Parvati Stotram

प्रमोद प्रेमी यादव छठ गीत भक्ति इन हिंदी लिरिक्स

85 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के सबसे पावन लोक पर्व 'छठ पूजा' के अवसर पर गाए जाने वाले पारंपरिक और आधुनिक छठ गीत हमारी सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा हैं। सुप्रसिद्ध लोक गायक प्रमोद प्रेमी यादव द्वारा गाया गया यह भक्तिमय छठ गीत "छठी माई के नेवता" (Chhathi Mai Ke Nevta) श्रद्धा, समर्पण और लोक आस्था का एक अद्भुत संगम है। इस गीत में छठी मैया के प्रति अटूट विश्वास, व्रत की कठिन साधना और सूर्य देव की उपासना का अत्यंत मार्मिक चित्रण किया गया है। जब कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को घाटों पर यह मधुर स्वर गूंजता है, तो संपूर्ण वातावरण भक्तिमय और पवित्र हो उठता है। इस लेख में हम इस लोकप्रिय छठ गीत के हिंदी लिरिक्स, विस्तृत भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व और इससे जुड़ी सांस्कृतिक परंपराओं का गहराई से विश्लेषण करेंगे।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

॥ छठी माई के नेवता ॥

(मुखड़ा)
कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए।
होई ना बलम जी कहँरिया, बहंगी घाट पहुँचाए॥
छठी माई के देब हम नेवता, अइहें सपरिवार।
दउरा सजइबे हम भारी, पूजइबे गंगा के धार॥

(अंतरा 1)
केला के पात पर उगेलन सुरुज देव झाँके-झुके।
एह पर सुगा मँडराए, सुरुज देव होई ना सहाय॥
कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए।
अरघ के बेर भईल बाड़े, जल्दी कदम बढ़ाए॥

(अंतरा 2)
गोदी में बालक खेले, घर-परिवार में सुख होए।
छठी माई के बरतिया, जे भी श्रद्धा से करे॥
नारियल-नेबुआ चढ़इबे, बाजे बाजा दुआर।
प्रमोद प्रेमी गावे गीतिया, महिमा अपरम्पार॥

(अंतरा 3)
गंगा के पावन तीरे, दीया जरत बा हजार।
सुरुज देव के अरघ देके, सफल भईल संसार॥
छठी माई के देब हम नेवता, अइहें सपरिवार।
दउरा सजइबे हम भारी, पूजइबे गंगा के धार॥

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

प्रमोद प्रेमी यादव द्वारा गाए गए इस छठ गीत का भावार्थ अत्यंत सरल और हृदयस्पर्शी है। यह गीत एक व्रती (महिला) की मनोदशा और उसकी भक्ति को दर्शाता है:

  • प्रथम भाग (मुखड़ा): व्रती अपने पति (बलम जी) से कहती है कि कच्चे बांस से बनी यह सुंदर बहंगी (पूजा की टोकरी ले जाने वाला ढांचा) भार के कारण लचक रही है। वह अपने पति से अनुरोध करती है कि वे कहार (कंधे पर उठाने वाले) की भूमिका निभाएं और इस पावन बहंगी को नदी के घाट तक सुरक्षित पहुंचाएं। वह कहती है कि वह छठी मैया को सपरिवार आने का न्योता दे रही है और गंगा की पवित्र धारा के किनारे भारी दउरा (बांस का सूप और टोकरी) सजाकर पूजा करेगी।
  • द्वितीय भाग (अंतरा 1): इस भाग में प्रकृति और सूर्य देव की महिमा का वर्णन है। केले के पत्तों के बीच से भगवान सूर्य देव उदित हो रहे हैं। पूजा की सामग्रियों (जैसे फल और प्रसाद) पर तोता (सुगा) मंडरा रहा है, जो लोक कथाओं में पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। व्रती कहती है कि संध्या और उषा काल के अर्घ्य का समय हो चुका है, इसलिए घाट की ओर जल्दी कदम बढ़ाएं।
  • तृतीय भाग (अंतरा 2): यह भाग छठी मैया के आशीर्वाद और फलश्रुति को दर्शाता है। जो भी भक्त पूरी श्रद्धा के साथ छठी मैया का व्रत करता है, उसकी गोद हमेशा हरी-भरी रहती है (संतान सुख मिलता है) और पूरे परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। मैया को नारियल और नींबू अर्पित किए जाते हैं और घर के दरवाजे पर मंगल वाद्य बजते हैं।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत की मुख्य भावना 'पूर्ण समर्पण' और 'प्रकृति पूजा' है। छठ पूजा का त्योहार किसी पुरोहित या मंदिर के बिना, सीधे प्रकृति की शक्तियों (सूर्य और जल) की उपासना का पर्व है। यह गीत संदेश देता है कि ईश्वर की प्राप्ति के लिए किसी आडंबर की आवश्यकता नहीं है; केवल शुद्ध अंतःकरण, पवित्र सामग्री और सामूहिक सहयोग से ही परमात्मा को प्रसन्न किया जा सकता है। गीत में पति-पत्नी के आपसी सहयोग और पारिवारिक एकजुटता को भी रेखांकित किया गया है, जो इस पर्व का सामाजिक पहलू है।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण (Parameter) जानकारी (Information)
गीत का नाम (Song Name) छठी माई के नेवता (Chhathi Mai Ke Nevta)
गायक (Singer) प्रमोद प्रेमी यादव (Pramod Premi Yadav)
भाषा (Language) भोजपुरी / हिंदी (Bhojpuri / Hindi)
श्रेणी (Category) प्रमोद प्रेमी यादव छठ गीत, लोक भक्ति गीत
मुख्य विषय (Theme) छठ पूजा, सूर्य उपासना, छठी मैया का आमंत्रण
संगीत शैली (Music Style) पारंपरिक भोजपुरी लोक संगीत (Folk Devotional)

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

भोजपुरी लोक संगीत जगत में प्रमोद प्रेमी यादव अपनी अनूठी गायकी और भावपूर्ण प्रस्तुति के लिए जाने जाते हैं। उनके छठ गीतों में मिट्टी की सोंधी खुशबू और पारंपरिक धुनों का सुंदर मिश्रण होता है। इस गीत के माध्यम से उन्होंने न केवल धार्मिक भावनाओं को स्वर दिया है, बल्कि आधुनिक पीढ़ी को अपनी जड़ों और लोक कला से जोड़ने का भी सफल प्रयास किया है। संगीतकारों ने इसमें पारंपरिक वाद्य यंत्रों जैसे ढोलक, मंजीरा और बांसुरी का उत्कृष्ट उपयोग किया है, जो सुनने वाले के मन में भक्ति का संचार करता है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द (Word) सरल अर्थ (Simple Meaning) संदर्भ (Context)
बहंगिया (Bahangiya) बांस से बना ढांचा जिसे कंधे पर रखकर सामग्री ढोई जाती है पूजा की सामग्री को घाट तक ले जाने का साधन
लचकत (Lachkat) लचीलापन या भार के कारण झुकना दउरा और फलों के अत्यधिक भार को दर्शाने के लिए
कहँरिया (Kahariya) कंधे पर भार उठाने वाला व्यक्ति या सहायक पति द्वारा पत्नी की पूजा में सहयोग करने का प्रतीक
दउरा (Daura) बांस की बड़ी गोल टोकरी जिसमें प्रसाद रखा जाता है छठ पूजा का मुख्य पात्र या सूप रखने की टोकरी
नेवता (Nevta) निमंत्रण या बुलावा छठी मैया को अपने घर और घाट पर आमंत्रित करना
अरघ (Arghya) सूर्य देव को जल या दूध अर्पित करना छठ पूजा की मुख्य क्रिया

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

छठ पूजा का पर्व केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि एक कठिन आध्यात्मिक साधना है। ऋग्वेद में सूर्य देव की स्तुति और उषा (सुबह की पहली किरण) की आराधना के मंत्र मिलते हैं। लोक परंपरा में उषा को ही 'छठी मैया' के रूप में पूजा जाता है। प्रमोद प्रेमी यादव का यह गीत इसी वैदिक और पौराणिक पृष्ठभूमि को लोक भाषा में प्रस्तुत करता है।

सांस्कृतिक रूप से, यह गीत समाज के सभी वर्गों को एक सूत्र में पिरोता है। जब घाट पर हजारों लोग एक साथ इस गीत को गाते हैं, तो अमीर-गरीब, जाति-पाति का भेद समाप्त हो जाता है। मिट्टी के चूल्हे पर बना ठेकुआ का प्रसाद और बांस के सूप में रखे फल इस बात का प्रतीक हैं कि हमारी संस्कृति प्रकृति के कितने निकट है।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

  • प्रकृति का संरक्षण: यह गीत हमें नदियों, जलाशयों और वनस्पतियों (बांस, केला, नारियल) के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना सिखाता है।
  • कठिन अनुशासन और शुद्धता: छठ व्रत में शारीरिक और मानसिक शुद्धता का अत्यधिक महत्व है, जो हमें अनुशासित जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
  • पारिवारिक सहयोग: पति द्वारा बहंगी उठाना और पत्नी द्वारा व्रत रखना यह दर्शाता है कि जीवन के हर कठिन मार्ग पर गृहस्थ जीवन में सहयोग अनिवार्य है।
  • समानता का संदेश: इस पर्व में किसी मध्यस्थ (पुजारी) की आवश्यकता नहीं होती, भक्त सीधे अपने आराध्य से जुड़ता है, जो सामाजिक समरसता का प्रतीक है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यह गीत मुख्य रूप से चार दिवसीय छठ महापर्व के दौरान सुना और गाया जाता है:

