भगवान शिव के परम भक्त और साधक के लिए "शिव डमरू वाला" भजन एक दिव्य अनुभव है। विपिन सचदेवा की मधुर आवाज़ में गाया गया यह भजन देवादिदेव महादेव के डमरू की उस ध्वनि का आह्वान करता है, जो सृष्टि के सृजन और संहार का आधार है। सोमवार के दिन विशेष रूप से गाए जाने वाले इस भजन में शिव के वैराग्य, उनकी भस्म आरती, और उनके डमरू की गूँज का सजीव चित्रण है। यह भजन न केवल कानों को प्रिय लगता है, बल्कि मन को सांसारिक मोह-माया से मुक्त कर शिव की अनंत चेतना में लीन करने की शक्ति रखता है। शिव भक्ति का अर्थ ही है स्वयं के भीतर के अहंकार का नाश करना, और यह भजन उसी मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
शिव डमरू वाला, शिव डमरू वाला,
मेरा भोला है डमरू वाला, शिव डमरू वाला...
कैलाश पर्वत पर डेरा जमाया,
गले में सर्पों का हार सजाया,
जटाओं में गंगा को जिसने बसाया,
मेरा भोला है डमरू वाला...
माथे पे चंदा, गले में है माला,
विष का प्याला उसने खुद ही संभाला,
भक्तों के संकट को पल में मिटाया,
मेरा भोला है डमरू वाला...
डमरू की धुन पे दुनिया ये नाचे,
दुख-दर्द सारे हो जाते हैं पीछे,
शिव की शरण में जो भी है आया,
मेरा भोला है डमरू वाला...
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस भजन का भावार्थ शिव की सर्वशक्तिमान सत्ता को समर्पित है। "शिव डमरू वाला" का अर्थ है वह शक्ति जो ब्रह्मांड की लय (Rhythm) को नियंत्रित करती है। डमरू की ध्वनि 'नाद ब्रह्म' का प्रतीक है। भजन की पंक्तियाँ बताती हैं कि महादेव कैलाश पर वास करते हुए भी अपने भक्तों के हृदय में निवास करते हैं। विष का प्याला पीना उनके परोपकारी स्वभाव को दर्शाता है, जहाँ वे जगत के कल्याण के लिए स्वयं कष्ट सहते हैं। यह भजन साधक को सिखाता है कि यदि आप शिव की शरण में हैं, तो संसार के समस्त दुख-दर्द गौण हो जाते हैं।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह भजन सोमवार व्रत और शिवरात्रि के अवसर पर विशेष रूप से सुना जाता है। शिव पुराण के अनुसार, सोमवार का दिन चंद्रमा और शिव का दिन है। इस भजन को सुनने से मानसिक शांति मिलती है और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। यह भजन शिव के 'नटराज' स्वरूप और उनके 'औघड़' रूप का सुंदर समन्वय है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन को सोमवार की सुबह या प्रदोष काल में सुनना अत्यंत फलदायी है। इसे शिव मंदिर में या घर के पूजा स्थल पर धूप-दीप जलाकर सुनना चाहिए। भजन सुनते समय मन को एकाग्र रखें और शिव के ध्यान में लीन रहें।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द | अर्थ | संदर्भ |
|---|---|---|
| डमरू | शिव का वाद्य यंत्र | सृष्टि की लय का प्रतीक |
| कैलाश | शिव का निवास स्थान | पवित्रता और शांति का प्रतीक |
| विष का प्याला | हलाहल विष | जगत कल्याण के लिए त्याग |
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | शिव डमरू वाला |
|---|---|
| गायक | विपिन सचदेवा |
| देवता | भगवान शिव |
| भाषा | हिंदी |
| उपयुक्त अवसर | सोमवार, शिवरात्रि, सावन |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
- प्रश्न: सोमवार को शिव भजन सुनने का क्या लाभ है?
उत्तर: सोमवार को शिव भजन सुनने से मन शांत रहता है और चंद्र दोष से मुक्ति मिलती है। - प्रश्न: क्या इस भजन को घर पर गाया जा सकता है?
उत्तर: हाँ, इसे किसी भी पवित्र स्थान पर भक्ति भाव से गाया जा सकता है। - प्रश्न: डमरू किसका प्रतीक है?
उत्तर: डमरू ब्रह्मांड की ध्वनि और शिव के तांडव का प्रतीक है।
संबंधित भजन एवं लेख
शिव तांडव स्तोत्र का पाठ | ॐ नमः शिवाय मंत्र का महत्व | सोमवार व्रत कथा
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। संदर्भ: शिव पुराण एवं पारंपरिक भक्ति साहित्य।
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें