bhakti gana bhojpuri mein बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

छठ घाटे चली

पढ़ें छठ घाटे चली का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

लोक आस्था पर्व - छठ गीत

महापर्व छठ का पावन लोकगीत, भक्ति रस और संपूर्ण सांस्कृतिक संदर्भ

प्रकाशन तिथि: मार्च 2026 | अध्ययन समय: 12 मिनट | संकलक: भक्तलोक शोध एवं संस्कृति विभाग

सनातन संस्कृति में लोक पर्वों का अत्यंत विशिष्ट स्थान है, और जब बात लोक आस्था के महापर्व 'छठ' की आती है, तो इसका आध्यात्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व और भी गहरा हो जाता है। भोजपुरी संगीत जगत में महापर्व छठ के गीतों की एक समृद्ध परंपरा रही है, जो सीधे जनमानस के हृदय को स्पर्श करती है। ऐसा ही एक अत्यंत लोकप्रिय, कर्णप्रिय और ऊर्जा से ओत-प्रोत गीत है "छठ घाटे चली"। इस गीत में जहाँ एक ओर सूर्य देव और छठी मईया के प्रति अनन्य समर्पण का भाव झलकता है, वहीं दूसरी ओर परिवार और समाज के सामूहिक सहभागिता की सजीव झांकी भी देखने को मिलती है। भक्तलोक के इस विस्तृत scholarly guide में हम इस गीत के हर पहलू, इसके सात्विक भाव, सामाजिक प्रभाव और लोक परंपराओं का गहराई से विश्लेषण करेंगे।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

(मुखड़ा) उगिहे सुरुज मलजुग भइले, अबेर काहे होखे ला? चलो सजनी मिलि-जुलि के, हमनी तs छठ घाटे चली ना! ललित बथान पर सोहे दउरा सूप के उजियारी, छठी मईया के महिमा गावेली सगरी महतारी। जागs जागी हो भइया, बरतिया के दिन आवे ला, चलो सभे मिलि के छठी घाटे चली ना! (अंतरा १) घाट पर बाटे उमड़ल भीड़, भक्ति के बयार बहे, हरि-नाम के सिवा मनवा, कुछू ना कहत रहे। कोड़िला मइया के पूजा, छठी माई के ध्यान धरी, कतहुँ दुःख-दर्द ना रहे, संकट सब टरि जरी। दउरा उठाइये माथे पर, सुचि-पवित्र मन धरि के, चलो सभे मिलि के छठी घाटे चली ना! (अंतरा २) दूध के अरघ देइब, सुरुज देव के मनाइब, अंखियन में सपना सजा के, हम आशीर्वाद पाइब। बाल-बच्चा परिवार खातिर, सुख-समृद्धि मांगब हे, छठी माई के चरणन में, जीवन बिताइब हे। घाट के किनारे झूमे मनवा, बाजे मंगल गान री, चलो सभे मिलि के छठी घाटे चली ना!

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

"छठ घाटे चली" केवल शब्दों का संयोजन मात्र नहीं है, बल्कि यह पूर्वांचल और बिहार की माटी से जुड़े हर उस इंसान की मनोदशा का सजीव चित्रण है जो लोक आस्था के महापर्व छठ के दौरान सूर्योपासना के लिए अत्यंत उत्सुक रहता है। इस गीत का भावार्थ हमें भक्ति, अनुशासन और सामूहिक उल्लास की त्रिवेणी से अवगत कराता है।

मुखड़े का भावार्थ

गीत की शुरुआत में सुबह के समय की उस बेला का वर्णन है जब सूर्य भगवान की उपासना का समय निकट आ रहा है। रचनाकार आग्रह करता है कि अब और देर मत करो, हे सखियों!चलो हम सब मिलकर पवित्र मन से छठ घाट की ओर चलें। सिर पर सजे दउरा और सूप की पवित्रता तथा उस पर बिखरी धूप और दीपों की रोशनी छठी मईया के आगमन का संकेत देती है। यह पंक्ति समाज के हर वर्ग को एकजुट होकर इस अनुष्ठान में भाग लेने के लिए प्रेरित करती है।

