Durga Bhajan Lyrics बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

हमारो मन मोहलियो (HAMARO MANA MOH LIYO) - SHAHNAZ AKHTAR Ajaz Khan Durga Bhajan

प्रसिद्ध गायिका शहनाज अख्तर का लोकप्रिय भजन 'हमारो मन मोहलियो' सुनें। माँ दुर्गा की भक्ति और महिमा से परिपूर्ण इस भजन का भावार्थ यहाँ पढ़ें। | Bhaktilok

माता आदिशक्ति जगदम्बा की असीम कृपा, करुणा और वात्सल्य से परिपूर्ण अत्यंत लोकप्रिय भजन "हमारो मन मोहलियो (Hamaro Mana Moh Liyo)", जिसे प्रसिद्ध गायिका शहनाज अख्तर (Shahnaz Akhtar) और एजाज खान (Ajaz Khan) ने अपनी सुमधुर आवाज से सजाया है, सनातन भक्तों के हृदय में विशेष स्थान रखता है। यह भजन केवल एक संगीत रचना नहीं है, बल्कि यह मानव मन और जगदंबा के बीच के पावन आध्यात्मिक संबंध का एक जीवंत दस्तावेज है। जब कोई साधक पूरी तन्मयता से माँ दुर्गा के चरणों में अपनी हाजिरी लगाता है और उनके अलौकिक सौंदर्य, महिमा तथा करूणामयी स्वरूप का स्मरण करता है, तब उसका चंचल मन स्वतः ही संसार के प्रपंचों से मुक्त होकर माँ के चरणों में लीन हो जाता है। सनातन धर्म में आदि शक्ति को चराचर जगत का मूल कारण माना गया है—वही महालक्ष्मी हैं, वही महासरस्वती हैं और वही महाकाली हैं। इस भजन के माध्यम से श्रोता के भीतर भक्ति, समर्पण, तेज, साहस और आंतरिक पवित्रता का संचार होता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पावन भजन के सम्पूर्ण लिरिक्स, शब्दार्थ, विस्तृत भावार्थ, गायन विधि, आध्यात्मिक महत्व और जीवन पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों का सविस्तार अध्ययन करेंगे, जो आपके आध्यात्मिक ज्ञान और भक्ति भाव को और अधिक समृद्ध करेगा।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

स्थायी (मखड़ा):

हमारो मन मोहलियो री मैया, दरस तेरा सोहिलियो री मैया!
ओ मैया शेरावाली, ओ मैया जोरावाली, हमारो मन मोहलियो री मैया...
चरणों में तेरे झुकता सारा संसार है, मैया तुझको बारम्बार नमस्कार है!

अंतरा 1:

पर्वतों पे तेरा डेरा, भक्तों का लगा है फेरा,
जो भी दर पे तेरे आया, उसने सब कुछ है पाया।
तू है करुणा की मूरत, प्यारी तेरी ये मूरत,
देख के तेरा यह रूप, खिल गया मेरा अंतःकरण तूरत।
हमारो मन मोहलियो री मैया, दरस तेरा सोहिलियो री मैया...

अंतरा 2:

लाल लंगूरा वीर लंगूरा, संग में खेले खूबा-खूब,
भक्तों के संकट हरने को, मैया बैठी है रूप अनूप।
हाथ में त्रिशूल विराजे, खड्ग खप्पर सोहे साजे,
दुष्टों का संहार करने, सिंह पर मैया विराजे।
हमारो मन मोहलियो री मैया, दरस तेरा सोहिलियो री मैया...

