Punjabi Devi Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

शेरावाली ओ माँ (Sherawali O Maa) - Devi Bhajan K.P. SAXENA

के.पी. सक्सेना द्वारा गाया लोकप्रिय देवी भजन 'शेरावाली ओ माँ' सुनें। माँ दुर्गा के इस भावपूर्ण भजन के बोल, अर्थ और महिमा पढ़ें Bhaktilok पर।

आदिशक्ति जगत जननी माँ दुर्गा के चरणों में समर्पित लोकप्रिय भजन "शेरावाली ओ माँ (Sherawali O Maa)" सनातन भक्ति परंपरा और देवी आराधना का एक अत्यंत भावपूर्ण और ऊर्जावान स्वरूप है। प्रसिद्ध गायक के.पी. सक्सेना (K.P. Saxena) की सुरीली एवं ओजस्वी आवाज में गाया गया तथा विक्रांत मधुर द्वारा रचित संगीत से सजा यह देवी गीत माँ के ममतामयी, शक्तिपुंज और दुष्टनाशिनी स्वरूप का सजीव चित्रण करता है। टी-सीरीज (T-Series) के बैनर तले प्रस्तुत यह भजन नवरात्रि, जागरण, माता की चौकी और दैनिक संध्या वंदन के समय विशेष रूप से गाया व सुना जाता है। सनातन संस्कृति में शेर पर सवार आदिशक्ति दुर्गा को संपूर्ण ब्रह्मांड की ऊर्जा, चेतना और अभय का प्रतीक माना गया है। जब कोई साधक या भक्त भावुक हृदय से "शेरावाली ओ माँ" का स्मरण करता है, तो उसके जीवन के समस्त अंधकार, भय और मानसिक संताप स्वतः ही दूर हो जाते हैं। इस भजन का मूल स्वर आत्मसमर्पण, विनय, अनन्य प्रेम और माँ की अहेतुकी कृपा प्राप्ति का है, जो सुनने वाले के अंतःकरण को पवित्रता और ऊर्जा से ओत-प्रोत कर देता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

Mukhda (मुखड़ा):

शेरावाली ओ माँ, जोत वाली ओ माँ,
तेरे चरणों में झुकने आया हूँ मैं।
दुखों की आंधियों से घबराकर ओ माँ,
तेरी छांव में शरण पाने आया हूँ मैं।

Antara 1 (अंतरा १):

दुनिया के ठुकराए हुओं को तूने अपनाया,
हर हारे हुए इंसान को तूने गले लगाया।
कोई ना पराया तेरे दरबार में ओ मैया,
सबकी झोली भरने वाली तू ही है खिवैया।
अपना यह आंचल मुझपर फैला दे ओ माँ,
बिगड़ी हुई तकदीर बना दे ओ माँ।

Antara 2 (अंतरा २):

पर्वतों पर तेरा सुंदर दरबार सजा है,
भक्तों का तांता तेरे द्वारे लगा है।
लाल चुनरिया माँ तेरे मन को भाए,
जो भी दिल से पुकारे तू दौड़ी चली आए।
मेरी भी सुन ले अब पुकार ओ मैया,
भक्ति का दीप मेरे मन में जला दे ओ माँ।

Refrain / Ending (समापन):

जय माता दी कहो, जय शेरावाली की,
मैया सबकी बिगड़ी बनाने वाली की।
शेरावाली ओ माँ, जोत वाली ओ माँ,
तेरी महिमा गाता रहूँ उम्र भर ओ माँ!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन साधक और माँ के बीच के उस अटूट और पावन रिश्ते को परिभाषित करता है, जहाँ भक्त अपने जीवन के दुखों से त्रस्त होकर अपनी जननी के चरणों में शरण लेता है। भजन की प्रथम पंक्तियों में गायक के.पी. सक्सेना ने माँ को 'शेरावाली' और 'जोत वाली' कहकर संबोधित किया है, जो इस बात का प्रतीक है कि देवी दुर्गा केवल अस्त्र-शस्त्र धारिणी रणचंडी ही नहीं, बल्कि अपने भक्तों के लिए प्रेम और ममता की मूरत भी हैं।

मध्यवर्ती पंक्तियों में 'दुनिया के ठुकराए हुओं को तूने अपनाया' के माध्यम से समाज द्वारा उपेक्षित या जीवन में परास्त हो चुके मनुष्यों के लिए माँ के दरबार की開放ता (खुलेपन) को दर्शाया गया है। यह सनातन दर्शन का मूल मंत्र है कि माता के दरबार में जाति, वर्ण, वर्ग या पाप-पुण्य का भेद किए बिना हर सच्चे आर्त भक्त को शरण मिलती है। पर्वत पर विराजमान वैष्णो देवी या अन्य शक्तिपीठों के स्वरूप का स्मरण कराते हुए यह भजन सिखाता है कि श्रद्धा और पुकार सच्ची हो, तो आदिशक्ति अपनी समस्त शक्तियों के साथ भक्त की रक्षा के लिए तत्पर हो जाती हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरलता, मार्मिकता और लयबद्धता है। इसे किसी भी उम्र के व्यक्ति द्वारा आसानी से गाया जा सकता है। देवी उपासना में संगीत का महत्वपूर्ण स्थान रहा है, और यह भजन साधक के मन में एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। नवरात्रि के नौ दिनों में, विशेषकर अष्टमी और नवमी के पावन अवसरों पर, इस भजन का श्रवण और गान घर-घर में आध्यात्मिक वातावरण का सृजन करता है। इससे मानसिक तनाव कम होता है और आंतरिक आत्मबल में वृद्धि होती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को प्रातःकाल स्नान के पश्चात माता के पूजन के समय अथवा संध्याकालीन आरती के दौरान गाया जा सकता है। माता की चौकी, जागरण, कन्या पूजन या किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के आरंभ में इस भजन को गाने से सकारात्मक स्पंदन उत्पन्न होता है। गायन से पूर्व माता की जोत प्रज्वलित करें, पुष्प और अक्षत अर्पित करें तथा पूर्ण भाव के साथ सुर में सुर मिलाकर इसका पाठ करें।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन आदि शक्ति जगदम्बा माँ दुर्गा के महालक्ष्मी, महासरस्वती और महाकाली के समेकित स्वरूप को समर्पित है। इस गीत के रचनाकार एवं गायक श्री के.पी. सक्सेना हैं, जिन्होंने अपनी कला के माध्यम से भक्ति आंदोलन की उस लोक-परंपरा को जीवित रखा है जहाँ संगीत को ईश्वर प्राप्ति का सुगम साधन माना गया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

टी-सीरीज जैसे प्रतिष्ठित संगीत संस्थान द्वारा प्रस्तुत 'शेरावाली ओ माँ' एलबम का यह गीत आधुनिक संगीत रचना और पारंपरिक लोक-भक्ति का सुंदर समन्वय है। संगीतकार विक्रांत मधुर ने इसमें पश्चिमी और भारतीय वाद्ययंत्रों का ऐसा सम्मिश्रण किया है जो सुनने वाले को तुरंत मंत्रमुग्ध कर लेता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा बेहद सरल, सुबोध और आम बोलचाल की हिंदी है, जिसमें ब्रज और खड़ी बोली के सुंदर शब्दों का प्रभाव झलकता है। काव्यात्मक शैली में अनुप्रास और उपमा अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है, जैसे 'दुखों की आंधियों से घबराकर' और 'झोली भरने वाली खिवैया'। यह शैली सीधे हृदय को स्पर्श करती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी भी बड़ी विपत्तियाँ क्यों न आएं, मनुष्य को कभी भी हताश नहीं होना चाहिए। आदिशक्ति माँ दुर्गा करुणा की सागर हैं। जब संसार के सारे दरवाजे बंद हो जाते हैं, तब भीतर का विश्वास और माँ के चरणों की शरण ही एकमात्र संबल बनती है। यह भजन हमें नम्रता, निरंतर प्रयास और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास की प्रेरणा देता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
शेरावाली शेर की सवारी करने वाली प्रकृति और ऊर्जा की नियंत्रक माँ दुर्गा
जोत वाली प्रकाशपुंज या अखंड ज्योति धारण करने वाली ज्ञान और चेतना की प्रदात्री
खिवैया नैया पार लगाने वाला संसार रूपी भवसागर से पार उतारने वाली शक्ति
आंचल माता का वस्त्र / ममता का प्रतीक परम सुरक्षा और वात्सल्य का आवरण

