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लेके पूजा की थाली ज्योत मन की जगा ली लिरिक्स (Leke Pooja Ki Thali Jyot Man Ki Jagali Lyrics in Hindi) - Mata Bhajan

लेके पूजा की थाली ज्योत मन की जगा ली लिरिक्स पढ़ें। माता रानी का यह लोकप्रिय भजन हिंदी अर्थ और भावार्थ सहित यहाँ उपलब्ध है।

माता भजन (Mata Bhajan)

Mata Bhajan - Bhaktilok

प्रकाशित तिथि: 2026 | श्रेणी: भजन, माता रानी के भजन, नवरात्रि विशेष | रचनाकार: पारंपरिक लोक भजन परंपरा

सनातन संस्कृति में माता रानी की आराधना का विशेष स्थान है, और जब बात हो माँ शेरावाली, माता वैष्णो देवी अथवा जगत जननी आदिशक्ति जगदम्बा के भजनों की, तो भक्तों का अंतर्मन स्वतः ही भक्ति रस से सराबोर हो जाता है। अत्यंत लोकप्रिय और कर्णप्रिय भजन "लेके पूजा की थाली ज्योत मन की जगा ली" माता रानी के चरणों में अनन्य प्रेम, पूर्ण समर्पण और आंतरिक शुद्धि का एक अद्भुत प्रतीक है। इस पावन भजन के माध्यम से साधक न केवल बाह्य रूप से पूजा-थ्री सजाकर माँ की आरती उतारता है, बल्कि अपने भीतर की चेतना रूपी ज्योति को भी प्रज्वलित करता है। कलयुग में नाम जप और संकीर्तन को भवसागर से पार उतरने का सुगम मार्ग बताया गया है। यह भजन साधक के मन के सभी विकारों, अंधकार और अज्ञानता को दूर कर माता की कृपा का अनुभव कराता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस दिव्य भजन के संपूर्ण बोल, सरल हिंदी अर्थ, भावार्थ, गायन की विधि और आध्यात्मिक महत्व का रसास्वादन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

स्थायी (मुखड़ा):

लेके पूजा की थाली ज्योत मन की जगा ली,
मैया तेरे दर्शन को मैं तो मन में ठान ली।
ओ मैया शेरावाली, तेरे चरणों में अर्पण मेरी जिंदगानी...

पहला अंतरा:

रूप तुम्हारा जग से न्यारा, महिमा तेरी गाए संसारा,
चरणों की धूल जो पा जाए, भाग्य उसका जग में चमक जाए।
मैंने भी दामन से तेरे, अपनी हर उलझन सुलझा ली,
लेके पूजा की थाली ज्योत मन की जगा ली...

दूसरा अंतरा:

दुखियों की तू सुनने वाली, भरती झोली खाली-खाली,
जो भी तेरे द्वार पे आता, खाली हाथ कभी ना जाता।
श्रद्धा के फूलों से मैंने, आज तेरी आरती सजा ली,
लेके पूजा की थाली ज्योत मन की जगा ली...

तीसरा अंतरा:

सिंह सवारी कर के आ, भक्तों का तू मान बढ़ा,
मैया मेरी लाज बचा ले, संकट सारे दूर भगा ले।
तेरे नाम की महिमा गाकर, अपनी हर सांस सजा ली,
लेके पूजा की थाली ज्योत मन की जगा ली...

समापन / अंत:

लेके पूजा की थाली ज्योत मन की जगा ली,
जय माता दी, जय माता दी, बोलत जा, मन हरषा ली!
जय माँ शेरावाली! जय माता दी!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल शब्दों का संकलन नहीं है, बल्कि एक सच्चे साधक की पुकार है जो भौतिक पूजा से उठकर आध्यात्मिक चेतना की ओर यात्रा करता है। भजन की पहली पंक्ति "लेके पूजा की थाली ज्योत मन की जगा ली" हमें यह सिखाती है कि सच्ची पूजा केवल हाथों में दीपक और थाली लेकर मंदिर जाने तक सीमित नहीं है, बल्कि असली पूजा तब होती है जब साधक अपने अंतर्मन (हृदय) में भक्ति और ज्ञान की ज्योति जला लेता है।

जब भक्त कहता है कि "मैया तेरे दर्शन को मैं तो मन में ठान ली", तो यह उसकी दृढ़ इच्छाशक्ति (संकल्प शक्ति) को दर्शाता है। आध्यात्मिक मार्ग में बिना दृढ़ संकल्प के ईश्वर की प्राप्ति असंभव है। माता शेरावाली के चरणों में अपनी पूरी जीवनचर्या और कर्मों को समर्पित कर देना ही सच्ची शरणागति (Surrender) है।

अन्तरों में वर्णित पंक्तियां—कि मैया का रूप इस संसार में सबसे अनूठा है और उसके चरणों की धूल मात्र से जीव का उद्धार हो जाता है—सनातन धर्म के उस विश्वास को पुष्ट करती हैं जहाँ देवी को जगत की माता माना गया है। माता के दरबार से कोई भी संतान निराश नहीं लौटती। जब भक्त श्रद्धा और विश्वास के पुष्प अर्पित करता है, तो माँ उसके सभी संकटों और उलझनों को सहज ही सुलझा देती हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • ✨ आंतरिक शुद्धि का संदेश: यह भजन बाह्य कर्मकांडों के साथ-साथ आंतरिक शुद्धि और मन की एकाग्रता पर जोर देता है।
  • ✨ माँ दुर्गा की कृपा प्राप्ति: माता शेरावाली के नौ रूपों और उनकी ममतामयी स्वरूप का सुंदर स्मरण कराता है।
  • ✨ सत्संग और मानसिक शांति: इस भजन के निरंतर गायन या श्रवण से मन को असीम शांति, सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक संबल प्राप्त होता है।
  • ✨ नवरात्रि विशेष प्रस्तुति: चैत्र और शारदीय नवरात्रि के पवित्र दिनों में माता के जागरण और चौकी पर इस भजन को विशेष रूप से गाया जाता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भक्ति संगीत का पूर्ण लाभ प्राप्त करने के लिए उचित समय और विधि का होना आवश्यक है:

  • 🌅 ब्रह्ममुहूर्त एवं संध्याकाल: प्रातःकाल स्नान के पश्चात माता के सम्मुख दीपक प्रज्वलित करते समय या संध्या आरती के समय इस भजन को गाना अत्यंत फलदायी होता है।
  • 🌺 पूजा और अनुष्ठान: नवरात्रि, अष्टमी, नवमी अथवा किसी भी मंगलवार एवं शुक्रवार को माता की चौकी या जागरण के दौरान इसे समूह में गाया जा सकता है।
  • 📿 मानसिक जप: दैनिक जीवन की भागदौड़ के बीच जब भी मन विचलित हो, इस भजन की पंक्तियों को गुनगुनाने से मानसिक स्थिरता मिलती है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से आदिशक्ति माता दुर्गा (शेरावाली) को समर्पित है। सनातन परंपरा में माँ दुर्गा को शक्ति, ऊर्जा, करुणा और ब्रह्मांड की संरक्षिका माना गया है। मार्कण्डेय पुराण एवं दुर्गा सप्तशती के अनुसार, जब-जब पृथ्वी पर अधर्म और असुरों का अत्याचार बढ़ा है, तब-तब माता ने विभिन्न रूपों (महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती) में प्रकट होकर भक्तों की रक्षा की है। इस भजन में उसी सर्वशक्तिरूपा माता के प्रति बाल-सुलभ प्रेम और श्रद्धा को व्यक्त किया गया है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा अत्यंत सरल, सुबोध और लोक-सुलभ हिंदी/खड़ी बोली है, जिसे देश के किसी भी कोने में आसानी से समझा और गाया जा सकता है। इसमें अनुप्रास और उपमा अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है जैसे "पूजा की थाली" और "ज्योत मन की जगा ली"। संगीतात्मकता की दृष्टि से यह भजन कहहरवा या दादरा ताल में आसानी से गाया जा सकता है, जो श्रोताओं को झूमने और थिरकने पर विवश कर देता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी भी बड़ी बाधाएँ या उलझनें क्यों न आएँ, यदि ईश्वर और माता रानी पर अटूट विश्वास है, तो हर समस्या का समाधान मिल जाता है। यह हमें सिखाता है:

  • 1. आत्म-विश्वास और संकल्प: बिना दृढ़ संकल्प के कोई भी आध्यात्मिक या भौतिक लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा सकता।
  • 2. अहंकार का त्याग: पूजा की थाली के साथ मन की ज्योति जगाने का अर्थ अहंकार रूपी अंधकार को मिटाना है।
  • 3. शरणागति का भाव: अपने जीवन की डोर उस परम शक्ति के हाथों में सौंप देना ही सच्चे भक्त का लक्षण है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ संदर्भ / भावार्थ
पूजा की थाली आरती और पूजन सामग्री बाह्य पूजा का प्रतीक
मन की जगा ली अंतरात्मा को जाग्रत करना आंतरिक भक्ति और ज्ञान का उदय
शेरावाली सिंह पर सवार होने वाली माता माता दुर्गा का प्रसिद्ध संबोधन
जिंदगानी जीवन संपूर्ण जीवन ईश्वर को समर्पित करना
उलझन समस्या या मानसिक दुविधा जीवन के कष्ट और कठिनाइयाँ

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"लेके पूजा की थाली ज्योत मन की जगा ली..."
भावार्थ: भक्त कहता है कि मैं हाथों में पूजा की थाल लेकर माँ की आरती उतारने चला हूँ, और साथ ही मैंने अपने भीतर अज्ञानता का अंधेरा मिटाकर भक्ति और प्रेम की ज्योति जला ली है।

"रूप तुम्हारा जग से न्यारा, महिमा तेरी गाए संसारा..."
भावार्थ: हे माता! आपका रूप इस समस्त ब्रह्मांड में सबसे विलक्षण और सुंदर है। संपूर्ण संसार आपकी महिमा का गुणगान करता है।

"दुखियों की तू सुनने वाली, भरती झोली खाली-खाली..."
भावार्थ: आप दीन-दुखियों की पुकार सबसे पहले सुनती हैं और जो भी निराश आपके द्वार पर आता है, आप उसकी खाली झोली को अपनी कृपा से भर देती हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

माता रानी की आराधना के समय निम्नलिखित पावन मंत्र का स्मरण करना अति उत्तम माना गया है:

"या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।"

अर्थ: जो देवी सब जीवों में शक्ति के रूप में स्थित हैं, उनको बार-बार नमस्कार है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण तथ्य
भजन का नामलेके पूजा की थाली ज्योत मन की जगा ली
समर्पित देवीमाता दुर्गा / शेरावाली
शैलीलोक भजन / माता भजन
भाषासरल हिंदी / खड़ी बोली
मुख्य भावप्रेम, समर्पण, और आंतरिक भक्ति
उपयुक्त अवसरनवरात्रि, माता का जागरण, संध्या आरती, सत्संग
संबंधित लिंकश्री दुर्गा चालीसा, अम्बे तू है जगदंबे काली आरती

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1: "लेके पूजा की थाली ज्योत मन की जगा ली" भजन किस देवी को समर्पित है?

यह भजन जगत जननी आदिशक्ति माँ दुर्गा (शेरावाली) को समर्पित है।

Q2: इस भजन को किस अवसर पर गाया जाता है?

इस भजन को मुख्य रूप से नवरात्रि, माता के जागरण, कन्या पूजन, चौकी और संध्या आरती के समय गाया जाता है।

Q3: भजन में "ज्योत मन की जगा ली" का क्या तात्पर्य है?

इसका तात्पर्य केवल बाहरी दीपक जलाने के साथ-साथ अपने अंतर्मन में भक्ति, ज्ञान और प्रेम की चेतना को प्रज्वलित करना है।

Q4: क्या यह भजन शुरुआत करने वाले गायकों के लिए आसान है?

हाँ, इसकी लय बहुत सरल और तालबद्ध है, जिसे हारमोनियम या ढोलक के साथ आसानी से गाया जा सकता है।

Q5: माता रानी की पूजा में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

पूजा के दौरान पवित्रता, स्वच्छता, सच्चे मन से समर्पण और माता के प्रति अटूट विश्वास का होना आवश्यक है।

Q6: नवरात्रि के दिनों में माता को कौन सा भोग लगाना चाहिए?

नवरात्रि में हलवा, पूरी, चने का भोग और मखाने की खीर माता को अत्यंत प्रिय है।

Q7: इस भजन को गाने से क्या आध्यात्मिक लाभ मिलता है?

इससे मानसिक शांति मिलती है, नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

Q8: क्या इस भजन को घर पर अकेले भी गाया जा सकता है?

निश्चित रूप से, व्यक्तिगत साधना, पूजा या ध्यान के समय इसे अकेले या परिवार के साथ गाया जा सकता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह पृष्ठ संरेखित धार्मिक परंपराओं और लोक संस्कृति के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को प्रामाणिक भजन के बोल, सटीक अर्थ और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करना है। सभी पंक्तियों की शुद्धता और भक्ति रस का विशेष ध्यान रखा गया है।

संदर्भ स्रोत: पारंपरिक लोक भजन संग्रह, माता रानी के संकीर्तन ग्रंथ तथा सनातन भक्ति साहित्य।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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