Punjabi Devi Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

स्वागत भवानी के (Swagat Bhavani Ke) - Devi pachra Pawan Singh Devi Geet

पॉवर सिंह का लोकप्रिय देवी गीत स्वागत भवानी के पचरा लिरिक्स, अर्थ और महिमा पढ़ें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित प्रस्तुत है यह पावन भक्ति रचना।

आदिशक्ति माता दुर्गा के चरणों में समर्पित लोकगायकी के सिरमौर पावर सिंह (Pawan Singh) का यह पावन देवी गीत "स्वागत भवानी के" (Swagat Bhavani Ke - Devi Pachra Pawan Singh Devi Geet) सनातन भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय रचना है। यह भजन केवल एक संगीतिक प्रस्तुति नहीं, बल्कि जगत जननी माँ दुर्गा के आगमन, स्वागत और उनके अलौकिक तेज का साक्षात आह्वान है। पचरा (Pachra) गायन शैली बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड की लोक संस्कृति का वह स्वर्णिम हिस्सा है, जिसमें माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों—महालक्ष्मी, महासरस्वती और महाकाली—की महिमा का बखान अत्यंत मार्मिक और ऊर्जावान ढंग से किया जाता है। जब चैत्र या शारदीय नवरात्रि के पवित्र दिनों में यह देवी गीत गूंज उठता है, तो पूरा वातावरण भक्तिमय, ऊर्जावान और दिव्यता से भर जाता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस लोकप्रिय भजन के संपूर्ण बोल, इसके आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अर्थ, गायन की परंपरा और माँ भवानी की महिमा का गहन अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

ओ... शेरावाली मैया के दरबार में, भक्तों का लगा है मेला भारी। चलो सब मिलकर आज सजाएँ, स्वागत भवानी के थाली थारी॥ आदि भवानी, जगत कल्याणी, आई घर-घर माँ बनके महारानी। फूलन से सजवा दो सारा नगरिया, झूम-झूम गावे भवानी की डगरिया॥ ऊंचे पहाड़ों से मैया जब आवे, भक्तन के मन को बहुत भलुभावे। हाथ में खप्पर, त्रिशूल विराजे, सिंह सवारी पे मैया जब साजे॥ पावन पचरा गावे भक्त सारा, मिट जाए जीवन का संकट सारा। पॉवर सिंह कहे मैया दरश दिखा दो, चरणों की धूलि से भाग्य जगा दो॥ जय माता दी! बोल सांचे दरबार की जय!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

पॉवर सिंह द्वारा स्वरबद्ध और अनुराग मधेशिया द्वारा रचित यह देवी गीत "स्वागत भवानी के" माता के प्रति अगाध प्रेम और शरणागति का अद्भुत संगम है। भजन के प्रारंभ में ही कवि लोकजीवन के उस प्रसंग को जीवंत करता है जहाँ माँ के स्वागत के लिए पूरा गाँव और संसार पलक पावड़े बिछाकर तैयार रहता है। 'शेरावाली मैया के दरबार में भक्तों का मेला' इस बात का प्रतीक है कि शक्ति की उपासना में जाति, पंथ और वर्ग के बंधन टूट जाते हैं और सभी एक भाव से माँ के चरणों में उपस्थित होते हैं।

भजन के दूसरे चरण में आदिशक्ति और जगत कल्याणी के रूप में माँ का आह्वान किया गया है। फूल-नियोजन और सजावट का भाव यह दर्शाता है कि जब भक्त के हृदय में शुद्ध प्रेम और पवित्रता होती है, तो उसका अंतःकरण ही माता के स्वागत का मुख्य मंदिर बन जाता है। पहाड़ों से मैया का आगमन इस बात का द्योतक है कि परम शक्ति का निवास एकांत, पवित्र और उच्च शिखर पर है, जहाँ पहुँचने के लिए साधक को उच्च साधना और तपस्या की आवश्यकता होती है। अंत में, गायक अपने दीनभाव को प्रकट करते हुए माँ से चरण-स्पर्श और जीवन के संकटों के नाश की प्रार्थना करता है, जो हर सच्चे भक्त की मूल पुकार है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह गीत भोजपुरी लोक संस्कृति और सनातन देवी आराधना का एक उत्कृष्ट नमूना है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • लोक पचरा शैली का संवर्धन: पचरा गीत उत्तर भारत की लोक परंपरा में विशेष स्थान रखते हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य देवी को प्रसन्न करना और घर-परिवार की रक्षा का आशीर्वाद पाना है।
  • ऊर्जावान स्वर: पावर सिंह की ओजस्वी और शक्तिशाली आवाज भक्तों के भीतर सकारात्मक ऊर्जा और उत्साह का संचार करती है।
  • भक्ति और उत्सव का समन्वय: नवरात्रि के दिनों में यह गीत घरों और पंडालों में उत्सव का माहौल पैदा कर देता है।
  • समर्पण का भाव: गीत में भौतिक सुखों की मांग न करके माँ के दर्शन और कृपा की भीख माँगी गई है, जो उच्च कोटि की भक्ति का लक्षण है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस प्रकार के देवी गीतों का गायन और श्रवण विशेष अवसरों पर अत्यधिक फलदायी माना जाता है:

