सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें:
स्थायी (Mukhda):
हे जगदम्बे, हे भवानी, हे महामाई,
तेरे चरणों में झुकाऊँ मैं तो सीस दूँ दुहाई!
सुख की दाती, दुःख की हर्ता, मैया मेरी,
तेरी महिमा गाए सारा जग ये भाई!
अंतरा 1:
ऊँचे पर्वतों पे तेरा पावन धाम है,
जगत के कण-कण में गूँजे तेरा नाम है!
जो भी आया शरण तेरी, खाली ना गया,
तूने हर एक भक्त का सँवारा काम है!
मैया दया बरसा दो, झोली भर दो मेरी,
तेरे दर पे आया ले के आस मैं बड़ी!
अंतरा 2:
सिंह सवारी तू करती है महाबली,
असुरों का संहार करे खड्ग हाथ ली!
महिषासुर मर्दिनी तू शेर पे सवार है,
भक्तों के संकट हरने को तैयार है!
तेरी ज्योति से उजाला अंधकार मिटे,
तेरी कृपा से हर एक पापी का पाप कटे!
अंतिम चरण (Refrain):
साधना करे जो तेरा, पावे मुक्ति धाम,
जय माता दी कहे जो, बने उसके सारे काम!
हे जगदम्बे, हे भवानी, हे महामाई,
तेरे चरणों में झुकाऊँ मैं तो सीस दूँ दुहाई!
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
साधना सरगम द्वारा स्वरबद्ध यह भजन भक्त और भगवान के बीच के अनन्य प्रेम और अटूट विश्वास का प्रतीक है। भजन की पहली पंक्ति "हे जगदम्बे, हे भवानी, हे महामाई" में साधक माता के तीन प्रमुख रूपों का स्मरण करता है—जगदम्बा (सम्पूर्ण संसार की जननी), भवानी (संसार रूपी भवसागर से पार लगाने वाली) और महामाई (असीम ममता की खान)। साधक कहता है कि हे मैया! मैं अपने अहंकार का त्याग कर आपके चरणों में अपना शीश झुकाता हूँ और अपनी प्रार्थना आपके समक्ष रखता हूँ।
अगले चरणों में भजनकार माँ के धाम का वर्णन करते हुए कहता है कि माँ का निवास हिमालय जैसे ऊँचे और पवित्र पर्वतों पर है, किंतु उनकी शक्ति और उपस्थिति संसार के कण-कण में समाहित है। इतिहास गवाह है कि जो भी सच्चा भक्त माता के दरबार में श्रद्धापूर्वक आया, उसकी झोली कभी खाली नहीं लौटी। माँ अपने प्रत्येक संतान के संकट को हर लेती हैं।
सिंह वाहिनी रूप और महिषासुर मर्दिनी रूप का स्मरण कराते हुए भजन हमें याद दिलाता है कि देवी केवल ममता की मूरत ही नहीं, बल्कि अन्याय और अधर्म का नाश करने वाली महाशक्ति भी हैं। उनकी ज्योति मात्र से जीवन का अंधकार छँट जाता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह भजन केवल एक संगीतिक रचना नहीं है, बल्कि यह सनातन शाक्त परंपरा का एक जीवंत दस्तावेज है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- दिव्य संगीत संयोजन: दिलीप सेन का संगीत और साधना सरगम की शांत तथा सुरीली आवाज श्रोताओं को आत्मिक शांति प्रदान करती है।
- भक्ति रस की प्रधानता: इस भजन में शरणागति (Surrender) के भाव को अत्यंत सरल शब्दों में पिरोया गया है।
- नवरात्रि उत्सव का आनंद: शारदीय और चैत्र नवरात्रि के दिनों में यह भजन घर-घर और पंडालों में गूँजता है, जो वातावरण को पूरी तरह से ऊर्जावान बना देता है।
माता की आराधना के साथ-साथ शक्ति की साधना हेतु आप श्री दुर्गा चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
भजन को कब और कैसे सुनना या गाना चाहिए, इसका सनातन साधना में विशेष महत्व है:
- प्रातःकाल एवं संध्याकालीन वंदना: सूर्योदय के समय या संध्या बेला में दीपक प्रज्वलित करने के पश्चात इस भजन का श्रवण मानसिक शांति देता है।
- नवरात्रि के नौ दिन: नवरात्रि के दौरान घटस्थापना के समय तथा कन्या पूजन के अवसर पर इस भजन का गायन विशेष फलदायी होता है।
- सत्संग और जागरण: देवी जागरण या पारिवारिक अनुष्ठानों में समूह के साथ इस भजन को गाने से सामूहिक चेतना जागृत होती है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
इस भजन की आराध्य देवी आदिशक्ति माँ दुर्गा हैं, जिन्हें पराशक्ति, महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का समन्वित रूप माना जाता है। गीतकार सुधाकर शर्मा और गायिका साधना सरगम ने अपनी कला के माध्यम से देवी की महिमा को जन-जन तक पहुँचाया है। सनातन धर्म में यह मान्यता है कि नारी शक्ति का सम्मान और आदिशक्ति की उपासना से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
टी-सीरीज (T-Series) द्वारा प्रस्तुत इस एलबम "हे जगदम्बे" को 2000 के दशक के मध्य में रिलीज़ किया गया था। उस समय भक्ति संगीत के क्षेत्र में सुगम संगीत और शास्त्रीय सुरीलेपन का जो अनूठा मिश्रण तैयार किया गया था, उसमें साधना सरगम की आवाज़ ने चार चाँद लगा दिए। गीतकार सुधाकर शर्मा ने आम जनमानस की भाषा में माता के प्रति प्रेम को शब्दों का जामा पहनाया, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक और लोकप्रिय है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा सरल हिंदी और बृज-अवधी मिश्रित लोक बोलियों के निकट है, जिसे भारत का कोई भी आम नागरिक आसानी से समझ और गुनगुना सकता है। इसमें रूपक अलंकार और उपमाओं का सुंदर प्रयोग किया गया है, जैसे माता को "सुख की दाती" और "दुःख की हर्ता" कहना। यह काव्य शैली श्रोताओं के हृदय में सीधे उतर जाती है और भक्ति भाव को प्रज्वलित करती है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन की किसी भी परिस्थिति में मनुष्य को ईश्वर या आदिशक्ति के प्रति अपना विश्वास नहीं खोना चाहिए। जब चारों तरफ कठिनाइयों का अंधकार हो, तब श्रद्धा की एक ज्योति ही जीवन को रोशन कर सकती है। शरणागति का मार्ग सबसे सरल मार्ग है, जहाँ भक्त अपने अहंकार को छोड़कर माँ के चरणों में समर्पित हो जाता है और माता उसकी रक्षा करती हैं।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / पंक्ति | सरल अर्थ | सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| जगदम्बे | जगत की अंबा (माता) | सम्पूर्ण ब्रह्मांड की उत्पत्ति करने वाली आदिशक्ति। |
| भवानी | भवरोग का नाश करने वाली | संसार के चक्र से मुक्त करने वाली देवी। |
| महामाई | महान माता | असीम करुणा और वात्सल्य की प्रतीक। |
| महिषासुर मर्दिनी | महिषासुर का वध करने वाली | बुराई और अहंकार का अंत करने वाली शक्ति। |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"तेरे चरणों में झुकाऊँ मैं तो सीस दूँ दुहाई!" - इस पंक्ति का गहरा अर्थ है कि जब मनुष्य संसार के दुखों से थक जाता है, तब वह अपनी सभी शंकाओं और अहंकारों को छोड़कर केवल माँ के चरणों में सिर झुकाता है और अपनी पुकार (दुहाई) लगाता है। माँ बिना देर किए अपने भक्तों की पुकार सुनती हैं और उनके दुखों का निवारण करती हैं।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
माता जगदम्बा की आराधना के समय निम्नलिखित पावन मंत्र का स्मरण करना अत्यंत फलदायी होता है:
सम्पूर्ण मूल भजन लिरिक्स (हिंदी पाठ)
"सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
"
इसके अतिरिक्त शक्ति साधना के लिए आप दुर्गा सप्तशती प्रथम अध्याय का भी पाठ कर सकते हैं।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | हे जगदम्बे (Hey Jagdambe) |
|---|---|
| गायक (Singer) | साधना सरगम (Sadhna Sargam) |
| संगीत निर्देशक | दिलीप सेन (Dilip Sen) |
| गीतकार | सुधाकर शर्मा (Sudhakar Sharma) |
| संगीत लेबिल | टी-सीरीज (T-Series) |
| संगीत विधा | देवी भजन / नवरात्रि गीत |
| भाषा | हिंदी |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
"हे जगदम्बे" भजन की गायिका कौन हैं?
इस भजन की प्रसिद्ध गायिका साधना सरगम हैं, जिनकी सुमधुर आवाज ने इसे अमर बना दिया है।
इस भजन के संगीतकार कौन हैं?
इस भजन के संगीत निर्देशक दिलीप सेन हैं।
यह भजन मुख्य रूप से किस अवसर पर गाया जाता है?
यह भजन मुख्य रूप से शारदीय और चैत्र नवरात्रि, माता के जागरण तथा देवी पूजन के अवसरों पर गाया जाता है।
इस भजन के गीतकार कौन हैं?
इस भजन के गीतकार सुधाकर शर्मा हैं।
इस भजन को किस संगीत लेबिल ने रिलीज़ किया है?
इसे टी-सीरीज (T-Series) लेबिल के तहत रिलीज़ किया गया था।
भजन सुनने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है?
इसके श्रवण से मन को शांति मिलती है, नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और माता रानी के प्रति अटूट विश्वास जागृत होता है।
क्या इस भजन को घर पर अकेले गाया जा सकता है?
हाँ, इसे प्रातःकाल पूजा के समय या किसी भी समय व्यक्तिगत रूप से एकाग्रचित्त होकर गाया जा सकता है।
माता दुर्गा के प्रमुख नौ रूपों के नाम क्या हैं?
शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस लेख को वेदों, पुराणों और पारंपरिक लोक-संस्कृति के साहित्यों के आधार पर प्रामाणिक रूप से संकलित किया गया है ताकि पाठकों को सटीक और उपयोगी जानकारी मिल सके।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- श्रीमद्देवीभागवत पुराण
- दुर्गा सप्तशती (गीता प्रेस गोरखपुर)
- पारंपरिक लोक भक्ति संगीत एवं टी-सीरीज आॅफिशियल आडियो-वीडियो आर्काइव
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें