Parvati Stotram

जिसकी पूजा करे विधाता (Jiski Pooja Kare Vidhata) - Mata Rani Bhajan Mahendra Kapoor Shraddha - BhaktiLok

71 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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"जिसकी पूजा करे विधाता, वो है मेरी माता रानी" (Jiski Pooja Kare Vidhata) सनातन धर्म में आदि शक्ति माँ दुर्गा की आराधना का एक अत्यंत पावन, मधुर और हृदयस्पर्शी भजन है। महान पार्श्वगायक महेंद्र कपूर जी की ओजस्वी और भक्तिपूर्ण आवाज में गाया गया यह भजन श्रोताओं के भीतर श्रद्धा, समर्पण और दिव्य ऊर्जा का संचार करता है। इस भजन में माँ भगवती की असीम महिमा का वर्णन किया गया है, जिनकी आराधना स्वयं सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा (विधाता), पालनकर्ता विष्णु और संहारक शिव करते हैं। यह गीत केवल एक संगीतमय प्रस्तुति नहीं है, बल्कि यह साधक के अंतर्मन को जगदम्बा के चरणों में समर्पित करने का एक सशक्त माध्यम है। नवरात्र के पावन पर्व, माता की चौकी, जगराता या दैनिक पूजा के समय इस भजन का श्रवण और कीर्तन भक्तों को अलौकिक शांति और आध्यात्मिक आनंद प्रदान करता है।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

जिसकी पूजा करे विधाता - माता रानी भजन

जिसकी पूजा करे विधाता, वो है मेरी माता रानी।
जिसकी महिमा वेद बखाने, वो है मेरी माता रानी॥

ब्रह्मा पूजे, विष्णु पूजे, पूजे भोला भंडारी।
चरण शरण में शीश झुकाए, खड़ी है दुनिया सारी॥
जिसके द्वारे संकट भागे, वो है मेरी माता रानी।
जिसकी पूजा करे विधाता, वो है मेरी माता रानी॥

ऊंचे पर्वत मंदिर तेरा, नीचे बहती गंगा की धारा।
लाल चुनरिया, लाल-लाल चूड़ा, चमके मुकुट प्यारा॥
सिंह सवारी करके आए, वो है मेरी माता रानी।
जिसकी पूजा करे विधाता, वो है मेरी माता रानी॥

तू ही दुर्गा, तू ही काली, तू ही है कल्याणी।
तेरे चरणों में बहती है, अमृत की पावन वाणी॥
भक्तों की बिगड़ी जो बनाए, वो है मेरी माता रानी।
जिसकी पूजा करे विधाता, वो है मेरी माता रानी॥

बालक तेरे द्वार पे आए, झोली अपनी फैलाए।
खाली हाथ न जाए कोई, जो भी शरण में आए॥
सबकी मनोकामना पूर्ण करती, वो है मेरी माता रानी।
जिसकी पूजा करे विधाता, वो है मेरी माता रानी॥

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

यह भजन देवी दुर्गा की सर्वोपरि सत्ता और उनकी ममतामयी प्रकृति को प्रकट करता है। यहाँ इसके प्रत्येक अंतरे का विस्तृत भावार्थ प्रस्तुत किया जा रहा है:

मुखड़ा: भजन की शुरुआत इस परम सत्य की घोषणा से होती है कि जिस आदि शक्ति की आराधना स्वयं सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी (विधाता) करते हैं, वही मेरी माता रानी हैं। चारों वेद (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद) जिनकी महिमा का पार नहीं पा सकते और निरंतर उनके दिव्य स्वरूप का गान करते हैं, वे ही संपूर्ण जगत की जननी हैं।

प्रथम अंतरा: इस अंतरे में त्रिदेवों की आराधना का उल्लेख है। सृष्टि के सृजनकर्ता ब्रह्मा, पालनकर्ता भगवान विष्णु और संहारक भगवान शिव (भोला भंडारी) भी देवी महामाया की शरण में रहते हैं। संपूर्ण चराचर जगत और समस्त प्राणी उनके चरणों में अपना मस्तक झुकाते हैं। माँ के दरबार की यह महिमा है कि वहाँ आते ही भक्तों के बड़े से बड़े संकट और कष्ट क्षण भर में दूर हो जाते हैं।

द्वितीय अंतरा: यहाँ माता के दिव्य स्वरूप और उनके पावन धाम का सुंदर चित्रण किया गया है। माता रानी का भव्य मंदिर ऊंचे पर्वतों (जैसे वैष्णो देवी) पर सुशोभित है, जिसके नीचे पतित-पाविनी गंगा मैया की अविरल धारा बहती है। माता ने लाल रंग की चुनरी और हाथों में लाल चूड़ा धारण किया हुआ है। उनके मस्तक पर लगा मुकुट अत्यंत दिव्य और चमकीला है। वे अपने सिंह (शेर) पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देने और उनकी रक्षा करने आती हैं।

