Punjabi Devi Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

तेरा बुलावा आता है (Shraddha Bhakti Sagar)

तेरा बुलावा आता है देवी गीत ममता रौत द्वारा गाया गया। सम्पूर्ण बोल, अर्थ एवं संदर्भ सहित पढ़ें केवल Bhaktilok पर।

तेरा बुलावा आता है | Tera Bulawa Aata Hai | Mamta Raut Devi Geet | Shraddha Bhakti Sagar - BhaktiLok

माँ आदिशक्ति जगदम्बा की असीम कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने का माध्यम केवल भक्ति, प्रेम और समर्पण है। जब भक्त का हृदय श्रद्धा से ओत-प्रोत होता है, तब उसे ऐसा प्रतीत होता है कि स्वयं माँ शेरावाली उसे अपने दरबार में बुला रही हैं। लोकप्रिय देवी गीत 'तेरा बुलावा आता है' (Tera Bulawa Aata Hai) जिसे सुप्रसिद्ध गायिका ममता रौत (Mamta Raut) ने अपनी मधुर और भावपूर्ण वाणी से सजाया है, श्रद्धा भक्ति सागर के बैनर तले प्रस्तुत एक अत्यंत मनमोहक भजन है। यह भजन केवल एक संगीत रचना नहीं है, बल्कि यह हर उस साधक और भक्त के लिए एक आध्यात्मिक अनुभूतियों का सागर है जो माँ वैष्णो देवी, माता चिंतपूर्णी या माँ ज्वाला देवी के दर्शन के लिए लालायित रहता है। इस विस्तृत लेख में हम इस पावन देवी गीत के सम्पूर्ण बोल, इसका गूढ़ हिंदी अर्थ, भावार्थ, भजन की पृष्ठभूमि, गायन का महत्व और जीवन पर इसके आध्यात्मिक प्रभाव का गहन विश्लेषण करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

प्रसिद्ध देवी गीत 'तेरा बुलावा आता है' के मूल एवं शुद्ध बोल (Devanagari Lyrics):


स्थाई (Mukhda):
तेरा बुलावा आता है, मैया जी तेरा बुलावा आता है,
दर पे तेरे आने को, दिल मेरा मचलता है!
जब-जब सुनूँ मैं तेरी रहमत की ये कहानियाँ,
चुपके से मेरा मन माँ, तेरे पास आ जाता है...
तेरा बुलावा आता है, मैया जी तेरा बुलावा आता है!

अंतरा 1 (First Stanza):
ऊंचे पर्वतों पे तेरा सुंदर भवन है,
जहाँ गूँजता हर पल तेरा ही भजन है।
चरणों में तेरे जो भी शीश झुकाता है,
उसकी तकदीर का ताला खुल जाता है।
दुखों के अंधेरे में जो तेरा नाम गाए,
उसको तो माँ शेरावाली का सहारा मिल जाता है!
तेरा बुलावा आता है, मैया जी तेरा बुलावा आता है!

अंतरा 2 (Second Stanza):
दुनिया की भीड़ में जब मन घबराए,
कोई भी जब मुझको अपना नज़र न आए।
तब तेरी चुनरिया का साया याद आता है,
हर दर्द मेरा माँ पल में भूल जाता है।
तेरा यह दर ही तो सच्ची है पनाह मेरी,
तू ही तो मेरी अम्बे सबकी है रखवाली!
तेरा बुलावा आता है, मैया जी तेरा बुलावा आता है!

समापन / रिफ्रेन (Refrain):
झोली फैलाकर माँ द्वार तेरे आया हूँ,
चरणों की धूल को मैं माथे से लगाया हूँ।
सुन ले पुकार मेरी ममता की दाती माँ,
तेरे बिना अब तो कहीं चैन ना आता है!
तेरा बुलावा आता है, मैया जी तेरा बुलावा आता है,
दर पे तेरे आने को, दिल मेरा मचलता है!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन भक्त और भगवान (माता दुर्गा) के बीच के अटूट वात्सल्य और संबंध को रेखांकित करता है। 'तेरा बुलावा आता है' इस बात का प्रतीक है कि भगवान अपने भक्तों को कभी नहीं भूलते। जब भक्त सांसारिक मोह-माया, दुखों और परेशानियों से घिर जाता है, तब उसे माँ की पुकार या बुलावा अंतरात्मा में महसूस होता है। भजन की पंक्तियाँ यह समझाती हैं कि ऊंचे पर्वतों पर विराजमान माँ वैष्णो देवी या जगत जननी अम्बे भवानी का दरबार हर दुखी और विह्वल मन के लिए अंतिम शरणस्थली है।

जब ममता रौत जी अपनी सुरीली आवाज़ में गाती हैं कि "दर पे तेरे आने को दिल मेरा मचलता है," तो यह हर उस श्रद्धालु की सच्ची भावना को व्यक्त करता है जो नवरात्रि या विशेष अवसरों पर माता के दर्शन के लिए यात्रा पर निकलता है। इस भजन का भावार्थ यह सिखाता है कि जीवन की हर विषम परिस्थिति में यदि माँ का स्मरण किया जाए और उनके चरणों में पूरी श्रद्धा से प्रार्थना की जाए, तो सभी संकट स्वतः ही टल जाते हैं और मन को असीम शांति प्राप्त होती है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

पंजाबी और हिंदी देवी भजन परंपरा में ममता रौत की गायकी का एक विशिष्ट स्थान है। इस भजन की विशेषता इसके सरल शब्द, कर्णप्रिय संगीत और हृदय को स्पर्श करने वाली धुन में निहित है। नवरात्र के पावन दिनों में, जागरण के दौरान अथवा माता की चौकी में इस भजन को गाने से वातावरण पूरी तरह से ऊर्जावान और भक्तिमय हो जाता है। यह भजन सुनने वालों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और मानसिक तनाव को दूर करता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

देवी गीतों और भजनों का सस्वर पाठ या श्रवण करने से विशेष मानसिक शांति मिलती है।

  • उपयुक्त समय: ब्रह्म मुहूर्त में, संध्या वंदन के समय, अथवा नवरात्रि के नौ दिनों में विशेष रूप से।
  • स्थान: घर के पूजा गृह में, मंदिर में, माता की चौकी या जागरण के पावन अवसर पर।
  • विधि: माता के सम्मुख घी का अखंड दीप प्रज्वलित कर, लाल पुष्प अर्पित करके इस भजन का भावपूर्ण गान या श्रवण करना चाहिए।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन हिन्दू धर्म की मूल शक्ति, आदिशक्ति माँ दुर्गा, माता वैष्णो देवी, शेरावाली माँ और महालक्ष्मी-महाकाली-महासरस्वती के संयुक्त स्वरूप को समर्पित है। सनातन धर्म में आदि शक्ति को जगत की जननी माना गया है, जो अपने बालकों (भक्तों) के सभी दुखों का हरण करती हैं। ममता रौत जैसी प्रतिष्ठित लोक और भजन गायिकाएं इस परंपरा को जीवंत रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
बुलावा निमंत्रण / पुकार भगवान द्वारा भक्त को अपनी ओर आकर्षित करना
रहमत कृपा / करुणा देवी की अहेतुकी कृपा जो भक्तों पर बरसती है
पनाह शरण / आश्रय संसार के दुखों से मुक्ति पाने का एकमात्र स्थान
दाती देने वाली / दाता सबकी मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली माँ

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

भजन की शुरुआत इस विचार से होती है कि जब भी माँ का बुलावा आता है, भक्त का मन उनके दरबार की ओर खींच चला जाता है। पर्वतों पर बसा माँ का भवन इस बात का प्रतीक है कि उच्च आध्यात्मिक अवस्था को प्राप्त करने के लिए भौतिक सुखों से ऊपर उठना पड़ता है। जब भक्त अपनी झोली फैलाकर माता के द्वार पर पहुंचता है, तो उसे संसार के सारे दुखों से मुक्ति मिल जाती है और वह पूर्णतः निर्मल हो जाता है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

देवी गीतों के साथ माँ दुर्गा के बीज मंत्रों का जाप करने से साधना का फल कई गुना बढ़ जाता है:

"ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे"

"या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।"

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम तेरा बुलावा आता है (Tera Bulawa Aata Hai)
गायिका ममता रौत (Mamta Raut)
संगीत लेबल / चैनल श्रद्धा भक्ति सागर - BhaktiLok
भाषा हिंदी / पंजाबी देवी भजन
मुख्य विषय / थीम माँ दुर्गा / वैष्णो देवी भक्ति और पुकार
मुख्य भाव (Bhava) समर्पण, श्रद्धा, विरह और प्रेम
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, जागरण, माता की चौकी, संध्या आरती

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस प्रसिद्ध भजन को लोकप्रिय गायिका ममता रौत (Mamta Raut) ने अपनी मधुर आवाज में गाया है।

यह भजन मुख्य रूप से जगत जननी माँ आदिशक्ति, शेरावाली माता और माँ वैष्णो देवी को समर्पित है।

इस भजन को नवरात्रि के दिनों में, माता के जागरण के समय, अथवा सुबह और शाम की पूजा के वक्त सुनना अत्यंत फलदायी और आनंददायक होता है।

यह भजन सिखाता है कि जब भक्त सच्चे मन से माँ को पुकारता है, तो माँ की कृपा से उसके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और उसे दिव्य शांति मिलती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री पारंपरिक भक्ति साहित्य, लोक संगीत परंपरा और श्रोताओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को प्रामाणिक भजन लिरिक्स और उसका आध्यात्मिक अर्थ प्रदान करना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक देवी भजन एवं लोक संगीत परंपरा
  • श्रद्धा भक्ति सागर एल्बम संग्रह
  • देवी भागवत पुराण एवं सनातन भक्ति ग्रंथ

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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