  • नवरात्रि के नौ दिन: चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान सुबह और शाम की आरती या पूजन के समय इसे अवश्य सुनना चाहिए।
  • माता की चौकी या जागरण: किसी भी मांगलिक उत्सव, गृह प्रवेश या देवी जागरण के प्रारंभिक चरणों में माँ के स्वागत हेतु यह गीत सर्वोत्कृष्ट है।
  • दैनिक पूजा: प्रातःकाल स्नान-ध्यान के पश्चात दीप प्रज्वलित करके यदि इस भजन का स्मरण किया जाए, तो मन दिनभर शांत और ऊर्जावान रहता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन की आराध्य देवी माँ दुर्गा (आदिशक्ति, भवानी) हैं, जिन्हें हिंदू धर्म में ब्रह्मांड की मूल ऊर्जा, सृजन, पालन और संहार की शक्ति माना गया है। गीत के रचनाकार अनुराग मधेशिया हैं और इसे स्वर दिया है भोजपुरी संगीत जगत के लोकप्रिय गायक पॉवर सिंह (Pawan Singh) ने। ब्रदर्स म्यूजिक स्टूडियो (Brothers Music Studio) द्वारा इसका संगीत संयोजन किया गया है, जो लोक संगीत को आधुनिक वाद्य यंत्रों के साथ सहेजने का सराहनीय कार्य करता है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

"स्वागत भवानी के" एल्बम के अंतर्गत आने वाला यह गीत लोक संगीत और आधुनिक भक्ति संगीत का सुंदर मिश्रण है। पारंपरिक पचरा गीतों की शैली को जीवंत रखते हुए इसे आज की पीढ़ी के अनुकूल बनाया गया है। लोक गीतों की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है, जहाँ माता के आगमन को किसी पुत्री या अतिथि के आगमन की भांति अत्यंत उल्लास के साथ मनाया जाता है। यही कारण है कि यह गीत श्रोताओं के दिल को सीधे छूता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस गीत की भाषा सरल, सहज और ठेठ लोकभाषा (भोजपुरी-हिंदी मिश्रित) है। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है जैसे 'फूलन से सजवा दो सारा नगरिया'। पचरा शैली की अपनी एक लय होती है जो बिना किसी कठिन शास्त्रीय व्याकरण के सीधे हृदय में उतर जाती है। इसमें माता के स्वरूप का चित्रण अत्यंत सजीव और दृश्यमान है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी भी बड़ी बाधाएँ या संकट क्यों न हों, यदि माँ भवानी पर अटूट विश्वास है, तो हर समस्या का समाधान संभव है। यह हमें यह भी सिखाता है कि ईश्वर का स्वागत किसी बाहरी आडंबर से नहीं, बल्कि स्वच्छ मन, प्रेम और सेवा-भाव से होना चाहिए। शरणागति का यह मार्ग मनुष्य के अहंकार को समाप्त कर उसे विनम्र बनाता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पद सरल अर्थ संदर्भ / प्रसंग
भवानी माता दुर्गा, पार्वती सृष्टि की आदि शक्ति और पालनकर्ता
पचरा देवी गीत की एक विशेष लोक शैली उत्तर भारत में नवरात्रि के समय गाए जाने वाले पारंपरिक गीत
खप्पर माता का अस्त्र / पात्र दुष्टों के संहार का प्रतीक
डगरिया छोटा रास्ता / मार्ग माता के आगमन का मार्ग

