"दिल जब जब तुम्हें पुकारे" (Dil Jab Jab Tumhe Pukare) माँ पूर्णागिरि को समर्पित एक अत्यंत ही मधुर, भावपूर्ण और लोकप्रिय भजन है, जिसे सुप्रसिद्ध भजन गायिका नीलिमा और सिमरत सिंह ने अपने दिव्य स्वरों से सजाया है। यह भजन उत्तराखंड की पावन पहाड़ियों में विराजमान माँ पूर्णागिरि (जो कि आदि शक्ति का ही एक रूप हैं) के प्रति अटूट श्रद्धा, अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति को प्रदर्शित करता है। सनातन धर्म की संकीर्तन परंपरा में इस भजन का एक विशिष्ट स्थान है, क्योंकि इसके शब्द सीधे हृदय को स्पर्श करते हैं और जीवात्मा को परमात्मा (आदि शक्ति) से जोड़ने का माध्यम बनते हैं। इस भजन के माध्यम से भक्त अपनी करुण पुकार जगदम्बा के चरणों में अर्पित करता है और सांसारिक भवसागर से पार उतरने की प्रार्थना करता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
॥ दिल जब जब तुम्हें पुकारे ॥
(मुखड़ा)
दिल जब जब तुम्हें पुकारे, दौड़ी चली आना मैया।
हम हैं बालक तेरे सहारे, पार लगा देना नैया।
दिल जब जब तुम्हें पुकारे, दौड़ी चली आना मैया॥
(अंतरा 1)
ऊंचे पहाड़ों पे मंदिर तुम्हारा, भक्तों की आंखों का तू ही तारा।
महिमा तुम्हारी जग से न्यारी, शरण में आए जो भी सवाली।
बिगड़ी बनाने वाली मैया, पार लगा देना नैया।
दिल जब जब तुम्हें पुकारे, दौड़ी चली आना मैया॥
(अंतरा 2)
पूर्णागिरि की पावन घाटी, चंदन से पावन यहाँ की माटी।
जो भी श्रद्धा से शीश झुकाए, मनवांछित फल वो ही पाए।
दुःख हरने वाली मैया, पार लगा देना नैया।
दिल जब जब तुम्हें पुकारे, दौड़ी चली आना मैया॥
(अंतरा 3)
नीलिमा सिमरत महिमा गाएं, चरणों में तेरे शीश झुकाएं।
हाथ दया का सिर पे रखना, भूल हमारी मैया ना तकना।
भव पार लगाने वाली मैया, पार लगा देना नैया।
दिल जब जब तुम्हें पुकारे, दौड़ी चली आना मैया॥
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन भक्त और भगवान के बीच के उस निश्छल और पवित्र संबंध को दर्शाता है, जहाँ भक्त अपनी माँ से बाल-सुलभ हठ और पूर्ण विश्वास के साथ प्रार्थना करता है। भजन का मुख्य भाव यह है कि जब भी मनुष्य का हृदय सच्चे मन से, बिना किसी कपट के ईश्वर को पुकारता है, तो ईश्वर अवश्य ही उसकी सहायता के लिए दौड़े चले आते हैं।
भजन के प्रथम भाग में भक्त कहता है कि हे मैया! जब भी मेरा हृदय व्याकुल होकर तुम्हें पुकारे, तुम बिना किसी विलंब के दौड़ी चली आना। हम अज्ञानी बालक हैं और इस संसार में हमारा एकमात्र सहारा तुम ही हो। इस जीवन रूपी नैया को इस संसार रूपी भवसागर से पार लगाने का सामर्थ्य केवल तुम्हारे पास ही है।
दूसरे भाग में माँ के दिव्य धाम और उनकी महिमा का वर्णन है। माँ पूर्णागिरि का मंदिर ऊंचे पर्वतों पर स्थित है, जो भक्तों के लिए आशा और विश्वास का केंद्र है। माँ की महिमा अपरंपार है और जो भी उनके द्वार पर याचक बनकर आता है, माँ उसकी झोली खुशियों से भर देती हैं।
अंतिम भाग में भक्त अपनी भूलों के लिए क्षमा मांगते हुए माँ से दया की याचना करता है। वह प्रार्थना करता है कि हे माँ! हमारे अवगुणों पर ध्यान न देकर, अपनी ममतामयी छाया हमारे सिर पर बनाए रखना और हमें इस जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति प्रदान करना।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
इस भजन की कई ऐसी विशेषताएं हैं जो इसे अन्य भजनों से अलग और अत्यंत प्रभावशाली बनाती हैं:
- अनन्य शरणागति (Surrender): यह भजन पूरी तरह से माँ के चरणों में आत्मसमर्पण का संदेश देता है। जब साधक अपनी बुद्धि और अहंकार को त्यागकर माँ को पुकारता है, तभी वास्तविक कृपा का अनुभव होता है।
- पूर्णागिरि धाम की महिमा: भजन में उत्तराखंड के टनकपुर में स्थित प्रसिद्ध सिद्धपीठ माँ पूर्णागिरि धाम की महिमा का गान किया गया है, जो कि सती के अंगों के गिरने से बने शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।
- करुण और शांत रस का मिश्रण: इस भजन का संगीत और गायन शैली करुण रस से ओतप्रोत है, जो सुनने वाले के मन में शांति और भक्ति का संचार करती है।
- सरलता और सुगमता: इसके शब्द इतने सरल हैं कि कोई भी सामान्य भक्त इसे आसानी से कंठस्थ कर गा सकता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
यद्यपि ईश्वर की आराधना के लिए कोई भी समय अनुचित नहीं होता, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए निम्नलिखित समय और विधि को अत्यंत फलदायी माना गया है:
- प्रातःकाल और संध्याकाल की आरती के समय: इस भजन को सुबह या शाम की पूजा के बाद शांत मन से गाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है।
- नवरात्रि के पावन अवसर पर: चैत्र और अश्विन नवरात्रि के दौरान माँ दुर्गा की आराधना करते समय इस भजन का सामूहिक संकीर्तन करना विशेष रूप से फलदायी होता है।
- पूर्णागिरि यात्रा के दौरान: जब भक्त माँ पूर्णागिरि की कठिन चढ़ाई करते हैं, तब इस भजन को गाने से शारीरिक थकान दूर होती है और मानसिक बल प्राप्त होता है।
- गायन विधि: इस भजन को गाते समय मन में माँ की छवि का ध्यान करना चाहिए। हाथों से ताली बजाकर या मंजीरे के साथ इसका संकीर्तन करने से एकाग्रता बढ़ती है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन साक्षात आदि शक्ति माँ दुर्गा के स्वरूप माँ पूर्णागिरि को समर्पित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से देवी सती के पार्थिव शरीर के टुकड़े किए थे, तब यहाँ देवी सती का नाभि अंग गिरा था। इसी कारण इस स्थान को 'पूर्णागिरि' कहा जाता है, जिसका अर्थ है 'पूर्णता प्रदान करने वाला पर्वत'।
इस भजन को लोकप्रिय बनाने में गायक नीलिमा और सिमरत सिंह का महत्वपूर्ण योगदान है। उनकी युगल जोड़ी ने इस भजन में अपने प्राण फूंक दिए हैं, जिससे यह भजन हर भक्त के कंठ का हार बन गया है। माँ पूर्णागिरि की कृपा से ही भक्तों को जीवन में सुख, समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है। माँ की आराधना के साथ-साथ भगवान शिव की स्तुति के लिए पार्वती स्तोत्र का पाठ भी अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
इस भजन की रचना आधुनिक काल में की गई है, परंतु इसका आधार प्राचीन लोक परंपरा और शक्ति संप्रदाय की मान्यताएं हैं। उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में माँ पूर्णागिरि के प्रति अगाध श्रद्धा है। हर वर्ष यहाँ लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। इसी पावन पृष्ठभूमि को ध्यान में रखकर इस भजन को तैयार किया गया है, ताकि देश-विदेश के भक्त माँ की महिमा से परिचित हो सकें और अपने घरों में बैठकर भी माँ के दिव्य धाम का अनुभव कर सकें।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा सरल और सुबोध खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें कहीं-कहीं लोकभाषा के शब्दों का पुट भी देखने को मिलता है। इसकी काव्य शैली गेय (गाए जाने योग्य) है। इसमें प्रयुक्त रूपक और उपमाएं अत्यंत सुंदर हैं। उदाहरण के लिए, जीवन को 'नैया' और संसार को 'भवसागर' के रूप में चित्रित करना सनातन साहित्य की एक प्राचीन और प्रभावी शैली है। यह शैली श्रोता को दार्शनिक गहराई का बोध कराती है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह हमें जीवन जीने की कला और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग दिखाता है:
