पवन सिंह विदाई गीत देवी गीत परिचय
भोजपुरी संगीत जगत के पावर स्टार पवन सिंह का गाया हुआ यह अत्यंत मार्मिक और भावुक देवी गीत "हमनी के छोडकर" आदिशक्ति जगदंबा के विदाई प्रसंग पर आधारित है। नवरात्रि के पावन पर्व के समापन और विजया दशमी के अवसर पर जब माँ दुर्गा अपने भक्तों के लोक से पुनः अपने धाम (कैलाश पर्वत या दिव्य लोक) को प्रस्थान करती हैं, तब भक्तों के हृदय में जो विरह, व्याकुलता और करुणा उत्पन्न होती है, उसका सजीव और हृदयस्पर्शी चित्रण इस भजन में मिलता है। सनातन परंपरा में माँ को पुत्री, माता और कुलस्वामिनी के रूप में पूजा जाता है। जब नौ दिनों तक घर-आंगन में वास करने के बाद माँ की विदाई का समय आता है, तो एक आत्मीय रिश्ता होने के कारण भक्त भाव-विभोर हो जाते हैं। पवन सिंह की ओजस्वी और दर्द भरी आवाज ने इस विदाई गीत को अमर बना दिया है, जिसे सुनकर हर श्रद्धालु की आंखें नम हो जाती हैं। यह गीत केवल एक संगीत रचना नहीं है, बल्कि यह जीव और ब्रह्म, भक्त और भगवान के बीच के अनन्य प्रेम, विरह और समर्पण का अत्यंत पवित्र दस्तावेज है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
एल्बम: लागल बा दरबार शेरावाली के
गायक: पवन सिंह
संगीत: पारंपरिक / आधुनिक संयोजन
लेबल: वेव म्यूजिक (Wave Music)
मुखड़ा:
हमनी के छोडकर जाब कहाँ हे भवानी,
तोहरे भरोसा कटs ता एह जिंदगानी!
हमनी के छोडकर जाब कहाँ हे भवानी,
तोहरे भरोसा कटs ता एह जिंदगानी!
कइसे रही बानी बिना तोहरे दरस के,
रोवे पपीहा जईसे बरखा बरस के...
अंतरा 1:
नौ दिन कईनी हम तs सेवाढ़ तोहार हो,
सुन लीतs माई आके अरज हमार हो।
रोवे ला मन्दिरवा आ रोवे ला भवनवा,
सूना हो गइल माई तोहरे बिना आँगनवा।
केकरा सहारे अब दिनवा बिताइब,
केकरा से दुखियाड़ अपना हम कहाइब...
अंतरा 2:
पुनः फेरिए बरीस आवे के पड़ी माई,
बिछोह के दरद हमसे सहा ना जाई।
हंसते-हंसते बानी हम तs विदा करत,
अखियां से लोरवा छलकs ता भरत।
भूलि ना जइहs माई अपने सेवकवा के,
दर्शन दिहs आके तू अगिला बरस के...
गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth
पवन सिंह द्वारा गाए गए इस लोकप्रिय देवी विदाई गीत "हमनी के छोडकर" का भावार्थ अत्यंत गंभीर और करुणा से भरा हुआ है। गीत के माध्यम से भक्त माँ जगदंबा से अत्यंत ही विनय भाव से यह प्रश्न कर रहा है कि हे भवानी! आप हम सबको इस प्रकार अकेला छोड़कर कहाँ प्रस्थान कर रही हैं? इस संसार में हमारा जीवन तो केवल आपके ही भरोसे कट रहा है। नौ दिनों तक माँ की आराधना, पूजन, अर्चन और ज्योतिकलश की स्थापना के उपरांत जब विसर्जन और विदाई की बेला आती है, तब भक्त का हृदय विरह की अग्नि में जलने लगता है।
भक्त कहता है कि आपके दर्शन के बिना हमारा जीवन बिल्कुल व्यर्थ और असहाय हो जाता है। जिस प्रकार वर्षा ऋतु के बिना पपीहा व्याकुल रहता है, ठीक उसी प्रकार माँ के बिना भक्त का मन तड़पता रहता है। मंदिर और सूना आँगन माँ की अनुपस्थिति में जैसे रो रहे हों। भक्त विनती करता है कि हे माँ! अगले वर्ष आपको पुनः लौटना ही होगा, क्योंकि आपके बिना इस बिछोह का दर्द हमसे सहन नहीं होता। आँखों में आँसू भरकर, दिल पर पत्थर रखकर हम आपको विदा तो कर रहे हैं, परंतु हमारी प्रार्थना है कि आप अपने इन निरीह सेवकों को कभी भूल न जाना और अगले वर्ष पुनः दर्शन देने अवश्य आना।
गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message
इस गीत का मूल भाव 'विरह और वात्सल्य' है। नवरात्रि के नौ दिनों तक उत्सव और उल्लास का वातावरण रहता है, परंतु दशमी तिथि पर विसर्जन के साथ ही एक गहरा भावनात्मक सूनापन छा जाता है। यह गीत मनुष्य के भीतर की उस कोमल भावना को जागृत करता है जहाँ वह ईश्वर को केवल एक शक्ति के रूप में नहीं, बल्कि अपने परिवार के सबसे आत्मीय सदस्य के रूप में देखता है। संदेश यह है कि सच्ची भक्ति वही है जिसमें भगवान के आने पर आनंद हो और उनके जाने पर उनके प्रति व्याकुलता व प्रेम उमड़े। यह गीत हमें सिखाता है कि सांसारिक प्रपंचों के बीच एकमात्र ईश्वर का चरण ही हमारा वास्तविक आश्रय है।
| गीत की जानकारी (Song Information) | विवरण (Details) |
|---|---|
| गीत का नाम | हमनी के छोडकर (Hamni ke chodkar) |
| गायक | पवन सिंह (Pawan Singh) |
