माँ शेरावाली की महिमा का गुणगान करने वाले लोकप्रिय भजनों में नरेंद्र चंचल जी द्वारा स्वरबद्ध और प्रचारित "है कौन बड़ा तुमसे मैया" (Hai Kaun Bada Tumse Maiya) एक अत्यंत ही पावन, ऊर्जावान और हृदय को झकझोर देने वाला भजन है। यह भजन देवी दुर्गा के नौ रूपों, उनकी अहैतुकी करुणा और भक्तों पर बरसने वाली उनकी असीम कृपा का एक सजीव चित्रण है। सनातन भक्ति परंपरा में माता रानी के दरबार में आने वाला हर भक्त अपनी झोली उम्मीदों से भरकर ले जाता है, और यही भाव इस भजन के रोम-रोम में प्रवाहित होता है। जब भी कोई साधक पूरी श्रद्धा, विश्वास और रुंधे गले से माँ के चरणों में अपनी पुकार रखता है, तो जगत जननी जगदम्बा किसी न किसी रूप में उसकी रक्षा के लिए दौड़ी चली आती हैं। इस विस्तृत और scholarly guide में हम इस अमर भजन के शाब्दिक अर्थ, अंतर्मन को छू लेने वाले भावार्थ, गायन के आध्यात्मिक महत्व और देवी उपासना की गूढ़ परंपराओं का रसास्वादन करेंगे।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
जय माता दी!
है कौन बड़ा तुमसे मैया, ओ शेरावाली,
तेरे चरणों में झुकती है, दुनिया ये सारी।
है कौन बड़ा तुमसे मैया, ओ शेरावाली...
ऊँचे पर्वत तेरा धाम, ऊँचा तेरा ठिकाना,
तेरे दर पे जो भी आया, नहीं खाली लौट के जाना।
तू ममता की है मूरत, तू ही शक्ति अपार,
तेरी महिमा गाती मैया, ये सारी सृष्टि संसार।
है कौन बड़ा तुमसे मैया, ओ शेरावाली...
जब-जब भीड़ पड़ी भक्तों पर, दौड़ी चली आई,
मार्कण्डेय हो या प्रह्लाद, तूने लाज बचाई।
दुष्टों का संहार किया और भक्तों को तारा,
इस कलयुग में मैया तूने, दिया है सबका सहारा।
है कौन बड़ा तुमसे मैया, ओ शेरावाली...
लाल लंगूरा हाथ में खप्पर, संग में लांगुरिया गावें,
तेरे भवन में मैया जी, सब झूम के नाचें-गावेंगे।
जो कोई सच्चे मन से माँ, तेरी ज्योति जलावे,
उसके घर के सारे संकट, पल में दूर भगावे।
है कौन बड़ा तुमसे मैया, ओ शेरावाली...
हे जगदम्बे भवानी माँ, चरणों की धूल मिल जाए,
जन्म-जन्म के पाप कटें और मोक्ष धाम को जाए।
भक्ति का वरदान दे दो, चरणों का प्यार दे दो,
'लakkha' की इस विनती को, माँ स्वीकार कर लो।
है कौन बड़ा तुमसे मैया, ओ शेरावाली,
तेरे चरणों में झुकती है, दुनिया ये सारी।
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन केवल शब्दों का समूह नहीं, अपितु एक साधक की अपनी आराध्य देवी जगदम्बा के प्रति अनन्य भक्ति और परम समर्पण की जीवंत अभिव्यक्ति है। भजन के मुखड़े में ही यह प्रश्न पूछा गया है कि "है कौन बड़ा तुमसे मैया", जिसका तात्पर्य है कि त्रिलोकी में माता से बड़ा और कोई रक्षक, दयालु या पालनहार नहीं है। संसार के बड़े-बड़े राजा-महाराज, ऋषि-मुनि और देवता भी जब संकट में घिरते हैं, तो वे आदि शक्ति दुर्गा के चरणों में ही शरण लेते हैं।
भजन के अंतरा में माँ के निवास स्थान यानी त्रिकूट पर्वत (वैष्णो देवी) और उनके भव्य दरबार का वर्णन है। कवि या गायक यह विश्वास दिलाता है कि जो भी भक्त सच्चे भाव से उस ऊँचे पर्वत पर स्थित दरबार में हाजिरी लगाता है, वह कभी निराश नहीं लौटता। माता की ममता सागर के समान अगाध है और उनकी शक्ति ब्रह्मांड के कण-कण में समाहित है। जब-जब भक्त ने सच्चे हृदय से पुकारा, तब-तब माँ ने अदृश्य रूप से प्रकट होकर अपनी संतानों के कष्टों का निवारण किया है। कलयुग के इस जटिल कालखंड में भी माँ शेरावाली का स्मरण मात्र मनुष्य के सारे भय और संतापों को हर लेता है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
