आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती के अनंत स्वरूपों और उनकी करुणा का गान करने वाला भोजपुरी देवी भजन "झुलेली झूलनवां हमार मईया" (Jhuleli Jhulanava Hamar Maiya) स्वर कोकिला और लोकप्रिय गायक पवन सिंह की ओजस्वी एवं मधुर आवाज में सजी एक अत्यंत लोकप्रिय रचना है। सनातन भक्ति परंपरा में माता को जगत की जननी, आदि शक्ति और प्रकृति का मूल स्वरूप माना गया है। नवरात्रि के पावन पर्वों, देवी जागरण, और कुंवारी कन्या पूजन के अवसरों पर गाए जाने वाले इस भजन में माँ के ममतामयी, स्नेहिल और साथ ही दुष्टों का संहार करने वाले रौद्र एवं कल्याणकारी दोनों रूपों का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। इस विस्तृत और scholarly लेख में हम इस भजन के सम्पूर्ण बोल, उसके गहरे आध्यात्मिक अर्थ, रचना के पीछे की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि, गायन की परंपरा और जीवन में देवी भक्ति के महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
झुलेली झूलनवां हमार मईया (Jhuleli Jhulanava Hamar Maiya)
निगम अगम जाके भेद न पावै, ताको सुमरिन गावै मईया।
भक्तन के हितकारी जननी, झूला झुले आजु मईया मोरि भवानी॥
(मुखड़ा)
झुलेली झूलनवां हमार मईया, झुलेला झूलनवां…
झुलेला झूलनवां हमार मईया, भवनवा सुहावना लागे शेरावाली के॥
(अंतरा १)
हरिहर दुआरवा पर सोहे चंपा कली,
दर्शन पाके भइल भाग्य मोर बली।
मईया के अंगना में बाजे शहनाई,
झूला झुलावे हुवाँ भक्त समुदाई॥
झुलेली झूलनवां हमार मईया, भवनवा सुहावना लागे शेरावाली के॥
(अंतरा २)
हाथ में त्रिशूल साजे, पाँव में पैजनियाँ,
मईया के रूपवा पर बारेले दुनियाँ।
सिंहासन बैठी भवानी मनभावन,
झूला झूलावे सारा देवलोक साजन॥
झुलेली झूलनवां हमार मईया, भवनवा सुहावना लागे शेरावाली के॥
(अंतरा ३)
भक्तन के संकट मईया पल में हरेली,
झोली खाली जो आवे, झोली भरेली।
पवन सिंह गावे महिमा मईया के चरनन,
भवसागर तर जाई जो लेई मईया के सरनन॥
झुलेली झूलनवां हमार मईया, भवनवा सुहावना लागे शेरावाली के॥
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन केवल एक पारंपरिक देवी गीत नहीं है, बल्कि यह जीव और जगत जननी के बीच के वात्सल्य और अनन्य प्रेम का प्रतीक है। भजन के मुखड़े में माँ के झूला झूलने के सुंदर दृश्य का वर्णन किया गया है। लोक संस्कृति में जब आराध्य को झूले पर विराजमान किया जाता है, तो वह वात्सल्य रस की पराकाष्ठा होती है। भक्त अपनी आराध्य शेरावाली मईया को अपनी श्रद्धा और प्रेम के झूले में झुलाते हैं।
प्रथम अंतरे में माँ के पावन दरबार की भव्यता का वर्णन है, जहाँ चारों ओर हरियाली, सुंदर फूल (चंपा कली) और शहनाई की मंगल ध्वनियाँ गूँज रही हैं। भक्त मानता है कि उसे माँ का दर्शन पाकर अपनी जन्म-जन्मांतर की तपस्या का फल मिल गया है। दूसरे अंतरे में माता के दिव्य स्वरूप का अंकन है—एक हाथ में त्रिशूल जो धर्म की रक्षा और अधर्म के नाश का प्रतीक है, और पाँव में पैजनियाँ (घुंघरू) जो आनंद और उत्सव का प्रतीक हैं। यह दर्शाता है कि देवी एक ही समय में करुणा की सागर और दुष्टों के लिए संहारक हैं।
अंतिम अंतरे में गायक पवन सिंह ने स्पष्ट किया है कि जो भी भक्त सच्चे मन से माता की शरण में आता है, माता उसकी खाली झोली को अपनी असीम कृपा से भर देती हैं। यह भजन साधक को यह सिखाता है कि भौतिक संसार के दुखों और भवसागर से पार पाने का एकमात्र साधन माँ जगदम्बा के चरणों की शरण में जाना है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
