Punjabi Devi Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

सुखी संसार हो (Sukhi Sansar Ho)

सुखी संसार हो माता रानी भजन के बोल, अर्थ और महत्व पढ़ें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित समर्पित विशेष देवी गीत।

Devi Bhajan Devi Geet Punjabi Devi Bhajan

सुखी संसार हो | Sukhi Sansar Ho | Mata Rani Bhajan | Special Devi Geet | Amba Bhakti-Bhaktilok

अद्यतन: 2026 | भक्तिलोक विशेष सामग्री | सनातन परंपरा एवं देवी उपासना

आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती के अनंत स्वरूपों को समर्पित यह अत्यंत पावन भजन "सुखी संसार हो | Sukhi Sansar Ho | Mata Rani Bhajan | Special Devi Geet" जगत जननी जगदम्बा की असीम कृपा, करुणा और महिमा का अद्भुत गान करता है। सनातन वैदिक संस्कृति में स्त्री शक्ति को सम्पूर्ण चराचर जगत का आदि कारण, पोषणकर्ता और संहारकर्ता माना गया है। जब भक्त माता के दरबार में अपनी झोली फैलाता है और सम्पूर्ण विश्व के कल्याण की प्रार्थना करता है, तो इसे भारतीय दर्शन में 'वसुधैव कुटुंबकम' और 'लोकसंग्रह' की भावना का सर्वोच्च रूप कहा गया है। इस भजन की प्रत्येक पंक्ति साधक के अंतःकरण में मातृत्व, वात्सल्य, भक्ति और आध्यात्मिक तेज का संचार करती है। पारंपरिक संगीत और पंजाबी देवी भजन शैली की मिठास से ओत-प्रोत यह गीत माता रानी के चरणों में अटूट विश्वास और समर्पण की पावन सरिता बहाता है। इसे सुनने और गुननाने से मन के सभी संताप दूर होते हैं और साधक के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि एवं आरोग्य का वास होता है।

देवी भागवत पुराण और मार्कण्डेय पुराण (दुर्गा सप्तशती) के अनुसार, भगवती दुर्गा की आराधना न केवल व्यक्तिगत मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है, बल्कि संपूर्ण संसार को संकटों से उबारने वाली है। इस विशेष देवी गीत में माता से केवल अपने लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण संसार की सुख-शांति और कल्याण की गुहार लगाई गई है, जो इसे एक उच्च कोटि का लोक-कल्याणकारी भजन बनाता है। नवरात्र के पावन अवसरों पर, जागरण में, अथवा दैनिक संध्या वंदन के समय इस भजन का स्मरण करने से घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। आइए, इस पावन भजन के संपूर्ण बोल, विस्तृत भावार्थ और आध्यात्मिक रहस्यों को शुद्ध उच्चारण व पूर्ण भक्ति भाव के साथ आत्मसात करें।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मुखड़ा (Refrain)

सुखी संसार हो, मेरा दातार हो,
मैया तेरे चरणों में मेरा प्यार हो।
सबकी झोली भर दे शेरावालिए,
जगत जननी तू सबका आधार हो॥

प्रथम अंतरा

ऊँचे परबत वाली मैया तेरा धाम है,
जो भी लेवे तेरा नाम उसका कल्याण है।
दुखियों के दुख तू ही पल में हरती है,
मैया तू तो झोली झटपट भरती है।
चरणों की धूल मेरा श्रृंगार हो,
सुखी संसार हो, मेरा दातार हो...

द्वितीय अंतरा

लाल चुनरिया तेरे अंग विराजे है,
हाथों में खड्ग और त्रिशूल साजे है।
सिंह सवारी कर के मैया तू आती है,
भक्तों के संकट तू दूर भगाती है।
अंग-अंग मैया तेरा चमत्कार हो,
सुखी संसार हो, मेरा दातार हो...

तृतीय अंतरा

बच्चे तेरे हम हैं तू हमारी माता है,
तेरे बिना जग में कौन हमारा नाता है।
सुख दे या दुख दे तेरी रजा मानूँ मैं,
तुझको ही अपना कुल देवता जानूँ मैं।
जीवन का हर पल तुझको समर्पित यार हो,
सुखी संसार हो, मेरा दातार हो...

अंतिमा / समापन

'अंबा भक्ति' गाए महिमा तुम्हारी,
दर्शन दे दो हमको ओ महतारी।
भक्तिलोक पर गूंजे जयकारा तेरा,
दूर हो अंधेरा सदा हो सवेरा।
सबका भला हो, सबका उद्धार हो,
सुखी संसार हो, मेरा दातार हो॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन के माध्यम से रचनाकार ने अत्यंत सरल, सहज और लोक-सुलभ भाषा में माँ अम्बे के प्रति अपनी अनन्य भक्ति को प्रकट किया है। भजन का केंद्रीय भाव 'सर्वत्र सुख और शांति' की कामना करना है। साधक माता से प्रार्थना करता है कि हे संपूर्ण सृष्टि के पालनहार और दाता! यह संसार सुखी हो और मेरा मन सदैव आपके श्रीचरणों में अनुरक्त रहे। सनातन परंपरा में भगवान को अपना सर्वस्व मानना और उनके चरणों में प्रीति रखना ही सच्ची भक्ति है।

प्रथम अंतरे में ऊँचे पर्वतों पर विराजमान माँ वैष्णो देवी या अन्य शक्तिपीठों का स्मरण किया गया है। मान्यता है कि जो भी सच्चे मन से माता का स्मरण करता है, उसका कल्याण निश्चित है। मैया दुखों को हरने वाली और खाली झोली को भरने वाली है। द्वितीय अंतरे में माता के भव्य स्वरूप—लाल चुनरी, हाथों में त्रिशूल और खड्ग, तथा सिंह पर सवारी—का अत्यंत सजीव और सुंदर चित्रण किया गया है, जो साधक के मन में अदम्य साहस और निर्भीकता का संचार करता है। तृतीय अंतरे में भक्त और भगवान के अटूट वात्सल्य संबंध को दर्शाया गया है—'बच्चे तेरे हम हैं तू हमारी माता है'। अंत में, सम्पूर्ण मानवता के कल्याण की कामना करते हुए भजन का समापन होता है, जो इसे अत्यंत उदात्त और आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान करता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • लोक-कल्याण की भावना: यह भजन केवल व्यक्तिगत सुख की नहीं, बल्कि सम्पूर्ण संसार के सुखी होने (सुखी संसार हो) की कामना करता है।
  • भक्ति का सरल मार्ग: कठिन दार्शनिक प्रसंगों के बजाय सरल बोलों के माध्यम से माँ की महिमा का गुणगान किया गया है।
  • शक्ति उपासना का प्रतीक: देवी के रौद्र (खड्ग, त्रिशूल) और सौम्य (ममता, वात्सल्य) दोनों रूपों का सुंदर संतुलन प्रस्तुत किया गया है।
  • मानसिक शांति और ऊर्जा: इसके श्रवण मात्र से मन के भय, तनाव और नकारात्मक विचार दूर होते हैं तथा सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन देवी गीत को किसी भी समय सुना या गाया जा सकता है, परंतु इसकी पूर्ण आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करने के लिए निम्नलिखित नियमों का पालन किया जा सकता है:

🌅 ब्रह्ममुहूर्त एवं संध्याकाल

प्रातःकाल स्नान के पश्चात माता के सम्मुख दीप प्रज्वलित करके अथवा संध्या वंदन के समय इस भजन का गान करने से घर में सकारात्मकता आती है।

