Punjabi Devi Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

Roothna

पढ़ें मैया ना मुझसे रूठना | Maiya Na Mujhse Roothna I Devi Bhajan MONICA ARORA - Bhaktilok का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्या

SEO Title: मैया ना मुझसे रूठना | Maiya Na Mujhse Roothna Devi Bhajan Lyrics & Meaning - Bhaktilok

Meta Title: Maiya Na Mujhse Roothna Bhajan Lyrics - Monica Arora | Bhaktilok

Meta Description: जगत जननी आदिशक्ति को समर्पित 'मैया ना मुझसे रूठना' देवी भजन (मोनिका अरोड़ा) के संपूर्ण लिरिक्स, हिंदी भावार्थ, और आध्यात्मिक महत्व को विस्तार से पढ़ें।

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सनातन संस्कृति और भक्ति परंपरा में आदिशक्ति माँ दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती का स्थान सर्वोपरि है। जब एक साधक अपनी समस्त चिंताओं और अहंकार को त्यागकर माता के चरणों में समर्पण करता है, तो उसके जीवन के समस्त अंधकार स्वतः ही छंट जाते हैं। प्रसिद्ध गायिका मोनिका अरोड़ा की मधुर वाणी में गाया गया लोकप्रिय देवी भजन "मैया ना मुझसे रूठना | Maiya Na Mujhse Roothna" इसी अनन्य भक्ति, विरह, और प्रेम का एक अत्यंत सुंदर और मार्मिक प्रतीक है। यह भजन केवल एक संगीत रचना नहीं है, बल्कि यह एक भक्त की अपनी जगत जननी के प्रति वह पुकार है जिसमें वह हर परिस्थिति में माँ का आँचल थामे रहने की विनती करता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पावन भजन के संपूर्ण बोल (Lyrics), सरल हिंदी भावार्थ, गायन शैली, और इसके आध्यात्मिक महत्व का गहन विश्लेषण करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें:


मखड़ा (Refrain):
मैया ना मुझसे रूठना, ओ मेरी मैया ना मुझसे रूठना,
तेरे चरणों की धूल, मैया मेरी पूजा-पाठ!
मैया ना मुझसे रूठना, ओ मेरी मैया ना मुझसे रूठना...

अंतरा 1:
दुनिया के मेले में मैया, मैं अकेला रह गया,
तेरी ममता की छाया बिन, मैं तिनका बह गया।
अब तो संभाल ले मुझको ओ शेरावाली,
तेरे दर पे आई है ये भक्तों की टोली।
मैया ना मुझसे रूठना...

अंतरा 2:
रूप अनेक तेरे, महिमा अपार है,
तू ही तो नैया और तू ही पतवार है।
भटक ना जाऊँ कहीं इस भवसागर में,
थाम ले हाथ मेरा इस सूने सफर में।
मैया ना मुझसे रूठना...

अंतरा 3:
पाप किए होंगे मैंने, तू क्षमा कर देना,
बच्चा समझकर मेरी भूल को भुला देना।
माँ और बेटे का रिश्ता है पुराना,
अब मुझे छोड़कर कहीं और ना जाना।
मैया ना मुझसे रूठना, ओ मेरी मैया ना मुझसे रूठना...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन एक साधारण भक्त और जगत जननी के बीच के अत्यंत पवित्र और वात्सल्यपूर्ण संबंध को दर्शाता है। भजन की हर पंक्ति में विनय और आत्मीयता कूट-कूट कर भरी है। भक्त माता से प्रार्थना करता है कि हे मैया! मुझसे कभी भी रुष्ट मत होना, क्योंकि संसार के इस विशाल मेले में यदि किसी का सहारा छूट जाए तो काम चल सकता है, परंतु यदि माँ का आशीर्वाद और उसकी छत्रछाया उठ जाए तो जीवन अर्थहीन और दिशाहीन हो जाता है।

भजन के अंतरा में भक्त अपनी कमजोरियों और भूल-चूक को स्वीकार करते हुए कहता है कि मनुष्य होने के नाते मुझसे बहुत से पाप और गलतियां हुई होंगी, किंतु हे करुणा की सागर माँ! तू तो ममता की मूरत है, अतः मेरे अपराधों को क्षमा कर मुझे अपनी शरण में ले ले। यह भावार्थ साधक के हृदय में अहंकार को समाप्त कर विनम्रता और भक्ति का संचार करता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

देवी गीतों और भजनों की परंपरा में पंजाबी देवी भजन अपनी ऊर्जा, लय और भावुकता के लिए जाने जाते हैं। मोनिका अरोड़ा द्वारा स्वरबद्ध यह भजन विशेष रूप से जागरण, चौकी, और नवरात्रि के दिनों में अत्यधिक चाव से सुना जाता है। इसका मुख्य विषय मातृत्व, शरणागति और क्षमादान है। सनातन शास्त्रों जैसे देवीभागवत पुराण में उल्लेख मिलता है कि जो भक्त सच्चे मन से जगदम्बा की शरण में जाता है, उसे भवसागर से तरने में अधिक कठिनाई नहीं होती।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस प्रकार के करुणामयी और समर्पण से भरे भजनों को प्रातःकाल ब्रह्म बेला में अथवा संध्याकालीन बेला में दीप प्रज्ज्वलित करने के पश्चात सुनना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसे नवरात्रि के नौ दिनों में माता की चौकी के समय, माता के जागरण में, या नियमित पूजा के समय सस्वर गाया जा सकता है। इसे गाते समय मन में माता के दिव्य स्वरूप का ध्यान रखना चाहिए।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन की प्रमुख आराध्य देवी आदिशक्ति दुर्गा (शेरावाली, महामाया) हैं। सनातन धर्म में माता को संपूर्ण ब्रह्मांड की जननी माना गया है। विभिन्न संतों और कवियों ने समय-समय पर माँ की महिमा का गान किया है, जिससे यह परंपरा आज भी जीवंत बनी हुई है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

आधुनिक लोक संगीत और पारंपरिक देवी गीतों के संलयन से तैयार यह रचना समकालीन भक्ति संगीत का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। मोनिका अरोड़ा की सुरीली और भावपूर्ण आवाज ने इस रचना में प्राण फूंक दिए हैं, जिससे श्रोता मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सरल हिंदी और पंजाबी भाषी लोक शैलियों के सहज मिश्रण में रचा गया है। इसमें अनुप्रास और उपमा अलंकारों का सुंदर प्रयोग किया गया है जैसे "भवसागर", "ममता की छाया", और "नैया और पतवार", जो इसे साहित्यिक दृष्टि से भी समृद्ध बनाते हैं।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

1. पूर्ण शरणागति (Surrender): भक्त को हमेशा ईश्वर के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित रहना चाहिए।
2. क्षमा की प्रार्थना: अपनी गलतियों को स्वीकार करना और क्षमा मांगना सबसे बड़ा गुण है।
3. माता पर अटूट विश्वास: जीवन की कठिनाइयों में कभी भी माता का दामन नहीं छोड़ना चाहिए।
4. अहंकार का त्याग: जीवन में विनम्रता ही भगवान को प्राप्त करने का सबसे सरल मार्ग है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ संदर्भ / प्रसंग
रूठना नाराज होना या मुँह मोड़ना मैया से सदा अनुकंपा बनाए रखने की विनती
भवसागर यह संसार रूपी दुखद सागर जीवन के संघर्षों और मोह-माया से मुक्ति
पतवार नाव खेने का साधन जीवन की नैया को सही दिशा देने वाली माँ
ममता माँ का असीम प्रेम और वात्सल्य भक्तों के प्रति माता का सहज स्वभाव

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"मैया ना मुझसे रूठना..." - इस पंक्ति में साधक अपनी कमजोरी और माता के प्रति अनन्य प्रेम को व्यक्त करते हुए कहता है कि हे जगदम्बा! आप मुझसे कभी रुष्ट न होना।
"तेरे चरणों की धूल, मैया मेरी पूजा-पाठ!" - इसका अर्थ है कि मेरे लिए बड़े-बड़े अनुष्ठानों से बढ़कर माता के चरणों की रज (धूल) ही सर्वस्व है।
"तू ही तो नैया और तू ही पतवार है..." - संसार रूपी समंदर में हमारी जिंदगी की नाव को पार लगाने वाली केवल आप ही हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के पाठ या श्रवण के साथ निम्नलिखित देवी मंत्र का स्मरण करना अत्यंत मंगलकारी होता है:
"या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥"
साथ ही आप श्री दुर्गा चालीसा का नियमित पाठ कर सकते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम मैया ना मुझसे रूठना (Maiya Na Mujhse Roothna)
आराध्य देवी आदिशक्ति माँ दुर्गा / शेरावाली
गायिका मोनिका अरोड़ा (Monica Arora)
भाषा हिंदी / पंजाबी मिश्रित
मुख्य विषय भक्ति, शरणागति, वात्सल्य और क्षमा
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, माता की चौकी, जागरण, संध्या आरती

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

'मैया ना मुझसे रूठना' भजन की गायिका कौन हैं?

इस प्रसिद्ध देवी भजन को लोकप्रिय गायिका मोनिका अरोड़ा (Monica Arora) ने अपनी मधुर आवाज में गाया है।

यह भजन किस देवी को समर्पित है?

यह भजन जगत जननी आदिशक्ति माँ दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती के संयुक्त स्वरूप शेरावाली माता को समर्पित है।

इस भजन को किस अवसर पर सुनना सबसे अच्छा माना जाता है?

इसे नवरात्रि के दिनों में, माता के जागरण, चौकी या घर पर होने वाली दैनिक संध्या पूजा के समय सुनना अत्यंत फलदायी होता है।

क्या इस भजन को सुनने से मानसिक शांति मिलती है?

हाँ, इस भजन के भावपूर्ण शब्द और संगीत मन को शांत करते हैं तथा जीवन की चिंताओं से मुक्ति दिलाते हैं।

क्या इस भजन के बोल हिंदी में उपलब्ध हैं?

हाँ, इस लेख में संपूर्ण भजन के बोल देवनागरी लिपि में अर्थ सहित दिए गए हैं।

माता को प्रसन्न करने का सबसे सरल मार्ग क्या है?

सच्चे मन से अहंकार का त्याग करके माता के चरणों में शरणागत होना ही उन्हें प्रसन्न करने का सबसे सरल मार्ग है।

क्या इस भजन को सुबह के समय सुना जा सकता है?

बिल्कुल, ब्रह्म मुहूर्त या प्रातःकाल में ऐसे भक्ति गीतों को सुनने से पूरा दिन सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रहता है.

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

भजन का मुख्य संदेश यह है कि भक्त को हर परिस्थिति में माता का आंचल थामे रखना चाहिए और अपनी भूलों के लिए क्षमा मांगनी चाहिए।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री सनातन भक्ति परंपरा, लोक संगीत और देवी स्तुति के ग्रंथों पर आधारित है। इसे पाठकों की आध्यात्मिक रुचि और प्रामाणिक जानकारी को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • देवीभागवत पुराण - महर्षि वेद व्यास रचित
  • पारंपरिक लोक देवी गीत एवं भजन संग्रह
  • भक्ति संगीत परंपरा एवं आधुनिक ऑडियो रिलीज अभिलेख

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 10 Oct 2026

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