| एल्बम | लागल बा दरबार शेरावाली के (Lagal Ba Darbar Sherawali Ke) |
| संगीत लेबल | वेव म्यूजिक (Wave Music) |
| भाषा | भोजपुरी (Bhojpuri) |
| विषय / थीम | देवी विदाई गीत, दुर्गा विसर्जन, भक्ति और विरह |
| मुख्य भाव | करुणा, समर्पण, विरह और वात्सल्य |
गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators
भोजपुरी संगीत उद्योग में पवन सिंह को उनके अद्वितीय स्वर और ऊर्जावान गायकी के लिए जाना जाता है। उन्होंने इस पारंपरिक विदाई गीत में अपनी आवाज़ के माध्यम से जो प्राण फूंके हैं, उसने इसे घर-घर में लोकप्रिय बना दिया है। भोजपुरी अंचल में नवरात्रि के समय माता के आगमन से लेकर उनकी विदाई तक के विभिन्न चरणों पर अनेक गीत गाए जाते हैं, किंतु 'हमनी के छोडकर' जैसे गीत विदाई के क्षणों को अत्यंत जीवंत और मार्मिक बना देते हैं। इस गीत के माध्यम से लोक कलाकारों ने अपनी सांस्कृतिक जड़ों और देवी के प्रति अगाध प्रेम को सहेजने का सराहनीय कार्य किया है।
| कठिन शब्द (Word) | सरल हिंदी अर्थ (Simple Meaning) | संदर्भ (Context) |
|---|---|---|
| भवानी | माता दुर्गा, आदिशक्ति | देवी का संबोधन |
| जिंदगानी | जीवन, आयु | भक्त का संपूर्ण जीवन |
| दरस | दर्शन, दीदार | माता का पवित्र रूप देखना |
| सेवाढ़ | सेवा, पूजा-अर्चना | नौ दिनों तक की गई साधना |
| अरज | प्रार्थना, विनती | भक्त की पुकार |
| लोरवा | आँसू, अश्रु | विदाई के समय बहते आँसू |
| सेवकवा | सेवक, भक्त | माँ के शरणागत भक्त |
गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance
सनातन संस्कृति में देवी को जगत जननी माना गया है। जिस प्रकार एक पुत्री अपने मायके से विदा होकर अपने ससुराल जाती है और पूरा परिवार भावुक हो जाता है, ठीक उसी सांस्कृतिक परंपरा को भारत के ग्रामीण और शहरी अंचल में माँ दुर्गा के विसर्जन के समय निभाया जाता है। यह लोक संस्कृति और उच्च आध्यात्मिक दर्शन का सुंदर समन्वय है। जब भक्त माता को विदा करते हैं, तो वे यह मानते हैं कि माँ अपने लोक जा रही हैं, परंतु उनके आशीर्वाद की छाया सदैव उनके भक्तों के सिर पर बनी रहती है। यह गीत इस बात का प्रतीक है कि भौतिक रूप से माँ भले ही प्रतिमा विसर्जन के माध्यम से विदा हो जाएं, किंतु वे भक्तों के हृदय में हमेशाि के लिए निवास करती हैं।
गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons
यह विदाई गीत हमें जीवन की नश्वरता और संबंधों की गहराई का पाठ पढ़ाता है। जिस प्रकार हर मिलन के बाद बिछड़ना तय है, उसी प्रकार इस संसार में हर वस्तु और व्यक्ति का साथ क्षणिक है। यह गीत सिखाता है कि ईश्वर के प्रति हमारा प्रेम निस्वार्थ होना चाहिए। सुख में तो सभी ईश्वर को याद करते हैं, परंतु कठिनाइयों और विदाई के क्षणों में भी माँ के प्रति अटूट विश्वास बनाए रखना ही एक सच्चे भक्त की पहचान है। यह हमें विनम्रता, कृतज्ञता और सहनशीलता का संदेश देता है.
गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing
यह गीत विशेष रूप से निम्नलिखित अवसरों पर सुना और गाया जाता है:
- शारदीय और चैत्र नवरात्रि की विजया दशमी (दशहरा) के पावन अवसर पर।
- माँ दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन (विसर्जन यात्रा) के दौरान।
- माता के जागरण या चौकी के समापन समारोह में भावुक पलों के समय।
- जब भी भक्त माँ के प्रति अपने विरह और प्रेम को संगीत के माध्यम से व्यक्त करना चाहें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख भक्तिलोक (Bhaktilok.in) के संपादकीय मंडल द्वारा सनातन लोक संस्कृति, भोजपुरी संगीत परंपरा और देवी उपासना के दृष्टिकोण से पूरी श्रद्धा और प्रामाणिकता के साथ तैयार किया गया है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत यह सुनिश्चित किया गया है कि पाठकों को भक्तिरस से परिपूर्ण सटीक जानकारी और गीत के वास्तविक भाव मिल सकें।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- पारंपरिक भोजपुरी लोकगीत एवं देवी विसर्जन परंपराएं।
- वेव म्यूजिक (Wave Music) एल्बम आर्काइव - लागल बा दरबार शेरावाली के।
- देवीभागवत पुराण एवं मार्कण्डेय पुराण आधारित दुर्गा स्तुति परंपरा।
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