भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

देना हो तो दीजिये जन्म जन्म का साथ भक्ति इन हिंदी लिरिक्स

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"देना हो तो दीजिये जन्म जन्म का साथ" यह भजन भक्ति मार्ग के उन दुर्लभ रत्नों में से एक है, जो जीवात्मा की परमात्मा के प्रति अनन्य और अटूट निष्ठा को व्यक्त करता है। मुकेश बागड़ा जी की भावपूर्ण आवाज़ में यह भजन न केवल कानों को प्रिय लगता है, बल्कि हृदय के तारों को झंकृत कर देता है। इस भजन का मुख्य भाव 'शरणागति' है, जहाँ भक्त ईश्वर से किसी सांसारिक सुख या भौतिक संपदा की मांग नहीं करता, बल्कि केवल प्रभु का निरंतर सानिध्य और उनकी सेवा का अवसर मांगता है। सनातन धर्म में 'जन्म-जन्म का साथ' का अर्थ केवल एक जीवन की यात्रा नहीं, बल्कि आत्मा का परमात्मा के साथ शाश्वत संबंध है। यह भजन उन सभी साधकों के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो संसार की नश्वरता को समझकर प्रभु के चरणों में अपना सर्वस्व समर्पित करना चाहते हैं।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

देना हो तो दीजिये, जन्म-जन्म का साथ,
ऐसी कृपा कर दीजिये, थाम लीजिये हाथ।
देना हो तो दीजिये, जन्म-जन्म का साथ॥

मैं तो हूँ अज्ञानी प्रभु, राह न पाऊं मैं,
भटक रहा हूँ दर-दर, तुझको न पाऊं मैं।
भक्ति का दान दीजिये, मिट जाए सब संताप,
देना हो तो दीजिये, जन्म-जन्म का साथ॥

दुनिया के इस मेले में, सब कुछ है झूठा,
रिश्ते-नाते सब यहाँ, माया का है बूटा।
सच्चा साथी आप हैं, प्रभु मेरे दीनानाथ,
देना हो तो दीजिये, जन्म-जन्म का साथ॥

जब-जब लूँ मैं जन्म, तेरा ही दास रहूँ,
तेरी ही सेवा करूँ, तेरा ही नाम लूँ।
हर पल रहे ध्यान में, आपका ही मुख-पात,
देना हो तो दीजिये, जन्म-जन्म का साथ॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का भावार्थ अत्यंत गहरा है। भक्त यहाँ ईश्वर से प्रार्थना करता है कि यदि उन्हें कुछ देना ही है, तो वे धन-दौलत या सांसारिक सुख न देकर अपना 'साथ' दें। 'जन्म-जन्म का साथ' का अर्थ है कि आत्मा का परमात्मा से जो संबंध है, वह कभी न टूटे। भक्त अपनी अज्ञानता को स्वीकार करते हुए प्रभु से मार्ग दिखाने की विनती करता है। संसार को 'मेला' कहा गया है, जहाँ सब कुछ क्षणभंगुर है। यहाँ के रिश्ते-नाते माया के जाल हैं, जो अंत में साथ नहीं देते। केवल ईश्वर ही वह एकमात्र सत्य हैं जो हर जन्म में जीव के साथ रहते हैं। भक्त की अंतिम अभिलाषा यही है कि वह चाहे जितने भी जन्म ले, हर जन्म में वह प्रभु का दास बनकर रहे और निरंतर उनका नाम स्मरण करता रहे।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन 'अनन्य भक्ति' का प्रतीक है। इसमें 'दास्य भाव' की प्रधानता है। यह भजन साधक को यह सिखाता है कि ईश्वर के साथ संबंध केवल एक जीवन का नहीं, बल्कि शाश्वत है। यह भजन मन की चंचलता को कम करने और एकाग्रता बढ़ाने में सहायक है। इसे सुनने से हृदय में वैराग्य और प्रेम का उदय होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को नित्य प्रातः काल पूजा के समय या संध्या वंदन के पश्चात गाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसे एकांत में बैठकर या सामूहिक सत्संग में भावपूर्ण तरीके से गाया जा सकता है। इसे गाते समय मन को शांत रखें और प्रभु की छवि का ध्यान करें।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द सरल अर्थ संदर्भ
संताप दुःख या कष्ट सांसारिक दुखों से मुक्ति
दीनानाथ दीनों के स्वामी (ईश्वर) प्रभु की करुणा
माया संसार का भ्रम नश्वर जगत
मुख-पात ईश्वर का मुख/स्वरूप ध्यान की अवस्था

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम देना हो तो दीजिये जन्म जन्म का साथ
मुख्य गायक मुकेश बागड़ा
विषय शरणागति एवं भक्ति
भाव दास्य भाव
उपयुक्त अवसर दैनिक पूजा, सत्संग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  • प्रश्न: यह भजन किस भाव पर आधारित है?
    उत्तर: यह भजन 'दास्य भाव' और 'पूर्ण शरणागति' पर आधारित है।
  • प्रश्न: क्या इस भजन को घर पर गाया जा सकता है?
    उत्तर: हाँ, इसे घर पर पूजा के समय गाना अत्यंत कल्याणकारी है।
  • प्रश्न: 'जन्म-जन्म का साथ' का क्या अर्थ है?
    उत्तर: इसका अर्थ है कि आत्मा और परमात्मा का संबंध शाश्वत है, जो हर जन्म में बना रहे।
  • प्रश्न: मुकेश बागड़ा जी के अलावा इसे और कौन गाता है?
    उत्तर: यह भजन कई अन्य कलाकारों द्वारा भी गाया गया है, लेकिन मुकेश बागड़ा जी का संस्करण सर्वाधिक लोकप्रिय है।
  • प्रश्न: क्या यह भजन मन की शांति के लिए प्रभावी है?
    उत्तर: हाँ, भक्तिपूर्ण भजनों का श्रवण मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।
  • प्रश्न: इस भजन को गाने का सबसे अच्छा समय क्या है?
    उत्तर: ब्रह्म मुहूर्त या संध्या काल का समय सबसे उत्तम है।
  • प्रश्न: क्या इस भजन को सुनने से भक्ति बढ़ती है?
    उत्तर: निश्चित रूप से, प्रभु के गुणों का गान करने से भक्ति में वृद्धि होती है।
  • प्रश्न: क्या इसमें किसी विशेष देवता का नाम है?
    उत्तर: इसमें 'दीनानाथ' संबोधन का प्रयोग हुआ है, जो सभी देवताओं के लिए प्रयुक्त हो सकता है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

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संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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