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"शेरावाली ओ माँ, जोत वाली ओ माँ, तेरे चरणों में झुकने आया हूँ मैं।" - इस पंक्ति का भाव है कि साधक अपने अहंकार का त्याग कर माँ के चरणों में अपनी पूर्ण शरणागति स्वीकार करता है। शीश झुकाना इस बात का प्रतीक है कि बुद्धि और बल से परे ईश्वरीय शक्ति ही सर्वोपरि है।

"दुखों की आंधियों से घबराकर ओ माँ, तेरी छांव में शरण पाने आया हूँ मैं।" - जीवन के प्रपंचों और दुखों रूपी झंझावातों से जब मनुष्य थक जाता है, तब वह केवलमात्र मातृत्व की शीतल छाया की तलाश में देवी के द्वार पहुँचता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

माता के इस भजन के साथ निम्नलिखित पावन मंत्र का स्मरण अत्यंत फलदायी माना जाता है:

"या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै నమో नमः॥"

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम शेरावाली ओ माँ (Sherawali O Maa)
समर्पित देवता आदिशक्ति माँ दुर्गा
गायक एवं गीतकार के.पी. सक्सेना (K.P. Saxena)
संगीत निर्देशक विक्रांत मधुर (Vikrant Mathur)
संगीत लेबल टी-सीरीज (T-Series)
भाषा हिंदी
प्रधान भाव भक्ति, शरणागति, वात्सल्य एवं समर्पण
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, माता का जागरण, संध्या वंदन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस लोकप्रिय देवी भजन के गायक और गीतकार दोनों ही श्री के.पी. सक्सेना (K.P. Saxena) हैं।

यह भजन प्रसिद्ध संगीत कंपनी टी-सीरीज (T-Series) के बैनर तले रिलीज किया गया है।

इस भजन का मुख्य संदेश संकट के समय ईश्वर पर अटूट विश्वास रखना और माता के चरणों में पूर्ण शरणागति अर्पित करना है।

नवरात्रि के नौ दिनों, माता की चौकी, जागरण अथवा दैनिक पूजा के समय इस भजन को सुनना अत्यंत आनंददायक और ऊर्जावान होता है।

हाँ, इसे एकांत में या परिवार के साथ पूजा के दौरान पूरी तन्मयता से गाया जा सकता है, जिससे मानसिक शांति मिलती है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार माता दुर्गा का वाहन सिंह (शेर) है, जो शक्ति, साहस और निर्भयता का प्रतीक है, इसलिए उन्हें शेरावाली कहा जाता है।

इस भजन का संगीत निर्देशन विक्रांत मधुर ने किया है।

हाँ, भक्ति संगीत और भजन सुनने से मस्तिष्क शांत होता है, सकारात्मक हॉर्मोन का संचार होता है और तनाव में कमी आती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री सनातन भक्ति साहित्य, लोक संगीत परंपरा और देवी उपासना के शास्त्रीय स्वरूप को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को प्रामाणिक भजन लिरिक्स, उसका सरल भावार्थ और आध्यात्मिक महत्व प्रदान करना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • सनातन देवी भागवत पुराण एवं मार्कण्डेय पुराण (दुर्गा सप्तशती संदर्भ)
  • टी-सीरीज भक्ति सागर संगीत अभिलेखागार
  • पारंपरिक लोकगीत एवं भजन संकलन

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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