अंतरा 3:

शहनाज अख्तर गावे, एजाज मिल गुण गावे,
जो कोई इस भजन को गावे, मनवांछित फल पावे।
मैया की दया जो बरसे, हर भक्त का जीवन हरसे,
चरणों की धूल ले माथे, भवसागर तर जावे।
हमारो मन मोहलियो री मैया, दरस तेरा सोहिलियो री मैया...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

शहनाज अख्तर और एजाज खान द्वारा स्वरबद्ध यह भजन भक्त के अंतःकरण की उस अवस्था का वर्णन करता है जहाँ लौकिक प्रपंचों से परे केवल और केवल माँ दुर्गा के दिव्य दर्शन की लालसा शेष रह जाती है। भजन की शुरुआती पंक्तियों में ही भक्त भाव-विभोर होकर पुकारता है कि हे मैया! तेरे अलौकिक और मनमोहक दर्शन ने मेरे मन को पूरी तरह से मोह लिया है, चुरा लिया है। 'शेरावाली' और 'जोरावाली' (शक्तिरूपा) संबोधन इस बात के प्रतीक हैं कि माँ सिंह पर सवार होकर संपूर्ण ब्रह्मांड की रक्षा करती हैं और अपने भक्तों के सभी प्रकार के भय को दूर भगाती हैं।

पर्वतों पर माँ का वास इस बात का द्योतक है कि ईश्वरीय चेतना तक पहुँचने के लिए साधक को भौतिक संसार से ऊपर उठकर एकांत, तप और उच्च चेतना के शिखरों तक पहुँचना पड़ता है। जब भक्त माता के दरबार में पहुँचता है, तो उसकी सारी चिंताएं और पीड़ाएं स्वतः समाप्त हो जाती हैं। भजन में आगे वीर हनुमान (लाल लंगूरा) और माता के अस्त्र-शस्त्रों (त्रिशूल, खड्ग) का उल्लेख इस बात का स्मरण कराता है कि माता केवल ममतामयी ही नहीं, बल्कि धर्म और सत्य की रक्षा के लिए दुष्टों का संहार करने वाली प्रचंड शक्ति भी हैं। इस भजन को सुनने और गाने मात्र से हृदय में सकारात्मक ऊर्जा, अदम्य साहस और भक्ति का अटूट विश्वास जागृत होता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन लोक संगीत और शास्त्रीय भक्ति भाव का एक अद्भुत संगम है। शहनाज अख्तर की भावपूर्ण और गूंजती हुई आवाज श्रोताओं को तल्लीन कर देती है, वहीं एजाज खान का साथ इस रचना को साम्प्रदायिक सद्भाव और सार्वभौमिक भक्ति का एक अनूठा उदाहरण बनाता है। यह प्रमाणित करता है कि सच्ची भक्ति किसी भी जाति, पंथ या संप्रदाय की सीमाओं से परे होती है। माता दुर्गा की उपासना से साधक को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—इन चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है। नियमित रूप से ऐसे भजनों का श्रवण करने से मानसिक तनाव दूर होता है, घर में सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) का संचार होता है और आत्मबल मजबूत होता है.

आप माँ की आराधना से जुड़े अन्य पावन ग्रंथों और स्तोत्रों के बारे में भी जान सकते हैं, जैसे कि शक्ति की उपासना के लिए दुर्गा सप्तशती पाठ का अत्यंत महत्व है, या फिर आप संकटों से मुक्ति हेतु श्री हनुमान चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन भजन को किसी भी समय सुना जा सकता है, परंतु इसकी आध्यात्मिक ऊर्जा का अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए कुछ विशेष समय और नियम निर्धारित किए गए हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त एवं प्रातःकाल: सुबह स्नान के पश्चात पूजा घर में दीप प्रज्वलित करके इस भजन को सुनने से पूरा दिन सकारात्मक और ऊर्जावान रहता है।
  • संध्या काल: प्रदोष काल में माता की आरती के समय इस भजन का श्रवण करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सुख-शांति बनी रहती है।
  • नवरात्र के पावन दिन: शारदीय या चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में विशेष रूप से माँ दुर्गा के मंडप और जागरण में इस भजन को गाना और इस पर नृत्य करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
  • सत्संग एवं जागरण: माता के चौकी या जागरण के आयोजनों में इस भजन को सामूहिक रूप से गाने पर अद्भुत समा बंध जाता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन की केंद्र बिंदु आराध्य देवी माँ आदिशक्ति दुर्गा हैं, जिन्हें वेदों और पुराणों में संपूर्ण ब्रह्मांड की जननी कहा गया है। माता दुर्गा की उत्पत्ति देवताओं के तेज से असुरों के संहार के लिए हुई थी। इस भजन में उनके साथ उनके अनन्य भक्त हनुमान जी (लाल लंगूरा) का भी स्मरण किया गया है जो शक्ति और निष्ठा के प्रतीक हैं। वहीं, इस भजन को अपनी आवाज़ से अमर बनाने वाली लोक गायिका शहनाज अख्तर और गायक एजाज खान हैं, जिन्होंने अपनी कला के माध्यम से भक्ति संगीत की महान परंपरा को आगे बढ़ाया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

