Papmochani Ekadashi Vrat Katha बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

कभी जल्दी जल्दी कभी धीरे धीरे लिरिक्स भक्ति इन हिंदी लिरिक्स

माता रानी का प्रसिद्ध भजन 'कभी जल्दी जल्दी कभी धीरे धीरे' के लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। नवरात्रि और जगराता के लिए विशेष रूप से समर्पित, संदर्भ सहित।

"कभी जल्दी जल्दी कभी धीरे धीरे" माता रानी का एक अत्यंत लोकप्रिय और हृदयस्पर्शी भजन है, जो देवी भक्तों के बीच विशेष रूप से नवरात्रि, जगराता और माता की चौकी के शुभ अवसरों पर गाया जाता है। यह भजन भक्त और भगवान के बीच के मधुर, निश्छल और आत्मीय संबंध को दर्शाता है। इस भजन में जीवात्मा अपनी जीवन रूपी गाड़ी की डोर जगदम्बा, आदि शक्ति मां दुर्गा के हाथों में सौंप देती है। समर्पण के इसी भाव को 'गाड़ी हांक मेरी मैया' के रूप में व्यक्त किया गया है। इस भजन का मुख्य स्वर 'शरणागति' (पूर्ण समर्पण) और 'करुणा' है, जहां एक अबोध बालक की भांति भक्त अपनी माता से जीवन यात्रा को सुगम बनाने की प्रार्थना करता है। सनातन धर्म की संकीर्तन परंपरा में इस भजन का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सरल शब्दों में गहन वेदांत और भक्ति मार्ग के सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

कभी जल्दी जल्दी कभी धीरे धीरे लिरिक्स

|| मुखड़ा ||
कभी जल्दी जल्दी, कभी धीरे धीरे,
गाड़ी हांक मेरी मैया, मैं तो आया तेरे द्वारे।
कभी जल्दी जल्दी, कभी धीरे धीरे...

|| अंतरा - 1 ||
मैया तेरे द्वारे एक अंधा पुकारे,
अंधे को आंखें दे दे, वो तो आया तेरे द्वारे।
कभी जल्दी जल्दी, कभी धीरे धीरे,
गाड़ी हांक मेरी मैया, मैं तो आया तेरे द्वारे।

|| अंतरा - 2 ||
मैया तेरे द्वारे एक कोढ़ी पुकारे,
कोढ़ी को काया दे दे, वो तो आया तेरे द्वारे।
कभी जल्दी जल्दी, कभी धीरे धीरे,
गाड़ी हांक मेरी मैया, मैं तो आया तेरे द्वारे।

|| अंतरा - 3 ||
मैया तेरे द्वारे एक निर्धन पुकारे,
निर्धन को माया दे दे, वो तो आया तेरे द्वारे।
कभी जल्दी जल्दी, कभी धीरे धीरे,
गाड़ी हांक मेरी मैया, मैं तो आया तेरे द्वारे।

|| अंतरा - 4 ||
मैया तेरे द्वारे एक बांझ पुकारे,
बांझ को गोदी दे दे, वो तो आया तेरे द्वारे।
कभी जल्दी जल्दी, कभी धीरे धीरे,
गाड़ी हांक मेरी मैया, मैं तो आया तेरे द्वारे।

|| अंतरा - 5 ||
मैया तेरे द्वारे तेरा बालक पुकारे,
बालक को दर्शन दे दे, वो तो आया तेरे द्वारे।
कभी जल्दी जल्दी, कभी धीरे धीरे,
गाड़ी हांक मेरी मैया, मैं तो आया तेरे द्वारे।

|| अंतरा - 6 ||
मैया तेरे द्वारे सब भक्त पुकारे,
भक्तों को भक्ति दे दे, वो तो आया तेरे द्वारे।
कभी जल्दी जल्दी, कभी धीरे धीरे,
गाड़ी हांक मेरी मैया, मैं तो आया तेरे द्वारे।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल एक पारंपरिक गीत नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन की यात्रा और उसमें ईश्वरीय हस्तक्षेप की आवश्यकता का एक सुंदर रूपक है। 'गाड़ी' शब्द यहां मानव शरीर और जीवन यात्रा का प्रतीक है, और 'मैया' इस ब्रह्मांड की परम संचालक शक्ति (आदि शक्ति) हैं।

भक्त कहता है कि हे मां! मेरी यह जीवन रूपी गाड़ी कभी सुख के क्षणों में बहुत तेजी से भागती है, तो कभी दुख और संघर्ष के समय अत्यंत धीमी हो जाती है। इस उतार-चढ़ाव भरे मार्ग पर संतुलन बनाए रखना मेरे वश में नहीं है। इसलिए, मैं अपनी इस गाड़ी का सारथी आपको बनाता हूं। आप इसे अपनी इच्छा और मेरी पात्रता के अनुसार कभी जल्दी तो कभी धीरे चलाएं, लेकिन मुझे सुरक्षित रूप से भवसागर से पार ले जाएं।

भजन के विभिन्न अंतरे समाज के विभिन्न वर्गों की पीड़ा और उनकी आध्यात्मिक व भौतिक आवश्यकताओं को दर्शाते हैं। अंधा, कोढ़ी, निर्धन, और निसंतान (बांझ) - ये सभी सांसारिक कष्टों से पीड़ित जीव हैं जो केवल जगदम्बा की शरण में ही परम शांति और समाधान पाते हैं। अंततः, भक्त केवल भौतिक सुखों की कामना नहीं करता, बल्कि वह माता से उनके परम पावन स्वरूप के दर्शन और अनन्य भक्ति का वरदान मांगता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व बहुआयामी है:

  • पूर्ण शरणागति (प्रपत्ति मार्ग): यह भजन वैष्णव और शाक्त दर्शन के 'प्रपत्ति' यानी पूर्ण आत्मसमर्पण के सिद्धांत पर आधारित है। जब भक्त अपनी बुद्धि और अहंकार को त्यागकर ईश्वर को अपना सारथी मान लेता है, तब उसके जीवन का सारा भार ईश्वर स्वयं वहन करते हैं।
  • करुणा और परोपकार: भजन में केवल व्यक्तिगत सुख की कामना नहीं की गई है, बल्कि समाज के सबसे उपेक्षित और पीड़ित लोगों (अंधे, कोढ़ी, निर्धन) के कल्याण की प्रार्थना की गई है। यह सनातन धर्म के 'वसुधैव कुटुम्बकम्' और 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' के भाव को पुष्ट करता है।
  • सरलता और सुगमता: इस भजन की भाषा इतनी सरल है कि कोई भी सामान्य व्यक्ति इसे आसानी से गा और समझ सकता है। जटिल दार्शनिक सिद्धांतों को लोक भाषा में प्रस्तुत करना ही इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि मां भगवती की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष अवसर अत्यंत फलदायी माने गए हैं:

  • नवरात्रि महोत्सव: आश्विन और चैत्र नवरात्रि के पावन दिनों में इस भजन का गायन माता के दरबार में विशेष ऊर्जा का संचार करता है।
  • संध्या आरती और सत्संग: प्रतिदिन संध्याकाल में मां दुर्गा की आरती के पश्चात सामूहिक रूप से इस भजन को गाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है।
  • जागरण और चौकी: माता की चौकी या जगराते में इस भजन को ढोलक, मंजीरे और हारमोनियम की थाप पर ऊंचे स्वर में गाया जाता है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से मां दुर्गा (महिषासुरमर्दिनी, शेरावाली माता) को समर्पित है। मां दुर्गा को सनातन परंपरा में शक्ति, करुणा, और ममता की प्रतिमूर्ति माना गया है। वे अपने भक्तों के सभी कष्टों को हरने वाली 'विघ्नविनाशिनी' हैं।

