नवरात्री के पावन अवसर पर भक्ति के सागर में गोता लगाने हेतु 'बता दे पुरवैया भवानी कब आएगी' भजन एक अत्यंत भावपूर्ण रचना है। स्वर सम्राट नरेंद्र चंचल जी द्वारा गाया गया यह भजन माँ दुर्गा के प्रति भक्त की व्याकुलता, प्रतीक्षा और अनन्य प्रेम को प्रदर्शित करता है। सनातन संस्कृति में माँ भवानी को जगत जननी और शक्ति का स्वरूप माना गया है। नवरात्री के नौ दिनों में जब भक्त उपवास और साधना करते हैं, तब यह भजन मन में एक विशेष ऊर्जा और श्रद्धा का संचार करता है। यह भजन केवल एक गीत नहीं, बल्कि एक जीवात्मा की पुकार है जो अपनी माँ के दर्शन के लिए आतुर है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
बता दे पुरवैया भवानी कब आएगी,
कब आएगी मेरी माँ कब आएगी...
ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों वाली, शेरों पर सवार होकर,
भक्तों की पुकार सुनकर, माँ कब आएगी...
बता दे पुरवैया भवानी कब आएगी...
लाल चुनरिया ओढ़े मैया, हाथों में त्रिशूल लिए,
दुष्टों का संहार करने, माँ कब आएगी...
बता दे पुरवैया भवानी कब आएगी...
मंदिरों में ज्योत जगे, भक्त खड़े द्वार पर,
दर्शन की प्यास लिए, माँ कब आएगी...
बता दे पुरवैया भवानी कब आएगी...
नरेंद्र चंचल गाए गुणगान, मैया तू मान ले,
भक्तों के दुःख हरने, माँ कब आएगी...
बता दे पुरवैया भवानी कब आएगी...
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस भजन में भक्त 'पुरवैया' (पूर्व दिशा से आने वाली हवा) को माध्यम बनाकर माँ भवानी से प्रश्न कर रहा है कि वह कब अपने भक्तों को दर्शन देने आएंगी। यहाँ 'पुरवैया' का अर्थ उस शुभ संदेश या संकेत से है जो माँ के आगमन की सूचना देता है। भक्त की व्याकुलता यहाँ चरम पर है; वह माँ के ऊँचे पहाड़ों (त्रिकुटा पर्वत) वाले स्वरूप का स्मरण कर रहा है। भजन का भावार्थ यह है कि जब भक्त का हृदय पूर्णतः शुद्ध और समर्पित हो जाता है, तो माँ भवानी स्वयं भक्त के अंतर्मन में प्रकट होती हैं। यह भजन हमें सिखाता है कि ईश्वर की प्राप्ति के लिए धैर्य और निरंतर पुकार आवश्यक है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- भक्ति भाव: यह भजन 'विरह' और 'मिलन' की भावना का अद्भुत मिश्रण है।
- सांस्कृतिक महत्व: नवरात्री के दौरान उत्तर भारत में यह भजन अत्यंत लोकप्रिय है।
- आध्यात्मिक ऊर्जा: नरेंद्र चंचल जी की ओजस्वी आवाज इस भजन में एक दिव्य कंपन पैदा करती है।
- शरणागति: भजन का मुख्य संदेश माँ के चरणों में पूर्ण समर्पण है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन को नवरात्री के नौ दिनों में प्रातःकाल या संध्याकालीन आरती के समय सुनना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसे सुनते समय मन को शांत रखें और माँ दुर्गा के स्वरूप का ध्यान करें। यदि आप इसे गा रहे हैं, तो लय और ताल का ध्यान रखते हुए भावपूर्ण स्वर में गाएं।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द | अर्थ | संदर्भ |
|---|---|---|
| पुरवैया | पूर्व की हवा | संदेशवाहक के रूप में |
| भवानी | माँ दुर्गा | शक्ति का स्वरूप |
| संहार | विनाश | बुराई का अंत |
| ज्योत | दीपक की लौ | ज्ञान और भक्ति |
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | बता दे पुरवैया भवानी कब आएगी |
|---|---|
| गायक | नरेंद्र चंचल |
| विषय | माँ दुर्गा भक्ति |
| अवसर | नवरात्री |
| भाव | समर्पण एवं प्रतीक्षा |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. यह भजन किस देवी को समर्पित है?
Q2. क्या इसे नवरात्री के अलावा भी सुना जा सकता है?
Q3. नरेंद्र चंचल जी का इस भजन में क्या योगदान है?
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।
संबंधित भजन एवं लेख
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
यह सामग्री पारंपरिक भक्ति साहित्य, नरेंद्र चंचल जी के भजनों के संकलन और सनातन धर्म की स्तुति परंपराओं पर आधारित है।
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें