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लगन तुमसे लगा बैठे जो होगा देखा जाएगा लिरिक्स | Lagan Tumase Laga Baithe Jo Hoga Dekha Jayega Lyrics

88 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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लगन तुमसे लगा बैठे जो होगा देखा जाएगा लिरिक्स | Lagan Tumase Laga Baithe Jo Hoga Dekha Jayega Lyrics

अत्यंत पावन, प्रेम-रस से सराबोर और अनन्य समर्पण की भावना से परिपूर्ण भजन "लगन तुमसे लगा बैठे जो होगा देखा जाएगा" भारतीय भक्ति संगीत एवं संकीर्तन परंपरा का एक अत्यंत लोकप्रिय और हृदयस्पर्शी पद है। यह भजन साधक और आराध्य (विशेषकर बांके बिहारी, श्री कृष्ण या भगवान शिव) के बीच के उस प्रगाढ़ और निडर प्रेम को दर्शाता है जहाँ भक्त संसार की परवाह किए बिना अपने प्रियतम की शरण में पूर्ण रूप से समर्पित हो जाता है। जब मनुष्य का चित्त सांसारिक बंधनों, लोक-लज्जा और भय से मुक्त होकर केवल और केवल अपने इष्ट के चरणों में अनुरक्त हो जाता है, तब उसके भीतर एक असीम निर्भीकता का जन्म होता है। यही इस भजन का मूल भाव है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पावन भजन के सम्पूर्ण बोल, पद-दर-पद भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व, गायन की विधि और जीवन दर्शन पर विस्तार से चर्चा करेंगे ताकि आप इसे पूरी श्रद्धा के साथ स्मरण कर सकें।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

लगन तुमसे लगा बैठे जो होगा देखा जाएगा,
तुम्हें अपना बना बैठे जो होगा देखा जाएगा।

कभी दुनियाँ से डरते थे छुप छुप याद करते थे,
लो अब परदा उठा बैठे जो होगा देखा जाएगा।
लगन तुमसे लगा बैठे जो होगा देखा जाएगा,
तुम्हें अपना बना बैठे जो होगा देखा जायेगा।

कभी यह ख़याल था दुनियाँ हमें बदनाम कर देगी,
शर्म अब बेच खा बैठे जो होगा देखा जाएगा।
लगन तुमसे लगा बैठे जो होगा देखा जाएगा,
तुम्हें अपना बना बैठे जो होगा देखा जायेगा।

दीवाने बन गए तेरे तो फिर दुनियाँ से क्या मतलब,
तेरी गलियों में आ बैठे जो होगा देखा जाएगा।
लगन तुमसे लगा बैठे जो होगा देखा जाएगा,
तुम्हें अपना बना बैठे जो होगा देखा जायेगा।

लगन तुमसे लगा बैठे जो होगा देखा जाएगा,
तुम्हें अपना बना बैठे जो होगा देखा जायेगा।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि यह एक प्रेमी भक्त की आत्मकथा है जिसने सांसारिक मान्यताओं को ताक पर रखकर अपने आराध्य से प्रेम किया है। भजन की शुरुआती पंक्तियों में भक्त कहता है कि उसने अपने मन की लगन अपने प्रभु से लगा ली है और अब उसे इस बात की बिल्कुल चिंता नहीं है कि परिणाम क्या होगा। सांसारिक लोग समाज के डर से अपने प्रेम को छुपाते हैं, लेकिन भक्त ने अब समाज के तानों और परदों को हटा दिया है। वह कहता है कि पहले वह छुपकर अपने प्रभु का स्मरण करता था, किंतु अब उसने खुलेआम स्वीकार कर लिया है कि उसका सर्वस्व उसका प्रभु ही है।

आगे की पंक्तियों में कवि लोक-लज्जा और बदनामी के भय पर प्रहार करता है। आम इंसान हमेशा यही सोचता है कि लोग क्या कहेंगे, समाज क्या सोचेगा। परंतु सच्चे भक्त की स्थिति इसके विपरीत होती है। वह कहता है कि उसने तो अपनी 'शर्म' और संकोच को मानो बेच दिया है। अब उसे दुनिया की किसी भी बदनामी का कोई भय नहीं रहा क्योंकि जिस हृदय में प्रभु बस जाएं, वहाँ दुनिया की राय का कोई मूल्य नहीं रह जाता। अंत में भक्त मदमस्त होकर कहता है कि जब वह अपने इष्ट का दीवाना बन ही चुका है, तो इस नश्वर दुनिया से उसका क्या मतलब? वह तो स्वयं चलकर अपने प्रभु की गलियों में आ बैठा है, अब जो भी होगा, वह उसे स्वीकार करने के लिए सर्वथा तैयार है। यह भाव मीराबाई, सूरदास और चैतन्य महाप्रभु की उच्च कोटि की प्रेम-भक्ति की याद दिलाता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन का मुख्य स्वर अनन्य भक्ति, आत्मसमर्पण और निर्भीकता है। सनातन धर्म में भक्ति के नौ प्रकार बताए गए हैं, जिनमें 'आत्मनिवेदन' या शरणगति भक्ति को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। जब कोई भक्त भगवान के चरणों में अपनी संपूर्ण सत्ता को समर्पित कर देता है, तब उसके सभी भय स्वतः समाप्त हो जाते हैं। यह भजन साधक के मन से लोक-लज्जा के कृत्रिम आवरण को हटाकर उसे भगवान के प्रति निश्छल प्रेम का पाठ पढ़ाता है। इसे नियमित रूप से स्मरण करने से मानसिक संकोच दूर होता है और भगवान के प्रति अगाध विश्वास की प्राप्ति होती है। ऐसे भजनों का गायन सत्संग, संकीर्तन और एकांत साधना के समय विशेष रूप से आनंदित करता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भक्ति संगीत के श्रवण और गायन का कोई निश्चित समय नहीं होता, क्योंकि प्रेम की भाषा काल और प्रहर से परे है। फिर भी, प्रातः काल ब्रह्म बेला में या संध्याकालीन बेला में जब मन शांत हो, इस भजन का गायन या श्रवण करने से विशेष मानसिक शांति मिलती है। एकांत कमरे में बैठकर, धुप-दीप प्रज्वलित करके, आँखें बंद कर जब इस भजन के बोलों का उच्चारण किया जाता है, तो यह ध्यान का कार्य करता है। इसे आप किसी भी धार्मिक सत्संग, एकादशी जागरण, जन्माष्टमी उत्सव या घर पर होने वाले संकीर्तन के दौरान समूह में भी गा सकते हैं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मूल रूप से भगवान श्री कृष्ण, बांके बिहारी या किसी भी आराध्य देव को समर्पित किया जा सकता है। ब्रज संस्कृति में कृष्ण और गोपियों के बीच का प्रेम लोक-लज्जा से परे था। गोपियों ने भी समाज की परवाह किए बिना कृष्ण से प्रेम किया था। संत कवियों की परंपरा में मीराबाई ने भी कुछ ऐसी ही पंक्तियाँ गाई थीं—"लोक लाज कुल की मर्यादा, डारि दियों संसारी रे।" यह भजन उसी प्राचीन संत परंपरा और माधुर्य भाव की भक्ति का आधुनिक किंतु उतना ही सशक्त रूप है। आप इसके माध्यम से अपने इष्टदेव के चरणों में अपनी निष्ठा प्रकट कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए आप श्री कृष्ण स्तोत्र और ॐ जय जगदीश हरे आरती जैसे पावन पदों का भी अध्ययन कर सकते हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा बहुत ही सरल, सहज और आम बोलचाल की हिंदी (खड़ी बोली मिश्रित ब्रजभाषा के भाव) है। इसमें व्याकरण की क्लिष्टता के स्थान पर हृदय की सच्ची पुकार और भावनाओं की गहराई है। 'शर्म अब बेच खा बैठे', 'परदा उठा बैठे' जैसे मुहावरों और प्रयोगों ने इस रचना को अत्यधिक सजीव और जीवंत बना दिया है। यह काव्य शैली श्रोता के मन पर सीधा प्रभाव डालती है और बिना किसी कठिन प्रयास के उसके भीतर भक्ति के भाव जगा देती है.

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

इस भजन से हमें जीवन के कई अत्यंत गहरे आध्यात्मिक पाठ सीखने को मिलते हैं:

  • निडरता एवं साहस: सत्य और भक्ति के मार्ग पर चलने वाले को समाज के विरोध का भय नहीं होना चाहिए।
  • लोक-लज्जा का त्याग: जब बात ईश्वर प्राप्ति की हो, तो दुनिया क्या कहेगी, इसकी परवाह छोड़ देनी चाहिए।
  • पूर्ण समर्पण: भक्त को अपने आराध्य पर अटूट विश्वास रखना चाहिए कि जो होगा अच्छा ही होगा।
  • संसार से अनासक्ति: जब मन भगवान में लग जाए, तो सांसारिक मोह-माया और मान-अपमान का प्रभाव समाप्त हो जाता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
लगन प्रेम, लगन, एकाग्रता भगवान के चरणों में चित्त का जुड़ जाना
परदा उठा बैठे संकोच या पर्दा हटा देना समाज के डर को छोड़कर भगवान से प्रेम स्वीकार करना
शर्म बेच खाना लोक-लज्जा का पूर्ण त्याग भगवान के लिए समाज की परवाह न करना
दीवाने प्रेमी, मस्त, पागल ईश्वर के प्रेम में सुधि-बुधि खो देने वाला भक्त
गलियों में आ बैठे शरण में आना प्रभु के धाम या धाम के समीप निवास करना

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"लगन तुमसे लगा बैठे जो होगा देखा जाएगा..." - इस पहली पंक्ति में भक्त अपने इष्ट के प्रति अटूट निष्ठा की घोषणा करता है। वह कहता है कि मैंने अपना मन केवल आपसे जोड़ लिया है, अब परिणाम चाहे जो भी हो, मुझे उसकी कोई चिंता नहीं है।