इस भजन की रचना लोक परंपरा के संतों द्वारा की गई है। भारत के ग्रामीण अंचलों में सदियों से देवी मां को अपनी माता मानकर उनके साथ एक अनौपचारिक और अत्यंत आत्मीय संबंध बनाने की परंपरा रही है। यह भजन उसी शाक्त परंपरा की देन है जहां देवी केवल एक अमूर्त शक्ति नहीं, बल्कि एक ममतामयी मां हैं जो अपने बच्चे की पुकार सुनकर दौड़ी चली आती हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस भजन की पृष्ठभूमि उत्तर भारत की समृद्ध लोक संस्कृति और संकीर्तन परंपरा से जुड़ी है। लोक भजनों की यह विशेषता होती है कि वे किसी एक व्यक्ति की रचना न होकर समय के साथ भक्तों के सामूहिक अनुभवों से समृद्ध होते जाते हैं। 'गाड़ी हांकना' एक ऐसा रूपक है जो ग्रामीण भारत के दैनिक जीवन से लिया गया है। जिस प्रकार एक कुशल सारथी उबड़-खाबड़ रास्तों पर भी रथ या गाड़ी को सुरक्षित निकाल ले जाता है, उसी प्रकार मां भगवती भी अपने भक्तों को संसार के कठिन मार्गों से सुरक्षित निकाल ले जाती हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें अवधी और ब्रजभाषा के पुट भी देखने को मिलते हैं। इसकी काव्य शैली 'पद' शैली है, जिसमें गेयता (गाए जाने की योग्यता) का गुण कूट-कूट कर भरा है।

भजन में प्रयुक्त अलंकार और बिंब अत्यंत सजीव हैं। 'गाड़ी हांकना' एक रूपक अलंकार है जहां मानव जीवन की तुलना एक गाड़ी से की गई है। 'जल्दी-जल्दी' और 'धीरे-धीरे' शब्दों का प्रयोग जीवन के सुख-दुख और उतार-चढ़ाव को बड़ी ही खूबसूरती से चित्रित करता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें कई महत्वपूर्ण जीवन सीख देता है:

  1. धैर्य और विश्वास: जीवन में जब परिस्थितियां हमारे अनुकूल न हों (गाड़ी धीरे चल रही हो), तब हमें विचलित नहीं होना चाहिए। हमें विश्वास रखना चाहिए कि हमारी जीवन-गाड़ी की कमान मां के हाथों में है।
  2. समानता का भाव: मां के दरबार में कोई अमीर या गरीब, स्वस्थ या अस्वस्थ नहीं होता। वे सभी को उनकी पात्रता और भक्ति के अनुसार फल देती हैं।
  3. भौतिकता से आध्यात्मिकता की ओर: भजन की शुरुआत भौतिक मांगों (आंखें, काया, माया) से होती है, लेकिन इसका अंत 'दर्शन' और 'भक्ति' की मांग पर होता है। यह दर्शाता है कि मानव जीवन का अंतिम लक्ष्य ईश्वर की प्राप्ति ही है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द/वाक्यांश सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
गाड़ी रथ या वाहन मानव शरीर और जीवन यात्रा का प्रतीक
हांकना चलाना या मार्गदर्शन करना ईश्वरीय नियंत्रण और दिशा-निर्देशन
काया शरीर स्वस्थ और निरोगी जीवन की प्रार्थना
माया धन-दौलत / सांसारिक समृद्धि सांसारिक जीवन को सुचारू रूप से चलाने के साधन
द्वारे पुकारे दरवाजे पर आकर प्रार्थना करना ईश्वर के प्रति पूर्ण शरणागति का भाव

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"कभी जल्दी जल्दी, कभी धीरे धीरे, गाड़ी हांक मेरी मैया..."
हे मां! मेरे जीवन की गति चाहे जैसी भी हो, आप ही इसकी सारथी बनी रहें। जब सुख आए तो मैं अहंकार में न डूबूं (जल्दी-जल्दी), और जब दुख आए तो मैं हताश न होऊं (धीरे-धीरे)।

"मैया तेरे द्वारे एक अंधा पुकारे, अंधे को आंखें दे दे..."
यहां 'अंधा' केवल शारीरिक रूप से दृष्टिहीन व्यक्ति नहीं है, बल्कि वह अज्ञानी जीव भी है जो माया के अंधकार में फंसा हुआ है। भक्त प्रार्थना करता है कि हे मां! हमें ज्ञान रूपी चक्षु प्रदान करें ताकि हम सत्य को देख सकें।

"मैया तेरे द्वारे एक कोढ़ी पुकारे, कोढ़ी को काया दे दे..."
'कोढ़' पापों और विकारों का प्रतीक है। जिस प्रकार कोढ़ शरीर को नष्ट कर देता है, उसी प्रकार काम, क्रोध, लोभ आदि विकार आत्मा को मलिन कर देते हैं। भक्त मां से अपनी आत्मा की शुद्धि और पवित्रता की याचना करता है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

मां दुर्गा की आराधना करते समय इस भजन के साथ निम्नलिखित मंत्रों का जाप करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है। आप मां की स्तुति के लिए गायत्री मंत्र या विशेष रूप से ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए लक्ष्मी गायत्री मंत्र का भी पाठ कर सकते हैं।

मां दुर्गा का महामंत्र:

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम कभी जल्दी जल्दी कभी धीरे धीरे
समर्पित देवी/देवता मां दुर्गा / आदि शक्ति शेरावाली माता
काव्य शैली भक्ति पद / लोक भजन
मुख्य रस भक्ति रस, करुण रस, शांत रस
भाषा सरल हिंदी (खड़ी बोली)
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, माता की चौकी, जगराता, दैनिक संध्या आरती
मुख्य संदेश पूर्ण शरणागति और परोपकार की भावना

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन का मुख्य संदेश ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण (शरणागति) है। यह हमें सिखाता है कि जीवन के सुख-दुख में विचलित हुए बिना अपनी जीवन-डोर मां भगवती के हाथों में सौंप देनी चाहिए।

भजन में 'गाड़ी' मानव शरीर और जीवन यात्रा का प्रतीक है, जबकि 'सारथी' मां दुर्गा हैं, जो इस जीवन को सही दिशा और गति प्रदान करती हैं।

यह भजन मुख्य रूप से मां दुर्गा (शेरावाली माता) को समर्पित है, जिन्हें आदि शक्ति और जगत जननी माना जाता है।

इस भजन को नवरात्रि के दिनों में, माता की चौकी, जगराते में या प्रतिदिन संध्या आरती के समय गाना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

हां, यह भजन श्रीमद्भगवद्गीता के 'शरण गति' और शाक्त दर्शन के 'ममतामयी मां' के सिद्धांत को लोक भाषा में प्रस्तुत करता है, जो इसे आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है।

भजन में समाज के पीड़ित और उपेक्षित वर्गों जैसे- दृष्टिहीन (अंधा), रोगी (कोढ़ी), निर्धन और निसंतान (बांझ) का उल्लेख है, जो मां से दया की भीख मांगते हैं।

इस भजन की भाषा अत्यंत सरल, सुबोध और लोक-शैली पर आधारित खड़ी बोली हिंदी है, जिसे कोई भी भक्त आसानी से गा सकता है।

हां, यह भजन बच्चों में नैतिक मूल्य, करुणा, परोपकार और ईश्वर के प्रति श्रद्धा की भावना विकसित करने के लिए अत्यंत उपयोगी है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन के पाठ और भावार्थ को विभिन्न प्रामाणिक शाक्त ग्रंथों, लोक संकीर्तन परंपराओं और वरिष्ठ विद्वानों के परामर्श के आधार पर संकलित और विश्लेषित किया गया है। हमारा उद्देश्य पाठकों तक शुद्ध, त्रुटिहीन और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध सामग्री पहुंचाना है ताकि वे अपनी साधना और भक्ति मार्ग में आगे बढ़ सकें।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत महापुराण (शाक्त संप्रदाय का प्रमुख ग्रंथ)
  • पारंपरिक उत्तर भारतीय लोक भजन संग्रह एवं संकीर्तन संकलन
  • सनातन धर्म की मौखिक भजन परंपरा और संतों के प्रवचन

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संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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