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पS कृपा कदी छठी मईया

पढ़ें पS कृपा कदी छठी मईया का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के सबसे पावन और महापर्व छठ पूजा के पावन अवसर पर गाए जाने वाले भोजपुरी देवी गीतों का अपना एक विशेष और अमूल्य महत्व है। इसी पावन श्रृंखला में "पS कृपा कदी छठी मईया" (Pa Kripa Kadi Chhathi Maiya) एक अत्यंत ही भावुक, कर्णप्रिय और भक्ति रस से सराबोर भोजपुरी देवी गीत है। इस गीत को सुप्रसिद्ध लोक गायक टुनटुन यादव और सुरीली गायिका शिल्पी राज ने अपनी मधुर आवाज से सजाया है। यह गीत विशेष रूप से एक ऐसे भक्त और देश के रक्षक (सैनिक या आर्मी लवर) की मनोदशा को दर्शाता है, जो अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए सीमाओं पर तैनात है और वहां से अपनी आराध्य देवी छठी मईया से अपने परिवार, समाज और देश की खुशहाली के लिए प्रार्थना कर रहा है। इस विस्तृत लेख में हम इस पावन गीत के बोल, उसका गहरा आध्यात्मिक भावार्थ, सांस्कृतिक महत्व और इससे जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियों का रसास्वादन करेंगे।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

॥ पS कृपा कदी छठी मईया ॥

(अंतरा - १)
होई आराधन तोहार सुरुज देव हे दीनानाथ,
जोड़ी के हाथ खड़ा बानी, दीं ना असीस के हाथ।
सदा सुहागिन रखीं मोरी माई के,
पS कृपा कदी छठी मईया हो...
पS कृपा कदी छठी मईया, मोरा भाई पे हो।
पS कृपा कदी छठी मईया, मोरा भाई पे हो॥

(अंतरा - २)
देशवा के सीमा पे खड़ा बाड़े भैया हो,
दिन-रात रक्षा करेले भारत मईया हो।
उनका के शक्ति दीहा, बल बुद्धि ज्ञान हो,
राखीं सलामत मोरा भैया के परान हो।
दुःख-तकलीफ कवनो आवे ना पाई पे,
पS कृपा कदी छठी मईया हो...
पS कृपा कदी छठी मईया, मोरा भाई पे हो।
पS कृपा कदी छठी मईया, मोरा भाई पे हो॥

(अंतरा - ३)
दउरा सजवले बानी घाट पे आई के,
अरघ देवे बानी सुरुज गोसाईं के।
मन में बा आस माई पूरा कदीं आस हो,
भक्तन के राखब सदा चरनन में पास हो।
आँसू बहे ना कबहूँ माई के आँखि से,
पS कृपा कदी छठी मईया हो...
पS कृपा कदी छठी मईया, मोरा भाई पे हो।
पS कृपा कदी छठी मईया, मोरा भाई पे हो॥

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

यह पावन गीत "पS कृपा कदी छठी मईया" केवल एक सामान्य लोकगीत नहीं है, बल्कि यह एक परिवार के प्रति प्रेम, देशभक्ति और ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा का अद्भुत संगम है। इस गीत के माध्यम से एक बहन या एक भक्त अपने भाई के लिए, जो देश की सीमा पर तैनात है, छठी मईया से प्रार्थना कर रहा है।

प्रथम भाग का भावार्थ: गीत की शुरुआत भगवान सूर्य (दीनानाथ) की आराधना से होती है। भक्त हाथ जोड़कर प्रार्थना करता है कि हे दीनानाथ! हम आपके सामने हाथ जोड़कर खड़े हैं, हमें अपना आशीर्वाद प्रदान करें। मेरी माता को सदा सुहागिन रखें और मेरे भाई पर अपनी असीम कृपा बनाए रखें। यह पंक्तियां भारतीय परिवार की उस सुंदर परंपरा को दर्शाती हैं जहां अपनी सुख-सुविधाओं से पहले माता-पिता और भाई-बहनों के कल्याण की कामना की जाती है।

द्वितीय भाग का भावार्थ: दूसरे अंतरे में देशभक्ति का अत्यंत सुंदर और संवेदनशील चित्रण है। इसमें कहा गया है कि मेरा भाई देश की सीमा पर खड़ा होकर दिन-रात भारत माता की रक्षा कर रहा है। हे छठी मईया! आप उसे असीम शक्ति, बल, बुद्धि और ज्ञान प्रदान करें ताकि वह अपने कर्तव्य का पालन कर सके। उसके प्राणों की रक्षा करना और उसके जीवन में कभी कोई दुःख या तकलीफ न आने देना। यह अंश दर्शाता है कि एक सैनिक का परिवार किस प्रकार हर पल ईश्वर से उसकी सुरक्षा की गुहार लगाता है।

