Chhath Puja Geet बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

नारियल लन्दन से लाएंगे (Nariyal Landon Se Layenge)

नारियल लन्दन से लाएंगे भोजपुरी छठ गीत के बोल, अर्थ और महत्व पढ़ें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित भक्तिमय सामग्री।

Chhath Puja Special || नारियल लन्दन से लाएंगे || Nariyal Landon Se Layenge | Bhojpuri Chhath Geet

छठ महापर्व सनातन संस्कृति का वह अद्वितीय और पावन उत्सव है, जिसमें प्रकृति, जल, अग्नि और सूर्योपासना का अनूठा संगम देखने को मिलता है। इस लोकपर्व पर गाए जाने वाले भोजपुरी छठ गीत केवल संगीत या मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि ये लोक चेतना, पारिवारिक समर्पण, और छठी मइया के प्रति अटूट आस्था के जीवंत दस्तावेज हैं। प्रस्तुत भजन "नारियल लन्दन से लाएंगे" (Nariyal Landon Se Layenge) एक अत्यंत लोकप्रिय और आधुनिक भावभूमि से जुड़ा लोकगीत है, जो पारंपरिक लोक संवेदनाओं को समकालीन संदर्भों के साथ जोड़ता है। इस गीत में व्रतियों की उस उत्कण्ठा, प्रेम और हठ को दर्शाया गया है जो वे छठी मइया की पूजा को सबसे विशिष्ट और भव्य बनाने के लिए करती हैं। विदेशों तक फैली भारतीय संस्कृति और छठ की महत्ता को बयां करता यह गीत हर आयु वर्ग के श्रोता के मन में भक्ति रस का संचार कर देता है।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Bhojpuri Chhath Geet Lyrics

मुखड़ा:
नारियल लन्दन से लाएंगे, अरघिया के बेरवा में;
छठी मइया के बरतिया हम कईसे करिहें हेरा फेरवा में!
कार्तिक मास के आई अँजोरिया, झूमे पूरा संसार,
घाट सजेला सुंदर मूरत, बरसे अमियाार फुहार!

अंतरा 1:
सईया जी गईले परदेसवा, कमाई खातिर दूर,
फोनवा पर बोलवले बानी, चढ़त रहे रविकूर।
कहले बानी पिया जी हमार, काहे होखेलू तू परेशान,
लंदन से लामी नारियल, देबौ छठी मइया के ध्यान!

अंतरा 2:
गंगा किनारवा बहे पुरवइया, लागे बड़ा सुहाना,
छठी मइया के महिमा अपार, कोना-कोना गवइया गाना।
दउरा सजा के सुपवा उठा के, चलली बानी घाट,
भक्तन के भीड़ बा भारी, लागे मइया के दरबार सा ठाठ!

अंतरा 3:
उगा हो सुरुजदेव भइले अरघ के बेर,
ललकी किरणवा से भरि दs अँजोरिया ढेर।
छठी मइया सुनली पुकारिया, घरवा भइल गुलजार,
पिया फेरि आ गईले घरे, मिलल मइया के दुलार!

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

यह लोकगीत पारिवारिक प्रसंग और छठी मइया के प्रति अनन्य भक्ति का एक सुंदर मिश्रण प्रस्तुत करता है। गीत की नायिका यानी व्रती महिला अपने पति से दूर परदेस में होने के बावजूद छठ व्रत के नियमों और पूजन सामग्री की पवित्रता को लेकर पूरी तरह समर्पित है। वह कहती है कि छठी मइया के इस कठिन और पवित्र व्रत में किसी भी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए। भले ही उसके पति रोजगार के सिलसिले में लंदन या किसी दूर देश में हों, लेकिन उनका प्रेम और कर्तव्य अपनी मइया के प्रति अडिग है। पति द्वारा यह आश्वासन दिया जाना कि वे विदेश से भी पूजा के लिए विशेष नारियल और सामग्री उपलब्ध कराएंगे, इस बात को दर्शाता है कि आधुनिकता और भौतिक दूरियां भी सनातन आस्था को डिगा नहीं सकतीं।

