Punjabi Devi Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

शैलपुत्री माँ (Shailputi Maa) - Devi Bhajan LOKESH GARG

गायक लोकेश गर्ग द्वारा गाया गया माँ शैलपुत्री का यह पावन भजन सुनें। नवरात्रि के प्रथम दिन माँ शैलपुत्री की आराधना के लिए भजन लिरिक्स और भावार्थ।

शैलपुत्री माँ का यह पावन भजन, जिसे सुप्रसिद्ध गायक लोकेश गर्ग ने अपनी मधुर वाणी में पिरोया है, नवरात्रि के प्रथम दिन की अधिष्ठात्री देवी माँ शैलपुत्री के प्रति अगाध श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है। सनातन धर्म में माँ दुर्गा का प्रथम स्वरूप 'शैलपुत्री' है, जो हिमालय की पुत्री होने के कारण इस नाम से विख्यात हैं। यह भजन न केवल एक संगीतमय प्रस्तुति है, बल्कि साधक के हृदय में भक्ति का संचार करने वाला एक आध्यात्मिक माध्यम भी है। इस भजन के माध्यम से भक्त माँ के उस स्वरूप का स्मरण करते हैं जो स्थिरता, शक्ति और वैराग्य का आधार है। नवरात्रि के पावन अवसर पर इस भजन का श्रवण और गायन मन को एकाग्र करने, नकारात्मकता को दूर करने और माँ की कृपा प्राप्त करने का एक सरल एवं प्रभावी मार्ग है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मुखड़ा:
शैलपुत्री माँ, शैलपुत्री माँ,
पर्वत राज की दुलारी माँ,
भक्तों की हो तुम ही सहारा,
शैलपुत्री माँ, शैलपुत्री माँ।

अंतरा 1:
वृषभ सवारी हाथ त्रिशूल,
चरणों में चढ़ाऊँ मैं श्रद्धा के फूल,
मस्तक पर है चंद्रमा का वास,
करती हो तुम भक्तों की आस,
शैलपुत्री माँ, शैलपुत्री माँ।

अंतरा 2:
नवरात्रि का पहला दिन आया,
भक्तों ने है तुमको मनाया,
दुख हरती हो, संकट टालती हो,
जीवन में खुशहाली डालती हो,
शैलपुत्री माँ, शैलपुत्री माँ।

अंतरा 3:
हिमालय की तुम हो सुता प्यारी,
सृष्टि की तुम ही हो पालनहारी,
लोकेश गर्ग गाए महिमा तुम्हारी,
भव सागर से पार उतारो माँ,
शैलपुत्री माँ, शैलपुत्री माँ।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का भावार्थ माँ शैलपुत्री के प्रति पूर्ण शरणागति है। भक्त यहाँ माँ को 'पर्वत राज की दुलारी' कहकर संबोधित करता है, जो उनके हिमालय पुत्री होने के पौराणिक संदर्भ को दर्शाता है। भजन में माँ के स्वरूप का वर्णन करते हुए वृषभ (बैल) की सवारी और हाथ में त्रिशूल को शक्ति का प्रतीक बताया गया है। मस्तक पर चंद्रमा का वास उनके सौम्य और शीतल स्वरूप को दर्शाता है, जो भक्तों के दुखों को हरने वाला है। लोकेश गर्ग द्वारा स्वरबद्ध यह भजन साधक को यह विश्वास दिलाता है कि नवरात्रि के प्रथम दिन माँ की आराधना करने से जीवन के समस्त संकट दूर होते हैं और साधक को भवसागर से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन नवरात्रि के प्रथम दिन की साधना के लिए अत्यंत उपयुक्त है। शैलपुत्री माँ मूलाधार चक्र की अधिष्ठात्री हैं, और इस भजन का गायन मन को स्थिरता प्रदान करता है। भजन की भाषा सरल और हृदयस्पर्शी है, जो सामान्य भक्त को भी माँ की भक्ति में लीन कर देती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को नवरात्रि के प्रथम दिन (प्रतिपदा) की पूजा के समय गाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसे सुबह की पूजा या संध्या आरती के समय सुना जा सकता है। भजन गाते समय मन में माँ शैलपुत्री के सौम्य स्वरूप का ध्यान करना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द सरल अर्थ संदर्भ
शैलपुत्री पर्वत की पुत्री हिमालय की पुत्री माँ पार्वती
वृषभ बैल माँ का वाहन
सुता पुत्री हिमालय की पुत्री
भव सागर संसार रूपी सागर जन्म-मरण का चक्र

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम शैलपुत्री माँ
गायक लोकेश गर्ग
देवी माँ शैलपुत्री (नवदुर्गा का प्रथम स्वरूप)
भाषा हिंदी
भाव भक्ति एवं समर्पण
उपयुक्त अवसर नवरात्रि प्रथम दिन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  • प्रश्न: माँ शैलपुत्री की पूजा किस दिन की जाती है?
    उत्तर: नवरात्रि के प्रथम दिन माँ शैलपुत्री की पूजा की जाती है।
  • प्रश्न: माँ शैलपुत्री का वाहन क्या है?
    उत्तर: माँ शैलपुत्री का वाहन वृषभ (बैल) है।
  • प्रश्न: शैलपुत्री नाम का अर्थ क्या है?
    उत्तर: शैल का अर्थ पर्वत और पुत्री का अर्थ बेटी है, अतः हिमालय की पुत्री को शैलपुत्री कहा जाता है।
  • प्रश्न: इस भजन को कब सुनना चाहिए?
    उत्तर: नवरात्रि के दौरान या किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत में इसे सुनना अत्यंत फलदायी है।
  • प्रश्न: क्या यह भजन घर पर गाया जा सकता है?
    उत्तर: हाँ, यह भजन अत्यंत सरल है और इसे घर पर पूजा के दौरान गाया जा सकता है।
  • प्रश्न: माँ शैलपुत्री किस चक्र की देवी हैं?
    उत्तर: माँ शैलपुत्री मूलाधार चक्र की अधिष्ठात्री देवी हैं।
  • प्रश्न: लोकेश गर्ग द्वारा गाए इस भजन की विशेषता क्या है?
    उत्तर: यह भजन माँ के प्रति सात्विक प्रेम और समर्पण को बहुत ही मधुरता से व्यक्त करता है।
  • प्रश्न: क्या नवरात्रि में इस भजन का पाठ करने से लाभ होता है?
    उत्तर: जी हाँ, श्रद्धापूर्वक पाठ करने से मन की एकाग्रता बढ़ती है और माँ की कृपा प्राप्त होती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री माँ शैलपुत्री के प्रति भक्तों की श्रद्धा को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। भजन के बोल और भावार्थ पारंपरिक स्रोतों और भक्ति साहित्य पर आधारित हैं। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

देवी भागवत पुराण, दुर्गा सप्तशती, एवं पारंपरिक नवरात्रि पूजन पद्धतियां।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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