  1. नहाय-खाय (प्रथम दिन): इस दिन घर की सफाई और पवित्रता के साथ व्रत की शुरुआत होती है।
  2. खरना (द्वितीय दिन): इस दिन शाम को रसियाव-रोटी का भोग लगाकर निर्जला व्रत प्रारंभ होता है।
  3. संध्या अर्घ्य (तृतीय दिन): अस्ताचलगामी (डूबते) सूर्य को अर्घ्य देने के लिए घाट जाते समय यह गीत बजाया जाता है।
  4. उषा अर्घ्य (चतुर्थ दिन): उदीयमान (उगते) सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है, तब इस गीत की गूंज हर तरफ सुनाई देती है।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

मुख्य बिंदु संक्षिप्त विवरण
गीत का शीर्षक प्रमोद प्रेमी यादव छठ गीत (छठी माई के नेवता)
मुख्य आराध्य भगवान सूर्य देव एवं छठी मैया
काव्य रस भक्ति रस, वात्सल्य रस, शांत रस
प्रमुख वाद्य यंत्र ढोलक, मंजीरा, बांसुरी, सिंथेसाइज़र
संबंधित पर्व कार्तिक एवं चैती छठ पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस अत्यंत लोकप्रिय और कर्णप्रिय छठ गीत के मुख्य गायक सुप्रसिद्ध भोजपुरी लोक कलाकार प्रमोद प्रेमी यादव हैं।

बहंगिया कच्चे बांस से बना एक ढांचा होता है, जिसके दोनों सिरों पर टोकरियां (दउरा) लटकाई जाती हैं। इसमें छठ पूजा का पवित्र प्रसाद और फल रखकर पुरुष सदस्य कंधे पर उठाकर घाट तक ले जाते हैं। यह सेवा और समर्पण का प्रतीक है।

यह गीत दर्शाता है कि भगवान को प्रसन्न करने के लिए सोने-चांदी की नहीं, बल्कि प्रकृति द्वारा प्रदत्त सरल और शुद्ध वस्तुओं (जैसे बांस, मिट्टी, फल) की आवश्यकता होती है। यह सादगी और पर्यावरण के प्रति प्रेम का संदेश देता है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, छठी मैया (उषा) भगवान सूर्य देव की मानस बहन या उनकी शक्ति हैं। सूर्य देव प्रत्यक्ष देवता हैं जो जीवन ऊर्जा प्रदान करते हैं, और छठी मैया संतानों की रक्षा करने वाली देवी हैं। दोनों की संयुक्त पूजा से सुख, समृद्धि और आरोग्य की प्राप्ति होती है।

नहीं, यह गीत भोजपुरी भाषी क्षेत्रों (बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश) के साथ-साथ देश-विदेश में जहां भी प्रवासी भारतीय छठ महापर्व मनाते हैं, वहां अत्यंत श्रद्धा के साथ सुना और गाया जाता है।

छठ पूजा का सबसे मुख्य प्रसाद 'ठेकुआ' (गेहूं के आटे, गुड़ और घी से बना) होता है। इसके अलावा चावल के लड्डू (कसार), गन्ना, नारियल, डाभ नींबू, केला और विभिन्न मौसमी फल प्रसाद के रूप में सूप में सजाए जाते हैं।

प्रमोद प्रेमी यादव ने कई देवी गीत, कांवड़ भजन और छठ गीत गाए हैं। उनके गीतों में पारंपरिक धुनों का विशेष प्रभाव रहता है, जो श्रोताओं को सीधे भक्ति रस से सराबोर कर देता है।

छठ पूजा का व्रत लगभग 36 घंटों का अत्यंत कठिन और निर्जला व्रत होता है। इसकी शुरुआत खरना के दिन शाम के भोजन के बाद से होती है और चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद पारण के साथ समाप्त होती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख लोक आस्था के महापर्व छठ और उससे जुड़े पारंपरिक संगीत के महत्व को उजागर करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। प्रमोद प्रेमी यादव के इस गीत के बोल और भावार्थ को शुद्धता के साथ प्रस्तुत किया गया है ताकि नई पीढ़ी अपनी समृद्ध लोक विरासत को समझ सके। यह सामग्री पूरी तरह से लोक परंपराओं, प्रामाणिक स्रोतों और सांस्कृतिक विमर्श पर आधारित है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री - भक्तिलोक संपादकीय बोर्ड द्वारा सत्यापित और समीक्षित।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भागवत पुराण एवं ऋग्वेद (सूर्य उपासना संदर्भ)
  • भोजपुरी लोक साहित्य एवं पारंपरिक छठ गीत संग्रह
  • बिहार एवं उत्तर प्रदेश की क्षेत्रीय लोक संस्कृतियों का ऐतिहासिक अध्ययन
  • ओम जय जगदीश हरे आरती - आरती संग्रह

संबंधित भजन एवं लेख

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 27 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!