एकादशी के पावन अवसर पर गाया जाने वाला यह भावपूर्ण भजन "ओ बाबा इतना बता मैं जाऊं कहाँ" भक्त और भगवान के बीच के उस अटूट संबंध को दर्शाता है, जहाँ भक्त स्वयं को पूर्णतः अपने आराध्य के चरणों में समर्पित कर देता है। यह भजन केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि एक जीवात्मा की पुकार है जो संसार के दुखों और भ्रमों से थककर अपने परम पिता, अपने 'बाबा' (श्याम) की शरण में शांति की खोज कर रही है। एकादशी का दिन, जो भगवान विष्णु और उनके अवतारों की भक्ति के लिए समर्पित है, इस भजन के गायन के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। यह भजन साधक के मन में वैराग्य और अनन्य प्रेम का संचार करता है, जिससे हृदय में भक्ति का अमृत प्रवाहित होने लगता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
ओ बाबा इतना बता, मैं जाऊं कहाँ,
तेरे दर के सिवा, मेरा कोई नहीं यहाँ।
ओ बाबा इतना बता, मैं जाऊं कहाँ...
दुनिया के मेले में, मैं खो गया हूँ,
अपनों के बीच भी, मैं पराया हो गया हूँ।
तू ही सहारा दे, तू ही किनारा दे,
भटका हुआ हूँ मैं, तू ही सहारा दे।
ओ बाबा इतना बता, मैं जाऊं कहाँ...
हारे का तू ही, साथी कहाता है,
दुखियों के आंसू, तू ही तो बहाता है।
मेरी भी सुन ले तू, अर्जी लगाता हूँ,
चरणों में तेरे ही, सर को झुकाता हूँ।
ओ बाबा इतना बता, मैं जाऊं कहाँ...
तेरी दया की, एक बूंद मिल जाए,
जीवन की नैया, मेरी पार लग जाए।
श्याम सुंदर मेरे, अब तो बुला ले तू,
अपने ही चरणों में, मुझको बिठा ले तू।
ओ बाबा इतना बता, मैं जाऊं कहाँ...
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस भजन का भावार्थ 'शरणागति' है। भक्त अपने आराध्य से प्रश्न करता है कि हे प्रभु, इस मायावी संसार में मेरे लिए आपके चरणों के अतिरिक्त कोई अन्य स्थान नहीं है। संसार के 'मेले' (मोह-माया) में मनुष्य भटक जाता है, जहाँ उसे अपना कोई नहीं मिलता। यहाँ 'बाबा' शब्द का प्रयोग भगवान श्री श्याम (श्री कृष्ण) के लिए किया गया है। भक्त अपनी व्यथा सुनाते हुए कहता है कि मैं संसार के दुखों से हार चुका हूँ, और शास्त्रों में आपको 'हारे का सहारा' कहा गया है। यह भजन हमें सिखाता है कि जब चारों ओर से निराशा घेर ले, तब केवल प्रभु का नाम और उनके चरणों का आश्रय ही एकमात्र सत्य है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- भक्ति भाव: यह भजन 'दैन्य भाव' की भक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण है।
- एकादशी का महत्व: एकादशी के दिन इस भजन का श्रवण मन को एकाग्र करने और विष्णु-कृष्ण भक्ति में लीन होने में सहायक है।
- आध्यात्मिक शांति: यह भजन मानसिक तनाव को कम कर हृदय में सात्विक आनंद की अनुभूति कराता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन को एकादशी की रात्रि के जागरण, संध्या आरती के समय, या घर में पूजा करते समय गाया जा सकता है। इसे गाते समय मन में पूर्ण विश्वास और समर्पण होना चाहिए। इसे किसी भी वाद्य यंत्र के साथ या केवल तालियों की गूँज के साथ भी गाया जा सकता है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द | सरल अर्थ | संदर्भ |
|---|---|---|
| बाबा | पिता/रक्षक | भगवान श्री श्याम के लिए संबोधन |
| दर | द्वार/चौखट | प्रभु का धाम |
| शरणागति | पूर्ण समर्पण | प्रभु की शरण में जाना |
| नैया | नाव | जीवन रूपी संसार सागर |
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | ओ बाबा इतना बता मैं जाऊं कहाँ |
|---|---|
| आराध्य | श्री श्याम (श्री कृष्ण) |
| भाव | शरणागति एवं विनय |
| उपयुक्त अवसर | एकादशी, सत्संग, कीर्तन |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
क्या एकादशी पर यह भजन गाना शुभ है?
इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?
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