अंतरों का आध्यात्मिक व सामाजिक संदेश

पहले और दूसरे अंतरे में घाट पर उमड़ने वाले जनसैलाब और वहाँ बहने वाली भक्ति की पवित्र बयार का वर्णन है। कवि याद दिलाता है कि घाट पर पहुँचते ही सांसारिक चिंताएँ मिट जाती हैं और मन केवल भगवान भास्कर और छठी माता के ध्यान में लीन हो जाता है। दूध और जल का अर्घ्य देकर संतान, परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की कामना करना सनातन संस्कृति के वसुधैव कुटुंबकम् और लोक-कल्याण की भावना को चरितार्थ करता है।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत की केंद्रीय भावना लोक आस्था, अनुशासन, पवित्रता और सामूहिक समरसता है। छठ पर्व जात-पात, ऊँच-नीच के भेदों से परे होकर प्रकृति की पूजा का पर्व है। यह गीत साधक के अंतर्मन में छिपी उस निष्ठा को जगाता है जहाँ वह प्रकृति के प्रत्यक्ष देवताओं—सूर्य देव और छठी माता—के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करता है।

  • प्रकृति प्रेम: उगते और डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर प्रकृति के प्रति आभार जताना।
  • पारिवारिक एवं सामाजिक एकता: परिवार के सभी सदस्यों का मिलकर घाट तक जाना और सेवा करना।
  • मानसिक शुद्धि: कठिन व्रतों और नियमों के माध्यम से आत्म-अनुशासन सीखना।

पर्व और त्योहारों के इस सांस्कृतिक ताने-बाने को समझने के लिए आप हमारे अन्य लेख जैसे भोजपुरी देवी गीत संग्रह और पारंपरिक अनुष्ठानों से जुड़े व्रत एवं पर्व विशेष का अध्ययन कर सकते हैं।

गीत की जानकारी | Song Information

कथन / विवरण विवरण विवरण / जानकारी
गीत का शीर्षक (Song Name) छठ घाटे चली (Chhath Ghate Chali)
संगीत शैली (Genre) भोजपुरी लोकगीत / छठ पर्व गीत / देवी गीत
भाषा (Language) भोजपुरी (हिन्दी मिश्रित लोक बोली)
मुख्य विषय (Theme) सूर्य उपासना, छठी मईया की महिमा, लोक आस्था
प्रमुख भावना (Bhava) भक्ति, उल्लास, समर्पण और सामूहिक सहभागिता
उपयुक्त अवसर (Occasion) कार्तिक और चैती छठ महापर्व

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / प्रयोग
दउरा बांस का बना हुआ बड़ा टोकरा पूजा की सामग्री (फल, ठेकुआ आदि) रखने के लिए प्रयुक्त
सूप बांस से निर्मित अनाज या सामग्री छानने का पात्र छठ पूजा में अर्घ्य की सामग्री सजाने हेतु
अरघ (अर्घ्य) जल या दूध अर्पित करने की क्रिया सूर्य देव को जल अर्पित करना
सुचि-पवित्र शुद्ध, निर्मल और सात्विक व्रत के दौरान शारीरिक एवं मानसिक शुद्धि
महतारी माता / जननी छठी मईया या परिवार की माताएँ

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

छठ पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम है। "छठ घाटे चली" जैसे गीत समाज को अपनी जड़ों से जोड़े रखने का कार्य करते हैं। जब आधुनिकता की दौड़ में लोग अपनी संस्कृति से दूर हो रहे हैं, तब ऐसे पारंपरिक गीत नई पीढ़ी को उनकी संस्कृति, लोक संगीत और रीति-रिवाजों से रूबरू कराते हैं।