भजन की सबसे बड़ी विशेषता इसका लोक-स्वीकार्य होना और जन-मानस के हृदय को तुरंत स्पर्श कर लेना है। देवी दुर्गा, जिन्हें महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का समन्वित स्वरूप माना जाता है, उनकी स्तुति करने से साधक को भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है। नवरात्र के पावन पर्वों पर, मंगलवार या शनिवार की चौकियों में तथा जागरण के दौरान इस भजन को गाने से वातावरण पूरी तरह से चैतन्य और सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है। यह भजन भक्तों के मन में अदम्य साहस, आत्मबल और मातृ-भक्ति का संचार करता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस पावन भजन को प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त में देवी पूजन के समय, संध्या वंदन के दौरान अथवा विशेष रूप से शारदीय और चैत्र नवरात्र के नौ दिनों में गाना या सुनना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसे गाते या सुनते समय मन में पूर्ण पवित्रता, धूप-दीप की सुगंध और माता की ज्योति के प्रति अटूट विश्वास होना चाहिए। सामूहिक संकीर्तन और माता के जागरण में इस भजन को कोरस (समूह) में गाने से प्राप्त होने वाली आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव अद्वितीय होता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
इस भजन की मूल आराध्य देवी माँ शेरावाली (माता वैष्णो देवी / दुर्गा) हैं, जो हिंदू सनातन संस्कृति में शक्ति की अधिष्ठात्री देवी हैं। इस प्रसिद्ध भजन को जन-जन तक पहुँचाने में प्रसिद्ध भजन सम्राट पद्म श्री नरेंद्र चंचल (Lakkha / Bhajan Samrat) जी का अतुलनीय योगदान रहा है। उनकी ओजस्वी और भावपूर्ण आवाज ने इस रचना को अमर बना दिया है। आप माता की अन्य स्तुतियों के लिए श्री दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती पाठ का भी अध्ययन कर सकते हैं।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
भजन की रचना लोक परंपरा और आधुनिक भक्ति संगीत शैली के अद्भुत समन्वय पर आधारित है। उत्तर भारत के पारंपरिक देवी जागरणों और माता के भंडारों में इस प्रकार के भजनों का गायन पिछले कई दशकों से होता आ रहा है। इसके मूल रचनाकार और गायक ने अपनी सात्विक साधना के बल पर माँ के उस स्वरूप को शब्दों में पिरोया है, जहाँ भक्त और भगवान का भेद मिटकर केवल एक निर्मल प्रेम शेष रह जाता है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा अत्यंत सरल, सुबोध और लोक-प्रिय हिंदी/खड़ी बोली है, जिसमें ब्रज और पंजाबी लोक संगीत की हल्की सी मिठास भी महसूस होती है। काव्य शैली में अनुप्रास और उपमा अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है जैसे "ममता की मूरत", "शक्ति अपार" आदि। यह शैली आम से लेकर खास तक हर श्रोता के मन में तुरंत उतर जाती है और जुबान पर स्वतः थिरकने लगती है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी भी विकट परिस्थितियाँ क्यों न आएँ, मनुष्य को कभी भी अपनी उम्मीद और ईश्वर पर से विश्वास नहीं खोना चाहिए। माता शेरावाली इस बात का प्रतीक हैं कि शक्ति और प्रेम का संतुलन ही संसार को चलाता है। अहंकार का त्याग कर शरणागति का भाव अपनाने से बड़े से बड़ा संकट भी धूल के समान उड़ जाता है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / पद | सरल हिंदी अर्थ | आध्यात्मिक / सात्विक संदर्भ |
|---|---|---|
| शेरावाली | शेर की सवारी करने वाली माँ | प्रकृति और ऊर्जा की नियंत्रक देवी दुर्गा |
| धाम | पवित्र निवास स्थान / तीर्थ | आध्यात्मिक चेतना का सर्वोच्च केंद्र (जैसे त्रिकूट पर्वत) |
| ममता की मूरत | असीम प्रेम और वात्सल्य की प्रतिमूर्ति | भक्तों के प्रति माँ का निस्वार्थ प्रेम |
| खप्पर | देवी का अस्त्र / पात्र | दुष्ट प्रवृत्तियों और अहंकार का नाश करने का प्रतीक |
| लांगुरिया | भैरव या हनुमान जी का बाल रूप / सेवक | माता के दरबार के परम सेवक और अनुचर |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"है कौन बड़ा तुमसे मैया, ओ शेरावाली..." - इस पंक्ति में साधक अपनी बुद्धि की सीमाओं को स्वीकार करते हुए कहता है कि हे जगदम्बे! आपके समान सामर्थ्यवान, दयालु और शक्तिशाली इस ब्रह्मांड में दूसरा कोई नहीं है।