तृतीय भाग का भावार्थ: अंतिम भाग में छठ पूजा की पारंपरिक विधि का वर्णन है। भक्त कहता है कि मैंने आपके लिए सुंदर दउरा (बांस की टोकरी) सजाया है और मैं नदी के घाट पर आकर भगवान सूर्य को अर्घ्य दे रहा हूँ। मेरे मन में जो भी अभिलाषाएं हैं, उन्हें पूरा करें। मेरी माता की आँखों में कभी आंसू न आएं और हमारा पूरा परिवार सदा आपकी भक्ति में लीन रहे।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत की मुख्य भावना "समर्पण, देशभक्ति और पारिवारिक स्नेह" है। यह गीत हमें सिखाता है कि हमारी व्यक्तिगत खुशियां तभी पूर्ण होती हैं जब हमारा देश और हमारा परिवार सुरक्षित और सुखी हो।

  • देशभक्ति का संदेश: सीमा पर तैनात सैनिकों के प्रति सम्मान और उनकी सुरक्षा के लिए प्रार्थना करना हर नागरिक का कर्तव्य है।
  • पारिवारिक एकता: भाई-बहन का पवित्र प्रेम और माता-पिता के प्रति आदर इस गीत के मूल में है।
  • अटूट श्रद्धा: कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी छठी मईया और भगवान सूर्य पर विश्वास बनाए रखना।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण बिंदु जानकारी (Details)
गीत का नाम (Song Name) पS कृपा कदी छठी मईया (Pa Kripa Kadi Chhathi Maiya)
मुख्य गायक (Singers) टुनटुन यादव (Tuntun Yadav) एवं शिल्पी राज (Shilpi Raj)
गीत की श्रेणी (Category) भोजपुरी देवी गीत / छठ गीत (Bhojpuri Devi Geet / Chhath Geet)
भाषा (Language) भोजपुरी (Bhojpuri)
मुख्य विषय (Theme) देशभक्ति, भाई की सुरक्षा और छठी मईया की आराधना
संगीत शैली (Music Style) पारंपरिक एवं आधुनिक लोक संगीत

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

इस गीत को भोजपुरी संगीत जगत के दो बेहद लोकप्रिय कलाकारों ने अपनी आवाज दी है:

टुनटुन यादव: अपनी बुलंद और ठेठ भोजपुरी आवाज के लिए जाने जाने वाले टुनटुन यादव ने इस गीत में एक सैनिक के भाई या रक्षक के रूप में अपनी आवाज का जादू बिखेरा है। उनकी गायकी में मिट्टी की सोंधी महक और वीर रस का सुंदर मिश्रण मिलता है।

शिल्पी राज: वर्तमान समय में भोजपुरी संगीत उद्योग की सबसे व्यस्त और सुरीली गायिकाओं में से एक शिल्पी राज ने इस गीत में भक्ति और करुणा के भाव को अत्यंत खूबसूरती से उभारा है। उनकी आवाज श्रोताओं के दिलों को सीधे छू जाती है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द (Word) सरल हिंदी अर्थ (Meaning) सांस्कृतिक संदर्भ (Context)
आराधन पूजा, अर्चना या उपासना भगवान सूर्य की जाने वाली विशेष पूजा
दीनानाथ गरीबों के नाथ, सूर्य देव छठ महापर्व में सूर्य देव को इसी नाम से पुकारा जाता है
असीस आशीर्वाद, मंगल कामना बड़ों या देवी-देवताओं द्वारा दिया जाने वाला वरदान
दउरा बांस की बनी बड़ी टोकरी जिसमें छठ पूजा का प्रसाद (ठेकुआ, फल आदि) रखा जाता है
अरघ (अर्घ्य) जल या दूध अर्पित करना अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्य को जल देना
सुरुज गोसाईं सूर्य देव, भगवान भास्कर भोजपुरी लोक संस्कृति में सूर्य देव का आदरसूचक नाम

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

छठ पूजा का त्योहार प्रकृति, शुचिता और अनुशासन का पर्व है। इस पर्व में गाए जाने वाले गीतों का बहुत बड़ा सांस्कृतिक महत्व होता है। "पS कृपा कदी छठी मईया" जैसे आधुनिक लोकगीत पारंपरिक मूल्यों को युवा पीढ़ी से जोड़ने का कार्य करते हैं।

यह गीत हमें याद दिलाता है कि जब हम अपने घरों में सुरक्षित होकर त्योहार मना रहे होते हैं, तब देश की सीमाओं पर हमारे सैनिक भाई हमारी सुरक्षा के लिए मुस्तैद रहते हैं। इसलिए, त्योहार के पावन अवसर पर उनके लिए प्रार्थना करना हमारी समृद्ध सांस्कृतिक और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक है।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

इस पावन भोजपुरी देवी गीत से हमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण जीवन सीख मिलती हैं:

  1. कृतज्ञता का भाव: हमें हमेशा उन लोगों के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए जो हमारी सुरक्षा और भलाई के लिए काम करते हैं।
  2. निःस्वार्थ प्रार्थना: प्रार्थना हमेशा केवल अपने लिए नहीं, बल्कि अपनों और पूरे समाज के कल्याण के लिए होनी चाहिए।
  3. सांस्कृतिक जुड़ाव: अपनी जड़ों, लोक भाषाओं और पारंपरिक त्योहारों के प्रति हमेशा गर्व का भाव रखना चाहिए।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यद्यपि यह गीत वर्ष के किसी भी समय सुना जा सकता है, लेकिन इसका वास्तविक आनंद और महत्व निम्नलिखित अवसरों पर दोगुना हो जाता है:

  • छठ पूजा के चार दिवसीय अनुष्ठान के दौरान: नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य के समय घाटों पर इस गीत का बजना अत्यंत सुखद अनुभव देता है।
  • कार्तिक और चैत्र मास में: जब वर्ष की दोनों मुख्य छठ पूजा का आयोजन होता है।
  • पारिवारिक मिलन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में: जब परिवार के सदस्य एक साथ एकत्रित होते हैं।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

मुख्य विशेषता संक्षिप्त विवरण
गीत का प्रकार भोजपुरी छठ देवी गीत (Bhojpuri Chhath Devi Geet)
मुख्य भाव भक्ति, करुणा, देशप्रेम और पारिवारिक स्नेह
आराध्य देवी-देवता छठी मईया एवं भगवान सूर्य (दीनानाथ)
गायन शैली युगल गीत (Duet Song)
उपयुक्त अवसर छठ पूजा महापर्व, कार्तिक मास

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस अत्यंत लोकप्रिय भोजपुरी छठ गीत को प्रसिद्ध लोक गायक टुनटुन यादव और सुरीली गायिका शिल्पी राज ने गाया है।

इस गीत का मुख्य विषय देश की सीमा पर तैनात सैनिक भाई की सुरक्षा के लिए उसकी बहन या परिवार द्वारा छठी मईया से की जाने वाली भावपूर्ण प्रार्थना है। इसमें देशभक्ति और पारिवारिक प्रेम का सुंदर मिश्रण है।

"दीनानाथ" का अर्थ है 'दीनों (गरीबों और असहायों) के स्वामी'। भगवान सूर्य बिना किसी भेदभाव के पूरी सृष्टि को अपना प्रकाश और जीवन प्रदान करते हैं, इसलिए उन्हें आदरपूर्वक दीनानाथ कहा जाता है।

"दउरा" बांस की खपच्चियों से बनी एक बड़ी और गहरी टोकरी होती है, जिसका उपयोग छठ पूजा का पावन प्रसाद (जैसे ठेकुआ, फल, नारियल आदि) रखकर घाट तक ले जाने के लिए किया जाता है।

नहीं, यद्यपि इसमें सैनिक का संदर्भ है, लेकिन यह गीत हर उस व्यक्ति के लिए प्रासंगिक है जो अपने परिवार की सुख-समृद्धि और अपने प्रियजनों की सुरक्षा के लिए ईश्वर से प्रार्थना करता है।

शिल्पी राज ने कई सुपरहिट भोजपुरी देवी गीत और छठ गीत गाए हैं, जो हर साल नवरात्रि और छठ पूजा के दौरान पूरे उत्तर भारत में गूंजते हैं।

छठ पूजा का महापर्व पूरे चार दिनों तक चलता है। इसकी शुरुआत 'नहाय-खाय' से होती है, दूसरे दिन 'खरना', तीसरे दिन 'संध्या अर्घ्य' और चौथे दिन 'उषा अर्घ्य' के साथ इसका समापन होता है।

इस गीत को सुनते समय मन में गहरी श्रद्धा, करुणा, देशप्रेम और अपने परिवार के प्रति अगाध स्नेह का भाव जाग्रत होता है। यह आँखों में भक्ति के आंसू ला देने वाला एक अत्यंत भावुक गीत है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री पर आधारित है। इस गीत की समीक्षा करते हुए हमारे संगीत और सांस्कृतिक विशेषज्ञों ने पाया कि यह आधुनिक युग में पारंपरिक लोक संगीत को जीवित रखने का एक बेहतरीन उदाहरण है। यह गीत न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ करता है, बल्कि हमारे समाज में सैनिकों के प्रति सम्मान की भावना को भी बढ़ावा देता है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • बिहार और उत्तर प्रदेश की पारंपरिक छठ पूजा लोक संस्कृति।
  • भोजपुरी लोकगीत संग्रह एवं पारंपरिक संगीत विधाएं।
  • श्रीमद्भागवत पुराण एवं सूर्योपनिषद में वर्णित सूर्य देव की महिमा।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 09 Oct 2026

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