Parvati Stotram

chhath geet 2021 अवधेश प्रेमी यादव का इस साल का पहला छठ गीत | बन गइले मुखिया हमार सईया |

87 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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अवधेश प्रेमी यादव का चर्चित लोकगीत: 'बन गइले मुखिया हमार सईया' और छठ महापर्व की सांस्कृतिक चेतना

लोक आस्था का महापर्व छठ केवल एक अनुष्ठान या व्रत नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, सूर्य उपासना और पारिवारिक सुख-समृद्धि का एक ऐसा जीवंत सांस्कृतिक उत्सव है जो पीढ़ियों से भारतीय जनमानस को जोड़े हुए है। इस पावन पर्व पर लोक संगीत की परंपरा का एक विशेष स्थान है, जहाँ छठी मइया की महिमा के साथ-साथ गृहस्थ जीवन की आकांक्षाओं, सामाजिक प्रतिष्ठा और लोक जीवन के उल्लास का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। वर्ष 2021 में भोजपुरी लोकगायिकी के लोकप्रिय गायक अवधेश प्रेमी यादव द्वारा गाया गया छठ गीत "बन गइले मुखिया हमार सईया" इसी सांस्कृतिक परंपरा का एक अत्यंत चर्चित और मनोरंजक आयाम बनकर उभरा। यह गीत न केवल छठ घाट के उल्लास को दर्शाता है, बल्कि लोक संस्कृति में ग्राम्य राजनीति, पति की सफलता और छठी मइया की असीम कृपा के बीच के मधुर संबंधों को भी सहजता से प्रस्तुत करता है। इस विस्तृत आलेख में हम इस गीत के संपूर्ण बोल, इसके अंतर्निहित भावार्थ, लोक जीवन पर इसके प्रभाव और छठ पर्व की आध्यात्मिक गहराई का समग्र विश्लेषण प्रस्तुत कर रहे हैं। ऐसे पावन पर्वों और पारंपरिक गीतों की श्रृंखला में आप छठ महापर्व के अन्य लोकप्रिय गीतों एवं कथाओं के बारे में भी जान सकते हैं, जो हमारी समृद्ध लोक संस्कृति का दर्पण हैं।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

मुखड़ा:

छठ बरतिया कइले बानी, छठी मइया के मनाइले बानी,
सुन लs अरज हमार सईया, बन गइले मुखिया हमार सईया!
घाट पs सजेली छठी मइया, चमकल भाग्य हमार सईया,
बन गइले मुखिया हमार सईया!

अंतरा 1:

कोसी भरे के बाटे तैयारी, सूप-दउरा लेले बानी भारी,
भक्ति में डूबल बाटे मनवा, छठी मइया के महिमा है न्यारी!
सबके भलाई के वरदान मांगेली, खुश बाड़ी छठी मइया सईया,
बन गइले मुखिया हमार सईया!

अंतरा 2:

अवधेश प्रेमी के सुर में बाटे, छठी मइया के गीत के बाटे,
गांव-जवार में गूंजे जयकारा, खुशहाली के दिन अब बाटे!
घाट के सोभा निराला लागे, आशीर्वाद मिलल अपार सईया,
बन गइले मुखिया हमार सईया!

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

अवधेश प्रेमी यादव द्वारा प्रस्तुत यह छठ गीत ग्रामीण भारत के पारिवारिक और सामाजिक परिदृश्य को अत्यंत जीवंत रूप में चित्रित करता है। इस गीत के माध्यम से एक गृहणी अपनी अगाध आस्था और प्रसन्नता को व्यक्त करती है।

मुखड़ा का भावार्थ: गीत की नायिका अत्यंत हर्षित होकर यह बताती है कि उसने सच्चे मन से छठ व्रत का अनुष्ठान किया है और छठी मइया की आराधना की है। उसकी मनोकामना पूर्ण हो चुकी है क्योंकि छठी मइया की कृपा से उसके पति ('सईया') अब गांव के मुखिया बन चुके हैं। घाट पर सजी छठ मइया की प्रतिमा के अलौकिक सौंदर्य के साथ-साथ उसके अपने भाग्य के चमकने का श्रेय वह पूरी तरह छठी मइया के आशीर्वाद को देती है।

पहला अंतरा का भावार्थ: यहाँ लोक पर्व के अनुष्ठानों का सजीव चित्रण है। व्रती महिलाएं कोसी भरने की तैयारी कर रही हैं, हाथों में सूप और दउरा (बांस की टोकरी) संभाले हुए भारी अनुष्ठानिक कर्तव्यों का पालन कर रही हैं। उनका मन पूर्णतः भक्ति रस में डूबा हुआ है। नायिका बताती है कि छठी मइया की महिमा बहुत निराली है, जो सभी की भलाई का वरदान देती हैं और अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं।