🌺 नवरात्र एवं विशेष उत्सव

चैत्र और शारदीय नवरात्र के नौ दिनों में, माता के चौकी-जागरण के दौरान तथा मंगलवार और शुक्रवार के विशेष पूजन में इसे सामूहिक रूप से गाना अत्यंत फलदायी माना गया है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन आदिशक्ति जगत जननी माँ दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती के संयुक्त स्वरूप 'माँ अम्बे' को समर्पित है। सनातन धर्म में शक्ति की उपासना को अद्वैत वेदांत और तांत्रिक परंपराओं दोनों में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। 'अंबा भक्ति' और 'भक्तिलोक' के बैनर तले रचित यह भजन पारंपरिक लोक धुनों और आधुनिक भक्ति संगीत का एक उत्कृष्ट संगम है, जो संतों और भक्तों की उस परंपरा को आगे बढ़ाता है जहाँ संगीत को ईश्वर प्राप्ति का सुगम मार्ग माना गया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

पंजाबी देवी भजन परंपरा में माता रानी के प्रति जो आत्मीयता और उल्लास दिखाई देता है, वही इस भजन की मूल पृष्ठभूमि है। पंजाब और उत्तर भारत के अंचलों में मैया को बेटी, बहन और माँ के रूप में देखने की अनूठी परंपरा रही है। इसी भावुक सांस्कृतिक परिवेश से उपजा यह गीत भक्तों के दिलों में सीधा उतर जाता है। रचनाकार ने आम जनमानस की भाषा का प्रयोग करते हुए माता और भक्त के बीच के उस अटूट रिश्ते को शब्दों में पिरोया है, जो किसी भी बंधन से परे है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल हिंदी और पंजाबी मिश्रित लोक शैली है, जिसे आसानी से समझा और गाया जा सकता है। काव्य की दृष्टि से इसमें अनुप्रास और रुचक लय का सुंदर प्रयोग हुआ है। 'सुखी संसार हो, मेरा दातार हो' जैसी पंक्तियों में आद्यांत तुकांतता (Rhyme) इसे संगीतबद्ध करने में अत्यंत सुगम बनाती है। उपमा और रूपक अलंकारों के प्रयोग से माता के स्वरूप का जो बिंब (Imagery) उभरता है, वह श्रोता को मंत्रमुग्ध कर देता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन केवल मनोरंजन या संगीत का साधन नहीं है, बल्कि एक गहरा जीवन दर्शन सिखाता है:

  • समष्टि कल्याण की भावना: अपना स्वार्थ छोड़कर संपूर्ण संसार के सुख की कामना करना ही सबसे बड़ा धर्म है।
  • समर्पण का भाव: सुख हो या दुख, जीवन की हर परिस्थिति में ईश्वर की रजा को स्वीकार करना सच्चा समर्पण है।
  • अहंकार का त्याग: यह विश्वास रखना कि इस संसार का पालनहार कोई और (माता) है, हमारे भीतर के अहंकार को समाप्त करता है।
  • संकटों में धैर्य: मैया के दरबार में शरण लेने से बड़े से बड़ा संकट टल जाता है, यह अटूट विश्वास हमें जीवन के संघर्षों से लड़ने की शक्ति देता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पद सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / भाव
दातार सबको देने वाला, पालनहार जो बिना माँगे सब कुछ प्रदान करता है (माता रानी)।
जगत जननी संसार की माता समस्त ब्रह्मांड को उत्पन्न करने वाली आदिशक्ति।
रजा इच्छा, मर्जी ईश्वर की हर परिस्थिति को स्वीकार करने का भाव।
महतारी माता, अम्बे वात्सल्य से परिपूर्ण माँ का संबोधन।
उद्धार कल्याण, मुक्ति दुखों और बंधनों से मुक्ति दिलाना।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"सुखी संसार हो, मेरा दातार हो, मैया तेरे चरणों में मेरा प्यार हो।"
इस पंक्ति में भक्त की दोहरी मनोकामना दिखाई देती है—पहला, संपूर्ण संसार सुखी हो और दूसरा, उसका अपना चित्त निरंतर माता के श्रीचरणों में प्रेम मग्न रहे। यही वैष्णव और शाक्त परंपरा का मूल मंत्र है जहाँ व्यक्तिगत भक्ति के साथ लोक-मंगल की कामना जुड़ी है।

"सुख दे या दुख दे तेरी रजा मानूँ मैं, तुझको ही अपना कुल देवता जानूँ मैं।"
यह अद्वैत और अनन्य समर्पण का शिखर है। भक्त कहता है कि हे माता! जीवन में सुख आए या दुख, मैं उसे आपका प्रसाद मानकर स्वीकार करूँगी/करूँगा। मैं संसार के अन्य आश्रय छोड़कर केवल आपको ही अपना सर्वस्व और कुलदेवी मानता/मानती हूँ।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं मंत्र | Related Mantra & Shlok

माता रानी की आराधना को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए इस भजन के साथ निम्नलिखित पौराणिक मंत्र का स्मरण अवश्य करना चाहिए:

"सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥"

(हे नारायणी! आप सभी प्रकार के मंगलों की भी मंगलदाता हैं, आप कल्याणकारी हैं, सभी पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली हैं, शरण में आए हुओं की रक्षा करने वाली और त्रिदृष्टि संपन्न गौरी हैं। आपको बारम्बार नमस्कार है।)

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम सुखी संसार हो (Sukhi Sansar Ho)
समर्पित देवी आदिशक्ति माँ दुर्गा / अम्बे मैया
संगीत शैली पंजाबी देवी भजन / लोक भक्ति गीत
मुख्य भाषा हिंदी एवं पंजाबी मिश्रित लोक भाषा
केंद्रीय भाव लोक-कल्याण, समर्पण और अनन्य भक्ति
उपयुक्त अवसर नवरात्र, माता का जागरण, संध्या वंदन
प्लेटफॉर्म भक्तिलोक (Bhaktilok.in)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन आदिशक्ति जगत जननी माँ दुर्गा और अम्बे भवानी के पावन स्वरूप को समर्पित है।

इस भजन को प्रातःकाल पूजा के समय, संध्या वंदन के दौरान, अथवा नवरात्र और माता के जागरण के विशेष अवसरों पर गाना सबसे उत्तम माना गया है।

इस भजन का मुख्य संदेश संपूर्ण संसार के कल्याण (सुखी संसार हो) की कामना करना और माता के चरणों में पूर्ण समर्पण रखना है।

हाँ, यह भजन पंजाबी देवी भजन परंपरा और लोक संगीत की शैली से प्रेरित है, जो उत्तर भारत में अत्यधिक लोकप्रिय है।

माता रानी के भजन से मन को शांति मिलती है, नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।

निश्चित रूप से! यह भजन माता की चौकी, कीर्तन और जागरण के लिए अत्यंत उपयुक्त और आनंददायक है।

यह भजन पारंपरिक लोक रचनाओं और 'अंबा भक्ति' परंपरा के संकलन पर आधारित है।

आप Bhaktilok.in की वेबसाइट पर जाकर देवी भजन, चालीसा, आरती और स्तोत्र खंड में ऐसे अनेक पावन भजन पढ़ सकते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस लेख को सनातन धर्म की शाक्त परंपरा, देवी भागवत पुराण के संदर्भों तथा लोक-भजन परंपरा के मानकों के अनुरूप सत्यापित किया गया है ताकि पाठकों को प्रामाणिक, शुद्ध और उच्च कोटि की भक्ति सामग्री प्राप्त हो सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • 1. दुर्गा सप्तशती (मार्कण्डेय पुराण एवं तांत्रिक संदर्भ)
  • 2. देवी भागवत पुराण - व्यास रचित महापुराण
  • 3. पारंपरिक भारतीय लोकगीत एवं पंजाबी देवी भजन संग्रह
  • 4. सनातन धर्म संस्कृति एवं भक्ति साहित्य कोष

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 14 Oct 2026

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