Matarani Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

नाम है तेरा तारणहारा कब तेरा दर्शन होगा

पढ़ें नाम है तेरा तारणहारा कब तेरा दर्शन होगा का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

Matarani Bhajan Bhakti Sangeet devotional Guide

सम्पूर्ण भक्ति रस, लिरिक्स एवं भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "नाम है तेरा तारणहारा कब तेरा दर्शन होगा" सनातन संस्कृति में ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम, विरह, और पूर्ण शरणागति का जीवंत और प्रेरक उदाहरण है। कलियुग में भगवन्नाम संकीर्तन को भवसागर से तरने का एकमात्र सुलभ मार्ग बताया गया है। इस भजन का प्रत्येक शब्द साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति और श्रद्धा रूपी अमृत का संचार करता है। इस लेख में हम इस दिव्य भजन के सम्पूर्ण बोल, गहन भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व, गायन विधि और जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

भजन का परिचय एवं आध्यात्मिक पृष्ठभूमि

सनातन धर्म में माता रानी (जगदम्बा, आदिशक्ति) और विभिन्न आराध्य देवों की आराधना में संगीत और भजनों का विशेष स्थान रहा है। जब एक साधक सांसारिक बंधनों और दुखों से घिर जाता है, तब उसके हृदय से जो आर्त पुकार निकलती है, वही इस भजन का मूल स्वर है। "नाम है तेरा तारणहारा कब तेरा दर्शन होगा" केवल एक पंक्ति नहीं, बल्कि उस जीवात्मा की छटपटाहट है जो अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा या माता रानी) से मिलने के लिए व्याकुल है। इस भजन का भाव साधक को भौतिकता से ऊपर उठाकर आध्यात्मिक चेतना के शिखर पर ले जाता है।

श्रीमद्भगवद्गीता और विभिन्न पुराणों में भी इस बात का उल्लेख है कि जो भक्त अनन्य भाव से भगवान का स्मरण करते हैं, उनकी पुकार अवश्य सुनी जाती है। यह भजन साधक के मन की चंचलता को शांत कर उसे एकाग्रता और भक्ति मार्ग पर अग्रसर करता है। ऐसे भजनों के नियमित श्रवण और गायन से घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मन को असीम शांति की प्राप्ति होती है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

(स्थाई / मुखड़ा)
नाम है तेरा तारणहारा, कब तेरा दर्शन होगा,
इस सूने मन के मंदिर में, कब तेरा आगमन होगा।
नाम है तेरा तारणहारा, कब तेरा दर्शन होगा...


(अंतरा 1)
भटक रहा हूँ इस माया की, नगरी में अंधियारे में,
कोई किनारा दीख ना पड़ता, इस जीवन के भंवरारे में।
तू ही मेरी नैया का माझी, कब मेरा उद्धार होगा,
नाम है तेरा तारणहारा, कब तेरा दर्शन होगा...

(अंतरा 2)
आशा की इक जोत जलाई, तेरे चरणों के साये में,
उम्र बीतती जाए मेरी, बस तेरी ही माया में।
एक बार तो सुन ले पुकार, हे मैया मेरा नमन होगा,
नाम है तेरा तारणहारा, कब तेरा दर्शन होगा...

(अंतरा 3)
पाप और संताप मिटा दे, अपनी दया की छांव में,
तृषित खड़ा हूँ द्वार तिहारे, अमृत भर दे नाव में।
तेरे बिना हे प्राण-प्यारी, जीवन यह व्यर्थ मरण होगा,
नाम है तेरा तारणहारा, कब तेरा दर्शन होगा...

(समापन)
जय माता दी, जय तारणहारी, सबकी बिगड़ी बनाने वाली!
तेरी कृपा से हे जगदम्बे, हर संकट का निवारण होगा।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस पावन भजन का भावार्थ अत्यंत गहरा है। प्रथम पंक्तियों में भक्त अपनी विरहाग्नि को प्रकट करते हुए माता रानी या आराध्य से प्रश्न करता है कि हे तारणहार! तेरा नाम ही इस भवसागर से पार लगाने वाला है, परंतु मुझे तेरे प्रत्यक्ष दर्शन कब प्राप्त होंगे? मेरा यह अंतर्मन, जो सूने मंदिर की भांति नीरस हो चुका है, उसमें तेरी चैतन्य ज्योति का प्रकाश कब फैलेगा।

आगे के अंतरों में साधक अपनी लाचारी और संसार की मायावी प्रपंचों का वर्णन करता है। वह कहता है कि मैं इस संसार रूपी अंधकारमयी नगरी में भटक रहा हूँ और जीवन के संघर्षों रूपी भंवर में मेरा कोई किनारा नहीं सूझ रहा। ऐसी स्थिति में केवल आप ही मेरी जीवन नैया को पार लगाने वाले माझी हो। जब तक आपकी कृपा दृष्टि नहीं होगी, तब तक इस जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति असंभव है। यह भजन आर्त-भक्ति (संकट के समय की गई सच्ची पुकार) का सर्वोत्तम उदाहरण है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं आध्यात्मिक महत्व

  • अनन्य शरणागति: भजन साधक को सिखाता है कि अपने अहंकार को त्यागकर पूर्ण रूप से ईश्वर के चरणों में समर्पित हो जाना चाहिए।
  • नाम जप की महिमा: कलियुग में भगवन्नाम को ही सबसे बड़ा साधन माना गया है, जो तारणहार की भूमिका निभाता है।
  • विरह और प्रेम का संतुलन: ईश्वर प्राप्ति के लिए व्याकुलता (विरह) ही सच्ची भक्ति की कसौटी है।
  • मानसिक शांति: ऐसे भजनों के गायन से तनाव, चिंता और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है तथा मन में सकारात्मकता आती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि

इस भजन का गायन या श्रवण किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु कुछ विशेष अवसरों और समय पर इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है:

  • ब्रह्म मुहूर्त एवं संध्याकाल: प्रातः काल उठकर या सूर्यास्त के समय दीप प्रज्वलित करते हुए इस भजन का स्मरण करना अत्यंत फलदायी होता है।
  • नवरात्रि एवं विशेष पर्व: माता रानी के पर्वों, जैसे चैत्र या शारदीय नवरात्रि, और विशेष नवरात्रि व्रत पूजा विधि के दौरान इसका सामूहिक संकीर्तन बहुत आनंददायक होता है।
  • सत्संग और जागरण: माता के जागरण, चौकी या घर पर होने वाले अनुष्ठानों में इस भावुक भजन को गाकर माहौल को पूर्णतः भक्तिमय बनाया जा सकता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं सनातन परंपरा

यह भजन मुख्य रूप से शक्ति स्वरूपा जगत जननी आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती के संयुक्त स्वरूप को समर्पित है। सनातन परंपरा में 'तारणहार' शब्द उस परम शक्ति के लिए प्रयोग किया जाता है जो अपने भक्तों को इस संसार रूपी चक्रव्यूह और दुखों से सहर्ष बाहर निकाल लेती है। माता रानी अपने भक्तों की पुकार पर तुरंत द्रवित होती हैं, इसीलिए इन्हें 'दयामयी' और 'कारुण्यमयी' भी कहा जाता है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि

पारंपरिक लोक संगीत और संत वाणी से प्रेरित यह भजन पीढ़ियों से संतों, गायकों और भक्तों द्वारा गाया जाता रहा है। इसकी रचना सरल हिंदी और ब्रज-अवधी मिश्रित लोक बोलियों के प्रभाव से हुई है ताकि आम से आम व्यक्ति भी इसके भाव को आसानी से समझ सके और अपने जीवन में उतार सके। लोक कथाओं और संकीर्तन परंपरा में ऐसे भजनों को मौखिक रूप से आगे बढ़ाया गया है जो आज भी हर घर में अपनी मिठास बिखेर रहे हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली

इस भजन की भाषा बहुत ही सरल, सहज और हृदयस्पर्शी है। इसमें रूपक अलंकारों का सुंदर प्रयोग किया गया है, जैसे—'जीवन के भंवरारे में', 'सूने मन के मंदिर में', और 'नैया का माझी'। शब्दों की यह कोमलता श्रोता के मन को सीधे छू लेती है और बिना किसी कठिन शब्दार्थ के भगवान के प्रति प्रेम और करुणा के भाव को जागृत कर देती है।

आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख

भजन हमें यह सीख देता है कि मनुष्य चाहे कितनी भी भौतिक सुख-सुविधाओं में क्यों न उलझा हो, जब तक उसके जीवन में ईश्वर के प्रति समर्पण और प्रेम नहीं है, तब तक उसका जीवन अधूरा है। विपत्तियों के समय घबराने के बजाय अपनी प्रार्थना सीधे उस तारणहार तक पहुंचानी चाहिए। धैर्य, अटूट विश्वास और सच्ची पुकार ही भगवान को प्रसन्न करने की एकमात्र कुंजी है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ संदर्भ / भावार्थ
तारणहार पार लगाने वाला / उद्धारकर्ता जो इस भवसागर से जीव को मुक्त करता है।
भंवरारा जल का भंवर / संकट चक्र जीवन के कठिन संघर्ष और समस्याएं।
तृषित प्यासा ईश्वर के दर्शन और ज्ञान के लिए लालायित मन।
आगमन प्रवेश / आना हृदय में ईश्वर की चेतना का जागृत होना।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ

"नाम है तेरा तारणहारा, कब तेरा दर्शन होगा" — इस पंक्ति में भक्त भगवान के नाम की महिमा का गुणगान करते हुए उनके प्रत्यक्ष स्वरूप के दर्शन की तीव्र इच्छा व्यक्त करता है।
"इस सूने मन के मंदिर में, कब तेरा आगमन होगा" — भक्त का हृदय एक सूने मंदिर की तरह है जहाँ प्रभु की अनुपस्थिति के कारण अंधकार है, वह अपने भीतर दिव्य प्रकाश चाहता है।
"तू ही मेरी नैया का माझी, कब मेरा उद्धार होगा" — जीवन रूपी नौका को सही दिशा देने और पार लगाने की संपूर्ण जिम्मेदारी भक्त अपने आराध्य को सौंप देता है।

संबंधित मंत्र एवं श्लोक

"सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥"

यह श्लोक माता रानी की स्तुति और तारणहार स्वरूप का स्मरण कराने के लिए इस भजन के साथ अत्यंत उपयुक्त है। अधिक जानकारी के लिए आप दुर्गा सप्तशती पाठ विधि भी देख सकते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी (Quick Information)

भजन का नाम नाम है तेरा तारणहारा कब तेरा दर्शन होगा
आराध्य देवता माता रानी / आदिशक्ति / जगत जननी
काव्य शैली / भाषा सरल हिंदी, लोक संगीत शैली
मुख्य विषय / थीम भक्ति, विरह, शरणागति और उद्धार
प्रमुख भाव (Bhava) प्रेम, आर्त पुकार और विनय
उपयुक्त अवसर संध्या वंदन, नवरात्रि, जागरण, सत्संग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन मुख्य रूप से जगत जननी आदिशक्ति माता रानी और भगवान के तारणहार स्वरूप को समर्पित है, जो अपने भक्तों के सभी संकटों को दूर करती हैं।

इस भजन को प्रातःकालीन पूजा, संध्या आरती, नवरात्रि के दिनों या घर पर होने वाले माता के सत्संग व जागरण के समय पूरी श्रद्धा के साथ गाया जा सकता है।

'तारणहारा' का अर्थ है—वह महान शक्ति जो इस संसार रूपी भवसागर और दुखों के भंवर से भक्त को सकुशल पार लगा दे या उसका उद्धार कर दे।

इसके नियमित गायन और श्रवण से मन की चंचलता समाप्त होती है, मानसिक शांति मिलती है और ईश्वर के प्रति अटूट प्रेम और विश्वास जागृत होता है।

हाँ, पारिवारिक अनुष्ठानों और संध्याकालीन भजन-कीर्तन में परिवार के सभी सदस्य मिलकर इसे गा सकते हैं, जिससे घर का वातावरण पवित्र बनता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह आलेख सनातन भक्ति परंपरा, लोक साहित्य और संकीर्तन ग्रंथों के गहन अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध और उच्चकोटि की भक्ति सामग्री प्रदान करना है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत सभी तथ्यों और भावों की प्रमाणिकता का विशेष ध्यान रखा गया है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • सनातन लोक भक्ति एवं संकीर्तन परंपरा संग्रह
  • श्रीमद्भगवद्गीता (भक्ति योग संदर्भ)
  • दुर्गा सप्तशती एवं पौराणिक स्तोत्र ग्रंथ
  • पारंपरिक भजन संकलन एवं लोकगाथाएं

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 10 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!