सम्पूर्ण विवरण एवं भावार्थ
लोक आस्था के महान पर्व महापर्व छठ पूजा के अवसर पर गाए जाने वाले गीतों में 'छठी मईया दिहे ललनवा, मंगल करिहऽ हमार' एक अत्यंत ही हृदयस्पर्शी और लोकप्रिय भजन है। लोकगायक अरविंद अकेला कल्लू और गायिका शिल्पी राज की मधुर आवाज़ में सजे इस पारंपरिक गीत ने छठी मैया के दरबार में गूंजने वाले उन तमाम गीतों में एक विशेष स्थान बनाया है जो निसंतान दंपत्तियों की मनोकामना, संतान सुख की प्राप्ति और परिवार के मंगलमय भविष्य के लिए छठी मैया की वंदना करते हैं। लोकसंस्कृति, मातृत्व और छठी मैया के प्रति अगाध श्रद्धा से ओत-प्रोत यह गीत पूर्वांचल, बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के कोने-कोने में अत्यंत श्रद्धा के साथ गाया और सुना जाता है।
इस विस्तृत आलेख में हम इस पावन भजन के सम्पूर्ण लिरिक्स (बोल), इसके गहरे आध्यात्मिक और सामाजिक अर्थ, छठ पर्व की महत्ता, तथा इस गीत से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डालेंगे। यदि आप छठी मैया के इस मनमोहक भजन को पढ़ना, गाना या इसके भाव को समझना चाहते हैं, तो यह मार्गदर्शिका आपके लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
मुखड़ा (Refrain)
छठी मईया दिहे ललनवा, मंगल करिहऽ हमार।
छठी मईया दिहे ललनवा, मंगल करिहऽ हमार।
हमरा अंगना में बिराजऽ मईया, दुखवा हरिहऽ हमार।
छठी मईया दिहे ललनवा, मंगल करिहऽ हमार।
अंतरा 1
जिनगी के नैया डोले मईया, तू खेवइया बनऽ।
हमरा पर ममता करी मईया, सुख-समृद्धि बरसऽ।
बाल-बच्चन के दीहऽ आशीष, जीवन सफल बनाईहऽ।
छठी मईया दिहे ललनवा, मंगल करिहऽ हमार।
अंतरा 2 (पारंपरिक लोक लय)
घाट पर सजले बाड़ें झांपी अरघिया, दर्शन देबू ना काहे सजधज के।
भक्ति भाव से जो तोहरे दर आवे, जोझत दुख से तारिहऽ जग के।
कल्लू-शिल्पी गावे तोहर महिमा, नइया पार लगाईहऽ मईया।
छठी मईया दिहे ललनवा, मंगल करिहऽ हमार।
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह लोकगीतनुमा भजन केवल शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि यह एक गृहणी, एक मां और एक भक्त की अपनी आराध्य देवी छठी मैया के प्रति अनन्य पुकार है। भारतीय सनातन परंपरा में छठी मैया (षष्ठी देवी) को सूर्य देव की बहन तथा प्रकृति की रक्षा करने वाली और संतानों की दीर्घायु व आरोग्य प्रदान करने वाली देवी माना गया है।
"छठी मईया दिहे ललनवा, मंगल करिहऽ हमार" - इस पंक्ति का सीधा अर्थ है कि हे छठी मैया! हमें संतान (ललनवा) का सुख प्रदान करें और हमारे पूरे परिवार के जीवन में मंगल और कल्याण का संचार करें। लोक जीवन में संतान प्राप्ति की कामना के लिए छठी मैया का व्रत और पूजन सबसे बड़ा अनुष्ठान माना जाता है।
"हमरा अंगना में बिराजऽ मईया, दुखवा हरिहऽ हमार" - भक्त मैया से निवेदन करता है कि वे केवल घाट पर ही नहीं, बल्कि उसके सूने या साधारण आंगन में भी आकर विराजमान हों और उसके समस्त दुखों, संतापों और अभावों का नाश कर दें।
"जिनगी के नैया डोले मईया, तू खेवइया बनऽ" - यह आध्यात्मिक रूप से अत्यंत गहरी पंक्ति है। जीवन रूपी इस संसार सागर में जब मनुष्य की जीवन नैया कठिनाइयों और दुखों के भंवर में डगमगाने लगती है, तब साधक छठी मैया से प्रार्थना करता है कि हे मैया! अब तू ही इस नैया की नाविक (खेवइया) बन जा और इसे सुरक्षित किनारे लगा दे।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- मातृत्व और वात्सल्य का प्रतीक: यह गीत मां और संतान के बीच के अटूट रिश्ते को छठी मैया के आशीर्वाद के साथ जोड़ता है।
- लोक संस्कृति की महक: इसमें भोजपुरी लोक संगीत की सोंधी खुशबू और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनें समाहित हैं, जो श्रोताओं को सीधा अपनी मिट्टी से जोड़ती हैं।
- पूर्ण शरणागति (Surrender): जीवन की हर कठिनाई में छठी मैया को ही अपना एकमात्र रक्षक मानना इस भजन का केंद्रीय भाव है।
- छठ महापर्व की आत्मा: नहाय-खाय से लेकर उद्यत सूर्य को अर्घ्य देने तक, यह गीत हर छठ घाट पर गूंजता है और वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना देता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस प्रकार के पावन लोक भजनों को विशेष अवसरों पर ही नहीं, बल्कि दैनिक जीवन में भी आत्मिक शांति के लिए सुना जा सकता है। इसके गायन और श्रवण के मुख्य अवसर निम्नलिखित हैं:
- कार्तिक एवं चैती छठ पर्व: कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि (छठ महापर्व) के दौरान जब महिलाएं खरना, संध्या अर्घ्य और सुबह का अर्घ्य देती हैं, तब यह गीत घर-घर में बजाया जाता है।
- सोहर और मुंडन संस्कार: घर में संतान के जन्म (सोहर) या मुंडन जैसे मांगलिक अवसरों पर छठी मैया का स्मरण करते हुए यह गीत गाया जाता है।
- दैनिक पूजा और अनुष्ठान: प्रातकाल या संध्या बेला में दीप प्रज्वलित करते समय जब मां भगवती का ध्यान किया जाता है, तब ऐसे भावपूर्ण गीत मन को निर्मल करते हैं।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
इस भजन की मुख्य आराध्य देवी षष्ठी मैया (छठी मईया) हैं, जिन्हें ब्रह्मा जी की मानस पुत्री और सूर्य देव की बहन माना जाता है। स्कंद पुराण और देवी भागवत पुराण में षष्ठी देवी की महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है। वे बच्चों की रक्षा करने वाली, आयु, स्वास्थ्य और सौभाग्य प्रदान करने वाली अधिष्ठात्री देवी हैं। इसके साथ ही, इस लोकगीत को आधुनिक संगीत जगत में लोकप्रिय बनाने में लोकगायक अरविंद अकेला 'कल्लू' और गायिका शिल्पी राज का विशेष योगदान रहा है, जिन्होंने अपनी सुरीली आवाज़ से इसे अमर बना दिया है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
यह भजन ठेठ भोजपुरी और अंगिका/मैथिली मिश्रित लोक भाषा में रचित है। इसकी काव्य शैली सरल, सहज और अत्यंत प्रवाहित है। लोकगीतों की विशेषता होती है कि वे बिना किसी कठिन व्याकरण या क्लिष्ट शब्दों के सीधे हृदय को छू लेते हैं। इस गीत में 'ललनवा', 'अंगना', 'खेवइया', 'दुखवा' जैसे शब्दों का प्रयोग इसकी माटी की सुगंध को और अधिक प्रगाढ़ बनाता है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
- अटूट विश्वास: मनुष्य को जीवन की हर परिस्थिति में ईश्वर और प्रकृति की शक्ति पर अटूट विश्वास रखना चाहिए।
- परिवार का कल्याण: केवल अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज और परिवार के मंगल की कामना करना ही सच्ची भारतीय संस्कृति है।
- संकट में प्रार्थना: विपत्ति के समय घबराने के बजाय अपनी श्रद्धा को मजबूत कर परमात्मा का आह्वान करना चाहिए।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / मुहावरा | सरल हिंदी अर्थ | संदर्भ / भाव |
|---|---|---|
| ललनवा | संतान, बालक, पुत्र | वंश वृद्धि और संतान सुख की प्राप्ति |
| मंगल करिहऽ | कल्याण करना, शुभ करना | जीवन से अमंगल को दूर करना |
| खेवइया | नाविक, पार लगाने वाला | जीवन नैया को भवसागर से पार ले जाने वाली शक्ति |
| अरघिया | अर्घ्य देने की सामग्री | सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित जल एवं सूप |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"छठी मईया दिहे ललनवा, मंगल करिहऽ हमार..."