"ऊँचे पर्वत तेरा धाम, ऊँचा तेरा ठिकाना..." - माता का स्थान भौतिक रूप से ऊँचे पर्वतों पर है और आध्यात्मिक रूप से वे साधक के सहस्रार चक्र (सर्वोच्च चेतना) पर विराजमान हैं, जहाँ पहुँचने पर सारे बंधन कट जाते हैं।
"जो कोई सच्चे मन से माँ, तेरी ज्योति जलावे..." - ज्योति ज्ञान, प्रकाश और सकारात्मकता का प्रतीक है। जो भक्त अपने भीतर भक्ति का दीप जलाता है, उसके जीवन के सारे अंधकार स्वतः समाप्त हो जाते हैं।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
माता शेरावाली की आराधना के समय निम्नलिखित पावन वैदिक श्लोक का स्मरण करना अत्यंत फलदायी होता है:
या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
आप भगवान शिव की स्तुति के लिए शिव तांडव स्तोत्र और जगत के पालनहार की वंदना के लिए विष्णु सहस्रनाम का भी पाठ कर सकते हैं।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| भजन का नाम | है कौन बड़ा तुमसे मैया (Hai Kaun Bada Tumse Maiya) |
| प्रमुख देवता | माँ शेरावाली / माता दुर्गा / जगदम्बा |
| लोकप्रिय गायक | नरेंद्र चंचल (Narendra Chanchal) |
| भाषा | हिंदी / लोक भाषा |
| थीम / विषय | भक्ति, शरणागति, मातृ-प्रेम और स्तुति |
| भाव | अनन्य प्रेम, श्रद्धा और समर्पण |
| उचित अवसर | नवरात्र, माता का जागरण, मंगलवार/शनिवार पूजा |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
'है कौन बड़ा तुमसे मैया' भजन के मुख्य गायक कौन हैं?
इस प्रसिद्ध भजन को मुख्य रूप से प्रसिद्ध भजन सम्राट नरेंद्र चंचल जी ने अपनी ओजस्वी और अनूठी शैली में गाकर अमर किया है, जिसे आज भी हर देवी जागरण और नवरात्र में चाव से सुना जाता है.
यह भजन किस देवी-देवता को समर्पित है?
यह भजन सनातन धर्म की शक्ति स्वरूपा, आदिशक्ति जगत जननी माँ दुर्गा और माता वैष्णो देवी (शेरावाली) को समर्पित है.
इस भजन को किस अवसर पर गाना सबसे अच्छा होता है?
शारदीय और चैत्र नवरात्र, माँ दुर्गा की चौकी, मंगलवार या शुक्रवार की माता की पूजा तथा किसी भी मांगलिक उत्सव या जागरण के दौरान इस भजन को गाना अत्यंत शुभ माना जाता है.
भजन में 'लांगुरिया' शब्द का क्या अर्थ है?
माता के भजनों और दरबार में 'लांगुरिया' शब्द भगवान हनुमान या बटुक भैरव के बाल स्वरूप और माता के अनन्य सेवकों के संदर्भ में प्रेमपूर्वक प्रयोग किया जाता है.
इस भजन को सुनने से क्या आध्यात्मिक लाभ मिलता है?
इस भजन को सुनने और गाने से मन को असीम शांति मिलती है, भय और नकारात्मकता दूर होती है तथा माता रानी के चरणों में अटूट विश्वास और भक्ति बढ़ती है.
क्या घर पर इस भजन का संकीर्तन किया जा सकता है?
हाँ, घर पर संध्या वंदन या विशेष पूजा के दौरान परिवार सहित इस भजन का संकीर्तन करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-शांति का वास होता है.
माता रानी की कृपा पाने के लिए सबसे सरल उपाय क्या है?
सच्चे मन से माता का स्मरण करना, गरीबों की सहायता करना, पवित्रता बनाए रखना और नियमित रूप से चालीसा या भजनों का पाठ करना ही सर्वोत्तम उपाय है.
क्या इस भजन को नए कलाकार गा सकते हैं?
बिल्कुल, यह एक लोक-प्रिय भजन है जिसे कोई भी भक्त अपनी श्रद्धा और स्वर के अनुसार माता के दरबार में गा सकता है.
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस आलेख में प्रदत्त जानकारी पारंपरिक सनातन ग्रंथों, लोक कथाओं, भजन परंपरा और श्रद्धेय संतों के अनुभवों के आधार पर संकलित की गई है ताकि पाठकों को प्रामाणिक, सात्विक और उच्च कोटि की भक्ति सामग्री मिल सके।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- देवी भागवत पुराण एवं मार्कण्डेय पुराण (दुर्गा सप्तशती संदर्भ)
- उत्तर भारतीय लोक भजन परंपरा एवं संकीर्तन साहित्य
- पारंपरिक माता जागरण गीत संग्रह एवं आडियो अभिलेख
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें