भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

जय जय छठी मईया

पढ़ें जय जय छठी मईया का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

सनातन धर्म के सबसे कठिन और पवित्र महापर्व 'छठ' की महिमा अपरंपार है। "जय जय छठी मईया" केवल एक गीत या भजन नहीं है, बल्कि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, अटूट विश्वास और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का स्वर है। विशेष रूप से भोजपुरी लोक संस्कृति में रचे-बसे इस भजन के माध्यम से भक्त अपनी आराध्या छठी मईया और प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य देव के प्रति अपनी अनन्य भक्ति प्रकट करते हैं। प्रमोद प्रेमी यादव द्वारा स्वरबद्ध "दियरिया पिया हो" (जय जय छठी मईया) जैसे गीत छठ के पावन अवसर पर घाटों की रौनक बढ़ाते हैं और व्रतियों के मन में भक्ति का संचार करते हैं। यह महापर्व हमें शुद्धता, अनुशासन और सूर्य की ऊर्जा के महत्व का बोध कराता है। इस लेख में हम इस पावन गीत के भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व और छठ महापर्व की महत्ता का विस्तृत विश्लेषण करेंगे।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

जय जय छठी मईया - दियरिया पिया हो

(मुखड़ा)
कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए
होई ना बलम जी कहरिया, बहंगी घाटे पहुंचाए...
जय जय छठी मईया, जय जय छठी मईया...

(अंतरा 1)
हाथवा में लेके दियरिया पिया हो, घाटे चलीं ना संगे
रंग देब हम तऽ पियरिया पिया हो, रंगल भक्ति के रंगे...
सभवा सोभेला अजोरिया पिया हो, चमके चउक के संगे
जय जय छठी मईया, जय जय छठी मईया...

(अंतरा 2)
केरवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मेड़राय
मारबौ रे सुगवा धनुष से, कांच ही बांस के बहंगिया...
दउरा सजा के हम अइलीं पिया हो, अरघ देवे के बेरा
छठी मईया करिहें सहाई पिया हो, दूर होई सब अंधेरा...

(अंतरा 3)
उगा हो सुरुज देव भोर भइले, अरघ के रेला लागल
भक्तन के टोली सोहावन लागे, सोई भाग्य सब जागल...
प्रमोद प्रेमी गावे भजनिया पिया हो, महिमा बाटे अपार
जय जय छठी मईया, जय जय छठी मईया...

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

यह गीत छठ महापर्व की तैयारी और श्रद्धा का जीवंत चित्रण करता है। इसके भावार्थ को निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है:

समर्पण और तैयारी: गीत के शुरुआती पंक्तियों में 'बहंगी' (बांस का बना ढांचा जिस पर प्रसाद रखा जाता है) का वर्णन है। भक्त कहता है कि बांस की यह बहंगी बहुत कोमल है और भार से लचक रही है। वह अपने प्रिय (पति/परमेश्वर) से आग्रह करता है कि वह 'कहरिया' (भार उठाने वाला) बनकर इस पवित्र बहंगी को नदी के घाट तक पहुँचाने में मदद करें। यह संसार रूपी भार को ईश्वर के चरणों में समर्पित करने का प्रतीक है।

भक्ति का रंग: "रंगल भक्ति के रंगे" पंक्ति यह दर्शाती है कि भक्त केवल शारीरिक रूप से घाट पर नहीं जा रहा, बल्कि उसका पूरा अस्तित्व भक्ति के रंग में रंगा हुआ है। पीले वस्त्र (पियरिया) शुद्धता और मांगलिकता का प्रतीक हैं, जो छठ पूजा में अनिवार्य माने जाते हैं।

प्रकृति और जीव-जंतुओं का वर्णन: गीत में 'केला' और 'सुगा' (तोता) का उल्लेख लोक कथाओं से प्रेरित है। यह दर्शाता है कि जो फल छठी मईया को अर्पित किए जाने हैं, वे पूर्णतः शुद्ध होने चाहिए। यदि कोई पक्षी उन्हें जूठा करने की कोशिश करता है, तो भक्त उसे सचेत करता है। यह प्रकृति के प्रति सम्मान और पूजा की सामग्री की पवित्रता को दर्शाता है।

अंधकार से प्रकाश की ओर: अंतिम पंक्तियों में भगवान सूर्य (सुरुज देव) के उदय होने की प्रार्थना है। यह केवल भौतिक सूर्य का उदय नहीं है, बल्कि भक्त के जीवन से अज्ञानता और दुखों के अंधेरे को मिटाकर सौभाग्य के उदय की कामना है।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत की मुख्य भावना 'शरणागति' और 'सामुदायिक भक्ति' है। छठ महापर्व समाज के हर वर्ग को एक साथ लाता है। गीत का संदेश स्पष्ट है कि जब हम पवित्र मन से, प्रकृति के सानिध्य में रहकर ईश्वर की आराधना करते हैं, तो हमारे जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। यह गीत पति-पत्नी के बीच के धार्मिक सहयोग को भी दर्शाता है, जहाँ दोनों मिलकर इस कठिन व्रत को पूर्ण करते हैं।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण जानकारी
गीत का नाम जय जय छठी मईया (दियरिया पिया हो)
गायक प्रमोद प्रेमी यादव (Pramod Premi Yadav)
विषय छठ पूजा भक्ति गीत
भाषा भोजपुरी / हिंदी
मुख्य वाद्ययंत्र ढोलक, हारमोनियम, सिंथेसाइज़र
भक्ति रस वात्सल्य एवं भक्ति रस

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द अर्थ संदर्भ
बहंगिया बांस का बना ढांचा प्रसाद ढोने के लिए उपयोग किया जाने वाला पारंपरिक साधन।
कहरिया भार उठाने वाला यहाँ पति या सहायक के रूप में प्रयुक्त।
पियरिया पीले वस्त्र छठ पूजा में पहने जाने वाले मांगलिक वस्त्र।
अरघ (अर्घ्य) जल या दूध अर्पित करना सूर्य देव को दी जाने वाली अंजलि।
दउरा बांस की बड़ी टोकरी जिसमें फल और ठेकुआ का प्रसाद रखा जाता है।

छठ महापर्व का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual Significance

छठ पूजा विश्व का एकमात्र ऐसा पर्व है जहाँ 'अस्ताचलगामी' (डूबते हुए) सूर्य को भी अर्घ्य दिया जाता है। यह इस दार्शनिक सत्य को प्रतिपादित करता है कि जिसका अंत हुआ है, उसका उदय निश्चित है।

  • प्रकृति पूजा: इसमें किसी मूर्ति की पूजा नहीं होती, बल्कि प्रत्यक्ष देव सूर्य और जल की पूजा होती है।
  • छठी मईया का स्वरूप: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, छठी मईया ब्रह्मा जी की मानस पुत्री और भगवान सूर्य की बहन हैं। इन्हें 'कात्यायनी' देवी का रूप भी माना जाता है।
  • वैज्ञानिक महत्व: कार्तिक मास में सूर्य की पराबैंगनी किरणें (UV Rays) कम हानिकारक होती हैं। नदी के जल में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देने से शरीर को विटामिन-डी और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

यह गीत और छठ पर्व हमें कई महत्वपूर्ण जीवन पाठ सिखाते हैं:

  1. धैर्य और तपस्या: 36 घंटे का निर्जला व्रत हमें आत्म-नियंत्रण और धैर्य सिखाता है।
  2. समानता: छठ के घाट पर राजा और रंक, अमीर और गरीब सब एक साथ खड़े होकर अर्घ्य देते हैं। यहाँ कोई छोटा-बड़ा नहीं होता।
  3. स्वच्छता: पूजा की सामग्री से लेकर घाट तक की सफाई यह संदेश देती है कि 'स्वच्छता ही ईश्वर की सेवा है'।
  4. कृतज्ञता: सूर्य देव, जो हमें जीवन और ऊर्जा देते हैं, उनके प्रति आभार व्यक्त करना हमारा कर्तव्य है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यह गीत विशेष रूप से छठ पूजा के चार दिनों के दौरान सुना जाता है:

  • नहाय-खाय: व्रत की शुरुआत के दिन मन को शांत करने के लिए।
  • खरना: शाम को प्रसाद ग्रहण करने के समय।
  • संध्या अर्घ्य: जब व्रती डूबते सूर्य को अर्घ्य देने घाट पर जाते हैं।
  • उषा अर्घ्य: उगते सूर्य की प्रतीक्षा करते समय घाटों पर गूंजते ये गीत वातावरण को भक्तिमय बना देते हैं।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

प्राथमिक देवता छठी मईया एवं भगवान सूर्य देव
मुख्य पर्व छठ महापर्व (कार्तिक शुक्ल षष्ठी)
मुख्य भाव श्रद्धा, समर्पण और लोक आस्था
प्रसाद ठेकुआ, केला, गन्ना, डाभ नींबू
संबंधित मंत्र ॐ सूर्याय नमः, ॐ घृणि सूर्याय नमः

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

छठी मईया को भगवान सूर्य की बहन और ब्रह्मा जी की मानस पुत्री माना जाता है। पुराणों में इन्हें 'देवी षष्ठी' कहा गया है, जो बच्चों की रक्षा करने वाली और संतान सुख देने वाली देवी हैं।

यह इस बात का प्रतीक है कि जीवन में उत्थान और पतन दोनों का महत्व है। डूबते सूर्य को अर्घ्य देना कृतज्ञता का भाव है कि उन्होंने पूरे दिन हमें ऊर्जा दी, और यह विश्वास है कि वे कल पुनः उदय होंगे।

इसका अर्थ है कि बांस की नई और कच्ची टहनियों से बनी टोकरी (बहंगी)। यह शुद्धता और कोमलता का प्रतीक है, जिसे बहुत सावधानी से घाट तक ले जाया जाता है।

छठ पूजा 2024 में नहाय-खाय 5 नवंबर से शुरू होकर 8 नवंबर को उषा अर्घ्य के साथ संपन्न होगी। मुख्य पूजा (संध्या अर्घ्य) 7 नवंबर को है।

इस गीत में पारंपरिक लोक धुनों और आधुनिक संगीत का सुंदर मिश्रण है। इसके बोल सरल हैं जो आम जनमानस की भावनाओं और छठ की तैयारियों से सीधे जुड़ते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख भक्तिलोक के विद्वानों द्वारा छठ महापर्व की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गहराई को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। "जय जय छठी मईया" जैसे गीत हमारी लोक विरासत का हिस्सा हैं। इस सामग्री का उद्देश्य पाठकों को न केवल गीत के बोल उपलब्ध कराना है, बल्कि उन्हें इसके पीछे छिपे दार्शनिक और धार्मिक अर्थों से भी अवगत कराना है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ

  • श्रीमद्देवीभागवत पुराण - षष्ठी देवी महिमा
  • भोजपुरी लोक साहित्य एवं पारंपरिक छठ गीत संग्रह
  • सनातन धर्म पंचांग एवं व्रत कथाएं

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 08 Oct 2026

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