Durga Bhajan Lyrics बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

शेर पे शावर चली अंबिका भवानी (Sher Pe Shavar Chali Ambika Bhawani) - Arpita Tanu Mishra Durga Bhajan

इस भजन में देवी दुर्गा की शक्ति और कृपा का बखान है, जो मन में आस्था और भक्ति का संचार करता है।

प्रस्तावना एवं परिचय

अंबिका भवानी का दिव्य संदेश

इस भजन के माध्यम से माता अंबिका की कृपा प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करें।

शेर पे शावर चली अंबिका भवानी सिंह पर बैठी देवी, कर दे सुख की खान। काली काली आँखों में है, सृष्टि की छाया। चमके जब तारा, करे तू हम पराया। बुलाए जब तेरा नाम, पवन दे साथ। सुख का रथ चलाए, तेरा निरंतर हाथ। तू है बिंदास माता, सब दुखों की नाशिनी। शेर पे शावर चली, आंबा भवानी। साधना है सच्ची, शांति का होगा प्रवाह। तेरे चरणों में आते, मिटे सब अविश्वास। कामना जब तुझसे की, ऋद्धि-सिद्धि हो जाएगी। आंबा भवानी, आंबा भवानी। कंस की माया से, तूने हराया विष्णु। अभाव में माता, तूने दी है संतोष। शेर पे शावर चली, अंबिका भवानी। अवतार की साक्षात्, जो है दुर्गा भवानी।
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

भजन 'शेर पे शावर चली अंबिका भवानी' मां दुर्गा के दिव्य स्वरूप का बखान करता है। यहां अंबिका को सिंह पर विराजमान बताया गया है, जिससे उनके शक्ति और साहस का प्रतीक दर्शाया गया है। माता का नाम लेते ही भक्ति भावने मनुष्य के अंधकार में उजाला लाने की क्षमता रखती है। 'काली काली आँखों में है सृष्टि की छाया' से यह संकेत मिलता है कि देवी अपनी दृष्टि से समस्त संसार का पालन करती हैं। यह बिंदास माता हर दुख, अभाव और विपत्ति को दूर करने वाली हैं। यह माता के प्रति भक्त की श्रद्धा और विश्वास का प्रदर्शन है, जो उन्हें हर प्रकार की कठिनाई से मुक्त करने का सामर्थ्य रखती हैं।

इस भजन का भावार्थ भक्तों में आत्मीयता और आस्था का संचार करना है। जब भक्त माता अंबिका का नाम लेते हैं, तो वह मां की सुप्रभा में खुद को स्थापित कर लेते हैं। ''सुख का रथ चलाए, तेरा निरंतर हाथ'' से हमें ज्ञात होता है कि जब भी भक्त मां का आसरा लेते हैं, तब जीवन की कठिनाईयों से निपटने के लिए मां हमेशा उनके साथ रहती हैं। यह भक्त की आत्मा को सुकून देने वाला है और उनके मन में विश्वास जगाता है कि कोई भी दैवीय शक्ति मां के श्री चरणों में सरलता से प्रकट हो सकती है।

इस भजन में भक्ति मार्ग का अनिवार्य तत्व यथा विश्वास, समर्पण और प्रेम निहित है। माता के प्रति पूर्ण भक्ति और समर्पण से भक्त को सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। यहां 'कामना जब तुझसे की, ऋद्धि-सिद्धि हो जाएगी' में यह स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है कि अगर भक्त मां के प्रति अपनी मनोकामना रखते है, तो वे पूर्ण होती हैं। यही भक्ति का मूल आधार है जहां भक्त की श्रद्धा और मां की कृपा का संयोग होता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन देवी दुर्गा की शक्ति और करुणा का प्रतिक है। हिंदू धर्म के अनुसार, देवी दुर्गा के अद्वितीय स्वरूप को वंदना करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। पुराणों में वर्णित है कि माता ने राक्षसों के संहार के लिए महा शक्ति से युद्ध किया था और उन्हें पराजित किया। यह भजन न केवल भक्तों को मां के प्रति आवाहन करता है, बल्कि उनके लालित्य और शक्ति के प्रति भी श्रद्धा प्रकट करता है। भव्यता और महानता में समाहित माता अंबिका का यह स्वरूप केवल रक्षा का नहीं, बल्कि सृष्टि के उन्नति का भी है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। इस भजन का नियमित पाठ करने से मन में शांति, मानसिक दृढ़ता तथा भक्ति का अनुभव होता है। माता अंबिका की कृपा से भक्तों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं, जिससे आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति मिलती है और मानसिक तनाव को दूर करने में यह भजन अत्यंत सहायक होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह के समय सूर्योदय से पहले या शाम को संध्या के समय करना विशेष लाभकारी होता है। इस दौरान एक दीपक प्रज्वलित करें और माता को पुष्प अर्पित करें। एकाग्रता के साथ भव्यता से माता का नाम लें और मानसिक शांति का अनुभव करें। ध्यानमग्न होकर यह भजन गाने से न केवल मन में श्रद्भा बढ़ती है, बल्कि अदृश्य शक्तियों का संचार भी होता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या 'शेर पे शावर चली अंबिका भवानी' भजन का विशेष महत्व है?

जी हां, यह भजन देवी दुर्गा की शक्ति, साहस और करुणा का प्रतिक है। यह भक्तों को आत्मबल और सहयोग प्रदान करता है।

किस समय इस भजन का पाठ करना चाहिए?

यह भजन सुबह के समय या संध्या के समय करना विशेष रूप से सुखदायक रहता है, ताकि मां की कृपा प्राप्त हो।

क्या इस भजन का पाठ नियमित करना चाहिए?

हां, नियमित रूप से इस भजन का पाठ करने से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और मां का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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