लोक भजनों की इस श्रेणी में पारंपरिक धुनों और आधुनिक संगीत संयोजन (Music Arrangement) का सुंदर मिश्रण देखने को मिलता है। 1990 और 2000 के दशक में जब कैसेट और ऑडियो एलबम का दौर था, तब इस तरह के भजन उत्तर भारत के गाँवों से लेकर महानगरों तक के घरों, मंदिरों और माता के जागरणों में गूंजा करते थे। यह भजन लोक संस्कृति की उस निर्मल धारा से जुड़ा है जहाँ हर पर्व और उत्सव पर देवी-देवताओं का आह्वान लोकगीतों के माध्यम से किया जाता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सहज और आम जनमानस की समझ में आने वाली बोलचाल की हिंदी तथा अवधि-ब्रज मिश्रित लोक भाषा है। इसमें 'मोहलियो', 'सोहिलियो', 'तूरत' जैसे लोक-प्रचलित शब्दों का प्रयोग किया गया है जो इसकी मिठास को और अधिक बढ़ा देते हैं। काव्य शैली की दृष्टि से इसमें प्रवाहमयी तुकबंदी (Rhyming Scheme) का प्रयोग किया गया है, जिसे बिना किसी कठिन प्रयास के कोई भी आसानी से गा सकता है। उपमा और रूपक अलंकारों के प्रयोग से माता के सौंदर्य का जीवंत चित्रण किया गया है.

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन की तमाम कठिनाइयों और संघर्षों के बीच भी यदि ईश्वर के प्रति अटूट प्रेम और विश्वास बना रहे, तो कोई भी संकट मनुष्य को विचलित नहीं कर सकता। माता दुर्गा शक्ति, धैर्य और करुणा की त्रिवेणी हैं। जब मनुष्य अपने अहंकार का त्याग कर माँ के चरणों में नतमस्तक होता है, तो उसके भीतर छुपी हुई अनंत ऊर्जा जागृत हो जाती है। यह भजन हमें एकता, प्रेम और सर्वोच्च सत्ता के प्रति पूर्ण समर्पण का संदेश देता है.

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
मोहलियो मोह लिया / आकर्षित कर लिया मन का ईश्वर के प्रति आकृष्ट होना
सोहिलियो सुंदर लगना /शोभा देना माता के दर्शन का अलौकिक सौंदर्य
शेरावाली / जोरावाली सिंह पर सवार / महाशक्तिशाली प्रकृति और ऊर्जा की सर्वोच्च अधीश्वर
लाल लंगूरा बाल हनुमान / वीर वानर माता के सेवक और बल-बुद्धि के प्रतीक
तूरत तुरंत / तत्काल भक्त की पुकार पर माता की शीघ्र कृपा

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"हमारो मन मोहलियो री मैया, दरस तेरा सोहिलियो री मैया!"
भावार्थ: भक्त कहता है कि हे माता! आपके रूप और आपके दर्शन ने मेरे हृदय को पूरी तरह से मोह लिया है। आपके दर्शन करना मेरे नेत्रों और मेरे मन के लिए परम सुखदायी है।

"पर्वतों पे तेरा डेरा, भक्तों का लगा है फेरा..."
भावार्थ: त्रिकूट पर्वत या ऊंचे पर्वतों पर आपका निवास स्थान है, जहाँ आपके दर्शन के लिए देश-विदेश से भक्तों का तांता लगा रहता है। जो भी आपके दरबार में आता है, वह कभी खाली हाथ नहीं लौटता।

"लाल लंगूरा वीर लंगूरा, संग में खेले खूबा-खूब..."
भावार्थ: माता के दरबार में वीर हनुमान जी पहरा देते हैं और भक्तों की रक्षा करते हैं। माता का यह स्वरूप अत्यंत अद्भूत और कल्याणकारी है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

माता दुर्गा की महिमा का गुणगान करते समय निम्नलिखित वैदिक एवं पौराणिक मंत्र का स्मरण करना अत्यंत फलदायी माना गया है:

ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥

इस पावन मंत्र का अर्थ है कि हे सभी प्रकार का मंगल करने वाली, कल्याणकारी, समस्त पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली, शरण देने वाली और तीन नेत्रों वाली गौरी नारायणि देवी! हम आपको बारंबार नमस्कार करते हैं। आप इसी प्रकार अपनी कृपा हम पर बनाए रखें। इसके साथ ही आप अपनी दैनिक पूजा में शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करके भगवान शिव और आदिशक्ति की संयुक्त कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

श्रेणी विवरण
भजन का नाम हमारो मन मोहलियो (Hamaro Mana Moh Liyo)
गायक / कलाकार शहनाज अख्तर (Shahnaz Akhtar) एवं एजाज खान (Ajaz Khan)
आराध्य देवी माँ दुर्गा / आदिशक्ति
भाषा हिंदी / लोक भाषा
भक्ति भाव (Bhava) समर्पण, प्रेम, विनय और उल्लास
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, माता का जागरण, संध्या आरती, सत्संग
मुख्य संदेश ईश्वर के प्रति अटूट प्रेम और शरणागति

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस लोकप्रिय भजन को प्रसिद्ध लोक और भक्ति गायिका शहनाज अख्तर और एजाज खान ने अपनी सुमधुर आवाज में गाया है।

यह भजन संपूर्ण ब्रह्मांड की आदिशक्ति, जगत जननी माँ दुर्गा (शेरावाली) को समर्पित है।

इस भजन को आप नवरात्रि के दिनों में, माता के जागरण में, मंगलवार या शुक्रवार की पूजा के दौरान तथा दैनिक संध्या आरती के समय सुन या गा सकते हैं।

इस भजन के नियमित श्रवण से मन शांत होता है, मानसिक तनाव दूर होता है, घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और माँ दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

हाँ, इसकी भाषा अत्यंत सरल और धुन बहुत ही कर्णप्रिय है, इसलिए बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी इसे आसानी से गा सकते हैं।

भजन में 'लाल लंगूरा' शब्द माता के परम भक्त और सेवक श्री हनुमान जी के बाल स्वरूप के लिए स्नेहपूर्वक प्रयोग किया गया है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री Bhaktilok.in के उच्च संपादकीय मानकों के तहत सनातन परंपरा, लोक संगीत और भक्ति साहित्य के गहन अध्ययन के पश्चात तैयार की गई है। इस लेख का उद्देश्य श्रोताओं को भजन के शाब्दिक अर्थ, अंतर्निहित भाव और आध्यात्मिक महत्व से परिचित कराना है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के रूप में यह मार्गदर्शिका पाठकों को प्रामाणिक और प्रेरणादायक जानकारी प्रदान करती है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • सनातन पौराणिक ग्रंथ एवं दुर्गा सप्तशती (गीता प्रेस गोरखपुर संस्करण)
  • पारंपरिक लोक भजन एवं देवी संगीत संग्रह
  • वैदिक साहित्य और शक्ति उपासना पद्धतियां

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!