- विश्वास की शक्ति: जब हम पूरे विश्वास के साथ किसी को पुकारते हैं, तो हमारी पुकार सुनी जाती है। जीवन में चाहे कितनी भी कठिन परिस्थितियां आएं, हमें ईश्वर पर से अपना विश्वास नहीं खोना चाहिए।
- अहंकार का त्याग: "हम हैं बालक तेरे सहारे" पंक्ति हमें सिखाती है कि ईश्वर के सामने हमें हमेशा एक अबोध बालक की तरह रहना चाहिए, क्योंकि बालक के मन में कोई छल-कपट या अहंकार नहीं होता।
- कृतज्ञता का भाव: माँ की महिमा गाकर हम उनके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं, जो हमें मानसिक शांति और संतोष प्रदान करती है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| नैया | नाव (Boat) | मनुष्य का जीवन जो संसार रूपी सागर में तैर रहा है। |
| सवाली | याचक / प्रार्थना करने वाला | वह भक्त जो अपनी इच्छाओं को लेकर माँ के चरणों में आया है। |
| मनवांछित | मन की इच्छा के अनुसार | माँ की कृपा से प्राप्त होने वाला शुभ फल। |
| भव पार | संसार सागर से मुक्ति | मोक्ष या जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति पाना। |
| शरण | आश्रय (Shelter) | ईश्वर की छत्रछाया में सुरक्षित महसूस करना। |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
1. "दिल जब जब तुम्हें पुकारे, दौड़ी चली आना मैया।"
जब भी भक्त का हृदय किसी संकट में या अत्यंत प्रेम भाव में भरकर माँ को याद करे, तो माँ अपनी ममता के वशीभूत होकर तुरंत उसकी सहायता के लिए दौड़ी चली आएं।
2. "हम हैं बालक तेरे सहारे, पार लगा देना नैया।"
हम इस संसार में अत्यंत छोटे और अज्ञानी बालक के समान हैं। हमारा अपना कोई सामर्थ्य नहीं है। इसलिए हे माँ, आप ही हमारी जीवन रूपी नैया को सुरक्षित किनारे तक पहुंचाएं।
3. "ऊंचे पहाड़ों पे मंदिर तुम्हारा, भक्तों की आंखों का तू ही तारा।"
माँ का पावन धाम ऊंचे पर्वतों पर स्थित है, जो इस बात का प्रतीक है कि दिव्य ज्ञान और शक्ति हमेशा उच्च चेतना में वास करती है। माँ अपने सभी भक्तों को अत्यंत प्रिय हैं।
4. "पूर्णागिरि की पावन घाटी, चंदन से पावन यहाँ की माटी।"
पूर्णागिरि की घाटियाँ अत्यंत पवित्र हैं। वहाँ की मिट्टी भी इतनी पावन है कि उसे माथे पर लगाने से मन के सारे पाप और संताप दूर हो जाते हैं।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
माँ पूर्णागिरि की पूजा के समय इस भजन के साथ-साथ निम्नलिखित सिद्ध मंत्रों का जाप करने से पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। माँ दुर्गा की प्रसन्नता के लिए भक्त श्री दुर्गा चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं:
"सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥"
यह मंत्र माँ के सर्व-कल्याणकारी रूप को प्रदर्शित करता है और भक्त को हर प्रकार के भय से मुक्ति दिलाता है।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| भजन का नाम | दिल जब जब तुम्हें पुकारे (Dil Jab Jab Tumhe Pukare) |
| समर्पित देवी/देवता | माँ पूर्णागिरि (आदि शक्ति दुर्गा) |
| गायक (Singers) | नीलिमा और सिमरत सिंह |
| भाषा | हिंदी (खड़ी बोली) |
| मुख्य भाव (Bhava) | भक्ति, समर्पण, करुणा, शरणागति |
| उपयुक्त अवसर | नवरात्रि, दैनिक पूजा, पूर्णागिरि मेला, सत्संग |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
"दिल जब जब तुम्हें पुकारे" भजन के मुख्य गायक कौन हैं?