गीत के अगले चरणों में गंगा तट के प्राकृतिक सौंदर्य, व्रतियों के उत्साह और पारंपरिक लोक वाद्यों की गूंज का वर्णन है। बांस के सूप और दउरे में सजे हुए फल, ठेकुआ, कंदमूल और नारियल छठी मइया को अर्पित किए जाते हैं। सूर्य देव को अर्घ्य देने का क्षण भारतीय संस्कृति में कृतज्ञता का सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां उगते और डूबते दोनों सूर्यों को नमन किया जाता है। अंततः, व्रत की सफलता और परिवार की खुशहाली के साथ गीत एक आनंदमय और सकारात्मक संदेश पर समाप्त होता है।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस लोकप्रिय भोजपुरी छठ गीत की मूल भावना त्याग, समर्पण, पारिवारिक एकजुटता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता है। छठ महापर्व केवल एक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह अनुशासन और शुचिता का महापर्व है। गीत यह संदेश देता है कि भौगोलिक दूरियां या आधुनिक जीवनशैली कभी भी सच्ची भक्ति और सांस्कृतिक परंपराओं के मार्ग में बाधा नहीं बन सकतीं। यदि मन में छठी मइया के प्रति अटूट विश्वास हो, तो हर कठिन परिस्थिति स्वतः सरल हो जाती है। यह गीत प्रवासी भारतीयों की अपनी जड़ों और लोक परंपराओं से जुड़ी उस भावनात्मक डोर को भी मजबूत करता है जो सात समंदर पार भी अटूट रहती है।

गीत की जानकारी | Song Information

गीत का नाम नारियल लन्दन से लाएंगे (Nariyal Landon Se Layenge)
विधा भोजपुरी छठ गीत / लोक भजन
भाषा भोजपुरी (Bhojpuri)
संबंधित पर्व छठ महापर्व (Chhath Puja)
मुख्य विषय सूर्योपासना, पारिवारिक प्रेम, छठी मइया की महिमा
श्रेणी भक्ति गाना भोजपुरी में

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द / पद सरल हिंदी अर्थ संदर्भ
अरघिया अर्घ्य देने की सामग्री या जल-दूध अर्पण छठ पूजा अनुष्ठान
बेरवा समय या बेला पूजा का उपयुक्त समय
दउरा / सुपवा बांस से बने पारंपरिक सूप और टोकरी पूजा सामग्री सजाने का पात्र
रविकूर सूर्य देव की आराधना / सूर्य का प्रकाश सूर्योपासना संदर्भ
अँजोरिया चांदनी रात / शुक्ल पक्ष की रोशनी कार्तिक मास संदर्भ

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

भोजपुरी छठ गीत भारतीय लोक संस्कृति की रीढ़ हैं। 'नारियल लन्दन से लाएंगे' जैसे गीत इस बात का प्रमाण हैं कि हमारी लोक संस्कृति समय के साथ कैसे विकसित हुई है और आधुनिक प्रवासियों को भी अपने साथ जोड़े रखती है। छठ पूजा एकमात्र ऐसा पर्व है जिसमें डूबते सूर्य को भी प्रणाम किया जाता है, जो जीवन के उतार-चढ़ाव में संतुलन और धैर्य का संदेश देता है। इस गीत के माध्यम से घर-घर में छठ के पावन गीतों की गूंज सुनाई देती है, जिससे नई पीढ़ी भी अपनी संस्कृति और लोकभाषा से जुड़ी रहती है। इस प्रकार के गीत समाज में सकारात्मकता, आपसी प्रेम और धार्मिक सौहार्द को बढ़ावा देते हैं।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

