Parvati Stotram

जरूर सुनना ये भजन | Bhole Baba Ke Bhajan | Somvar Special Bhajan | Shiv Bhajan | Shankar | Bhajan - Bhaktilok

71 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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देवादिदेव महादेव को समर्पित सोमवारीय शिव भजन की महिमा

देवादिदेव महादेव भगवान शिव को समर्पित यह पावन भजन 'जरूर सुनना ये भजन | Bhole Baba Ke Bhajan | Somvar Special Bhajan | Shiv Bhajan | Shankar | Bhajan' साधकों के हृदय में अगाध शांति, वैराग्य और भक्ति का संचार करने वाला एक अत्यंत दिव्य और कल्याणकारी स्तोत्र है। सनातन संस्कृति में सोमवार का दिन देवादिदेव महादेव को समर्पित है, और इस पावन दिन पर भगवान शिव के भजनों का श्रवण करना मानव जीवन के सभी दुखों, संतापों और मानसिक क्लेशों का नाश करने वाला माना जाता है। शिव का शाब्दिक अर्थ ही 'कल्याण' है — वे जो समग्र चराचर जगत का मंगल करते हैं, जो अजर-अमर हैं और जो काल के भी महाकाल हैं। इस भजन के प्रत्येक शब्द के माध्यम से साधक भगवान शिव की अनंत चेतना, उनकी जटाओं से बहने वाली पवित्र गंगा, उनके गले में विराजमान सर्पराज, उनके मस्तक पर सुशोभित चंद्र और उनकी प्रलयंकारी डमरू की ध्वनि का सजीव अनुभव करता है। शिव भक्ति का मूल सिद्धांत यही है कि जगत की प्रत्येक नश्वर वस्तु का अंत और पुनरुत्थान अंततः शिव में ही निहित है। यह भजन साधक को सांसारिक मोह-माया, राग-द्वेष और अहंकार की पंकिल दुनिया से ऊपर उठाकर अपनी अंतरात्मा के वास्तविक, पावन और निर्मल स्वरूप को पहचानने की प्रेरणा देता है। भगवान शिव का नाम पंचमहाभूतों (पृथ्वी, जल, अग्नि, आकाश और वायु) को नियंत्रित करने वाली उस परम निर्गुण और सगुण चेतना का प्रतीक है, जिसके बिना कण-कण का संचालन असंभव है। इस भक्तिमय रचना के माध्यम से श्रोता न केवल मानसिक शांति प्राप्त करता है, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग पर भी अग्रसर होता है। विशेष रूप से सावन मास, प्रदोष व्रत, महाशिवरात्रि और प्रत्येक सोमवार को इस भजन का स्मरण एवं गायन भक्तों को आशुतोष भगवान शिव की असीम अनुकंपा का अधिकारी बनाता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मुखाड़ा (Stanza 1 - Mukhda):

जरूर सुनना ये भजन, भोले बाबा का प्यारा भजन,
सोमवार के इस पावन दिन, गाओ शिव का कीर्तन।
डम डम डम डम डमरू बाजे, कैलाशपति विराजे,
भक्तों के मनमंदिर में, भोले बाबा साजे!

अंतरा 1 (Stanza 2):

जटाजूट गंगा विराजे, चंदा मस्तक सोहे,
भोलेनाथ की मूरत मन को अति ही मोहे।
भस्म रमे अंगों पर, बाघंबर है धारी,
三नैनों की ज्योति से, जगती उजियारी!
संकट सारे हर लेते हैं, डमरू वाले भोले,
जो भी दिल से सिमरन करता, 'हर हर भोले' बोले!

अंतरा 2 (Stanza 3):

नंदी पर सवार होकर, बाबा जब आएं,
भक्तों की पीड़ा को पल में दूर भगाएं।
भांग धतूरा बेलपत्र जो भी मन से ध्यावे,
मनवांछित फल पाकर वह भव से तर जावे।
काल भी जिससे डरे, महाकाल वह कहलाए,
शरण में जो आ जाए, बैकुंठ को पा जाए!

समापन एवं समापन रिफ्रेन (Closing Refrain):

शिव सत्य है, शिव सुंदर है, शिव ही है आधार,
भोले बाबा के चरणों में है मेरा बारंबार नमस्कार!
हर हर महादेव शंभू, काशी के विश्वनाथ,
सबकी नैया पार लगाओ, बाबा थाम लो हाथ!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन भगवान शिव की महिमा, उनके स्वरूप और उनके आशुतोष स्वभाव का अत्यंत सुंदर और मर्मस्पर्शी वर्णन करता है। भजन के मुखड़े में कवि श्रोता से आग्रह करता है कि सोमवार के पवित्र दिन भगवान शिव के इस प्यारे भजन को अवश्य सुनें और उनके नाम का कीर्तन करें। भगवान शिव का डमरू 'डम डम' की ध्वनि के साथ ब्रह्मांड की उत्पत्ति और उसकी लय को नियंत्रित करता है। कैलाश पर्वत पर विराजमान महादेव अपने भक्तों के हृदय में निवास करते हैं।

प्रथम अंतरे में शिव के भौतिक और दिव्य स्वरूप का चित्रण किया गया है। उनकी जटाओं से मां गंगा प्रवाहित होती हैं, मस्तक पर द्वितीया का चंद्रमा सुशोभित है और उनके तीन नेत्र (सूर्य, अग्नि और चंद्रमा के प्रतीक) संपूर्ण ब्रह्मांड पर दृष्टि रखते हैं। उनके शरीर पर भस्म रमी हुई है और उन्होंने व्याघ्र चर्म (बाघंबर) धारण किया हुआ है। यह वेशभूषा इस बात का प्रतीक है कि महादेव सभी प्रकार की सांसारिक आसक्तियों और प्रपंचों से परे, परम वैरागी हैं।

द्वितीय अंतरे में उनके वाहन नंदी और उनकी शरण में आने वाले भक्तों के कल्याण का वर्णन है। जो भक्त सच्चे भाव से एक लोटा जल, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित करता है, महादेव उससे तुरंत प्रसन्न हो जाते हैं। उन्हें 'आशुतोष' कहा जाता है, जिसका अर्थ है बहुत जल्दी संतुष्ट होने वाले देवता। अंत में, यह संदेश दिया गया है कि जो मनुष्य 'हर हर महादेव' का महामंत्र जपते हैं, उनके जीवन के सभी कष्ट और भय स्वतः समाप्त हो जाते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस शिव भजन की मुख्य विशेषता इसकी सरलता, लयबद्धता और भक्ति रस से ओतप्रोत शब्दावली है। यह भजन किसी भी आयु वर्ग के भक्त द्वारा आसानी से गाया और गुनगुनाया जा सकता है। इसका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व इस बात में है कि यह साधक को भगवान शिव के प्रति अटूट विश्वास और समर्पण सिखाता है। सावन सोमवार या साप्ताहिक सोमवार व्रत के दौरान इस भजन का गान करने से मानसिक शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। यह भजन शिव भक्तों को शिव तांडव स्तोत्र और महामृत्युंजय मंत्र के समान ही आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन शिव भजन को गाये जाने का सर्वोत्तम समय प्रातःकाल ब्रह्म बेला (सूर्योदय से पूर्व) या प्रदोष काल (संध्या के समय) है। सोमवार के दिन विशेष रूप से भगवान शिव के मंदिर में दीप प्रज्वलित करके, शिवलिंग का जल और बेलपत्र से अभिषेक करने के पश्चात इस भजन का श्रवण या गायन करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसे सत्संग, जागरण, रुद्राभिषेक अनुष्ठान और पारिवारिक पूजा के दौरान सामूहिक रूप से भी गाया जा सकता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के प्रमुख आराध्य देवादिदेव महादेव (भगवान शिव), माता पार्वती, नंदी महाराज और उनके गण हैं। शिव परंपरा (शैव मत) में इन्हें आदिदेव, योगेश्वर, महाकाल और जगतपिता के रूप में पूजा जाता है। यह भजन पारंपरिक लोक भक्ति धाराओं और संत परंपरा से प्रेरित है, जहाँ भगवान शिव को दीन-बन्धु और भोले भंडारी के रूप में याद किया जाता है.

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन पारंपरिक लोक संगीत और भक्ति रस की शैली पर आधारित है। इसे शिव भक्तों और संतों द्वारा पीढ़ियों से मौखिक और लिखित परंपरा के रूप में आगे बढ़ाया गया है। सोमवारीय व्रतों के दौरान भक्तों की आध्यात्मिक पिपासा को शांत करने और उन्हें भगवान शिव की महिमा से जोड़ने के लिए ऐसे भजनों की रचना की जाती है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और लोक-प्रिय हिंदी (खड़ी बोली एवं ब्रज-अवधि के प्रभावयुक्त) है। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकारों का सुंदर प्रयोग किया गया है जैसे 'डम डम डमरू', 'जटाजूट गंगा' आदि। इसकी काव्य शैली गेय (Singable) है, जो श्रोता के मन को तुरंत अपनी ओर आकर्षित कर लेती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन में अहंकार का त्याग करके वैराग्य और सादगी को अपनाना ही सच्ची उन्नति है। भगवान शिव श्मशान की भस्म लगाते हैं, जो इस नश्वर शरीर का अंतिम सत्य है। इस भजन से यह संदेश मिलता है कि हमें भौतिक वस्तुओं के पीछे भागने के बजाय अपनी आत्मा को पवित्र करना चाहिए और हर परिस्थिति में भगवान शिव का स्मरण करते हुए धैर्य और संयम बनाए रखना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पदावली सरल अर्थ धार्मिक संदर्भ
जटाजूट बनी हुई जटाएं भगवान शिव की लंबी जटाएं जिनमें गंगा विराजती हैं।
बाघंबर बाघ की खाल शिव द्वारा पहना जाने वाला वस्त्र जो वैराग्य का प्रतीक है।
भस्म विभूति / राख नश्वरता और शिव की अलोकिक साधना का प्रतीक।
आशुतोष शीघ्र प्रसन्न होने वाले भगवान शिव का एक प्रमुख नाम।
कैलाशपति कैलाश पर्वत के स्वामी भगवान शिव का वास स्थान।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"डम डम डम डम डमरू बाजे..." - इस पंक्ति का भाव यह है कि जब भगवान शिव अपने हाथ में डमरू बजाते हैं, तो उसकी ध्वनि से संपूर्ण ब्रह्मांड की ऊर्जा जागृत होती है और सृष्टि का चक्र गतिमान होता है।

"जटाजूट गंगा विराजे, चंदा मस्तक सोहे..." - शिव की जटाएं अनंत आकाश का प्रतीक हैं, जिनसे निकलने वाली गंगा पवित्रता प्रदान करती हैं, और मस्तक पर चंद्रमा शीतलता व शांति का संदेश देता है।

"भांग धतूरा बेलपत्र जो भी मन से ध्यावे..." - भगवान शिव अत्यंत भोले हैं; उन्हें महंगे आभूषणों की नहीं, बल्कि भाव और समर्पण की आवश्यकता होती है। तुच्छ सामग्री से भी वे संतुष्ट हो जाते हैं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

यह महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव की आराधना और दीर्घायु, स्वास्थ्य व मोक्ष प्राप्ति के लिए सर्वोत्तम है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

श्रेणी विवरण
भजन का नाम जरूर सुनना ये भजन | Bhole Baba Ke Bhajan | Somvar Special
आराध्य देव भगवान शिव (महादेव / महाकाल)
भाषा सरल हिंदी / ब्रज शैली
मुख्य भाव भक्ति, वैराग्य, समर्पण और कल्याण
उपयुक्त अवसर सोमवार व्रत, सावन मास, प्रदोष व्रत, महाशिवरात्रि
संबंधित पाठन श्री हनुमान चालीसा, ॐ जय जगदीश हरे आरती

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन सप्ताह के प्रत्येक सोमवार को, विशेषकर सावन मास के सोमवार और प्रदोष व्रत के दिन सुनना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, कच्चा दूध, गंगाजल, सफेद आंकड़े के फूल और चंदन अत्यंत प्रिय हैं।

सोमवार का व्रत रखने से मानसिक शांति, उत्तम स्वास्थ्य, मनचाहा वरदान और भगवान शिव व माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

शिवलिंग पर उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके शांत चित्त से जल, दूध या गंगाजल अर्पित करना चाहिए और साथ ही 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जप करना चाहिए।

'आशुतोष' का अर्थ है जो बहुत शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। भगवान शिव अपने भक्तों की सच्ची भक्ति से अत्यंत शीघ्र संतुष्ट होकर उनकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

हाँ, महिलाएं और पुरुष दोनों ही सोमवार का व्रत रख सकते हैं। सोलह सोमवार का व्रत विशेष रूप से सुखी वैवाहिक जीवन और योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए रखा जाता है।

भक्ति संगीत और सकारात्मक शब्दों के श्रवण से मस्तिष्क में उत्पन्न होने वाले तनाव के हॉर्मोन नियंत्रित होते हैं और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे मन शांत होता है।

इस भजन को दैनिक पूजा के समय, सावन मास के अनुष्ठानों में, शिवरात्रि जागरण में और घर पर आयोजित होने वाले सत्संग व भजन कार्यक्रमों में बजाया जा सकता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस लेख में प्रस्तुत भजन के बोल, अर्थ, और आध्यात्मिक व्याख्या को पारंपरिक शिव पुराण, लोक साहित्य और सनातन परंपरा के आचार्यों के मार्गदर्शन के अनुसार संकलित किया गया है ताकि पाठकों को प्रामाणिक एवं शुद्ध भक्ति सामग्री मिल सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • शिव महापुराण - कोट रुद्र संहिता एवं विद्येश्वर संहिता
  • पारंपरिक लोक भजन एवं संकीर्तन परंपरा
  • सनातन पंचांग एवं व्रत कथा संग्रह

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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