Parvati Stotram

मैं जोगन मैया तेरे नाम दी (Mai Jogan Maiya Tere Naam Di) - Bhagwati Bhawna Jagran Bhajan - Bhaktilok

77 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

"मैं जोगन मैया तेरे नाम दी" एक अत्यंत भावपूर्ण और भक्ति रस से ओत-प्रोत भजन है, जो भगवती के प्रति एक भक्त के अनन्य समर्पण और प्रेम को दर्शाता है। सनातन धर्म की परंपरा में 'जोगन' (योगिनी) का भाव उस जीवात्मा का प्रतीक है, जिसने संसार के समस्त भौतिक बंधनों को त्यागकर स्वयं को पूर्णतः आदि शक्ति माँ दुर्गा के चरणों में समर्पित कर दिया है। यह भजन विशेष रूप से भगवती जागरण, नवरात्रि के पावन पर्वों और देवी के सत्संग में अत्यंत श्रद्धा के साथ गाया जाता है। इसमें भक्त की वह अवस्था वर्णित है, जहाँ उसे अपने आराध्य के नाम के अतिरिक्त संसार में कुछ भी सत्य प्रतीत नहीं होता। यह भजन न केवल मन को शांति प्रदान करता है, बल्कि साधक को आत्म-समर्पण की उस पराकाष्ठा तक ले जाता है जहाँ भक्त और भगवान का भेद मिट जाता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मैं जोगन मैया तेरे नाम दी,
मैं जोगन मैया तेरे नाम दी,
हो गई दीवानी मैं तो श्याम दी,
मैं जोगन मैया तेरे नाम दी...

तेरी ज्योत जगाई मैंने मन के मंदिर में,
तेरी मूरत बसाई मैंने अपने ही अंतर में,
मैं तो हुई गुलाम तेरे काम दी,
मैं जोगन मैया तेरे नाम दी...

दुनिया के बंधन मैंने सारे तोड़ दिए,
तेरे चरणों में आकर मैंने मुख मोड़ लिए,
खुशबू उड़ी है तेरे धाम दी,
मैं जोगन मैया तेरे नाम दी...

तू ही मेरी माता, तू ही मेरी शक्ति है,
तेरे ही सहारे मेरी सारी भक्ति है,
तू ही है पहचान मेरे काम दी,
मैं जोगन मैया तेरे नाम दी...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का भावार्थ अत्यंत गहरा है। 'जोगन' शब्द यहाँ वैराग्य का प्रतीक है। भक्त कहता है कि हे माँ! मैं अब सांसारिक मोह-माया से विरक्त होकर केवल तुम्हारे नाम की जोगन बन गई हूँ। जिस प्रकार एक योगी अपनी साधना में लीन रहता है, उसी प्रकार भक्त का मन माँ के नाम के सिमरन में लीन है। भजन की पंक्तियाँ बताती हैं कि भक्त ने अपने 'मन के मंदिर' में माँ की ज्योति प्रज्वलित कर ली है, जिसका अर्थ है कि अब उसका हृदय शुद्ध और प्रकाशमय हो गया है। सांसारिक बंधनों को तोड़ना वास्तव में अहंकार और अज्ञान का त्याग है। जब भक्त कहता है कि 'खुशबू उड़ी है तेरे धाम की', तो यह उस आनंद की अनुभूति है जो माँ की भक्ति से प्राप्त होती है। यह भजन पूर्ण शरणागति (Surrender) का संदेश देता है, जहाँ भक्त स्वीकार करता है कि उसकी शक्ति, उसकी भक्ति और उसका अस्तित्व केवल माँ की कृपा पर ही आधारित है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • भक्ति भाव: यह भजन 'दास्य भाव' और 'माधुर्य भाव' का मिश्रण है।
  • आध्यात्मिक शुद्धि: नियमित श्रवण से मन की चंचलता कम होती है और एकाग्रता बढ़ती है।
  • जागरण का महत्व: भगवती जागरण में यह भजन माँ की कृपा प्राप्त करने का एक सशक्त माध्यम माना जाता है।
  • आत्म-समर्पण: यह भजन सिखाता है कि कैसे संसार में रहते हुए भी मन को ईश्वर में स्थिर रखा जा सकता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को किसी भी समय गाया जा सकता है, परंतु ब्रह्म मुहूर्त या संध्या काल में इसका प्रभाव अधिक होता है। भगवती की चौकी या जागरण के समय इसे विशेष रूप से गाया जाता है। इसे गाते समय मन में माँ दुर्गा का ध्यान करना चाहिए और संभव हो तो सामने माँ की प्रतिमा या ज्योति प्रज्वलित होनी चाहिए।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाममैं जोगन मैया तेरे नाम दी
आराध्य देवीमाँ दुर्गा / भगवती
गायकभगवती (भावना स्वर्णजलि)
संगीतबिजेंद्र चौहान
विषयभक्ति एवं समर्पण
उपयुक्त अवसरनवरात्रि, जागरण, सत्संग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

'मैं जोगन मैया तेरे नाम दी' भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण और सांसारिक मोह-माया से विरक्ति है।

क्या इस भजन को नवरात्रि में गाना शुभ है?

हाँ, नवरात्रि के दौरान माँ दुर्गा की आराधना में यह भजन गाना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

'जोगन' शब्द का आध्यात्मिक अर्थ क्या है?

आध्यात्मिक अर्थ में 'जोगन' वह साधक है जिसने अपना मन और जीवन ईश्वर की सेवा में समर्पित कर दिया है।

क्या इस भजन को घर पर गाया जा सकता है?

निश्चित रूप से, इसे घर पर पूजा या संध्या आरती के समय भक्ति भाव से गाया जा सकता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री भगवती की भक्ति और लोक परंपराओं के आधार पर तैयार की गई है। भजन के बोल और भावार्थ को भक्ति साहित्य के मानकों के अनुरूप संकलित किया गया है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

संबंधित भजन एवं लेख

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!