  • अटूट श्रद्धा: कितनी भी कठिन परिस्थिति हो, ईश्वर और अपनी परंपराओं के प्रति निष्ठा कभी कम नहीं होनी चाहिए।
  • परिवार का महत्व: पर्व-त्यौहार परिवार को जोड़ने और आपसी दूरियों को मिटाने का सबसे बड़ा माध्यम हैं।
  • प्रकृति प्रेम: सूर्य और जल की पूजा के जरिए यह गीत हमें प्रकृति के संरक्षण और उसके प्रति आभार व्यक्त करने की प्रेरणा देता है।
  • धैर्य और अनुशासन: छठ व्रत का कठिन अनुशासन हमें जीवन में संयम और नियमितता सिखाता है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यह गीत मुख्य रूप से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाए जाने वाले छठ पूजा गीत के अवसरों पर विशेष रूप से सुना और गाया जाता है। जब महिलाएं नहाय-खाय से लेकर खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य के दौरान घाट पर जाती हैं या घर की साफ-सफाई और प्रसाद निर्माण करती हैं, तब ऐसे लोकगीतों की गूंज वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना देती है। इसके अलावा लोक संगीत कार्यक्रमों, सांस्कृतिक मंचों और डिजिटल माध्यमों पर भी इसे चाव से सुना जाता है.

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

शीर्षक Nariyal Landon Se Layenge Chhath Geet
संगीत शैली पारंपरिक भोजपुरी लोक संगीत
मुख्य deity छठी मइया एवं सूर्य देव
क्षेत्र बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और प्रवासी भोजपुरी समाज
उपयोग छठ पूजा महोत्सव और सांस्कृतिक संकीर्तन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह गीत लोकआस्था के महापर्व छठ पूजा से संबंधित है, जिसमें छठी मइया और सूर्य देव की उपासना की जाती है।

यह गीत अत्यंत मधुर और लोकप्रिय भोजपुरी भाषा में गाया गया है।

नारियल को पवित्रता, श्री और अखंडता का प्रतीक माना जाता है। छठ पूजा के सूप और दउरे में नारियल का होना अनिवार्य माना जाता है।

हाँ, यह गीत विशेष रूप से उन प्रवासियों के बीच बहुत लोकप्रिय है जो देश-विदेश में रहकर भी अपनी संस्कृति और छठ पर्व से जुड़े रहते हैं।

यह मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है, लेकिन अब यह देश-विदेश के कोने-कोने में वैश्विक स्तर पर मनाया जाने लगा है।

छठ का यह पावन व्रत कुल चार दिनों का होता है, जिसकी शुरुआत नहाय-खाय से होती है और इसका समापन उदयगामी सूर्य को अर्घ्य देकर होता है।

कार्तिक मास के छठ पर्व के दौरान घाट पर जाते समय, घरों में पूजा की तैयारी करते समय या डिजिटल संगीत प्लेटफॉर्म्स पर इसे सुना जा सकता है।

मुख्य रूप से इसे 'परतिहिन' (व्रती) महिलाओं द्वारा कठिन नियमों के साथ किया जाता है, परंतु परिवार के सभी पुरुष और अन्य सदस्य भी इसमें पूरी निष्ठा से सहयोग करते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

भक्तित्त्व और लोक संस्कृति के संवर्धन के लिए समर्पित यह आलेख पूरी तन्मयता के साथ पारंपरिक मान्यताओं, लोक गीतों के मर्म और सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसमें किसी भी प्रकार के अप्रमाणित तथ्यों से बचा गया है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक भोजपुरी लोकगीत संग्रह एवं मौखिक परंपराएं
  • बिहार और उत्तर प्रदेश की लोक संस्कृति एवं छठ पर्व अनुष्ठान ग्रंथ
  • सूर्य पुराण एवं वैदिक सूर्योपासना के संदर्भ
  • भक्तिलोक सांस्कृतिक एवं संगीत आर्काइव

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!