भक्त अपनी माता स्वरूपिणी छठी मैया से करबद्ध प्रार्थना करता है कि हे जगत जननी! हमारे घर में किलकारियां गूंजें, हमें संतान का वरदान मिले और हमारे परिवार का प्रत्येक दिन मंगलमय हो। जीवन के हर मोड़ पर आपका आशीर्वाद हमारे साथ बना रहे, यही इस गीत की मूल आत्मा है।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | छठी मईया दिहे ललनवा (Chhathi Maiya Dihe Lalanwa) |
|---|---|
| आराध्य देवी | षष्ठी मैया (छठी मईया) एवं भगवान सूर्य |
| गायक कलाकार | अरविंद अकेला 'कल्लू' एवं शिल्पी राज |
| भाषा | भोजपुरी लोकभाषा |
| मुख्य विषय / थीम | संतान प्राप्ति, लोक आस्था और छठ पर्व |
| उपयुक्त अवसर | छठ महापर्व, सोहर एवं मांगलिक उत्सव |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: 'छठी मईया दिहे ललनवा' भजन के मुख्य गायक कौन हैं?
उत्तर: इस लोकप्रिय भजन को प्रसिद्ध भोजपुरी गायक अरविंद अकेला 'कल्लू' और गायिका शिल्पी राज ने अपनी मधुर आवाज में गाया है।
प्रश्न 2: छठी मैया की पूजा किस पर्व पर मुख्य रूप से की जाती है?
उत्तर: छठी मैया की पूजा मुख्य रूप से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाए जाने वाले 'छठ महापर्व' पर की जाती है। इसके अलावा चैत्र माह में भी चैती छठ मनाई जाती है।
प्रश्न 3: इस भजन का मुख्य आध्यात्मिक संदेश क्या है?
उत्तर: इस भजन का मुख्य संदेश छठी मैया के प्रति पूर्ण समर्पण है, जिसमें भक्त अपनी जीवन नैया को मैया के हाथों में सौंपकर परिवार के कल्याण और संतान सुख की कामना करता है।
प्रश्न 4: क्या यह गीत केवल छठ पूजा के दौरान ही सुना जाता है?
उत्तर: मुख्य रूप से यह छठ पर्व पर सर्वाधिक गाया जाता है, परंतु बच्चे के जन्म, मुंडन या किसी भी मांगलिक अवसर पर माता के आशीर्वाद के लिए इसे सुना और गाया जाता है।
प्रश्न 5: छठी मैया को किसकी बहन माना जाता है?
उत्तर: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार षष्ठी देवी (छठी मैया) को भगवान सूर्य की बहन माना गया है, इसीलिए छठ पर्व पर सूर्य देव और छठी मैया दोनों की एक साथ आराधना की जाती है।
प्रश्न 6: 'ललनवा' शब्द का क्या अर्थ है?
उत्तर: भोजपुरी और प्रांतीय लोकभाषा में 'ललनवा' का अर्थ संतान, बालक या पुत्र होता है।
प्रश्न 7: छठ व्रत का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?
उत्तर: छठ व्रत संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य, उज्जवल भविष्य और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है।
प्रश्न 8: क्या इस भजन को घर पर अकेले भी गाया जा सकता है?
उत्तर: हाँ, पूरी श्रद्धा और पवित्रता के साथ इस भजन को घर पर अकेले या परिवार के साथ सस्वर गाया जा सकता है।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख लोक संस्कृति, पारंपरिक संगीत और धार्मिक मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को छठी मैया के इस लोकप्रिय लोकगीत के सटीक बोल और उसके सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्व से अवगत कराना है। सभी विवरण पारंपरिक लोक परंपराओं और उपलब्ध ऑडियो-विजुअल साक्ष्यों पर आधारित हैं।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- पारंपरिक भोजपुरी लोकगायन एवं छठ गीत परंपरा
- सनातन संस्कृति और षष्ठी माता (छठी मैया) से जुड़े पौराणिक आख्यान
- लोक संगीत संग्रह एवं क्षेत्रीय सांस्कृतिक उत्सव प्रकाशन
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