सनातन धर्म में आदिशक्ति माँ दुर्गा की आराधना का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। "ओ शेरावालिये ओ ज्योतावालिये" (O Sherawaliye O Jyotawaliye) सुमित्रा राणा जी द्वारा गाया गया एक अत्यंत ही लोकप्रिय और हृदयस्पर्शी माता का भजन है। यह भजन देवी दुर्गा के प्रति अनन्य भक्ति, पूर्ण शरणागति और अगाध विश्वास को दर्शाता है। इस भजन का मुख्य स्वर 'समर्पण' और 'कृतज्ञता' का है, जहाँ एक भक्त अपनी आराध्या माँ जगदम्बा के चरणों में अपना सर्वस्व अर्पित कर देता है। जब भी भक्त संकट में होते हैं या माता के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करना चाहते हैं, तो वे इस पावन संकीर्तन का आश्रय लेते हैं। इस भजन को सुनने मात्र से मन में अपूर्व शांति, सकारात्मक ऊर्जा और भक्ति भाव का संचार होता है। विशेष रूप से नवरात्रि, माता की चौकी और जागरण के शुभ अवसरों पर इस भजन का गायन भक्तों को भाव-विभोर कर देता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
ओ शेरावालिये ओ ज्योतावालिये
ओ शेरावालिये ओ ज्योतावालिये,
तेरे दर पे आया जो खाली न लौटा।
ओ शेरावालिये ओ ज्योतावालिये,
तेरे दर पे आया जो खाली न लौटा।
मैया शेरावालिये, मैया ज्योतावालिये,
तेरे दर पे आया जो खाली न लौटा।
ऊँचे पहाड़ों पे मंदिर है तेरा,
भक्तों के दिल में है तेरा बसेरा।
जो भी पुकारे तुझे सच्चे मन से,
दूर करे मैया उसका अँधेरा।
ओ लाटावालिये ओ मेहरांवालिये,
तेरे दर पे आया जो खाली न लौटा।
लाल चुनरिया मैया तुमको सुहाए,
हाथों में त्रिशूल दुष्टों को डराए।
सिंह की सवारी मैया तेरी निराली,
महिमा तुम्हारी जग गाए गाए।
ओ पहाड़ावालिये ओ गुफावालिये,
तेरे दर पे आया जो खाली न लौटा।
चरणों में तेरे जो शीश झुकाए,
मनवांछित फल वो मैया से पाए।
सुमित्रा के सुर में जो महिमा गाए,
भवसागर से वो पार उतर जाए।
ओ शेरावालिये ओ ज्योतावालिये,
तेरे दर पे आया जो खाली न लौटा।
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन "ओ शेरावालिये ओ ज्योतावालिये" माँ दुर्गा की महिमा का एक अत्यंत सुंदर और सरल चित्रण है। इस भजन का मूल भाव यह है कि जो भी भक्त सच्चे मन से और निष्काम भाव से माता रानी के दरबार में हाजिरी लगाता है, उसकी झोली कभी खाली नहीं रहती। माँ अपने भक्तों पर सदैव अपनी असीम कृपा बरसाती हैं।
भजन के प्रथम भाग में भक्त माँ को "शेरावाली" (सिंह पर सवार होने वाली) और "ज्योतावाली" (अखंड ज्योति के रूप में प्रकाशमान) कहकर पुकारता है। यह इस बात का प्रतीक है कि माँ एक ओर तो दुष्टों का संहार करने वाली अत्यंत शक्तिशाली देवी हैं, तो दूसरी ओर वे अपने भक्तों के जीवन से अज्ञानता का अंधकार मिटाने वाली दिव्य ज्योति भी हैं।
भजन के अंतराओं में माँ के दिव्य स्वरूप, उनके निवास स्थान (ऊँचे पहाड़ों और गुफाओं) तथा उनकी असीम दयालुता का वर्णन किया गया है। भक्त कहता है कि माँ का वास केवल पहाड़ों पर ही नहीं, बल्कि उनके सच्चे भक्तों के हृदय में भी है। जो भी भक्त माँ के चरणों में अपना मस्तक झुकाता है, उसे जीवन के सभी सुख और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
इस भजन की कई ऐसी विशेषताएं हैं जो इसे अन्य भजनों से विशिष्ट और लोकप्रिय बनाती हैं:
- शरणागति का भाव: यह भजन पूरी तरह से माँ के चरणों में समर्पित होने की प्रेरणा देता है। इसमें यह अटूट विश्वास प्रकट किया गया है कि माँ के द्वार से कोई भी याचक निराश होकर नहीं लौटता।
- दिव्य स्वरूपों का वर्णन: भजन में माँ के विभिन्न रूपों जैसे शेरावाली, ज्योतावाली, लाटावाली, पहाड़ावाली और गुफावाली का स्मरण किया गया है, जो माँ दुर्गा के विविध आयामों को दर्शाते हैं।
- सकारात्मक ऊर्जा का संचार: सुमित्रा राणा जी की मधुर और ओजस्वी आवाज में गाया गया यह भजन श्रोताओं के भीतर एक अद्भुत ऊर्जा और मानसिक शांति का संचार करता है।
- सरल और सुबोध भाषा: भजन की भाषा अत्यंत सरल है, जिससे साधारण से साधारण व्यक्ति भी इसके भावों से सीधे जुड़ जाता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
यद्यपि ईश्वर की आराधना के लिए कोई भी समय अनुचित नहीं होता, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष अवसर अत्यंत फलदायी माने गए हैं:
- नवरात्रि महोत्सव: चैत्र और आश्विन मास की नवरात्रि के दौरान इस भजन का श्रवण और गायन विशेष रूप से फलदायी और आनंददायक होता है।
- माता की चौकी और जागरण: पारिवारिक या सामाजिक धार्मिक आयोजनों जैसे माता की चौकी, जागरण या सुंदरकांड पाठ के बाद इस भजन को गाकर भक्त झूम उठते हैं।
- दैनिक संध्या आरती: प्रतिदिन संध्याकाल में माँ दुर्गा की प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक जलाकर इस भजन का पाठ करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
- गायन की विधि: इस भजन को गाते समय मन में पूर्ण श्रद्धा, हाथों से ताली की सेवा और मुख पर माँ का नाम होना चाहिए। सामूहिक रूप से गाने पर इसका प्रभाव और भी अधिक बढ़ जाता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन मुख्य रूप से माँ दुर्गा (आदिशक्ति) को समर्पित है। सनातन परंपरा में माँ दुर्गा को शक्ति, बुद्धि, करुणा और संरक्षण की देवी माना गया है। वे भक्तों की रक्षा के लिए अनेक रूप धारण करती हैं। इस भजन में माँ के उन्हीं ममतामयी और कल्याणकारी रूपों की वंदना की गई है।
इसके साथ ही, इस भजन की प्रस्तुति प्रसिद्ध भजन गायिका सुमित्रा राणा जी द्वारा की गई है, जिन्होंने अपनी मधुर आवाज से इस भजन को घर-घर में लोकप्रिय बना दिया है। उनके सुरों में जो तड़प और समर्पण है, वह सीधे भक्तों के दिलों को छू लेता है।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
इस भजन के निर्माण में कई कलाकारों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है:
- गायिका: सुमित्रा राणा (Sumitra Rana)
- संगीतकार: दिव्यांश अनुराग (Divyansh Anurag)
- गीतकार: राजा गोहर (Raja Goher)
- निर्माता: अमरेश बहादुर और रमित माथुर
- लेबल: यूकी (Yuki)
इस भजन की पृष्ठभूमि पारंपरिक माता के भजनों पर आधारित है, जिसमें आधुनिक वाद्य यंत्रों और पारंपरिक ढोलक-मंजीरों का सुंदर समन्वय किया गया है। गीतकार राजा गोहर ने बहुत ही सुंदर शब्दों में माँ की महिमा को पिरोया है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा मुख्य रूप से खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें पंजाबी और पहाड़ी लोक संस्कृति के शब्दों का अत्यंत सुंदर समावेश किया गया है। "शेरावालिये", "ज्योतावालिये", "लाटावालिये" और "मेहरांवालिये" जैसे शब्द माँ के प्रति आदर और घनिष्ठता को दर्शाते हैं।
काव्य शैली की दृष्टि से यह एक 'गीत' या 'पद' शैली में रचित है, जिसमें लय और ताल का विशेष ध्यान रखा गया है। इसके अंतरे छोटे और प्रभावशाली हैं, जो आसानी से याद हो जाते हैं और सामूहिक गायन के लिए अत्यंत उपयुक्त हैं।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह हमें जीवन के कई महत्वपूर्ण आध्यात्मिक पाठ सिखाता है:
- अटूट विश्वास (Shraddha): जीवन में चाहे कितनी भी विषम परिस्थितियां क्यों न आएं, यदि हमारा विश्वास माँ के प्रति अटूट है, तो वे हमारा हाथ कभी नहीं छोड़तीं।
- अहंकार का त्याग: माँ के दरबार में जाने का अर्थ है अपने अहंकार को उनके चरणों में समर्पित कर देना। जब हम शून्य होकर माँ के पास जाते हैं, तभी वे हमें अपनी कृपा से भर देती हैं।
- समानता का संदेश: माँ के दरबार में अमीर-गरीब, राजा-रंक का कोई भेद नहीं होता। जो भी सच्चे मन से आता है, माँ उसे समान रूप से अपना आशीर्वाद देती हैं।
- सकारात्मकता: "दूर करे मैया उसका अँधेरा" यह पंक्ति हमें सिखाती है कि जीवन के दुखों और कठिनाइयों के अंधकार को केवल ईश्वरीय ज्ञान और भक्ति के प्रकाश से ही दूर किया जा सकता है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ एवं महत्व |
|---|---|---|
| शेरावालिये | सिंह की सवारी करने वाली | माँ दुर्गा का वह रूप जो शक्ति, साहस और निर्भयता का प्रतीक है। |
| ज्योतावालिये | अखंड ज्योति के रूप में विराजमान | ज्ञान की वह दिव्य लौ जो अज्ञानता के अंधकार को नष्ट करती है। |
| लाटावालिये | सुंदर केशों या लटों वाली माँ | माँ का वह ममतामयी और सौम्य रूप जो भक्तों को आकर्षित करता है। |
| मेहरांवालिये | कृपा और दया बरसाने वाली | माँ की वह असीम करुणा जो बिना किसी भेदभाव के सभी पर बरसती है। |
| भवसागर | संसार रूपी समुद्र | जन्म और मृत्यु का चक्र, जिससे मुक्ति केवल भगवद कृपा से ही संभव है। |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
पंक्ति: "ओ शेरावालिये ओ ज्योतावालिये, तेरे दर पे आया जो खाली न लौटा।"
भावार्थ: हे सिंहवाहिनी! हे दिव्य ज्योति स्वरूपिणी माँ! आपके पावन दरबार की यह महिमा है कि जो भी याचक अपनी झोली फैलाकर आपके पास आता है, वह कभी भी खाली हाथ वापस नहीं जाता। आप सबकी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।
पंक्ति: "ऊँचे पहाड़ों पे मंदिर है तेरा, भक्तों के दिल में है तेरा बसेरा।"
भावार्थ: यद्यपि आपका भौतिक मंदिर ऊंचे और दुर्गम पहाड़ों पर स्थित है, परंतु आध्यात्मिक रूप से आप अपने सच्चे भक्तों के हृदय कमल में सदैव निवास करती हैं। आपको पाने के लिए केवल ऊंचे पहाड़ों पर जाने की आवश्यकता नहीं, बल्कि हृदय को शुद्ध करने की आवश्यकता है।
पंक्ति: "जो भी पुकारे तुझे सच्चे मन से, दूर करे मैया उसका अँधेरा।"
भावार्थ: जो भी मनुष्य निष्कपट और निर्मल मन से आपको पुकारता है, आप उसके जीवन के सभी कष्टों, दुखों और अज्ञानता रूपी अंधकार को क्षण भर में दूर कर देती हैं।
पंक्ति: "लाल चुनरिया मैया तुमको सुहाए, हाथों में त्रिशूल दुष्टों को डराए।"
भावार्थ: माँ का श्रृंगार अत्यंत दिव्य है। उन्हें लाल रंग की चुनरी अत्यंत प्रिय है, जो सुहाग और सौभाग्य का प्रतीक है। वहीं उनके हाथों में सुशोभित त्रिशूल दुष्टों और नकारात्मक शक्तियों का दमन करने वाला है।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
माँ दुर्गा की आराधना करते समय इस भजन के साथ निम्नलिखित मंत्रों और श्लोकों का संपुट लगाने से साधना और भी अधिक प्रभावशाली हो जाती है। आप इन मंत्रों का जाप गणेश वंदना मंत्र और माँ सरस्वती वंदना के साथ भी कर सकते हैं:
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥
अर्थ: हे नारायणी! आप सब प्रकार का मंगल प्रदान करने वाली मंगलमयी हैं। आप कल्याणकारिणी, सब पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली, शरणागतवत्सला, तीन नेत्रों वाली गौरी हैं। आपको नमस्कार है।
इसके अतिरिक्त, माँ पार्वती की स्तुति के लिए पार्वती स्तोत्रम का पाठ भी अत्यंत कल्याणकारी माना गया है।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | ओ शेरावालिये ओ ज्योतावालिये (O Sherawaliye O Jyotawaliye) |
|---|---|
| मुख्य देवी/देवता | माँ दुर्गा / माता रानी (आदिशक्ति) |
| गायिका | सुमित्रा राणा (Sumitra Rana) |
| गीतकार | राजा गोहर (Raja Goher) |
| संगीतकार | दिव्यांश अनुराग (Divyansh Anurag) |
| भाषा | हिंदी (पंजाबी और पहाड़ी शब्दों के मिश्रण के साथ) |
| मुख्य भाव | भक्ति, समर्पण, शरणागति |
| उपयुक्त अवसर | नवरात्रि, माता की चौकी, जागरण, दैनिक संध्या आरती |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" श्रेणी के अंतर्गत आता है। भक्तिलोक की संपादकीय टीम ने इस भजन के पाठ, इसके आध्यात्मिक अर्थ, और इसकी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का गहन विश्लेषण करके इसे तैयार किया है। इस भजन का मुख्य उद्देश्य सनातन धर्म के अनुयायियों में भक्ति रस का संचार करना और उन्हें माँ दुर्गा की असीम अनुकंपा से परिचित कराना है।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- श्रीमद्देवीभागवत महापुराण - माँ दुर्गा की महिमा और उनके विभिन्न स्वरूपों का वर्णन।
- पारंपरिक लोक भजन संग्रह और सुमित्रा राणा जी की आधिकारिक डिस्कोग्राफी।
- सनातन धर्म की संकीर्तन परंपरा और भक्ति मार्ग के सिद्धांत।
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