दूसरा अंतरा का भावार्थ: गायक अवधेश प्रेमी अपनी विशिष्ट शैली में छठ मैया के इन लोकगीतों के माध्यम से पूरे गांव-जवार में भक्ति का संचार कर रहे हैं। घाट का दृश्य अत्यंत मनमोहक है, जहाँ चारों तरफ जयकारे गूंज रहे हैं और लोग खुशहाली के नए दिनों का स्वागत कर रहे हैं। यह गीत केवल एक राजनीतिक पद (मुखिया) की प्राप्ति का नहीं, बल्कि इसके साथ जुड़ी सामाजिक प्रतिष्ठा और ईश्वर के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। पारंपरिक अनुष्ठानों और लोक आस्था के इस पर्व को अधिक गहराई से जानने के लिए आप छठ पूजा की संपूर्ण विधि एवं नियम का भी अध्ययन कर सकते हैं।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

यह गीत भक्ति, उल्लास और सामाजिक आकांक्षाओं का एक सुंदर संगम है। लोक संस्कृति में धर्म और कर्म को कभी अलग नहीं माना गया है। व्यक्ति अपनी दैनिक जीवन की सफलताओं, पारिवारिक उन्नति और सामाजिक प्रतिष्ठा को भी अपनी इष्ट देवी या देवता की कृपा से जोड़कर देखता है। छठी मइया को समर्पित यह गीत यह संदेश देता है कि जब मनुष्य सच्ची निष्ठा, कठिन तपस्या और लोक आस्था के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वाह करता है, तो समाज में उसकी प्रतिष्ठा बढ़ती है और उसे सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। गीत का मूल भाव कृतज्ञता और उत्सवधर्मिता है, जो कठिन छठ व्रत के बाद मिलने वाले मानसिक संतोष और आनंद को उजागर करता है.

गीत की जानकारी | Song Information

गीत का नाम (Song Name) बन गइले मुखिया हमार सईया (Chhath Geet 2021)
गायक (Singer) अवधेश प्रेमी यादव (Awadhesh Premi Yadav)
पर्व / अवसर (Occasion) छठ महापर्व (Chhath Mahaparv 2021)
भाषा / शैली (Language & Style) भोजपुरी लोकगीत (Bhojpuri Folk Song)
मुख्य विषय (Main Theme) छठ पूजा, लोक आस्था, पारिवारिक सुख एवं सामाजिक प्रतिष्ठा
आध्यात्मिक भाव (Spiritual Emotion) समर्पण, कृतज्ञता और उल्लास

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

लोकप्रिय भोजपुरी गायक अवधेश प्रेमी यादव अपनी ऊर्जावान गायकी और ठेठ ग्रामीण अंचल की शब्दावली के लिए जाने जाते हैं। उनके द्वारा गाए गए छठ गीत विशेष रूप से उत्तर बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के ग्रामीण बाजारों और छठ घाटों पर खूब गूंजते हैं। इस गीत में उन्होंने न केवल पारंपरिक लोक धुनों का ध्यान रखा है, बल्कि समकालीन ग्रामीण समाज की आकांक्षाओं—जैसे पंचायत चुनाव में जीत और पारिवारिक प्रतिष्ठा—को भी कलात्मक रूप से पिरोया है। लोक कलाकारों का यह योगदान हमारी मौखिक परंपराओं को जीवित रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी प्रकार अन्य लोक कथाओं और पर्वों की परंपरा को समझने हेतु छठ व्रत कथा एवं पौराणिक प्रसंग का पाठ करना भी अत्यंत फलदायी माना गया है.

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द (Word) सरल अर्थ (Simple Meaning) संदर्भ (Context)
बरतिया व्रत करने वाला / व्रती छठ व्रत का अनुष्ठान करने वाली स्त्री
कोसी भरे छठ पूजा का एक विशेष अनुष्ठान घाट पर गन्ने के मंडप के नीचे दीप जलाने की परंपरा
सूप-दउरा बांस से बने पारंपरिक बर्तन पूजा की सामग्री जैसे ठेकुआ, फल और अर्घ्य सजाने के लिए
मुखिया ग्राम पंचायत का प्रमुख ग्रामीण स्थानीय स्वशासन का पद
गांव-जवार आसपास के गांव और क्षेत्र सामुदायिक परिवेश

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

छठ पर्व सूर्य देव और छठी मइया (माता षष्ठी) की उपासना का पर्व है, जो सूर्योदय और सूर्यास्त दोनों समय अर्घ्य देने की अनूठी परंपरा के लिए विश्व प्रसिद्ध है। इस पर्व में किसी मूर्ति की विशेष पूजा के बजाय प्रत्यक्ष देवताओं—सूर्य और प्रकृति—की आराधना की जाती है। अवधेश प्रेमी यादव का यह गीत लोक संस्कृति के उस पक्ष को उजागर करता है जहाँ धर्म और समाज एक-दूसरे से पूरी तरह जुड़े हुए हैं। ग्रामीण जीवन में जब कोई व्यक्ति सामाजिक पद प्राप्त करता है, तो उसे ईश्वर का आशीर्वाद माना जाता है। छठ जैसे कठोर व्रत के माध्यम से लोग अपने परिवार की सुख-शांति और उन्नति की कामना करते हैं, और जब वह कामना पूरी होती है, तो लोकगीतों के माध्यम से उस आनंद को व्यक्त किया जाता है.