तृतीय अंतरा: माता रानी के विभिन्न स्वरूपों की वंदना करते हुए कवि कहता है कि हे माँ! आप ही दुष्टों का संहार करने वाली दुर्गा हो, आप ही महाकाली हो और आप ही भक्तों का कल्याण करने वाली कल्याणी हो। आपके श्रीचरणों से ज्ञान और भक्ति रूपी अमृत की वाणी प्रवाहित होती है। जो भक्त जीवन की कठिनाइयों से निराश हो चुके हैं, उनकी बिगड़ी हुई तकदीर को संवारने वाली केवल आप ही हैं।

चतुर्थ अंतरा: अंतिम अंतरे में भक्त की करुण पुकार और माता की उदारता का वर्णन है। माँ के द्वार पर सभी भक्त अबोध बालक बनकर आते हैं और अपनी झोली फैलाकर दया की भीख मांगते हैं। माता का दरबार इतना कृपालु है कि वहाँ से कोई भी याचक खाली हाथ नहीं लौटता। माँ अपने सभी बच्चों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं और उन्हें सुख, समृद्धि तथा मोक्ष प्रदान करती हैं।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस भजन की मुख्य भावना 'शरणागति' (Surrender) और 'वात्सल्य रस' (Maternal Love) है। यह गीत हमें सिखाता है कि संसार में चाहे कितनी भी विषमताएं क्यों न हों, यदि हम निष्कपट भाव से जगदम्बा की शरण में जाते हैं, तो हमारे सभी भय दूर हो जाते हैं।

  • अनन्य भक्ति: यह भजन भक्त को ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम करना सिखाता है, जहाँ भक्त अपनी माता को ही सर्वोपरि मानता है।
  • समता का संदेश: माता के दरबार में अमीर-गरीब, राजा-रंक का कोई भेद नहीं है। जो भी सच्चे मन से झोली फैलाता है, उसे माँ का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
  • संकट निवारण: यह विश्वास दिलाता है कि माँ की कृपा से जीवन के बड़े से बड़े संकट भी टल जाते हैं।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण (Parameter) जानकारी (Details)
भजन का नाम (Song Name) जिसकी पूजा करे विधाता (Jiski Pooja Kare Vidhata)
गायक (Singer) महेंद्र कपूर (Mahendra Kapoor)
एल्बम (Album) श्रद्धा (Shraddha) / माता रानी के भजन
मुख्य देवी/देवता (Deity) माता रानी / दुर्गा माँ / आदि शक्ति
भाषा (Language) हिन्दी (Hindi)
भक्ति रस (Bhava) समर्पण, श्रद्धा, वात्सल्य (Devotion & Surrender)

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

इस कालजयी भजन को अपनी सुरीली और बुलंद आवाज से सजाने वाले कलाकार महेंद्र कपूर हैं। महेंद्र कपूर जी भारतीय संगीत जगत के एक ऐसे नक्षत्र रहे हैं जिन्होंने देशभक्ति गीतों के साथ-साथ भक्ति संगीत में भी अमिट छाप छोड़ी है। उनकी आवाज में जो गंभीरता, ओज और तन्मयता है, वह सीधे श्रोता के हृदय को स्पर्श करती है। इस भजन का संगीत पारंपरिक वाद्यों जैसे ढोलक, मंजीरा, और बांसुरी के सुंदर संयोजन से बना है, जो इसे और भी अधिक कर्णप्रिय बनाता है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द (Word) सरल अर्थ (Meaning) संदर्भ (Context)
विधाता सृष्टि के रचयिता, भगवान ब्रह्मा जो संपूर्ण ब्रह्मांड का निर्माण करते हैं।
बखाने वर्णन करना या प्रशंसा करना वेदों द्वारा माता की महिमा का गान करना।
भोला भंडारी भगवान शिव शिव जी का अत्यंत दयालु और सहज स्वरूप।
कल्याणी कल्याण करने वाली, मंगलकारी भक्तों का उद्धार करने वाला माता का रूप।
मनोकामना मन की इच्छा या अभिलाषा भक्तों द्वारा माँगी गई मुरादें।

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

सनातन धर्म में शक्ति की पूजा का विशेष महत्व है। देवी भागवत पुराण के अनुसार, आदि शक्ति ही इस संसार की मूल ऊर्जा हैं। यह भजन इसी दार्शनिक सत्य को सरल शब्दों में जन-साधारण तक पहुँचाता है।

जब हम गाते हैं "जिसकी पूजा करे विधाता", तो यह हमें याद दिलाता है कि हमारी लौकिक माता की तरह ही एक अलौकिक जगन्माता भी हैं, जो संपूर्ण ब्रह्मांड का संचालन कर रही हैं। सांस्कृतिक रूप से, यह भजन उत्तर भारत के जागरणों, चौकियों और विशेषकर शारदीय व चैत्र नवरात्रि के उत्सवों का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। इस भजन को सुनने मात्र से नकारात्मक विचारों का नाश होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

यह पावन भजन हमें केवल भक्ति का मार्ग ही नहीं दिखाता, बल्कि व्यावहारिक जीवन के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण सीख देता है:

  1. अहंकार का त्याग: जब ब्रह्मा, विष्णु और महेश जैसे देव भी माता के चरणों में शीश झुकाते हैं, तो मनुष्य को अपने धन, बल या ज्ञान का अहंकार कभी नहीं करना चाहिए।
  2. धैर्य और विश्वास: जीवन में जब भी कठिन समय आए, हमें विचलित होने के बजाय माता रानी पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए कि वे हमारी नैया पार लगाएंगी।
  3. करुणा और सेवा: माता जिस प्रकार बिना किसी भेदभाव के सभी बालकों पर अपनी कृपा बरसाती हैं, उसी प्रकार हमें भी समाज के प्रति दयालु और सहयोगी होना चाहिए।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यद्यपि ईश्वर की आराधना के लिए हर क्षण शुभ है, परंतु इस भजन को गाने और सुनने के कुछ विशेष अवसर निम्नलिखित हैं:

  • नवरात्रि पर्व: नौ दिनों के पावन व्रत के दौरान सुबह और शाम की आरती के समय इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी माना जाता है।
  • माता की चौकी व जगराता: पारिवारिक मंगल कार्यों या मन्नत पूरी होने पर आयोजित होने वाले कीर्तनों में यह भजन मुख्य रूप से गाया जाता है।
  • दैनिक पूजा: प्रतिदिन सुबह के समय इस भजन को सुनने से मन शांत रहता है और दिनभर कार्य करने की सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

मुख्य बिंदु संक्षिप्त विवरण
भजन का नाम जिसकी पूजा करे विधाता
मुख्य स्वर महेंद्र कपूर
मुख्य विषय देवी दुर्गा की महिमा और शरणागति
काव्य शैली गेय पद (भक्ति गीत)
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, दुर्गा पूजा, माता की चौकी, दैनिक वंदना
संबंधित स्तोत्र ललिता सहस्रनाम स्तोत्र, श्री दुर्गा चालीसा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस अत्यंत लोकप्रिय भजन के मुख्य गायक सुप्रसिद्ध पार्श्वगायक महेंद्र कपूर जी हैं। उनकी बुलंद और भक्तिमय आवाज ने इस भजन को अमर बना दिया है।

"विधाता" शब्द का अर्थ सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा जी से है। भजन का तात्पर्य यह है कि जिनकी पूजा स्वयं ब्रह्मा जी करते हैं, वे ही हमारी माता रानी हैं।

यह भजन आदि शक्ति, माँ दुर्गा (माता रानी) को समर्पित है, जिन्हें कल्याणी, काली और जगदम्बा भी कहा जाता है।

इस भजन के श्रवण से मन को असीम शांति मिलती है, भय और तनाव दूर होते हैं, तथा साधक के भीतर सकारात्मक ऊर्जा और माँ के प्रति अटूट श्रद्धा का विकास होता है।

हाँ, नवरात्रि के पावन नौ दिनों में माता की पूजा, आरती और कलश स्थापना के समय इस भजन को गाना और सुनना अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है।

यह भजन सरल और सुबोध खड़ी बोली हिन्दी में लिखा गया है, जिससे इसे समझना और गाना अत्यंत आसान हो जाता है।

भजन की पंक्ति "सिंह सवारी करके आए" में माता के दिव्य वाहन सिंह (शेर) का उल्लेख किया गया है, जो शक्ति और शौर्य का प्रतीक है।

यह पंक्ति दर्शाती है कि जब मनुष्य चारों ओर से निराश हो जाता है, तब माँ की शरण में जाने से उसके प्रारब्ध के कठिन कर्म भी सुधर जाते हैं और बिगड़े काम बन जाते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन के बोल, भावार्थ और दार्शनिक पृष्ठभूमि को सनातन धर्म के ग्रंथों (जैसे देवी भागवत पुराण) और पारंपरिक लोक मान्यताओं के आधार पर संकलित और विश्लेषित किया गया है। महेंद्र कपूर जी द्वारा गाए गए इस भजन की प्रामाणिकता और इसके दिव्य प्रभाव को ध्यान में रखते हुए इसे भक्तों के लिए सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है ताकि वे इसका रसास्वादन कर सकें।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत महापुराण: आदि शक्ति की सर्वोपरि सत्ता और त्रिदेवों द्वारा उनकी स्तुति का शास्त्रीय संदर्भ।
  • पारंपरिक भजन संग्रह: महेंद्र कपूर जी के मूल ऑडियो एल्बम "श्रद्धा" से संकलित प्रामाणिक गीत के बोल।
  • भक्ति संकीर्तन परंपरा: उत्तर भारतीय लोक संगीत और जगराता मंडलियों द्वारा गाए जाने वाले पारंपरिक पाठ।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 27 Sep 2026

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