Hanuman Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

मंगलवार हनुमान जी काShree Hanuman Stavan (Shree Hanuman Chalisa Hanuman Ashtak)

मंगलवार के दिन श्री हनुमान स्तवन, चालीसा एवं अष्टक का पाठ करें। जानिए पाठ के लाभ, महत्व और संदर्भ सहित विशेष जानकारी Bhaktilok पर।

मंगलवार का दिन भगवान श्री हनुमान जी को समर्पित है और इस दिन हनुमान जी के भजन, स्तवन, चालीसा एवं अष्टक का पाठ करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। प्रस्तुत भजन "श्री हनुमान स्तवन" (Shree Hanuman Stavan) SHIVAY VYAS की भक्ति भाव से ओत-प्रोत प्रस्तुति है, जिसमें हनुमान चालीसा पाठ एवं भावार्थ">श्री हनुमान चालीसा एवं हनुमान अष्टक की दिव्य ध्वनि समाहित है। यह भजन साधक को संकटमोचन हनुमान की शरण में ले जाता है, जहाँ भय, निराशा और दुःख का अंत होता है। हनुमान जी रामभक्ति के आदर्श प्रतीक हैं — बल, बुद्धि, विद्या, साहस और निष्ठा के साक्षात स्वरूप। उनका नाम स्मरण मात्र से ही मंगल होता है, इसीलिए मंगलवार के दिन उनके भजन-कीर्तन का विशेष महत्व है। यह भजन उस भक्ति परंपरा का हिस्सा है जिसमें गोस्वामी तुलसीदास रचित हनुमान चालीसा और हनुमान अष्टक जैसे अमर ग्रंथों की ध्वनि आज भी घर-घर में गूंजती है। इस लेख में हम भजन के भावार्थ, महत्व, पाठ विधि एवं आध्यात्मिक लाभ पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ श्री हनुमान स्तवन ॥

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥
राम दूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥

महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी॥
कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा॥

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
काँधे मूँज जनेऊ साजै॥
संकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग बंदन॥

बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार॥

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥

— SHIVAY VYAS की भक्ति प्रस्तुति में श्री हनुमान चालीसा एवं हनुमान अष्टक सहित

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का प्रारंभिक पद "जय हनुमान ज्ञान गुन सागर" हनुमान जी की स्तुति का सार है। 'ज्ञान गुन सागर' का अर्थ है — वे ज्ञान और गुणों के असीम सागर हैं। साधारण भक्त के लिए यह स्मरण इस बात का प्रतीक है कि हनुमान जी में जो ज्ञान है, वह केवल पुस्तकीय नहीं, बल्कि अनुभवजन्य और आत्मिक है। 'कपीस' अर्थात् वानरराज — तिहुँ लोक को प्रकाशित करने वाले। यह पंक्ति बताती है कि हनुमान जी का तेज केवल पृथ्वी तक सीमित नहीं, बल्कि तीनों लोकों में व्याप्त है।

"राम दूत अतुलित बल धामा" — ये शब्द हनुमान जी की पहचान को स्पष्ट करते हैं। वे राम के दूत हैं, अर्थात् रामभक्ति उनका प्राण है। उनका बल अतुलनीय है, फिर भी वह बल अहंकार से नहीं, सेवा से जुड़ा है। यही भक्ति का सर्वोच्च आदर्श है — शक्ति का उपयोग विनम्रता और सेवा के लिए होना चाहिए। "अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा" — माता अंजनी के पुत्र और पवनदेव के पुत्र के रूप में उनका नाम स्मरण किया जाता है। यह पंक्ति मातृ-पितृ भक्ति और प्रकृति के साथ जुड़ाव का भी प्रतीक है।

"महाबीर बिक्रम बजरंगी" — महाबीर अर्थात् महान वीर, बिक्रम अर्थात् पराक्रमी, बजरंगी अर्थात् वज्र के समान अंगों वाले। "कुमति निवार सुमति के संगी" — ये पंक्ति भक्त के लिए अत्यंत आश्वासनकारी है। हनुमान जी दुर्बुद्धि को दूर करते हैं और सद्बुद्धि के साथी बनते हैं। जीवन में जब भी भ्रम, भय या दुविधा हो, हनुमान जी का स्मरण सही मार्ग दिखाता है।

"कंचन बरन बिराज सुबेसा" से "तेज प्रताप महा जग बंदन" तक के पद हनुमान जी के दिव्य स्वरूप का वर्णन करते हैं — स्वर्ण के समान वर्ण, सुंदर वेश, कानों में कुंडल, घुंघराले केश, हाथ में वज्र और ध्वजा, कंधे पर मूँज का जनेऊ। यह वर्णन भक्त के मन में हनुमान जी की एक सजीव, तेजस्वी और करुणामयी छवि स्थापित करता है। अंत में "बुद्धिहीन तनु जानिके" दोहा भक्त की विनम्रता का प्रतीक है — भक्त स्वयं को बुद्धिहीन मानकर हनुमान जी से बल, बुद्धि और विद्या की प्रार्थना करता है। यह भजन का हृदय है — अहंकार का त्याग और पूर्ण समर्पण।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन श्री हनुमान चालीसा और हनुमान अष्टक की परंपरा से जुड़ा है, जिसके रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी माने जाते हैं। हनुमान चालीसा में 40 चौपाइयाँ हैं और यह अवधी भाषा में रचित है। हनुमान अष्टक में आठ श्लोक हैं जो संस्कृत में हैं और हनुमान जी की स्तुति करते हैं। SHIVAY VYAS की प्रस्तुति में इन दोनों का संगम भक्ति संगीत के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिससे श्रोता एक ही स्थान पर चालीसा और अष्टक दोनों का आनंद ले सकते हैं।

इस भजन का प्रमुख महत्व यह है कि यह भक्त को मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक तीनों स्तरों पर बल देता है। हनुमान जी को 'संकटमोचन' कहा जाता है — संकटों को हरने वाले। मंगलवार के दिन इस भजन का श्रवण और गायन करने से भय, ग्रह दोष, बाधाएँ और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती हैं। विद्यार्थियों के लिए यह भजन स्मरण शक्ति और एकाग्रता बढ़ाने वाला माना जाता है। व्यवसायियों के लिए यह साहस और निर्णय क्षमता का प्रतीक है। गृहस्थ जीवन में यह भजन पारिवारिक सुख-शांति और एकता का वातावरण बनाता है।

हनुमान जी की भक्ति का एक और विशेष पहलू यह है कि वे 'रामदूत' हैं — अर्थात् भक्ति और सेवा के प्रतीक। उनका जीवन बताता है कि शक्ति का सही उपयोग सेवा में है। इस भजन को सुनने या गाने से भक्त के भीतर विनम्रता, सेवा भाव और धैर्य का विकास होता है। यह भजन केवल एक धार्मिक गीत नहीं, बल्कि एक साधना है जो आत्म-विकास की ओर ले जाती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

हनुमान जी के भजन का गायन विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार के दिन किया जाता है, क्योंकि ये दोनों दिन हनुमान जी को समर्पित हैं। इसके अतिरिक्त हनुमान जयंती, रामनवमी, दीपावली और नवरात्रि के दौरान भी इस भजन का विशेष महत्व है। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में या संध्या काल में दीप प्रज्वलित करके इस भजन का गायन करना शुभ माना जाता है।

गायन की विधि सरल है — स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें, हनुमान जी की मूर्ति या चित्र के समक्ष घी का दीपक जलाएँ, लाल फूल या चमेली के फूल अर्पित करें, बूंदी या गुड़-चने का भोग लगाएँ और फिर श्रद्धा भाव से भजन का गायन करें। भजन के साथ हनुमान चालीसा का पाठ भी किया जा सकता है। यदि संभव हो तो हनुमान मंदिर में जाकर सामूहिक कीर्तन में सम्मिलित हों, क्योंकि सामूहिक भजन का प्रभाव व्यक्तिगत से अधिक होता है।

श्रवण करते समय मन को एकाग्र रखें, आँखें बंद करके हनुमान जी की छवि का ध्यान करें और प्रत्येक शब्द के भाव को हृदय में उतारें। केवल शब्दों का उच्चारण नहीं, भाव का अनुभव ही भक्ति है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: श्री हनुमान स्तवन क्या है?

श्री हनुमान स्तवन हनुमान जी की स्तुति का एक भक्ति गीत है, जिसमें श्री हनुमान चालीसा और हनुमान अष्टक के भाव समाहित हैं। SHIVAY VYAS की प्रस्तुति में इसे भक्ति संगीत के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

प्रश्न 2: यह भजन कब सुनना चाहिए?

मंगलवार और शनिवार को सुबह या संध्या के समय यह भजन सुनना सर्वाधिक शुभ माना जाता है। हनुमान जयंती और रामनवमी पर भी इसका विशेष महत्व है।

प्रश्न 3: क्या इस भजन को सुनने से संकट दूर होते हैं?

हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है। श्रद्धा और विश्वास के साथ इस भजन का श्रवण और गायन करने से मानसिक शांति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

प्रश्न 4: हनुमान चालीसा और हनुमान अष्टक में क्या अंतर है?

हनुमान चालीसा अवधी भाषा में 40 चौपाइयों का संग्रह है, जबकि हनुमान अष्टक संस्कृत में आठ श्लोकों का स्तोत्र है। दोनों ही हनुमान जी की स्तुति के लिए प्रयुक्त होते हैं।

प्रश्न 5: क्या इस भजन का गायन घर में कर सकते हैं?

हाँ, घर में शुद्धता और श्रद्धा के साथ इस भजन का गायन किया जा सकता है। दीपक जलाकर और हनुमान जी का ध्यान करके गायन करना अधिक फलदायी माना जाता है।

प्रश्न 6: क्या बच्चे भी यह भजन सुन सकते हैं?

हाँ, बच्चों के लिए यह भजन विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। इससे उनमें स्मरण शक्ति, एकाग्रता और सकारात्मक संस्कारों का विकास होता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख भक्तिलोक पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसमें श्री हनुमान चालीसा, हनुमान अष्टक एवं हनुमान स्तवन की पारंपरिक भक्ति परंपरा का संदर्भ एवं व्याख्या सहित विवरण दिया गया है। सामग्री को शास्त्रीय भक्ति साहित्य, तुलसीदास कृत रचनाओं और प्रचलित लोक परंपरा के आधार पर संकलित किया गया है। पाठकों से अनुरोध है कि वे भजन का गायन श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ करें।

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 02 Nov 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!