"कभी दुनियाँ से डरते थे छुप छुप याद करते थे..." - भक्त अपनी पिछली स्थिति का स्मरण करते हुए कहता है कि पहले वह समाज और दुनिया के डर से भगवान का स्मरण छुप-छुप कर करता था, ताकि कोई उसे ताने न दे।

"लो अब परदा उठा बैठे जो होगा देखा जाएगा..." - अब भक्त में इतना साहस आ गया है कि उसने सारे संकोच के परदे हटा दिए हैं और खुलेआम अपने भगवान को अपना मान लिया है।

"दीवाने बन गए तेरे तो फिर दुनियाँ से क्या मतलब..." - जब मनुष्य भगवान के प्रेम में पागल (दीवाना) हो जाता है, तब उसके लिए सांसारिक रिश्ते-नाते और दुनिया की राय अर्थहीन हो जाती है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के भाव से मिलते-जुलते कई श्लोक भगवत गीता और अन्य ग्रंथों में मिलते हैं। भगवान श्री कृष्ण गीता में कहते हैं:

"मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमुरु। मापि वैष्यसि सत्यं ते प्रतिजाने प्रियोऽसि मे॥"

अर्थात: "मुझमें मन लगा, मेरा भक्त बन, मेरा पूजन कर, मुझको नमस्कार कर। तू मुझको ही प्राप्त होगा, यह मैं तुमसे सत्य प्रतिज्ञा करता हूँ क्योंकि तू मेरा अत्यंत प्रिय है।" यह श्लोक इस भजन के पूर्ण समर्पण के भाव को पूरी तरह पुष्ट करता है। आप पार्वती स्तोत्रम् का भी पाठ कर सकते हैं जो देवी की निष्ठा को दर्शाता है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण तथ्य
भजन का नाम लगन तुमसे लगा बैठे जो होगा देखा जाएगा
संगीत विधा भक्ति गीत / संकीर्तन / भजन
प्रमुख भाव अनन्य प्रेम, समर्पण, निर्भीकता
भाषा सरल हिंदी / ब्रजभाव
किसको समर्पित श्री कृष्ण / बांके बिहारी / इष्ट देव
गायन अवसर सत्संग, जागरण, कीर्तन, एकांत साधना

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

'लगन तुमसे लगा बैठे' भजन के रचयिता कौन हैं?

यह भजन पारंपरिक (Traditional) संत वाणी और आधुनिक भक्ति संगीत का एक सुंदर मिश्रण है जिसे विभिन्न लोक गायकों द्वारा अलग-अलग धुनों में गाया गया है।

इस भजन का मुख्य आध्यात्मिक संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश ईश्वर के प्रति निडर प्रेम और लोक-लज्जा का त्याग करके पूर्ण शरणागति अपनाना है।

क्या इस भजन को किसी विशेष अवसर पर गाया जा सकता है?

हाँ, इसे जन्माष्टमी, सत्संग, जागरण, या दैनिक पूजा के समय मन की शांति के लिए कभी भी गाया या सुना जा सकता है।

क्या यह भजन भगवान श्री कृष्ण के लिए ही है?

मूल रूप से यह माधुर्य भक्ति का पद है जिसे कृष्ण भक्तों द्वारा बहुत गाया जाता है, परंतु इसे किसी भी इष्टदेव के प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करने के लिए गाया जा सकता है।

इस भजन को गाने से क्या लाभ होता है?

इसे नियमित रूप से स्मरण करने से मन का भय, संकोच और दुनिया की चिंताएं दूर होती हैं तथा भक्ति में दृढ़ता आती है।

क्या इस भजन के बोल कठिन हैं?

नहीं, इस भजन के बोल बहुत ही सरल और सहज हिंदी में हैं जिन्हें कोई भी आसानी से याद कर सकता है।

इस भजन को सुनने से मानसिक शांति कैसे मिलती है?

जब आप सांसारिक चिंताओं को छोड़कर भगवान पर सब कुछ छोड़ देते हैं, तो मन का बोझ हल्का हो जाता है और गहरी शांति का अनुभव होता है।

क्या इस भजन का कोई लिखित प्रमाण प्राचीन ग्रंथों में है?

यह आधुनिक भक्ति साहित्य और संकीर्तन परंपरा का अत्यंत लोकप्रिय पद है जो संत-कवियों के प्रेम-मार्ग से प्रेरित है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख Bhaktilok.in के उच्च गुणवत्ता मानकों और गूगल की 'Helpful Content' मार्गदर्शिकाओं का पालन करते हुए तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों को प्रामाणिक, सुंदर और गहराई से आध्यात्मिक सामग्री प्रदान करना है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत इस भजन के अर्थ, भावार्थ और सांस्कृतिक संदर्भ को पूरी निष्ठा के साथ प्रस्तुत किया गया है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक भक्ति संगीत एवं संकीर्तन संग्रह
  • श्रीमद्भगवद्गीता (भक्ति योग संदर्भ)
  • सनातन संत वाणी एवं माधुर्य भक्ति ग्रंथ
  • लोकप्रिय भजन संकलन एवं लोक-साहित्य परंपरा

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यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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