Parvati Stotram

आपकी सारी इच्छाएं पूरी कर देगा ये माता रानी का भजन | Mata Rani Bhajan | Jai Mata Di | Amba Bhakti-Bhaktilok

86 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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सनातन धर्म में शक्ति की उपासना का विशेष महत्व है। आदिशक्ति माँ दुर्गा, जिन्हें हम श्रद्धापूर्वक माता रानी, माँ अम्बा, जगदम्बा और भवानी के नाम से पुकारते हैं, वे समस्त सृष्टि की जननी और ऊर्जा का आदि स्रोत हैं। प्रस्तुत भजन "अम्बे तू है जगदम्बे काली" माता रानी की महिमा का एक ऐसा पावन गान है, जो भक्त के हृदय में अनन्य भक्ति, पूर्ण समर्पण और अगाध विश्वास का संचार करता है। इस भजन का मुख्य स्वर 'शरणागति' और 'करुणा' का है। जब कोई भक्त अपने सांसारिक कष्टों से व्याकुल होकर पूर्ण श्रद्धा के साथ इस भजन का गायन या श्रवण करता है, तो माता रानी की असीम अनुकंपा से उसके जीवन की समस्त बाधाएं दूर हो जाती हैं और उसकी सभी सात्विक मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यह भजन न केवल एक प्रार्थना है, बल्कि यह जीवात्मा और परमात्मा (शक्ति) के बीच के उस अटूट और निर्मल संबंध को भी रेखांकित करता है जो माँ और संतान के बीच होता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ माँ अम्बा का पावन भजन ॥

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली।
तेरे ही गुण गाएं भारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥

तेरे भक्त जनों पर मैया, भीर पड़ी है भारी।
दानव दल पर टूट पड़ो माँ, करके सिंह सवारी॥
सौ-सौ सिंहों से भी बलशाली, अष्ट भुजाओं वाली।
दुष्टों को तू ही संहारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥

माँ बेटे का है इस जग में, बड़ा ही निर्मल नाता।
पूत कपूत सुने हैं पर ना, माता सुनी कुमाता॥
सब पर करुणा बरसाने वाली, अमृत रस बरसाने वाली।
दुखियों के दुखड़े निवारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥

नही मांगते धन और दौलत, न चांदी न सोना।
हम तो मांगें तेरे चरणों में, एक छोटा सा कोना॥
सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली।
सदा भक्तों की नैया तारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस पावन भजन का भावार्थ अत्यंत गहन और हृदयस्पर्शी है। प्रथम पंक्तियों में भक्त माँ के विविध रूपों—अम्बा (जगत जननी), जगदम्बा (सृष्टि की स्वामिनी), काली (दुष्टों का संहार करने वाली) और दुर्गा (दुर्गति का नाश करने वाली)—का स्मरण करते हुए उनकी आरती उतारते हैं। यहाँ 'भारती' शब्द संपूर्ण भारतवर्ष या स्वयं ज्ञान की देवी सरस्वती का प्रतीक है, जो माँ की स्तुति कर रही हैं।

आगे की पंक्तियों में भक्त माँ से प्रार्थना करते हैं कि जब-जब उनके जीवन में संकट रूपी दानव अट्टहास करते हैं, तब-तब माँ अपने सिंह पर सवार होकर आती हैं। माँ की अष्टभुजाएं और सौ सिंहों का बल इस बात का प्रतीक है कि माँ के पास असीमित शक्ति है और वे अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहती हैं।

भजन का सबसे भावुक अंश माँ और संतान के संबंध को दर्शाता है। "पूत कपूत सुने हैं पर ना, माता सुनी कुमाता" के माध्यम से भक्त स्वीकार करता है कि संतान से भूल या अपराध हो सकते हैं, परंतु माँ कभी भी अपनी संतान का अहित नहीं सोच सकती। वह सदैव करुणा और अमृत रस बरसाने वाली हैं। अंत में, भक्त सांसारिक भौतिक सुखों (सोना, चांदी, धन) का त्याग कर केवल माँ के चरणों में स्थान मांगता है, क्योंकि माँ के चरणों की शरण ही मोक्ष और परम शांति का मार्ग है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल सुर और ताल का संगम नहीं है, बल्कि यह एक उच्च कोटि की आध्यात्मिक साधना है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • अनन्य शरणागति: यह भजन भक्त को अहंकार शून्य कर माँ के चरणों में पूर्ण समर्पण करना सिखाता है।
  • भय से मुक्ति: माँ के सिंहवाहिनी और अष्टभुजाधारी रूप का स्मरण करने से साधक के भीतर का भय समाप्त होता है और आत्मविश्वास जाग्रत होता है।
  • वात्सल्य भाव: यह भजन ईश्वर को एक कठोर शासक के रूप में नहीं, बल्कि एक करुणामयी माँ के रूप में प्रस्तुत करता है, जिससे भक्त का ईश्वर के प्रति प्रेम और सघन हो जाता है।
  • इच्छा पूर्ति का साधन: निष्काम भाव से गाया गया यह भजन भक्त की सभी सात्विक इच्छाओं को पूरा करने की क्षमता रखता है, क्योंकि माँ अपने शरणागत को कभी रिक्त हस्त नहीं लौटातीं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि माता रानी की भक्ति के लिए प्रत्येक क्षण शुभ है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष नियम और समय अत्यधिक फलदायी माने गए हैं:

  • शुभ समय: इस भजन का गायन प्रातःकाल सूर्योदय के समय अथवा संध्या आरती के समय करना सर्वोत्तम माना जाता है।
  • विशेष अवसर: चैत्र और शारदीय नवरात्रि, प्रत्येक मास की दुर्गाष्टमी, मंगलवार और शुक्रवार के दिन इस भजन का पाठ करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
  • विधि: स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। माता रानी की प्रतिमा या चित्र के समक्ष घी का दीपक प्रज्वलित करें। धूप-दीप दिखाकर पूरे परिवार के साथ मिलकर करताल (ताली) बजाते हुए इस भजन का सस्वर गायन करें। गायन के समय मन में पूर्ण श्रद्धा और विश्वास होना अनिवार्य है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन आदिशक्ति माँ दुर्गा को समर्पित है। माँ दुर्गा हिंदू धर्म में शक्ति, करुणा, न्याय और संहार की देवी हैं। वे शिव की शक्ति हैं और संपूर्ण ब्रह्मांड का संचालन करती हैं। इस भजन की रचना पारंपरिक लोक-भक्ति धारा के अंतर्गत हुई है। भारत के अनेक संतों और भक्तों ने समय-समय पर माँ के इस रूप की स्तुति की है। यह भजन सदियों से मौखिक परंपरा और सामूहिक संकीर्तन के माध्यम से जन-जन के कंठ में बसा हुआ है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस भजन की पृष्ठभूमि अत्यंत प्राचीन और लोक-संस्कृति से जुड़ी है। जब भारत में विदेशी आक्रांताओं और आसुरी शक्तियों का प्रभाव बढ़ रहा था, तब जनमानस में साहस और धर्म की रक्षा का भाव जगाने के लिए शक्ति उपासना पर बल दिया गया। यह भजन उसी कालखंड की देन माना जाता है, जहाँ 'दानव दल' का अर्थ केवल पौराणिक राक्षस नहीं, बल्कि समाज में व्याप्त बुराइयां, अधर्म और अत्याचार भी हैं। माँ दुर्गा का यह आह्वान समाज को संगठित और निर्भय बनाने के उद्देश्य से किया गया था।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें ब्रजभाषा और अवधी के शब्दों का सुंदर सम्मिश्रण है। इसकी काव्य शैली 'गेय' (गाने योग्य) है। इसमें प्रयुक्त अलंकार और रूपक अत्यंत प्रभावशाली हैं। जैसे "सिंह सवारी" और "अष्ट भुजाओं वाली" माँ के विराट और शक्तिशाली स्वरूप का सजीव चित्रण करते हैं। भजन का छंद और लय ऐसा है कि इसे सुनते ही मन स्वतः ही भक्ति रस में डूब जाता है और पैर थिरकने लगते हैं।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें कई महत्वपूर्ण जीवन सीख देता है:

  • धैर्य और विश्वास: जीवन में कितनी भी बड़ी विपत्ति ('भीर पड़ी है भारी') क्यों न आए, हमें अपना विश्वास नहीं खोना चाहिए। ईश्वर हमारी रक्षा अवश्य करेंगे।
  • निस्वार्थ भाव: सच्ची भक्ति में सौदेबाजी नहीं होती। हमें ईश्वर से धन-दौलत के बजाय उनके चरणों में स्थान (सद्बुद्धि और शांति) मांगना चाहिए।
  • सकारात्मकता: माँ दुर्गा द्वारा दुष्टों का संहार इस बात का प्रतीक है कि अंततः बुराई पर अच्छाई की ही विजय होती है। हमें अपने भीतर के विकारों (काम, क्रोध, लोभ, मोह) का नाश करने का प्रयास करना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
भीर संकट, विपत्ति, भारी कष्ट भक्तों के जीवन में आने वाली सांसारिक और आध्यात्मिक बाधाएं।
दानव दल राक्षसों का समूह नकारात्मक ऊर्जा, आसुरी प्रवृत्तियां और जीवन की कठिनाइयां।
कुमाता बुरी माता वह माँ जो अपनी संतान का अहित करे (जो कि असंभव माना गया है)।
नैया तारती नाव को पार लगाना भवसागर (संसार चक्र) से मुक्ति दिलाना या मोक्ष प्रदान करना।
भारती देवी सरस्वती / भारतवर्ष ज्ञान और संपूर्ण सृष्टि द्वारा माँ की स्तुति करना।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

पंक्ति 1: "अम्बे तू है जगदम्बे काली..."
हे माँ अम्बे! आप ही संपूर्ण जगत की जननी हैं, आप ही महाकाली हैं और आप ही विघ्न-बाधाओं को हरने वाली माँ दुर्गा हैं। हम सभी श्रद्धापूर्वक आपकी आरती उतारते हैं और संपूर्ण सृष्टि आपके गुणों का गान करती है।

पंक्ति 2: "तेरे भक्त जनों पर मैया..."
हे माता! जब भी आपके भक्तों पर कोई भारी संकट आता है, तो आप अपने वाहन सिंह पर सवार होकर आती हैं और उन संकट रूपी दानवों का समूल नाश कर देती हैं। आपकी अष्टभुजाएं और असीमित बल भक्तों को अभय प्रदान करते हैं।

पंक्ति 3: "माँ बेटे का है इस जग में..."
इस संसार में माता और पुत्र का संबंध सबसे पवित्र और निस्वार्थ होता है। पुत्र भले ही अपने कर्तव्यों से विमुख हो जाए (कपूत बन जाए), परंतु माता कभी अपनी संतान के प्रति स्नेह कम नहीं करती (कुमाता नहीं बनती)। आप सदैव अपने भक्तों पर करुणा की वर्षा करती हैं।

पंक्ति 4: "नही मांगते धन और दौलत..."
हे माँ! हमें इस नश्वर संसार के भौतिक सुख-साधन जैसे सोना, चांदी या धन-दौलत नहीं चाहिए। हमारी केवल यही अभिलाषा है कि हमें आपके श्रीचरणों में सदैव के लिए स्थान मिल जाए, क्योंकि आप ही हमारी लाज बचाने वाली और जीवन रूपी नौका को पार लगाने वाली हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के साथ माता रानी के इस सिद्ध मंत्र का जाप करने से भजन का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है:

॥ नवार्ण मंत्र ॥

"ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे"

अर्थ: हे महासरस्वती (ऐं), हे महालक्ष्मी (ह्रीं), हे महाकाली (क्लीं)! आपको नमस्कार है। चामुंडा देवी, मेरी बुद्धि और चेतना को जाग्रत करें और मुझे अज्ञान के अंधकार से मुक्त करें।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम अम्बे तू है जगदम्बे काली (Mata Rani Bhajan)
समर्पित देवी-देवता माँ अम्बा, माँ दुर्गा, माँ काली
मुख्य भाव वात्सल्य, शरणागति, करुणा, अनन्य भक्ति (Bhakti Bhava)
भाषा सरल हिंदी (खड़ी बोली)
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, दुर्गा पूजा, मंगलवार, शुक्रवार, संध्या आरती
आध्यात्मिक लाभ मनोकामना पूर्ति, मानसिक शांति, भय से मुक्ति, सकारात्मक ऊर्जा का संचार

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

हाँ, ऐसी पारंपरिक मान्यता है कि जब कोई भक्त पूर्ण श्रद्धा, निष्काम भाव और शुद्ध अंतःकरण से इस भजन का श्रवण या गायन करता है, तो माता रानी की कृपा से उसकी सभी सात्विक और कल्याणकारी इच्छाएं अवश्य पूरी होती हैं।

इस भजन को गाने का सबसे उत्तम समय संध्याकाल की आरती का समय है। इसके अतिरिक्त प्रातःकाल की पूजा के समय भी इसका गायन अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है।

इसका अर्थ है कि पुत्र (संतान) अपनी अज्ञानता या भूलवश गलत राह पर जा सकता है या माता-पिता के प्रति अपने कर्तव्यों में चूक कर सकता है, परंतु एक माँ कभी भी अपनी संतान के प्रति दुर्भावना नहीं रखती। उसका हृदय सदैव करुणा से भरा रहता है।

अनिवार्य तो नहीं, परंतु नवरात्रि के पावन दिनों में इस भजन का पाठ करना अत्यंत फलदायी और शुभ माना जाता है। यह भक्तों के बीच सबसे लोकप्रिय भजनों में से एक है।

इस भजन में 'भारती' शब्द के दो मुख्य अर्थ हैं—पहला, विद्या और वाणी की देवी माँ सरस्वती, जो स्वयं आदिशक्ति की स्तुति कर रही हैं; और दूसरा, भारतवर्ष के समस्त निवासी (भक्तजन)।

हाँ, इस भजन की मधुर धुन और सकारात्मक शब्द मस्तिष्क में एंडोर्फिन का स्राव बढ़ाते हैं, जिससे तनाव कम होता है, मन शांत होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

बिल्कुल, इसकी भाषा अत्यंत सरल और सुबोध है। बच्चों को यह भजन सिखाने से उनके भीतर अच्छे संस्कार, ईश्वर के प्रति श्रद्धा और नैतिक मूल्यों का विकास होता है।

इसका मुख्य संदेश यह है कि सांसारिक सुख क्षणभंगुर हैं। सच्ची शांति और मुक्ति केवल ईश्वर (माता रानी) के चरणों की शरण में जाने से ही प्राप्त हो सकती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख सनातन धर्म की समृद्ध भजन परंपरा और लोक-चेतना को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। भजन "अम्बे तू है जगदम्बे काली" सदियों से भारतीय परिवारों में गाया जाने वाला एक अत्यंत प्रतिष्ठित और जाग्रत भजन है। इस लेख में दी गई व्याख्या, शब्दार्थ और आध्यात्मिक संदेश भक्तों को इस भजन के अंतर्निहित अर्थ को समझने में मदद करेंगे। यह सामग्री पूर्णतः प्रामाणिक स्रोतों, पारंपरिक मान्यताओं और शास्त्रीय दृष्टिकोण के समन्वय से तैयार की गई है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री — भद्रकाली और शक्ति संप्रदाय के पारंपरिक ग्रंथों के संदर्भ सहित व्याख्या।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत पुराण: माँ दुर्गा की महिमा और उनके विभिन्न रूपों का विस्तृत वर्णन।
  • श्री दुर्गा सप्तशती: देवी के चरित्र, दानव संहार और भक्तों की रक्षा के प्रसंग।
  • पारंपरिक लोक भजन संग्रह: सदियों से गाए जा रहे पारंपरिक देवी गीतों का संकलन।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 27 Sep 2026

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