भोजपुरी लोक संस्कृति और देवी गीतों की परंपरा में पवन सिंह द्वारा गाए गए इस भजन का एक विशिष्ट स्थान है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- लोक शैली और शास्त्रीय भाव का मिश्रण: इस भजन में लोक धुनों की मिठास के साथ-साथ वेदांत और पुराणों में वर्णित आदिशक्ति के स्वरूप का सामंजस्य है।
- वात्सल्य और समर्पण का भाव: यहाँ माँ को एक रानी या केवल भय उत्पन्न करने वाली शक्ति के रूप में नहीं, बल्कि अपने भक्तों पर स्नेह बरसाने वाली करुणामयी माता के रूप में दर्शाया गया है।
- नवरात्रि और उत्सवों की आन: चैत्र और शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में जब घर-घर में घटस्थापना और जवारे बोए जाते हैं, तब इस प्रकार के भजन वातावरण को पूरी तरह से ऊर्जावान और भक्तिमय बना देते हैं।
- संबंधित पावन अनुष्ठानों के बारे में अधिक जानने के लिए आप दुर्गा सप्तशती पाठ महत्व और नवरात्रि पूजा विधि एवं विधान के लेखों का अध्ययन कर सकते हैं।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
भक्ति संगीत के श्रवण और गायन का सीधा संबंध मन की पवित्रता और एकाग्रता से है। इस भजन को निम्नलिखित अवसरों और विधियों के अनुसार सुना या गाया जा सकता है:
- ब्रह्ममुहूर्त एवं संध्याकाल: प्रातः काल उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर माता के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर इस भजन को सुनने से मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- नवरात्रि के नौ दिन: शक्ति की उपासना के इन विशेष दिनों में सुबह और शाम की आरती के बाद इस भजन का संकीर्तन करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
- सत्संग और देवी जागरण: पारिवारिक आयोजनों, माता के चौकी और जागरण के समय इस लोकगीत-भजन को सामूहिक रूप से गाने पर वातावरण उल्लासमय हो जाता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
इस भजन की केंद्र बिंदु हैं आदिशक्ति जगदम्बा, जिन्हें महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का संयुक्त स्वरूप माना गया है। सनातन धर्म में देवी सूक्त और मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, ब्रह्मांड की उत्पत्ति, स्थिति और लय का संचालन करने वाली मूल शक्ति देवी ही हैं। लोक परंपराओं में इन्हें विभिन्न आंचलिक नामों जैसे मईया, शेरावाली, भवानी और माता रानी के रूप में अत्यंत आत्मीयता से पुकारा जाता है। गायक पवन सिंह ने अपनी सुरीली आवाज के माध्यम से इसी लोक-आस्था को आधुनिक संगीत के साथ जीवंत किया है।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
भोजपुरी संगीत उद्योग में देवी गीतों की एक समृद्ध परंपरा रही है। पारम्परिक सोहर, झूमर और देवी गीतों की तर्ज पर रचे गए इस भजन का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी दोनों ही परिवेश के श्रोताओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है। पारंपरिक लोक धुनों को आधुनिक संगीत संयोजन (Music Arrangement) के साथ पिरोकर इसे व्यापक जनमानस तक पहुँचाया गया है। लोक कलाकरों ने माँ के झूला झूलने के प्रसंग को सावन के गीतों और लोक पर्वों की भावना से जोड़कर अत्यंत मनोहारी रूप दिया है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
यह भजन ठेठ लोक-भाषा (भोजपुरी एवं अवधी मिश्रित हिंदी) में रचित है, जिससे यह आम जनमानस के हृदय को तुरंत स्पर्श कर लेता है। इसमें प्रयुक्त शब्द जैसे 'झूलनवां', 'मईया', 'दुआरवा', और 'पैजनियाँ' ग्रामीण परिवेश की आत्मीयता और ठेठपन को दर्शाते हैं। काव्य शैली की दृष्टि से इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है, जो इसके सौंदर्य को द्विगुणित करते हैं.
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
प्रत्येक उत्कृष्ट भजन मनुष्य को जीवन जीने की एक गहरी सीख देता है। इस भजन से निम्नलिखित आध्यात्मिक संदेश प्राप्त होते हैं:
- अहंकार का त्याग: जैसे भक्त माँ के चरणों में समर्पित होकर झूला झुलाता है, वैसे ही मनुष्य को अपने भीतर के अहंकार का त्याग कर ईश्वर के चरणों में शरण लेनी चाहिए।
- विश्वास और धैर्य: भजन की पंक्तियाँ याद दिलाती हैं कि जो भी व्यक्ति संकट में माता का स्मरण करता है, उसके सभी कष्ट निश्चित रूप से दूर होते हैं।
- आंतरिक शुद्धि: नियमित रूप से देवी भजनों का श्रवण करने से अंतःकरण पवित्र होता है और व्यक्ति सत्कर्म की ओर अग्रसर होता है।
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| झूलनवां | छोटा झूला | देवी के उत्सव और वात्सल्य का प्रतीक |
| निगम अगम | वेद और शास्त्र | जिसका रहस्य वेदों के लिए भी कठिन है |
| पैजनियाँ | पायल / घुंघरू | माँ के नर्तन और आनंदित स्वरूप का प्रतीक |
| भवसागर | संसार रूपी समुद्र | जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति का मार्ग |
| शेरावाली | सिंह पर सवार होने वाली | माता दुर्गा का शक्ति और साहस से युक्त रूप |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"निगम अगम जाके भेद न पावै, ताको सुमरिन गावै मईया..."
अर्थात- जिस परम शक्ति के स्वरूप का भेद वेद और पुराण भी पूरी तरह नहीं पा सकते, उसी महाशक्ति का गुणगान साधक और भक्तगण अपनी सरल भाषा में कर रहे हैं।
"हाथ में त्रिशूल साजे, पाँव में पैजनियाँ, मईया के रूपवा पर बारेले दुनियाँ..."
अर्थात- जिनके एक हाथ में दुष्टों के संहार हेतु त्रिशूल शोभायमान है और चरणों में पैजनियाँ बज रही हैं, उनके इस अलौकिक और सुंदर रूप पर संपूर्ण संसार न्यौछावर है।
"भक्तन के संकट मईया पल में हरेली, झोली खाली जो आवे, झोली भरेली..."
अर्थात- करुणामयी माता अपने भक्तों के सभी संकटों को पल भर में हर लेती हैं और उनके दरबार से कोई भी निराश नहीं लौटता।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
माता दुर्गा के इस भजन के संकीर्तन के साथ निम्नलिखित वैदिक एवं पौराणिक मंत्रों का स्मरण करना अत्यंत फलदायी माना गया है:
ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥
इसके अतिरिक्त माँ के बीज मंत्र "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै" का जाप भी इस भजन के साथ करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक बल की प्राप्ति होती है।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| भजन का नाम | झुलेली झूलनवां हमार मईया (Jhuleli Jhulanava Hamar Maiya) |
| गायक / कलाकार | पवन सिंह (Pawan Singh) |
| संगीत शैली | भोजपुरी देवी भजन / लोक संगीत |
| आराध्य देवी | माता दुर्गा / शेरावाली भवानी |
| प्रमुख भाव | भक्ति, वात्सल्य, समर्पण और उत्सव |
| श्रेणी (Category) | Devi Bhajan / Devi Geet |
| शुभ अवसर | नवरात्रि, देवी जागरण, शुक्रवार पूजा |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख Bhaktilok के विद्वान संपादकीय मंडल द्वारा सनातन संस्कृति, लोक संगीत परंपरा और देवी उपासना के ग्रंथों के अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों को प्रामाणिक जानकारी के साथ-साथ भजन के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व से परिचित कराना है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत सभी तथ्यों को पूरी श्रद्धा और सटीकता के साथ प्रस्तुत किया गया है।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- सनातन देवी उपासना पद्धतियां एवं लोक गीत परंपरा
- भोजपुरी भक्ति संगीत संग्रह एवं सांस्कृतिक ग्रंथ
- श्री मारुतिनंदन एवं देवी पुराण संदर्भ ग्रंथ
- पारंपरिक व्रत और त्योहार संकीर्तन पुस्तिकाएं
संबंधित भजन एवं लेख
यदि आपको यह भजन और इसका भावार्थ पसंद आया, तो आप हमारे अन्य पावन लेखों को भी पढ़ सकते हैं:
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें