा माँ दुर्गा जय जय दुर्गा सुर नर मुनि जन सभी तेरा गुन गावे तू लगाले रे जयकारा तू लगाले रे जयकारा तू लगाले रे जयकारा माँ दुर्गा माँ दुर्गा जय जय दुर्गा
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन की पहली पंक्ति 'तू लगाले रे जयकारा' माँ दुर्गा के प्रति समर्पण और आस्था का प्रतीक है। भजन में माँ दुर्गा की महानता की चर्चा की गई है, जो सभी जीवों के बीच एक अद्वितीय स्थान रखती हैं। माँ दुर्गा को शक्ति और उल्लास का प्रतीक माना जाता है, और इस भजन में उनके प्रति भावनाएँ व्यक्त की गई हैं। 'माँ दुर्गा जय जय दुर्गा' का जाप उनके प्रति निस्वार्थ प्रेम और उनके गुनगान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। भक्त उनकी महत्ता को समझते हैं और उनकी कृपा के लिए उन्हें अपनी बीन बजाते हुए, उनकी स्तुति में लीन रहते हैं। भजन में माँ दुर्गा की शक्ति को पाताल लोक से ओढ़ने की बात की गई है, जो दर्शाता है कि माँ दुर्गा सृष्टि की हर बूँद में बैठी हुई हैं।

भावार्थ के अनुसार, भजन में सुर, नर और मुनि सभी मिलकर माँ दुर्गा की स्तुति कर रहे हैं। यह दर्शाने की कोशिश की गई है कि माँ दुर्गा की महिमा भूत, मनुष्य और देवताओं के लिए समान है। 'खुशियों की फुलवारी तेरे दर पे सजती' पंक्ति उनकी कृपा से जीवन में सुख और समृद्धि की प्राप्ति का संकेत देती है। भक्त माँ दुर्गा को हर संकट के समय अपनी सहायता के लिए साक्षात् श्री का रूप मानते हैं। भजन का संपूर्ण उद्देश्य योगदान और विश्वसनीयता को सरलता से विस्तृत करना है, ताकि हर भक्त अपनी श्रद्धा से माँ दुर्गा से जुड़ सके। उनकी स्तुति के ये शब्द हृदय में गहराई से उतरते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।

यह भजन 'भक्ति मार्ग' की एक स्पष्ट परिभाषा प्रस्तुत करता है। यहाँ 'तू लगाले रे जयकारा' का अर्थ है कि माता की कृपा के लिए नित्य प्रार्थना कर जिएं। माँ दुर्गा की उपासना की अद्वितीयता, उनकी निस्वार्थता और संघर्षों में सहायक होने की विशेषता को उजागर करती है। भक्त न केवल उनकी पूजा करते हैं, बल्कि उनके प्रति सच्चे मन से प्रेम और विश्वास रखते हैं। इस भक्ति मार्ग पर चलकर भक्त आत्मज्ञान और जीवन का उद्देश्यों की ऊँचाइयों को प्राप्त करते हैं। यहाँ अद्वितीयता, संघर्ष और भक्ति सभी भजन के आधार हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का आध्यात्मिक महत्व भारतीय पौराणिक कथाओं में गहराई से जुड़ा हुआ है। माँ दुर्गा की पूजा का उल्लेख देवी भागवत, मार्कंडेय पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। माँ दुर्गा का स्वरूप शक्ति का प्रतीक है, जो संसार के सभी विपत्तियों का सामना करती हैं। भक्ति और समर्पण से भरे इस भजन में माँ दुर्गा की महिमा तथा उनके शक्तिशाली स्वरूप की चर्चा की गई है। ये भजन भारतीय समाज में केवल कुछ पंक्तियों का संकलन नहीं है, बल्कि यह माँ दुर्गा की महानता और भक्तों के बीच एक संबंध की गहराई को दर्शाता है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। इस भजन का नियमित जाप मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी है। यह भक्त को मानसिक शांति, तनाव से मुक्ति, और जीवन में सकारात्मकता लाने में मदद करता है। माँ दुर्गा की कृपा से परिवार में सुख-समृद्धि और सौभाग्य की वृद्धि होती है। इस भजन का अनुभव करने से भक्त के मन में विश्वास और आस्था की भावना प्रबल होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन का जाप सुबह के समय सबसे श्रेष्ठ होता है, विशेषकर सूर्योदय के समय। भक्त को पूजा स्थल को साफ-सुथरा रखना चाहिए और माँ दुर्गा के चित्र के सामने एक दीपक जलाना चाहिए। अपने मन को केंद्रित करने के लिए भक्त को सुखद आसन में बैठकर एकाग्रता से भजन का पाठ करना चाहिए। पूरी श्रद्धा और प्रेम के साथ भजन का जाप करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस भजन का मुख्य उद्देश्य माँ दुर्गा की महिमा का गुणगान करना और भक्तों को उनकी कृपा का अनुभव कराना है।

किस प्रकार की आस्था इस भजन में दर्शाई गई है?

भजन में निस्वार्थ प्रेम और समर्पण के साथ माँ दुर्गा के प्रति आस्था व्यक्त की गई है, जो कठिनाइयों में समर्थ बनाती है।

क्या यह भजन किसी विशेष समय पर गाना चाहिए?

हाँ, यह भजन सुबह के समय गाना बहुत शुभ माना जाता है, जिससे दिनभर की सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 07 Oct 2026

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