भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

छठी माई सुनली गोहार भक्ति इन हिंदी लिरिक्स

छठी माई सुनली गोहार छठ गीत के संपूर्ण बोल और भावार्थ पढ़ें। छठ पूजा के इस पावन भजन के माध्यम से छठी मैया की महिमा और भक्ति का अनुभव करें।

"छठी माई सुनली गोहार" एक अत्यंत लोकप्रिय और हृदयस्पर्शी भोजपुरी छठ गीत है, जो लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा के पावन अवसर पर श्रद्धा और भक्ति के साथ गाया जाता है। इस गीत में एक विवाहित महिला (सुहागिन) की छठी मैया के प्रति अनन्य श्रद्धा, समर्पण और अपने दांपत्य जीवन की सुख-शांति के लिए की गई भावपूर्ण प्रार्थना का सुंदर चित्रण है। छठ महापर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, शुचिता, और पारिवारिक संबंधों को सुदृढ़ करने का एक महान उत्सव है। पवन सिंह की मधुर आवाज में गाया गया यह भजन हर वर्ष कार्तिक मास में गंगा घाटों और घरों में गूंजता है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है। इस लेख में हम इस पावन गीत के संपूर्ण बोल, उसका विस्तृत भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व और इससे जुड़ी सांस्कृतिक परंपराओं का गहराई से विश्लेषण करेंगे।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

छठी माई सुनली गोहार

छठी माई सुनली गोहार,
हमरा के दे दा बलमुआ के प्यार।
छठी माई सुनली गोहार,
हमरा के दे दा बलमुआ के प्यार।

सुख-समृद्धि के तू बरसावा,
हमरा दुःख के मेटा दा भार।
छठी माई सुनली गोहार,
हमरा के दे दा बलमुआ के प्यार।

गंगा-जलवा में अर्घ्य चढ़ाई,
सूरज देवता से अरज लगाई।
छठी माई, कर दा उद्धार,
हमरा के दे दा बलमुआ के प्यार।

नहाय-खाय के व्रत रखलीं,
सच्चे मन से आस लगाई।
छठी माई, तोहर सहारा,
हमरा के दे दा बलमुआ के प्यार।

छठी माई सुनली गोहार,
हमरा के दे दा बलमुआ के प्यार।

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

यह गीत भोजपुरी लोक संस्कृति और हिंदू धर्म के सबसे कठिन व्रतों में से एक, छठ व्रत की महिमा को दर्शाता है। इस गीत के माध्यम से एक व्रती (महिला) छठी मैया से अपने सुहाग की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना कर रही है।

प्रथम अंतरा: गोहार और दांपत्य प्रेम की याचना

गीत की शुरुआत "छठी माई सुनली गोहार, हमरा के दे दा बलमुआ के प्यार" से होती है। यहाँ 'गोहार' का अर्थ है करुण पुकार या प्रार्थना। व्रती महिला छठी मैया से विनती करती है कि हे माता! मेरी इस दीन पुकार को सुन लीजिए और मुझे मेरे पति (बलमुआ) का अटूट प्रेम और सानिध्य प्रदान कीजिए। भारतीय संस्कृति में एक स्त्री के लिए उसका सुहाग ही उसका सबसे बड़ा गौरव होता है। वह अपने पति की दीर्घायु और उनके बीच सदैव प्रेम बना रहने की कामना करती है।

द्वितीय अंतरा: सुख-समृद्धि और दुखों का निवारण

आगे व्रती कहती है, "सुख-समृद्धि के तू बरसावा, हमरा दुःख के मेटा दा भार।" वह माता से प्रार्थना करती है कि हमारे घर-परिवार पर सुख और समृद्धि की वर्षा करें। जीवन में जो भी मानसिक, शारीरिक या आर्थिक कष्ट हैं, उन सभी दुखों के भार को समाप्त कर दें। छठी मैया को संतानों की रक्षा करने वाली और परिवारों को खुशहाली देने वाली देवी माना गया है।

तृतीय अंतरा: गंगा जल और सूर्य देव को अर्घ्य

"गंगा-जलवा में अर्घ्य चढ़ाई, सूरज देवता से अरज लगाई।" छठ पूजा में पवित्र नदियों, विशेषकर गंगा जी के जल में खड़े होकर भगवान सूर्य को अर्घ्य देने का विधान है। व्रती कहती है कि वह पवित्र गंगा जल में खड़े होकर अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्य देव को अर्घ्य दे रही है और उनसे प्रार्थना कर रही है। सूर्य देव प्रत्यक्ष देवता हैं, जो संपूर्ण जगत को ऊर्जा और जीवन प्रदान करते हैं। उनके माध्यम से छठी मैया तक अपनी प्रार्थना पहुँचाने का यह प्रयास अत्यंत पावन है।

चतुर्थ अंतरा: नहाय-खाय और अटूट विश्वास

"नहाय-खाय के व्रत रखलीं, सच्चे मन से आस लगाई।" छठ महापर्व की शुरुआत 'नहाय-खाय' से होती है, जिसमें व्रती पूर्ण पवित्रता के साथ स्नान करके सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। व्रती कहती है कि उसने अत्यंत नियम और निष्ठा के साथ नहाय-खाय से इस कठिन व्रत का आरंभ किया है और अपने मन में केवल छठी मैया पर ही भरोसा रखा है। "छठी माई, तोहर सहारा" कहकर वह पूरी तरह से देवी की शरण में आ जाती है।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत की मुख्य भावना समर्पण (Surrender), श्रद्धा (Faith) और पारिवारिक कल्याण (Family Well-being) है। यह गीत निम्नलिखित महत्वपूर्ण संदेश देता है:

  • शुचिता और पवित्रता: छठ पूजा में मन, वचन और कर्म की शुद्धता को सर्वोपरि माना गया है। गीत में 'नहाय-खाय' और 'गंगा जल' का उल्लेख इसी पवित्रता को रेखांकित करता है।
  • दांपत्य निष्ठा: एक सुहागिन स्त्री द्वारा अपने पति के प्रति प्रेम और आदर की भावना को दर्शाया गया है, जो भारतीय समाज की पारिवारिक सुदृढ़ता का आधार है।
  • प्रकृति की उपासना: सूर्य देव और गंगा मैया की आराधना के माध्यम से यह गीत हमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञ होना सिखाता है।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण क्षेत्र (Field) जानकारी (Information)
गीत का नाम (Song Name) छठी माई सुनली गोहार (Chhathi Mai Sunli Gohar)
मुख्य गायक (Singer) पवन सिंह (Pawan Singh)
भाषा (Language) भोजपुरी (Bhojpuri)
विधा (Genre) छठ देवी गीत / लोक भजन (Devotional Folk Song)
मुख्य विषय (Theme) छठ व्रत, दांपत्य सुख, सुख-समृद्धि की प्रार्थना
संबद्ध त्योहार (Festival) छठ पूजा (Chhath Puja)

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

यह गीत भोजपुरी संगीत जगत के प्रसिद्ध गायक और अभिनेता पवन सिंह द्वारा गाया गया है। पवन सिंह की आवाज में जो दर्द, भक्ति और गहराई है, वह इस गीत को सीधे श्रोताओं के दिलों तक पहुँचाती है। भोजपुरी लोक संगीत में छठ गीतों का एक विशेष स्थान है, और पवन सिंह के गाए हुए छठ गीत हर साल करोड़ों लोगों द्वारा सुने जाते हैं। इस गीत का संगीत पारंपरिक लोक धुनों पर आधारित है, जो मन को शांति और भक्ति रस से सराबोर कर देता है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

कठिन शब्द (Word) सरल हिंदी अर्थ (Meaning) सांस्कृतिक संदर्भ (Context)
गोहार (Gohar) पुकार, प्रार्थना, गुहार देवी से की जाने वाली करुण याचना।
बलमुआ (Balamuah) पति, स्वामी, प्रियतम भोजपुरी लोकगीतों में पति के लिए प्रयुक्त आदरसूचक शब्द।
अर्घ्य (Arghya) पूजन सामग्री युक्त जल अर्पित करना सूर्य देव को नदी में खड़े होकर जल या दूध देना।
नहाय-खाय (Nahay-Khay) छठ पूजा का पहला दिन स्नान और सात्विक भोजन ग्रहण करने की शुद्धि प्रक्रिया।
अरज (Araj) अर्ज, विनती, निवेदन ईश्वर के समक्ष अपनी इच्छा या प्रार्थना रखना।

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

छठ पूजा का त्योहार वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टिकोणों से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस गीत में निहित आध्यात्मिक तत्व हमें सनातन धर्म की गहरी जड़ों से जोड़ते हैं:

१. षष्ठी देवी (छठी मैया) का स्वरूप: पुराणों के अनुसार, देवी षष्ठी भगवान कार्तिकेय की मानस बहन और ब्रह्मा जी की मानस पुत्री हैं। इन्हें संतानों की रक्षा करने वाली और उन्हें दीर्घायु प्रदान करने वाली देवी माना गया है। लोक परंपरा में इन्हें 'छठी माई' कहकर पुकारा जाता है, जो अत्यंत दयालु हैं और सच्चे मन से की गई 'गोहार' को कभी अनसुना नहीं करतीं।

२. सूर्य उपासना का विज्ञान: सूर्य देव को जल अर्पित करने से शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। सुबह और शाम की सूर्य की किरणें स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी मानी गई हैं। गीत में "सूरज देवता से अरज लगाई" इसी वैज्ञानिक और धार्मिक विश्वास को दर्शाता है।

३. लोक आस्था का प्रतीक: यह गीत किसी ऊंच-नीच या जातिगत भेदभाव से परे, सामूहिक रूप से गाए जाने वाले गीतों का हिस्सा है। छठ पूजा में अमीर हो या गरीब, सभी एक ही घाट पर एक साथ खड़े होकर आराधना करते हैं, जो सामाजिक समरसता का अनुपम उदाहरण है।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

यह पावन भजन हमें केवल भक्ति का मार्ग ही नहीं दिखाता, बल्कि व्यावहारिक जीवन के लिए भी कई महत्वपूर्ण सीख देता है:

  • धैर्य और कठिन साधना: छठ का व्रत ३६ घंटों से अधिक समय तक निर्जला रहकर किया जाता है। यह हमें सिखाता है कि जीवन में किसी भी महान लक्ष्य या सुख की प्राप्ति के लिए कठिन परिश्रम, अनुशासन और धैर्य की आवश्यकता होती है।
  • कृतज्ञता की भावना: प्रकृति (नदी, सूर्य, मिट्टी के बर्तन, फल-फूल) के प्रति आभार व्यक्त करना इस पर्व का मूल है। हमें अपने जीवन को सहारा देने वाले पंचतत्वों के प्रति हमेशा कृतज्ञ रहना चाहिए।
  • पारिवारिक एकता: गीत में पति के प्रेम और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की गई है। यह दर्शाता है कि व्यक्ति की वास्तविक खुशी उसके सुखी और संगठित परिवार में ही निहित है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यद्यपि इस गीत को कभी भी सुना जा सकता है, लेकिन इसका वास्तविक आनंद और महत्व निम्नलिखित अवसरों पर बढ़ जाता है:

  • कार्तिक छठ पूजा के दौरान: कार्तिक शुक्ल चतुर्थी (नहाय-खाय) से लेकर सप्तमी (उषा अर्घ्य) तक के चार दिनों में यह गीत हर घर और घाट पर गूंजता है।
  • चैती छठ के अवसर पर: वर्ष में दो बार छठ पर्व मनाया जाता है। चैत्र मास के छठ पर्व में भी इस गीत का गायन किया जाता है।
  • पारिवारिक मांगलिक कार्यों में: कई परिवारों में मन्नत पूरी होने पर या संतान के जन्म के बाद विशेष रूप से छठी मैया के गीतों का अनुष्ठान रखा जाता है।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

मुख्य बिंदु (Key Point) संक्षिप्त विवरण (Quick Description)
गीत का शीर्षक छठी माई सुनली गोहार
मुख्य देवी-देवता छठी मैया (षष्ठी देवी) एवं भगवान सूर्य देव
मुख्य गायक पवन सिंह
काव्य रस भक्ति रस, करुण रस, वात्सल्य एवं दांपत्य भाव
मुख्य अनुष्ठान संदर्भ नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य, उषा अर्घ्य
मुख्य संदेश पूर्ण समर्पण, शुचिता और अखंड सौभाग्य की कामना

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस गीत का मुख्य अर्थ यह है कि एक व्रती महिला छठी मैया से अपने पति की लंबी आयु, उनके अटूट प्रेम और अपने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए करुण पुकार (गोहार) लगा रही है।

यह अत्यंत लोकप्रिय भजन भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के सुप्रसिद्ध गायक और अभिनेता पवन सिंह द्वारा गाया गया है।

'नहाय-खाय' छठ पूजा का पहला दिन होता है। इस दिन व्रती स्नान करके शुद्ध सात्विक भोजन (लौकी की सब्जी, चने की दाल और भात) ग्रहण करते हैं। यह तन और मन की शुद्धि का प्रतीक है।

इसका तात्पर्य यह है कि व्रती पवित्र गंगा नदी के जल में खड़े होकर भगवान सूर्य को अर्घ्य (जल अर्पित) दे रही है, जो छठ पूजा की सबसे महत्वपूर्ण और पावन विधि है।

छठी मैया को भगवान सूर्य की बहन और ब्रह्मा जी की मानस पुत्री (षष्ठी देवी) माना जाता है। वे संतानों की रक्षा करने वाली, उन्हें दीर्घायु बनाने वाली और सुहाग की रक्षा करने वाली देवी हैं।

नहीं, यद्यपि गीत के बोल एक महिला के दृष्टिकोण से लिखे गए हैं, लेकिन छठी मैया के प्रति श्रद्धा रखने वाला कोई भी भक्त इस गीत को गा या सुन सकता है।

छठ पूजा में पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन, बिना नमक का भोजन (खरना के दिन), जमीन पर सोना, और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना अनिवार्य होता है।

इस गीत को सुनने से मन में शांति, सात्विकता और ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना जाग्रत होती है। यह पारिवारिक प्रेम और श्रद्धा को बढ़ावा देता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री पर आधारित है। इस गीत के बोल और उसके भावार्थ को पारंपरिक भोजपुरी लोक संस्कृति, हिंदू धर्मग्रंथों (जैसे देवी भागवत पुराण) और छठ महापर्व की सदियों पुरानी परंपराओं के आलोक में विश्लेषित किया गया है। हमारी संपादकीय टीम ने यह सुनिश्चित किया है कि गीत के मूल शब्दों की शुद्धता बनी रहे ताकि पाठकों को प्रामाणिक और उच्च गुणवत्ता वाली जानकारी प्राप्त हो सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत महापुराण: षष्ठी देवी की उत्पत्ति और उनकी पूजा के महत्व का शास्त्रीय संदर्भ।
  • भोजपुरी लोक साहित्य एवं सांस्कृतिक परंपराएं: बिहार और उत्तर प्रदेश के लोकगीतों का पारंपरिक संग्रह।
  • पवन सिंह आधिकारिक संगीत एल्बम: गीत के मूल बोल और संगीत संरचना का संदर्भ।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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