Punjabi Devi Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

विदाई कैसे करी जुदाई कैसे सही (Bidai Kaise Kari) - पवन सिंह Pawan Singh Devi Geet

पवन सिंह का लोकप्रिय देवी गीत 'विदाई कैसे करी जुदाई कैसे सही' सुनें। माँ दुर्गा की विदाई और भक्ति भाव से जुड़ा यह भजन यहाँ उपलब्ध है।

आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती को समर्पित यह भजन "विदाई कैसे करी जुदाई कैसे सही (Bidai Kaise Kari)" जगत जननी की कृपा, ममता और महिमा का हृदयस्पर्शी गान है। लोकप्रिय लोकगायक पवन सिंह (Pawan Singh) की भक्ति-भरी वाणी में प्रस्तुत यह देवी गीत (Devi Geet) उस भाव की अभिव्यक्ति है जो प्रत्येक भक्त माता के चरणों में प्रणाम करते समय अनुभव करता है — यह भाव कि माँ के बिना जीवन सूना है, और माँ से विदाई लेना कठिन है। सनातन परंपरा में स्त्री शक्ति को सृष्टि का आदि कारण माना गया है; देवीभागवत पुराण, मार्कण्डेय पुराण और श्री दुर्गा सप्तशती में माँ के ममतामयी तथा दुष्टनाशिनी स्वरूप का विस्तृत वर्णन मिलता है। यह भजन नवरात्रि, दुर्गा पूजा, जागरण, कन्या पूजन तथा घर-आँगन के नित्य कीर्तन में विशेष रूप से गाया जाता है। इसकी एक-एक पंक्ति साधक के भीतर शक्ति, करुणा, तेज और पवित्रता का संचार करती है तथा भक्त को माता के प्रति पूर्ण समर्पण की ओर अग्रसर करती है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

विदाई कैसे करी, जुदाई कैसे सही
माँ तेरे दर से उठूँ, परछाईं कैसे सही

(मुखड़ा)

हे माता शेरों वाली, हे जगत जननी दयाली
तेरे चरणों में आया, भक्त तेरा बनके प्यारा
विदाई कैसे करी, जुदाई कैसे सही

तेरी ममता की छाया, सदा सिर पर बनी रहे
तेरा आँचल जो छूटे, तो जीवन कैसे जिए
विदाई कैसे करी, जुदाई कैसे सही

दुःख दर्द हर लेती है, भक्तों के संकट टालती है
जो तेरे दर पे आया, वो कभी नहीं पछताया
विदाई कैसे करी, जुदाई कैसे सही

जय जय माँ अम्बे भवानी, जय जय माँ शेरों वाली
तेरी महिमा अपरंपार, तू ही सारे जग की प्यारी
विदाई कैसे करी, जुदाई कैसे सही

चरणों की धूलि माँगूँ, आशीर्वाद यही पाऊँ
जन्म-जन्म तेरा भक्त बनूँ, तेरे दर का दीवाना रहूँ
विदाई कैसे करी, जुदाई कैसे सही

हे माता शेरों वाली, हे जगत जननी दयाली
तेरे चरणों में आया, भक्त तेरा बनके प्यारा
विदाई कैसे करी, जुदाई कैसे सही

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का मूल स्वर माता के प्रति पूर्ण समर्पण और उनके चरणों से विदाई लेने की विवशता का है। जब भक्त माता के चरणों में प्रणाम कर अपनी प्रार्थना रखता है, तो देवी माँ उसके समस्त कष्टों को हर लेती हैं। भजन की पहली पंक्ति "विदाई कैसे करी, जुदाई कैसे सही" में भक्त की वह आंतरिक वेदना व्यक्त होती है जो माँ के दरबार से उठते समय अनुभव होती है। यह केवल शारीरिक विदाई नहीं, बल्कि भावनात्मक और आध्यात्मिक विरह है — जैसे बालक माँ की गोद छोड़ने को तैयार न हो।

"हे माता शेरों वाली" सम्बोधन माँ दुर्गा के सिंहवाहिनी स्वरूप की ओर संकेत करता है, जो अधर्म का नाश कर धर्म की रक्षा करती हैं। "जगत जननी दयाली" कहकर भक्त माँ की करुणा और सृष्टि-धारण शक्ति दोनों को एक साथ नमन करता है। "तेरी ममता की छाया" पंक्ति में माँ की वात्सल्यमयी ममता की तुलना उस छाया से की गई है जो जीवनभर सिर पर बनी रहती है — जिसके छूटने पर जीवन निराधार हो जाता है।

"दुःख दर्द हर लेती है, भक्तों के संकट टालती है" पंक्ति देवी की संकटहारिणी शक्ति का वर्णन करती है। श्री दुर्गा सप्तशती में माँ को "दुर्गति नाशिनी" कहा गया है — जो भक्तों की विपत्तियों का नाश करती हैं। "जो तेरे दर पे आया, वो कभी नहीं पछताया" यह श्रद्धा का सर्वोच्च प्रमाण है कि माँ के दर पर कोई निराश नहीं लौटता। अंतिम पंक्तियों में भक्त जन्म-जन्म तक माँ का भक्त बने रहने की कामना करता है, जो भक्ति की पराकाष्ठा है। यह भजन साधक के भीतर शक्ति, करुणा, तेज और पवित्रता का संचार करता है तथा उसे माता के प्रति अनन्य भक्ति की ओर प्रेरित करता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

देवीभागवत पुराण के अनुसार, माता की उपासना से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष — चारों पुरुषार्थों की सिद्धि होती है। विशेषकर नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के भजनों का संकीर्तन करने से घर में रिद्धि-सिद्धि, सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। इस भजन की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • भावप्रधान रचना: यह भजन शुद्ध भक्ति-भाव से ओतप्रोत है, जिसमें भक्त और भगवान के बीच माँ-बेटे का वात्सल्य संबंध प्रकट होता है।
  • लोकगीत शैली: पवन सिंह की भोजपुरी-पंजाबी लोकशैली में गाया गया यह देवी गीत जनमानस के हृदय को सहज ही छू लेता है।
  • संकटहारिणी महिमा: भजन में माँ की दुःख-दर्द हरने वाली और संकट टालने वाली शक्ति का गुणगान है।
  • शरणागति का भाव: यह भजन भक्त को पूर्ण शरणागति और समर्पण की ओर ले जाता है।
  • नवरात्रि एवं जागरण में विशेष: देवी के जागरण, कन्या पूजन और दुर्गा पूजा के अवसर पर यह भजन विशेष रूप से गाया जाता है।

यह भजन साधक के भीतर आत्मबल, धैर्य और भक्ति की भावना जागृत करता है। जो भक्त इसे श्रद्धापूर्वक सुनता या गाता है, उसके जीवन से भय, चिंता और नकारात्मकता दूर होती है तथा माँ की कृपा से सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

देवी भजनों का गायन और श्रवण किसी भी शुभ अवसर पर किया जा सकता है, परंतु कुछ विशेष समय और विधियाँ इसे और अधिक फलदायी बनाती हैं:

  • शुभ समय: प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान के बाद, संध्या आरती के समय, तथा रात्रि जागरण में यह भजन विशेष रूप से गाया जाता है।
  • विशेष अवसर: नवरात्रि, दुर्गा पूजा, दुर्गाष्टमी, नवमी, कन्या पूजन, जागरण, गृह प्रवेश और मंगल कार्यों में।
  • स्थान: पूजा स्थल, मंदिर, आँगन या स्वच्छ एवं पवित्र स्थान पर माता की प्रतिमा या चित्र के समक्ष।
  • विधि: दीप प्रज्वलित कर, धूप-अगरबत्ती अर्पित कर, माँ को फूल और प्रसाद चढ़ाकर भक्ति-भाव से भजन का गायन करें।
  • भाव: भजन गाते समय मन में पूर्ण श्रद्धा, समर्पण और विनम्रता रखें; शब्दों के अर्थ पर ध्यान केंद्रित करें।

नियमित रूप से इस भजन का श्रवण और गायन करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तथा माता की कृपा सदैव बनी रहती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: "विदाई कैसे करी जुदाई कैसे सही" भजन किस देवी को समर्पित है?

यह भजन आदिशक्ति माता दुर्गा को समर्पित है, जिन्हें शेरों वाली, जगत जननी और दयाली कहा गया है। भजन में माँ की ममता, करुणा और संकटहारिणी शक्ति का गुणगान किया गया है।

प्रश्न 2: इस भजन को किसने गाया है?

यह देवी गीत लोकप्रिय लोकगायक पवन सिंह (Pawan Singh) की वाणी में प्रस्तुत किया गया है, जो भोजपुरी और देवी भजनों के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं।

प्रश्न 3: यह भजन कब गाना चाहिए?

यह भजन नवरात्रि, दुर्गा पूजा, जागरण, कन्या पूजन तथा किसी भी शुभ अवसर पर गाया जा सकता है। नित्य प्रातः या संध्या आरती के समय भी इसका श्रवण लाभदायक माना जाता है।

प्रश्न 4: इस भजन का मुख्य भाव क्या है?

इस भजन का मुख्य भाव माता के प्रति पूर्ण समर्पण, शरणागति और उनके चरणों से विदाई लेने की भावनात्मक विवशता है। यह भक्त और माँ के बीच वात्सल्य संबंध को प्रकट करता है।

प्रश्न 5: क्या इस भजन के गायन से विशेष लाभ होता है?

श्रद्धापूर्वक गायन और श्रवण से मन को शांति, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। देवी उपासना से भय, चिंता और नकारात्मकता दूर होती है तथा घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

प्रश्न 6: क्या यह भजन नवरात्रि में विशेष रूप से गाया जाता है?

हाँ, नवरात्रि के नौ दिनों में देवी भजनों का संकीर्तन विशेष फलदायी माना जाता है। यह भजन माँ की कृपा और महिमा का गान करता है, अतः नवरात्रि में इसका विशेष महत्व है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जिसमें देवी भक्ति परंपरा, लोकगीत शैली तथा पवन सिंह के देवी गीतों के सांस्कृतिक महत्व को दर्शाया गया है। भजन के भावार्थ एवं व्याख्या में देवीभागवत पुराण, मार्कण्डेय पुराण तथा श्री दुर्गा सप्तशती की पारंपरिक मान्यताओं का संदर्भ लिया गया है। सामग्री को भक्ति-भाव, शास्त्रीय संदर्भ एवं व्यावहारिक उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए प्रस्तुत किया गया है।

संदर्भ एवं व्याख्या सहित सामग्री — भक्तिलोक.इन

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यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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