भक्तिलोक
प्रकाशित तिथि: कार्तिक शुक्ल षष्ठी | श्रेणी: लोक पर्व एवं संस्कृति | छठ पूजा विशेष
झारखंड की राजधानी रांची में महालोकपर्व 'छठ पूजा' (Chhath Puja Ranchi) का आयोजन अत्यंत भव्य, अलौकिक और अद्वितीय होता है। यहाँ के ऐतिहासिक जलाशयों, विशेष रूप से रांची झील (Ranchi Lake), बड़ा तालाब, धुर्वा डैम, हटिया डैम और कांटाटोली क्षेत्र के तलाबों की सजावट देखते ही बनती है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को सूर्योपासना के इस महापर्व पर पूरा रांची शहर छठी मइया की भक्ति में सराबोर नजर आता है। रांची झील की अद्भुत विद्युत सजावट, भव्य तोरण द्वार, दीपों की कतारें और व्रतियों की अटूट श्रद्धा पूरे झारखंड में लोक आस्था के इस पर्व को एक विशिष्ट पहचान देती है। भक्तिलोक के इस विस्तृत आलेख में आइए जानते हैं रांची में छठ पूजा की भव्य परंपरा, सजावट के स्वरूप और इस पावन पर्व के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व के बारे में।
मुख्य आकर्षण एवं हाइलाइट्स
- रांची झील और बड़ा तालाब पर होने वाली भव्य सजावट और विद्युतरोपण (Lighting)
- झारखंड के पारंपरिक लोक गीतों और छठी मइया के संकीर्तन से गूंजते घाट
- प्रशासनिक और सामाजिक समितियों द्वारा व्रतियों के लिए की जाने वाली विशेष व्यवस्थाएं
- अस्ताचलगामी और उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने की पौराणिक एवं शास्त्रीय परंपरा
रांची में छठ पूजा और ऐतिहासिक रांची झील का महत्व
झारखंड और बिहार की सांस्कृतिक धरोहर में छठ पूजा का स्थान सर्वोच्च है। रांची में जब छठ महापर्व का आगमन होता है, तो यहाँ की भौगोलिक खूबसूरती में चार चांद लग जाते हैं। शहर के बीचों-बीच स्थित ऐतिहासिक रांची झील (Ranchi Lake) जिसे 'तूङू तालाब' के नाम से भी जाना जाता है, इस पर्व का मुख्य केंद्र बिंदु होती है। इस पावन अवसर पर रांची नगर निगम, स्थानीय पूजा समितियों और युवा मंडलों द्वारा पूरे झील परिसर को दुल्हन की तरह सजाया जाता है। रंग-बिरंगी लाइटों, भव्य स्वागत द्वारों और फूलों की सजावट के बीच जब हजारों व्रती महिला-पुरुष एक साथ भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के लिए उतरते हैं, तो वह दृश्य अलौकिक और मन को मोह लेने वाला होता है।
छठ पूजा प्रकृति, सूर्य और जल की पूजा का सबसे बड़ा उत्सव है। रांची झील की सजावट केवल भौतिक सुंदरता का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक सुंदर माध्यम है। इस दौरान पारंपरिक छठ गीत जैसे "कांच ही बाँस के बहंगिया..." और "केलवा के पात पर उगलन सुरुजमल..." की मधुर स्वरलहरियाँ पूरे वातावरण को पूरी तरह से भक्तिमय बना देती हैं।
रांची झील छठ पूजा सजावट की प्रमुख विशेषताएं
विद्युत एवं प्रकाश सजावट (Lighting)
रांची झील के चारों ओर घाटों पर आकर्षक एलईडी लाइट्स, भव्य झांकियाँ और सूर्य देव की विशाल प्रतिमाओं की सजावट की जाती है, जो रात के समय पानी में प्रतिबिंब होकर अद्भुत छटा बिखेरती है।
घाटों की सफाई और सुरक्षा व्यवस्था
जिला प्रशासन और स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा रांची झील और अन्य जलाशयों के जल को स्वच्छ किया जाता है। व्रतियों की सुविधा के लिए चेंजिंग रूम, बैरिकेडिंग और गोताखोरों की तैनाती की जाती है।
छठ महापर्व के चार पावन दिन और अनुष्ठान
छठ पूजा चार दिनों तक चलने वाला एक अत्यंत कठिन और पवित्र अनुष्ठान है, जो नहाय-खाय से शुरू होकर उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ संपन्न होता है:
- नहाय-खाय (प्रथम दिन - चतुर्थी): व्रती स्नान कर शुद्ध सात्विक भोजन (कद्दू-भात) ग्रहण करती हैं। इसके साथ ही घर की पूरी सफाई और शुचिता का विशेष ध्यान रखा जाता है।
- खरना (दूसरा दिन - पंचमी): इस दिन व्रती पूरे दिन उपवास रखती हैं और शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद बनाकर छठी मइया को भोग लगाती हैं तथा स्वयं ग्रहण करती हैं। इसके बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत आरंभ होता है।
- अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य (तीसरा दिन - षष्ठी): इसे मुख्य छठ कहा जाता है। इस दिन रांची झील या अन्य घाटों पर जाकर बांस की टोकरी (दउरा) में ठेकुआ, फल और गन्ने के साथ अस्ताचलगामी (डूबते हुए) भगवान सूर्य को पहला अर्घ्य दिया जाता है।
- उदयीमान सूर्य को अर्घ्य (चौथा दिन - सप्तमी): कार्तिक शुक्ल सप्तमी की सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर इस चार दिवसीय महापर्व का समापन होता है। व्रती पारण कर अपना व्रत खोलती हैं।
एक नजर में: रांची छठ पूजा त्वरित जानकारी
| विवरण | तथ्य / जानकारी |
|---|---|
| पर्व का नाम | छठ पूजा, रांची (Chhath Puja Ranchi) |
| प्रमुख आकर्षण स्थल | रांची झील (Ranchi Lake), बड़ा तालाब, धुर्वा डैम, हटिया डैम |
| मुख्य तिथि | कार्तिक शुक्ल पक्ष, षष्ठी तिथि |
| मुख्य देवता | भगवान सूर्य एवं छठी मइया (माता षष्ठी) |
| सांस्कृतिक विशेषता | भव्य विद्युत सजावट, लोकगीत, सामूहिक सहभागिता और अनुशासन |
| संबंधित लेख | देवी आरती संग्रह एवं श्री शनिदेव आरती |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय एवं संदर्भ
यह आलेख पारंपरिक लोक उत्सवों, क्षेत्रीय संस्कृति और प्रामाणिक जानकारियों के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। भक्तिलोक अपने पाठकों तक सनातन संस्कृति की सजीव और सटीक झांकी प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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