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

यह लोकगीत हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी भी व्यस्तता या ऊंचाइयां आ जाएं, अपनी संस्कृति, परंपराओं और पर्वों से जुड़ाव कभी नहीं छोड़ना चाहिए। गीत की नायिका मुखिया पति की पत्नी बनने के बाद भी अपनी परंपरा के अनुसार कठिन छठ व्रत का पालन पूरी निष्ठा से करती है। यह इस बात का प्रतीक है कि भौतिक सफलता और आध्यात्मिक आस्था दोनों का संतुलन ही सुखद जीवन का आधार है। कठिन परिश्रम (जैसे सूप-दउरा ढोना और व्रत रखना) के बाद ही सफलता का आनंद प्राप्त होता है। इसके साथ ही, समाज के सभी वर्गों की भलाई की कामना करना छठ पर्व की मूल भावना है, जैसा कि गीत में "सबके भलाई के वरदान मांगेली" पंक्ति के माध्यम से दर्शाया गया है.

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यह गीत विशेष रूप से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि के आसपास यानी छठ महापर्व के चार दिनों (नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उदयगामी सूर्य को अर्घ्य) के दौरान खूब सुना जाता है। जब लोग अपने घरों से छठ घाट की ओर बांस की टोकरियों (दउरा) में प्रसाद सजाकर जाते हैं, तब इस प्रकार के लोकगीत वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय और जीवंत बना देते हैं। इसके अलावा ग्रामीणमेलों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और यूट्यूब तथा अन्य डिजिटल माध्यमों पर भी इस तरह के गीतों की धूम रहती है। सूर्य उपासना के इस पावन पर्व पर आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना भी सूर्य देव की कृपा प्राप्त करने का अत्यंत उत्तम मार्ग माना गया है.

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

गीत शीर्षक बन गइले मुखिया हमार सईया
गायक अवधेश प्रेमी यादव
संगीत शैली भोजपुरी छठ लोकगीत
पर्व छठ महापर्व (सूर्य उपासना)
प्रमुख संदेश आस्था, पारिवारिक उन्नति और लोक संस्कृति का उल्लास
प्रसार माध्यम लोक संगीत एवं डिजिटल ऑडियो-वीडियो प्लेटफॉर्म

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

उत्तर: इस लोकप्रिय छठ गीत के गायक प्रसिद्ध भोजपुरी लोक कलाकार अवधेश प्रेमी यादव हैं, जो अपनी ऊर्जावान और ठेठ लोक शैली के लिए जाने जाते हैं।

उत्तर: यह गीत लोक आस्था के महान पर्व 'छठ महापर्व' से संबंधित है, जो मुख्य रूप से सूर्य देव और छठी मइया की उपासना के लिए मनाया जाता है।

उत्तर: गीत में 'मुखिया' ग्रामीण स्थानीय स्वशासन (ग्राम पंचायत) के प्रमुख पद को दर्शाता है। इसमें छठी मइया की कृपा से पति की राजनीतिक सफलता और सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि का प्रसंग है।

उत्तर: छठ पूजा में बांस के सूप और दउरा, ठेकुआ (प्रसाद), मौसमी फल (नारियल, केला, गन्ना आदि), दीपक और अर्घ्य के लिए जल व दूध का प्रमुख रूप से उपयोग किया जाता है।

उत्तर: यह पर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में अत्यंत श्रद्धा के साथ मनाया जाता है, हालांकि अब यह देश-विदेश के अन्य हिस्सों में भी बड़े पैमाने पर आयोजित होता है।

उत्तर: लोक गीत हमारी सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखते हैं। ये पर्व के दौरान उत्साह, सामाजिक सौहार्द और धार्मिक निष्ठा को बढ़ाने का कार्य करते हैं।

उत्तर: छठ महापर्व कुल चार दिनों का होता है, जिसकी शुरुआत नहाय-खाय से होती है और इसका समापन उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ होता है।

उत्तर: हां, यह गीत यूट्यूब और अन्य प्रमुख ऑडियो-वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है, जहाँ इसे छठ पर्व के दौरान काफी पसंद किया जाता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस लेख में प्रस्तुत गीत के बोल, भावार्थ और सांस्कृतिक संदर्भ को लोक परंपराओं और लोक संगीत के अध्ययन के आधार पर सत्यापित किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों को भोजपुरी लोक संस्कृति और छठ पर्व के उल्लास से परिचित कराना है। किसी भी प्रकार की पारंपरिक मान्यता या क्षेत्रीय भिन्नता का सम्मान करते हुए इसे प्रस्तुत किया गया है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

1. भोजपुरी लोक साहित्य एवं संगीत परंपराएं - पारंपरिक संदर्भ
2. छठ महापर्व लोकगीत संग्रह - सांस्कृतिक अध्ययन
3. क्षेत्रीय लोक कला और मौखिक परंपराएं - शोध आधारित विवरण

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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