इस भजन को सुप्रसिद्ध भजन गायिका नीलिमा और सिमरत सिंह ने गाया है। उनकी जुगलबंदी ने इस भजन को बहुत ही भावपूर्ण और कर्णप्रिय बनाया है।
माँ पूर्णागिरि का मंदिर कहाँ स्थित है?
माँ पूर्णागिरि का ऐतिहासिक और पौराणिक मंदिर भारत के उत्तराखंड राज्य के चंपावत जिले में, टनकपुर के पास शारदा नदी के किनारे ऊंचे पहाड़ों पर स्थित है।
पूर्णागिरि मंदिर को शक्तिपीठ क्यों माना जाता है?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, यहाँ देवी सती का नाभि अंग गिरा था, जिसके कारण यह स्थान एक अत्यंत जाग्रत शक्तिपीठ के रूप में पूजा जाता है।
इस भजन को सुनने या गाने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
इस भजन को आप कभी भी सुन सकते हैं, लेकिन प्रातःकाल की पूजा, संध्या आरती और विशेष रूप से नवरात्रि के दिनों में इसे सुनना और गाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
क्या इस भजन का कोई शास्त्रीय आधार है?
यह भजन सुगम संगीत और सुगम भक्ति शैली पर आधारित है, लेकिन इसका वैचारिक आधार श्रीमद्देवीभागवत महापुराण और सनातन धर्म की शक्ति उपासना पद्धति है।
इस भजन से हमें क्या आध्यात्मिक सीख मिलती है?
यह भजन हमें सिखाता है कि जब हम अपने अहंकार को छोड़कर पूरी तरह से ईश्वर के प्रति समर्पित हो जाते हैं, तो ईश्वर हमारी रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।
क्या पूर्णागिरि मंदिर की यात्रा के दौरान इस भजन का महत्व है?
हाँ, यात्रा के दौरान इस भजन को सुनने या गाने से भक्तों का उत्साह बढ़ता है और कठिन चढ़ाई भी सुगम प्रतीत होने लगती है।
माँ पूर्णागिरि की पूजा में किस मंत्र का जाप करना चाहिए?
माँ पूर्णागिरि की पूजा के दौरान "ॐ दुं दुर्गायै नमः" या "सर्वमंगल मांगल्ये..." मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी होता है। इसके साथ ही भगवान विष्णु की आराधना के लिए ॐ जय जगदीश हरे आरती का गान भी किया जा सकता है।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन की समीक्षा करते हुए हमारे विद्वान आचार्यों ने पाया कि इसके शब्द और संगीत का संयोजन अद्भुत है। यह भजन आधुनिक पीढ़ी को पारंपरिक मूल्यों और शक्ति उपासना से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है। इसके सरल शब्द बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को आकर्षित करते हैं और उनके भीतर भक्ति के बीज बोते हैं। यदि आप अपने जीवन में संकटों से घिरे हैं, तो इस भजन का श्रवण आपको मानसिक शांति और संबल प्रदान करेगा। इसके अतिरिक्त, संकटों के निवारण के लिए श्री हनुमान चालीसा का पाठ भी अत्यंत प्रभावी माना गया है।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- श्रीमद्देवीभागवत महापुराण - शक्तिपीठ वर्णन अध्याय।
- उत्तराखंड पर्यटन और सांस्कृतिक धरोहर अभिलेखागार (माँ पूर्णागिरि मंदिर इतिहास)।
- पारंपरिक कुमाऊंनी लोक संगीत एवं भजन संग्रह।
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें