108 Ramayan Choupai

मोह माया को त्याग कर | Moh Maya Ko Tyag kar | Jai Mata Di | Nonstop Mata Rani Playlist - BhaktiLok

99 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

"मोह माया को त्याग कर" भक्ति गीत सनातन धर्म की उस उच्च अवस्था का प्रतिनिधित्व करता है जहाँ जीवात्मा भौतिक जगत के क्षणभंगुर आकर्षणों से ऊपर उठकर परम सत्ता की ओर उन्मुख होती है। यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि के पावन पर्वों, विशेषकर महानवमी के दिन, मां सिद्धिदात्री की आराधना के समय अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। मोह और माया का त्याग केवल सांसारिक वस्तुओं को छोड़ना नहीं है, बल्कि अपने अहंकार और अज्ञान का परित्याग कर मां की शरणागति स्वीकार करना है। इस लेख में हम इस भजन के आध्यात्मिक मर्म, इसके भावार्थ और जीवन में इसके व्यावहारिक महत्व को विस्तार से समझेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मोह माया को त्याग कर, तू मां के चरणों में आ जा,
सच्चे मन से हे राही, तू जय माता दी गा जा।

ये दुनिया है एक सपना, यहाँ कोई न अपना,
झूठी है ये चमक-धमक, सब है एक छलावा,
मां की ममता की छाया में, तू अपना घर बसा जा।
मोह माया को त्याग कर, तू मां के चरणों में आ जा।

सिद्धिदात्री मां की कृपा, जो भी प्राणी पाता है,
भय और रोग-शोक से, वो सदा मुक्त हो जाता है,
मां के नाम की ज्योति से, तू अपना भाग्य जगा जा।
मोह माया को त्याग कर, तू मां के चरणों में आ जा।

जय माता दी, जय माता दी, गूंज उठे ये सारा जग,
भक्ति के इस सागर में, तू भी डुबकी लगा जा,
जीवन के इस सफर में, तू मां का हाथ थाम जा।
मोह माया को त्याग कर, तू मां के चरणों में आ जा।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का मुख्य संदेश 'वैराग्य' और 'समर्पण' है। भक्त को संबोधित करते हुए कहा गया है कि यह संसार केवल एक स्वप्न के समान है, जहाँ मोह और माया का बंधन मनुष्य को दुखों की ओर ले जाता है। मां सिद्धिदात्री, जो सभी सिद्धियों की स्वामिनी हैं, उनकी शरण में जाने से ही जीव को वास्तविक शांति मिलती है। भजन का भावार्थ यह है कि जब तक हम भौतिक सुखों के पीछे भागते रहेंगे, तब तक हम आत्मिक आनंद से वंचित रहेंगे। मां के चरणों में आने का अर्थ है—अपने अहंकार का विसर्जन करना और यह स्वीकार करना कि यह संपूर्ण जगत उसी शक्ति का विस्तार है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • आध्यात्मिक जागृति: यह भजन मनुष्य को उसके वास्तविक स्वरूप और ईश्वर के प्रति उसके कर्तव्य की याद दिलाता है।
  • नवरात्रि का संदर्भ: महानवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा के समय इस भजन का श्रवण मानसिक शांति और सिद्धि प्रदान करने वाला माना जाता है।
  • भक्ति रस: इसमें प्रेम, विरह और शरणागति का अद्भुत मिश्रण है, जो मन को एकाग्र करने में सहायक है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को नवरात्रि के नौ दिनों में, विशेषकर सुबह की पूजा या संध्या आरती के समय गाना अत्यंत शुभ है। इसे गाते समय मन में मां दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप का ध्यान करना चाहिए। यदि संभव हो, तो इसे सामूहिक सत्संग या मंदिर में अन्य भक्तों के साथ मिलकर गाना चाहिए, जिससे सामूहिक ऊर्जा का संचार होता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द अर्थ संदर्भ
मोह-माया सांसारिक आसक्ति जो जीव को ईश्वर से दूर रखती है।
सिद्धिदात्री सिद्धियां प्रदान करने वाली मां दुर्गा का नौवां स्वरूप।
छलावा भ्रम या माया संसार की नश्वरता।
शरणागति पूर्ण समर्पण ईश्वर के प्रति पूर्ण विश्वास।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

मां सिद्धिदात्री की स्तुति हेतु इस मंत्र का जाप अत्यंत फलदायी है:

"ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः॥"

साथ ही, दुर्गा सप्तशती का पाठ इस भजन के साथ करने से आध्यात्मिक ऊर्जा में वृद्धि होती है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम मोह माया को त्याग कर
प्रमुख देवी मां सिद्धिदात्री (मां दुर्गा)
मुख्य भाव वैराग्य एवं शरणागति
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, महानवमी, दैनिक पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

मोह माया का त्याग करने का क्या अर्थ है?

इसका अर्थ सांसारिक जिम्मेदारियों को छोड़ना नहीं, बल्कि उनमें रहते हुए भी मन को ईश्वर में लगाना है।

महानवमी पर इस भजन का क्या महत्व है?

महानवमी सिद्धिदात्री का दिन है, जो मोक्ष और सिद्धियां प्रदान करती हैं। यह भजन मन को शुद्ध कर मां की कृपा पाने में सहायक है।

क्या इस भजन को घर पर गाया जा सकता है?

जी हाँ, इसे घर पर पूरी श्रद्धा और पवित्रता के साथ गाया जा सकता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख भक्ति साहित्य और शास्त्रों के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों को मां दुर्गा की भक्ति और वैराग्य के मार्ग से परिचित कराना है। सामग्री को प्रामाणिक स्रोतों और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार व्यवस्थित किया गया है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

संबंधित भजन एवं लेख

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!