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"ओ... शेरावाली मैया के दरबार में, भक्तों का लगा है मेला भारी..."
यहाँ कवि बताता है कि सिंह पर सवार माँ दुर्गा के दरबार में भक्तों की अपार भीड़ है। यह भीड़ इस बात का प्रमाण है कि हर मनुष्य अपने दुखों से मुक्ति पाने के लिए उसी परम शक्ति की शरण में जाता है।

"आदि भवानी, जगत कल्याणी, आई घर-घर माँ बनके महारानी..."
माता को इस सृष्टि की शुरुआत (आदि) और पूरे संसार का कल्याण करने वाली (जगत कल्याणी) बताया गया है। नवरात्रि के दिनों में हर घर में माता का आगमन महारानी के रूप में होता है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के पाठ या श्रवण के साथ निम्नलिखित पौराणिक मंत्र का स्मरण करना अत्यधिक फलदायी माना जाता है:

ॐ सर्वमंगल मांग्लये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥

यह मंत्र माता दुर्गा के सभी स्वरूपों की वंदना करता है और साधक के जीवन में मंगलमयता और सिद्धि प्रदान करता है। इसी प्रकार आप हमारे अन्य पावन पृष्ठों पर श्री हनुमान चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं जो बल और बुद्धि का प्रतीक है, या फिर महादेव की स्तुति हेतु शिव तांडव स्तोत्र का रसास्वादन कर सकते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

श्रेणी विवरण
भजन का नाम स्वागत भवानी के (Swagat Bhavani Ke)
गायक (Singer) पॉवर सिंह (Pawan Singh)
गीतकार (Lyrics) अनुराग मधेशिया
संगीत (Music) ब्रदर्स म्यूजिक स्टूडियो
संगीत लेबल Brothers Music Studio
आराध्य देवी माँ दुर्गा (आदिशक्ति भवानी)
विधा / शैली देवी पचरा / लोक देवी गीत
मुख्य भाव स्वागत, भक्ति, उत्साह और शरणागति
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, देवी जागरण, माता की चौकी

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस प्रसिद्ध देवी गीत के गायक भोजपुरी संगीत जगत के लोकप्रिय कलाकार पॉवर सिंह (Pawan Singh) हैं।

इस भजन के शब्द अनुराग मधेशिया द्वारा रचे गए हैं।

पचरा उत्तर भारत (विशेषकर बिहार, यूपी और झारखंड) की लोक परंपरा के वे गीत हैं जो नवरात्रि या देवी पूजन के अवसर पर माता की महिमा और उनके स्वागत में गाए जाते हैं।

यह गीत चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दिनों में, सुबह-शाम की पूजा के समय या माता के जागरण और चौकी में सुनने के लिए अत्यंत उत्तम है।

यह भजन सिखाता है कि हमें अपने जीवन में आदिशक्ति माँ दुर्गा का स्वागत खुले मन और पूर्ण समर्पण के साथ करना चाहिए, जिससे हमारे सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

हाँ, इसे 'ब्रदर्स म्यूजिक स्टूडियो' द्वारा आधुनिक वाद्य यंत्रों के साथ लोक धुन का सुंदर मिश्रण देते हुए तैयार किया गया है।

इस गीत में माता के शेरावाली, जगत कल्याणी और सिंह पर सवार महामाया स्वरूप का स्मरण किया गया है।

निश्चित रूप से, माँ की भक्ति के लिए कोई विशेष दिन या काल सीमा नहीं होती। आप मंगलवार, शुक्रवार या किसी भी दिन इस भजन का आनंद ले सकते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

भक्तिलोक (Bhaktilok) टीम द्वारा प्रस्तुत यह मार्गदर्शिका सनातन लोक संस्कृति, देवी पचरा परंपरा और आधुनिक भक्ति संगीत के समन्वय को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। इस आलेख में प्रस्तुत सभी तथ्य, बोल और साहित्यिक व्याख्याएँ पारंपरिक स्रोतों और लोक कला के संरक्षण के उद्देश्य से संकलित हैं। यह सामग्री संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत प्रमाणित और विश्लेषित है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक भोजपुरी पचरा एवं देवी गीत लोक परंपरा
  • Brothers Music Studio - आधिकारिक ऑडियो रिलीज़ संदर्भ
  • श्रीमद्देवीभागवत पुराण (आदिशक्ति महात्म्य प्रसंग)
  • सनातन धर्म एवं नवरात्रि पूजा पद्धति ग्रंथ

संबंधित भजन एवं लेख

माता रानी और सनातन परंपरा से जुड़े अन्य पावन लेख पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें:

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!