सूर्य देव को संपूर्ण आरोग्य और ऊर्जा का देवता माना जाता है। छठ पर्व में जल में खड़े होकर सूर्योपासना करने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस गीत के माध्यम से गाया जाने वाला हर एक शब्द व्रतियों के मन के संशय को दूर कर उन्हें कठिन से कठिन व्रत को पूर्ण करने की ऊर्जा प्रदान करता है।

विस्तृत धार्मिक और सांस्कृतिक अनुष्ठानों की जानकारी के लिए हमारे अन्य लेख जैसे पवित्र व्रत एवं पर्व नियम और पौराणिक कथाएँ अवश्य पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह गीत मुख्य रूप से कार्तिक मास और चैत्र मास में मनाए जाने वाले लोक आस्था के महापर्व 'छठ' के दौरान, विशेषकर घाट पर जाते समय और पूजा की तैयारियों के समय गाया जाता है।

सूर्य देव प्रत्यक्ष देवता हैं जो हमें ऊर्जा, प्रकाश और आरोग्य प्रदान करते हैं। छठी मईया (प्रकृति देवी) संतान की रक्षा, दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना को पूर्ण करती हैं।

दउरा (बांस का टोकरा) और सूप छठ पूजा की पवित्र सामग्री जैसे ठेकुआ, मौसमी फल, दीप आदि को सजाकर घाट तक ले जाने के लिए उपयोग किए जाते हैं, जो ग्रामीण हस्तशिल्प और शुद्धता के प्रतीक हैं।

भोजपुरी छठ गीत अपनी सरलता, मार्मिकता, लोक संस्कृति की मिठास और पारिवारिक समरसता के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं। ये सीधे दिल को छू लेते हैं।

यद्यपि पारंपरिक रूप से यह महिलाओं (सोहर और मंगल गीतों की तर्ज पर) द्वारा अधिक गाया जाता है, किंतु छठ महापर्व के उल्लास में परिवार के सभी सदस्य इसे पूरी श्रद्धा के साथ गाते-सुनते हैं।

छठ पर्व पूर्णतः शारीरिक, मानसिक और वातावरणीय शुद्धि का पर्व है। इसे 'नहाय-खाय' से शुरू होकर 'उषा अर्घ्य' तक अत्यंत पवित्रता के साथ संपन्न किया जाता है।

आप भक्तलोक के भोजपुरी देवी गीत और व्रत पर्व अनुभाग में जाकर अन्य प्रसिद्ध लोकगीतों और कथाओं का आनंद ले सकते हैं।

यह सामग्री पारंपरिक लोक साहित्य, सांस्कृतिक शोध और क्षेत्र-विशेष की लोक परंपराओं के अध्ययन पर आधारित है, जिसे संपादकीय रूप से परिष्कृत किया गया है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख भक्तलोक की संपादकीय टीम द्वारा लोक संस्कृति, पारंपरिक संगीत और सनातन पर्वों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। हमारी प्राथमिकता पाठकों को प्रामाणिक, सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और अद्यतन सामग्री प्रदान करना है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री | अपडेटेड मार्च 2026

स्रोत एवं संदर्भ

  • 1. भारतीय लोक संस्कृति और पर्व - सांस्कृतिक अध्ययन ग्रंथ
  • 2. भोजपुरी लोकगीत और परंपरा - क्षेत्रीय मौखिक साहित्य संकलन
  • 3. सूर्योपासना और छठ महापर्व के शास्त्रीय एवं लोक संदर्भ
  • 4. भक्तलोक सांस्कृतिक अनुसंधान अभिलेखागार

संबंधित भजन एवं लेख

भोजपुरी देवी गीत

माँ दुर्गा और छठी मईया की आराधना से जुड़े पारंपरिक लोकगीतों का विस्तृत संग्रह।

और पढ़ें →

व्रत एवं पर्व विशेष

सनातन धर्म के प्रमुख व्रतों, उनकी तिथियों और पूजा विधियों की संपूर्ण जानकारी।

और पढ़ें →

पौराणिक कथाएँ

देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़ी पावन कथाओं का रसास्वादन करें।

और पढ़ें →

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 29 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!